शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2015

सुरभि सक्सेना की ग़ज़ल - अपना कहो मुझे और खुशियां हज़ार दो

अपना कहो मुझे और खुशियां हज़ार दो यूँ ही किसी गरीब की किस्मत सँवार दो दीवाना बन गया हूँ तेरी तिरछी नज़र का पलकें झुका, झुका के, दिल को क़रार ...

सूबे सिंह सुजान की ग़ज़ल

कुछ भी हो,अपने मसीहा को बड़ा रखता है आदमी अपनी ही मर्जी का खुदा रखता है वो सरेआम हकीकत से मुकर जायेगा गिरगिटों जैसी बदलने की अदा रखता है ...

राकेश अचल की व्यंग्य ग़ज़लें

बहती गंगा में हाथों को धो लीजे ******************************** हमको भी हासिल है इतनी आजादी इज्जत लौटाना थी,हमने लौटा दी * हम फ़क़ीर हैं नंगे...

ललित गर्ग का आलेख - रोशनी पवित्रता का जीवन रक्त है

विद्या, बुद्धि और कला-संपन्न व्यक्ति वही होता है, जो सहनशील, नम्र और मधुर व्यवहार वाला होता है। व्यवहार रेगिस्तान में नहीं पनपता। वह तो एक ...

आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र की पुण्यतिथि पर सम्मान समारोह सह संगोष्ठी

स्पष्ट अभिव्यक्ति ही सरोकार की पत्रकारिता : स्वामी निरंजनानंद                             आनंद बिहार के चर्चित पत्रकार आचार्य लक्ष्मीकांत ...

कृष्ण कुमार चंचल का लघु-आलेख - बिदाई

बिदाई अपनी कोमल ऊँगलियों से पापा के कठोर हाथों को छूती उसकी हथेली, छोटे-छोटे कदमों से चलके सुबह पापा के मोज़े तलाशती उसकी मासूम निगाहें, गाड़...

चन्द्रकुमार जैन का आलेख - मिलहिं संत वचन दुइ कहिए, मिलहिं असंत मौन होय रहिए

इन दिनों जितना बोला जा रहा है, उतना शायद इतिहास में कभी नहीं बोला गया. कौन बोल रहा है, क्यों बोल रहा है, क्या बोल रहा है, समझ में नहीं आ रह...

बी.के.गुप्ता की कविताएँ

''प्रेम'' अहसास ए मुहब्बत की सदा, दिल से लीजिए।, करना है सच्चा इश्क तो फिर, दिल से कीजिए।। 1.महफिल में हो तन्हाई में हो ,जि...

पाठकीय - बी.के.गुप्ता - ईश्वर क्या है?

''ईश्वर क्या है'' र्इ्रश्वर वह शक्ति है ,जिसके सहारे सूर्य, चन्द्रमा ,पृथ्वी घूम रहे हैं, पेड़-पौधे फल-फूल रहे हैं ,नदिया...

अंजली अग्रवाल की कविता - रेप

रेप पानी के बुलबुले सी एक लड़की थी ॰॰॰॰ होठों पर मुस्कान लिये घर से निकली थी ॰॰॰॰ कि पड़ नजर शैतानों की॰॰॰॰ और डूब गयी नाव इंसानियत की॰॰॰॰...

अखिलेश कुमार भारती की कविता - जीवन संघर्ष की जयगाथा

जीवन में इस तरह उदास न होना, मिली असफलता से निराश न होना, जीवन सुख-दुःख का पहिया है, कभी किसी वक्त हताश न होना |   जीवन में आए मुश्किलों से...

दीपक आचार्य का प्रेरक आलेख - मुँह दिखाई करो मस्त रहो

  कोई काम आता हो या न आता हो, किसी भी प्रकार की काबिलियत हो, न हो, मानवीय संवदनाएं, संस्कार, सिद्धान्त और आदर्श से कोसों दूर हों, न अनुशासन...

दीपक आचार्य का प्रेरक आलेख - त्यागें आत्मबंधन

हम सभी के पैदा होने का उद्देश्य लोक मंगल और विश्वोत्थान के कामों को आगे बढ़ाने में भागीदार बनना और मुक्ति पाने के लिए निरन्तर प्रयासरत रहना ...

कैलाश प्रसाद यादव की कविताएँ - लौटा फिर से प्यार

              करवा चौथ - लौटा फिर से प्यार चंदा देख रही चंदा में, सजन की सूरत, सजन का प्यार आज सुहागिन सजी है फिर से, फिर से किये सिंगार। ...

मनोज कुमार का आलेख - अखबारों में पाठकों के हिस्से की सेंधमारी

    उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने के अनेक उपक्रम संचालित हो रहे हैं। केन्द्र से लेकर राज्य सरकारों में यह अभियान चला हुआ है। करोड़ों रुपयों के ...

बुधवार, 28 अक्तूबर 2015

प्राची - सितम्बर 2015 - श्रीलाल शुक्ल की टिप्पणी : इमेज का दुखियारा - भारतीय लेखक

इमेज का दुखियारा : भारतीय लेखक श्रीलाल शुक्ल भारतीय भाषाओं में जब साहित्यकार के संघर्षशील क्षणों या उसके गर्दिश के दिनों का प्रसंग आता ...

प्राची - सितम्बर 2015 - राजीव आनंद का आलेख : भीष्म साहनी : मासूम इंसानियत के लेखक

आलेख शताब्दी वर्ष पर विशेष भीष्म साहनी : मासूम इंसानियत के लेखक राजीव आनन्द भी ष्म साहनी के लेखन, अभिनय और जीवन से ‘मासूम इंसानियत’ पर ...

प्राची - सितम्बर 2015 - कविताएँ, ग़ज़लें और दोहे

काव्य जगत   राकेश भ्रमर तुमने मुझे छुआ कि बदन जगमगा गया. कोई जला चराग, सहन जगमगा गया. ये फूल कौन-सा तेरे माथे पे खिल गया, गुजरे इधर से त...

प्राची - सितम्बर 2015 - पूजाश्री का आलेख : भाषा राष्ट्र की संजीवनी

भाषा राष्ट्र की संजीवनी पूजाश्री आ जादी के अड़सठ-बरस बाद भी, देश ने हिंदी को हृदय से राष्ट्र-भाषा स्वीकार नहीं किया है. उच्च स्तर पर साधन-...

प्राची - सितम्बर 2015 - प्रभु चौधरी का आलेख : राष्ट्रभाषा हिन्दी आवश्यकता हमारी है

आलेख राष्ट्रभाषा हिन्दी आवश्यकता हमारी है डॉ. प्रभु चौधरी डॉ . विद्यानिवास मिश्र के शब्दों में सात सौ वर्षों से कायम हिन्दी नष्ट होने वा...

प्राची - सितम्बर 2015 - भावना शुक्ल का आलेख : हिन्दी में राष्ट्रीय चेतना का स्वर

आलेख हिन्दी में राष्ट्रीय चेतना का स्वर डॉ . भावना शुक्ल वै दिक काल से ही राष्ट्र शब्द का प्रयोग होता रहा है. राष्ट्र की परिभाषायें स...

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