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प्राची - दिसंबर 2015 - काव्य जगत

राकेश भ्रमर

गजल

वक्त की दुश्वारियों के साथ चलते.

तुम कभी रुसवाइयों के साथ चलते.

जेठ की तपती दुपहरी क्यों सताती,

धूप में अमराइयों के साथ चलते.

मुल्क को पैगाम देते फिर रहे हो,

मुल्क की बरबादियों के साथ चलते.

बज्म में बैठे शगूफे छोड़ते हो,

क्यों ‘भ्रमर’ तनहाइयों के साथ चलते.

 

---

डॉ. राजकुमार ‘सुमित्र’’

 

जीवन न बने क्षेत्र ‘रण’ का

 

महत्वपूर्ण है ‘जन’

और

‘संख्या’ है अर्थपूर्ण.

सम्पूर्णता मिलती है

‘जन’ को ‘संख्या’ से

और ‘संख्या’ को ‘जन’ से.

मन से

उठती है आवाज

कि आज

कितनी जनसंख्या देश की

क्या स्थिति है परिवेश की?

आज

भूख/बेकारी/गरीबी और

भ्रष्टाचार

हिला रहे हैं आधार

समृद्धि का,

कारण है

जनसंख्या वृद्धि का.

अधिक है क्षेत्रफल

कम है उपज और उत्पादन,

इसलिए

अभाव पीड़ित है

साधारण जन.

महंगाई सुरसा हो रही है.

खुशी उड़नछू हो रही है तो

जीवन न बने क्षेत्र ‘रण’ का

ध्यान रखना होगा

जनसंख्या नियंत्रण का.

संपर्कः 112 सराफा वार्ड, जबलपुर(म.प्र.)

मो. 09300121702

 

मधुर गंजमुरादाबादी

बहुत दिनों के बाद

गांव को आए गंगाधर

भुलभुल, कीचड़ धूल नहीं है

पक्की सड़क बनी.

पर न किनारों पर पेड़ों की

छाया कहीं घनीं.

दूर-दूर तक कहीं न दिखते

हैं छानी-छप्पर.

बैठ गया है कुआं न दिखता

यहां कहीं पनघट,

सूखी हुई नहर गुमसुम है

टूटा पड़ा रहट.

सबके चेहरों पर उतरा

सूखा-अकाल का डर.

जिसे देखकर उनके मन को

लगा बड़ा झटका,

चौराहे पर मधुशाला का

बोर्ड मिला लटका.

ठीक सामने मंदिर से

उठता कीर्तन का स्वर

मिले सभी से किन्तु किसी से

अपनापन न मिला,

झील पटी है, जलकुम्भी से

पंकज-वन न खिला.

सोच रहे हैं क्या पाया है

भला यहां आकर.

 

संपर्कः गंजमुरादाबाद,

जिला-उन्नाव (उ.प्र.) पिन-209869

मो. 09451376763

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