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भूपेन्द्र मिश्रा ‘सूफी’ की रचनाएँ - हिन्द की जय कहो

हिन्द की जय कहो
   भूपेन्द्र मिश्रा ‘सूफी’
हम रहे ना रहे, ऐ वतन तुम रहो ,
     हिन्द की जय कहो ,हिन्द की जय कहो.
मुस्कराते रहो , खूब फूलो –फलो ,
     दीप दुनिया के बन जगमगाते रहो .
हम रहे ना रहे, ऐ वतन तुम रहो ,
     हिन्द की जय कहो ,हिन्द की जय कहो.
 
जंग की आग फैले जहाँ में अगर ,
      चाहे जैसे भी हो तुम बुझा दो उसे ,
राह अपनी तू खुद ही बना के चलो ,
      दीप दुनिया के बन जगमगाते रहो .
हम रहे ना रहे, ऐ वतन तुम रहो ,
     हिन्द की जय कहो ,हिन्द की जय कहो.


हिन्द पर अपने हमको बड़ा नाज है ,
       हिन्द देशों के देशों का सरताज है ,
विश्व के वृक्ष का हिन्द ही बीज है ,
       मैं जिधर देखता हिन्द ही हिन्द है .
हम रहे ना रहे, ऐ वतन तुम रहो ,
     हिन्द की जय कहो ,हिन्द की जय कहो.

हिन्द क्या था नहीं ,हिन्द क्या है नहीं ,
     हिन्द सा कौन होगा जहाँ में कहीं ,
हिन्द फौलाद है हिन्द चट्टान है ,
     हिन्द मौजे लहर हिन्द तूफान है .
हम रहे ना रहे, ऐ वतन तुम रहो ,
     हिन्द की जय कहो ,हिन्द की जय कहो.

जो ना झुकती कभी हिन्द वो आन है ,
     जिसका सानी नहीं हिन्द वो शान है ,
इसकी मिट्टी को सिर से लगाये चलो ,
     अपनी काबा औ’ काशी बनाये चलो .
हम रहे ना रहे, ऐ वतन तुम रहो ,
     हिन्द की जय कहो ,हिन्द की जय कहो.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जय –जय जननी वैशाली
जय बिहार जय –जय भारत जय वैशाली ,
      भारत की रानी दिल्ली है ,
              लेकिन माँ है वैशाली .
      किन शब्दों में गाऊं तेरी ,
              महिमा को मैं वैशाली .
जय –जय जननी वैशाली , जय –जय जननी वैशाली .
जब भी किसी आततायी की ,
     उठी किसी पर है तलवार .
थाम लिया तब वैशाली ने ,
     अपने हाथों में तलवार .
हर दिग्भ्रांत क्लान्त मानव की ,
     पथ प्रदर्शिका वैशाली .
भीषण अन्धकार में युग के ,
     दीपमालिका वैशाली ,
      किन शब्दों में गाऊं तेरी ,
              महिमा को मैं वैशाली .
जय –जय जननी वैशाली , जय –जय जननी वैशाली .
जब भी कभी दूर होता हूँ ,
     यह मिट्टी मुझे बुलाती है ,
जाने चुपके से कानों में ,
     क्या –क्या कथा सुनाती है ,
अपने उस स्वर्णिम अतीत की ,
    मुझको याद दिलाती है ,
जिसे याद कर , रह –रह कवि की ,
    आखें भर –भर आती हैं .
पर लौटा किसका अतीत है ,
     कर भविष्य की तैयारी ,
यही मात्र सन्देश दे रही ,
     फिर भारत को वैशाली .
      किन शब्दों में गाऊं तेरी ,
              महिमा को मैं वैशाली .
जय –जय जननी वैशाली , जय –जय जननी वैशाली .


सार –संक्षेप
१.    सिंघनाद
२.    वसुधैव –कुटुम्बकम
३.    वीर भोग्या वसुंधरा
४.    युध्धाय कृत निश्चय
५.    जय हो जय भारत की जय हो
६.    जागो ऐ भारत महान

१.सिंघनाद
उठों जवानों सिंघनाद कर ,
      एक बार भर कर हुंकार .
ताकि तेरी शक्ति देख कर,
      चकित हो उठें फिर संसार .
भारत की चट्टानी ताकत ,
      का जग को अंदाज नहीं हैं ,
जो धमकी से दर जायेगी ,
      भारत वह आवाज नहीं हैं .
बड़ो –बड़ो को रणभूमि में ,
      हमने सबक सिखाया हैं .
मुंह की खाकर ही लौटा है ,
      सम्मुख जो –जो आया है .
मातृभूमि की रक्षा हेतु ,
     दे देंगे हम तन –मन प्राण .
समय मांगता लहूँ –पसीना ,
      सिध्धि मांगती है बलिदान .  

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