विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

मोयले हावी हैं हम पर / आलेख / दीपक आचार्य

image

 

लो फिर आ गए मोयले। आजकल मोयलों के दिन हैं। मोयले जी भर कर नाच-गान कर रहे हैं, कोहरे की तरह उछलकूद करते हुए हवाओं में छाये हुए हैं। लाखों-करोड़ों मोयलों ने इन दिनों बस्तियों में कहर बरपा रखा है। मोयले सारी हदें पार करते जा रहे हैं।

अब कुछ भी वज्र्य नहीं रहा मोयलों के लिए। जहां चाहे वहाँ बिना पूछे, पूरी मस्ती के साथ घुसने लगे हैं। तीर की तरह आँखों में घुस कर अंधेरा दिखाने लगे हैं, आँखें लाल करने लगे हैं और जख्म देते हुए आँखों की जलन बढ़ाने पर तुले हुए हैं।

नाक में घुसकर नाक के बालों को चिढ़ाने लगे हैं, कान में घुस कर परदों को चुनौती दे रहे हैं, सर के बालों से लेकर कपड़ों और जिस्म के सारे रास्तों में बेरोकटोक घुस जाने वाले इन मोयलों ने सबकी नाक में दम कर रखा है।

मोयलों में वो ताकत आ गई है कि पूरा का पूरा जनजीवन अस्तव्यस्त कर डाला है। हमेशा अपना सर ऊँचा रखकर चलने वाले भी मोयलों की वजह से सर झुका कर, आँखों की पलकों को आधी बंद रखकर चलने लगे हैं। हमेशा मुँह खुला रख कर लगातार बातें करते रहने के आदी लोगों को भी मोयलों ने मौन धारण करवा दिया है।

सब तरफ मोयलों का कहर बरपने लगा है। कई इलाके तो ऎसे हैं जहाँ मोयलों का हर तरफ आधिपत्य ही हो गया है। मोयलों का यह घातक और आत्मघाती स्वरूप देख कर लगता है कि मोयलों ने शक्ति परीक्षण शुरू कर दिया  है। कोई मोयला पीछे नहीं रहना चाहता। काले दिल और काले कलूटे स्वरूप वाला किन्तु महीन मोयला किसी से कम नहीं है, जहाँ घुसपैठ कर ले वहाँ हरकत शुरू।

मच्छरों और मोयलों के लिए कहीं कोई वर्जना नहीं है। कहीं भी बेरोकटोक घुस  सकते हैं, कुछ भी कर सकते हैं। मोयलों को किसी की स्वीकृति या प्रवेश पास की कोई जरूरत नहीं पड़ती। मोयलों की जिन्दगी आतंकवादियों से कम नहीं है। आत्मघाती तरह आँखों में घुसकर सब कुछ लाल सूर्ख कर देंगे।

घुसपैठ करने के मामले में इनका कहीं कोई मुकाबला नहीं। कोई इनसे कभी नहीं बच सकता। एक मोयला ही काफी है किसी भी इंसान को तंग करने के लिए। पता नहीं मोयले जंगल छोड़कर बस्तियों के पीछे क्यों पड़े हैं। क्षणिक आनंद और मस्ती के पीछे भागने वालों के लिए मोयले रोल मॉडल हैं, उनके प्रतीक कहे जा सकते हैं।

मोयले सब जगह हैं। मोयलों को न पढ़ने-लिखने और परिश्रम करने की आवश्यकता है, न किसी हुनर को अपनाने की, न कोई पुरुषार्थ करने की। फिर मोयले यह अच्छी तरह जानते हैं कि निकम्मों और नाकाराओं को यदि ठाठ से जीना है तो अकेले कभी न रहें, अपनी तरह के दूसरे मोयलों की भीड़ साथ रखकर छापामार प्रणाली को अपनाएं, तभी मोयलों की सत्ता का डंका बज सकता है। 

यही वजह है कि कोई सा मोयला अकेला नहीं रहता, झुण्ड के झुण्ड में विचरण करते हैं और एक साथ हमला बोलते हैं। एकाध मोयला हो तो लोग मसल भी डालें, इतनी बड़ी संख्या में मोयलों की भीड़ से कैसे निपटा जाए। फिर हर मोयला इतना शातिर होता है कि घुसपैठ के सारे हुनर जानता है।

मोयलों को पोषण के लिए दूसरों पर जिन्दा रहने की विवशता है। जब तक ये औरों की नाक में दम न कर दें, इनका पेट नहीं भरता। हम लोग हर तरफ मोयलों से घिरे हुए हैं। पता नहीं किस दिशा से कौन से मोयले आकर कुछ छीन ले जाएं, किसी के कान भर दें, कान फूँक दें, किसी की आँखों पर अधिकार करते हुए कुछ का कुछ दिखला दें, किसे भ्रमित कर दें, किसके आँचल में घुस कर कुरेदते हुए कुछ नई बात सामने ले आएं।

मोयला संस्कृति कुछेक दिन की ही बात नहीं है, साल भर किसी न किसी किस्म के मोयलों से हमारा पाला पड़ता ही रहता है। हर मोयला दूसरे पर नज़र रखने और घुसपैठ कर सुरंग बनाता हुआ अपने उल्लू सीधे करने में माहिर है।

मोयलों की माया ही बड़ी अजीब है। जिस किसी ने मोयलों से सीख लिया वह हवाओं के साथ बहता हुआ जमाने भर की छाती पर चढ़ गया। जमाने भर को परेशान करने की सीख देने वाले मोयलों से आदमी को भी कुछ सीखने की जरूरत है। 

जो लोग मोयलों की तरह आतंक फैलाते हैं, मोयला संस्कृति में विश्वास रखते हैं उन्हें अच्छी तरह यह भान होना चाहिए कि मोयलों की आखिर आयु ही कितनी होती है। मोयला कोई सा हो, छोटा या बड़ा, इनकी क्षणिक आयु होती है, मोयलों का निश्चित समय होता है, इसके बाद मोयलों का अस्तित्व कहीं नज़र नहीं आता, ढूँढ़े नहीं मिलते मोयले।

दो-चार दिन तक इतराते फिरने वाले मोयले अल्पायु तो होते ही हैं, अपने आप में भ्रमित होते हैंं। फूलों के फेर में कपड़ों और चाहे जहां चिपकने वाले ये मोयले मुद्रा, मोह और वासना के अंधे लोगों की तरह लगातार भटकते रहते हैं और इसी भटकन के बीच इनका प्राणान्त हो जाता है।

मोयले हम सभी को कुछ न कुछ संदेश देने आए हैं। जो लोग क्षणिक भोग-विलासिता और वैभव पाने के लिए पुरुषार्थ की बजाय दूसरे रास्तों, गलियों और चौराहों पर भटक रहे हैं उन्हें कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है। जिस क्षणिक सुख को पाने के लिए वे इतने सारे जतन कर रहे हैं वे क्षणभंगुर जीवन के आगे व्यर्थ हैं, समय गँवाने से कुछ भी ज्यादा नहीं है।

लेकिन इस बात का अहसास इन मोयलों को कभी नहीं हो पाता क्योंकि इसका पछतावा या प्रायश्चित ये कर पाएं उससे पहले ही इनकी आत्मा इनकी देह को छोड़ कर चली जाती है। 

मोयलों की तरह हर जगह उछलकूद करने और हवाओं में बहने का स्वभाव त्यागें, धीर-गंभीर रहकर कर्तव्य कर्म करें और यशस्वी एवं दीर्घायु जीवन के लिए काम करें। हर दिन ऎसा कुछ करें कि दुआओं का जखीरा हमें प्राप्त होता रहे, कोई हमारे लिए न बुरा कहे, न बददुआएं दें।

अनधिकृत चेष्टा और बेवजह हस्तक्षेप करने वाले, आधी रोटी पर दाल खाने वाले, बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बनने का शौक फरमाने वाले, दुनिया भर की हलचलों पर अपनी जासूसी नज़र बनाए रखने वाले, आवाराओं की तरह घूमने वाले, सज्जनों को हैरान-परेशान करने वाले, स्वार्थ के अंधे होकर परिक्रमाएं करने वाले, आगे-पीछे घूमने वाले और बिना किसी कारण के सब जगह अपनी मौजूदगी दर्शाने वाले लोग ही आज मोयलों के रूप में उड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनकी कुटिल और अतृप्त वासनाओं ने इन्हें मोयलों के रूप में फिर मौका दिया है कुछ करने का, इसलिए इन दिनों मोयले खुलकर आतंक मचा रहे हैं।

---000---

दीपक आचार्य के प्रेरक आलेख inspirational article by deepak aacharya

- डॉ0 दीपक आचार्य

dr.deepakaacharya@gmail.com

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget