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दैवकृपा से संरक्षित है बम्बोरी कला प्रकृति, परमेश्वर और श्रद्धा की त्रिवेणी का आनंद / आलेख / डॉ. दीपक आचार्य

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हाड़ौती अंचल अपनी अनुपम लोक लहरियों, धर्म धामों और प्राकृतिक एवं दर्शनीय स्थलों की दृष्टि से अत्यन्त समृद्ध है। हाड़ौती क्षेत्र में हर तरफ प्रकृति विभिन्न रूपाकारों में मेहरबान है।  हर तरफ बहुत सारे पुरातन और अधुनातन मनोहारी बिम्ब विद्यमान हैं जो जन-मन को आकर्षित करने के साथ ही जीवन भर के लिए यादगार बन जाते हैं। इस मायने मेंं हाड़ौती अंचल का कोई मुकाबला नहीं।

कोटा संभाग अंतर्गत बांरा जिले के मांगरोल तहसील का बम्बोरी कला गाँव प्राकृतिक सौन्दर्य, पुरातन संस्कृति और  परम्पराओं का साक्षी वह गाँव है जो चारों तरफ से दैव कृपा से  संरक्षित है।

तीन तरफ से बाणगंगा नदी की रसधार से आप्लावित इस गाँव में हरि-हर धामोंं की कोई कमी नहीं है। इसके हर कोने व दिशा में विभिन्न देवी-देवता विराजमान हैं। इनमें जलेश्वर, सहस्रलिंगेश्वर, मंगलेश्वर,  भूतेश्वर, जगदीश मंदिर आदि देवालय प्रमुख हैं।

गाँव में वर्ष भर सामाजिक व सांस्कृतिक परम्पराओं का दर्शन होता है। इन मंदिरों को अनेक सिद्धों व तपस्वियों ने अपना तपस्या स्थल बनाया व लोक कल्याण का इतिहास रचा। कई तपस्वी महात्माओं ने अनेक चमत्कार भी दिखाए, जो आज भी जनमानस में अत्यन्त श्रद्धा के साथ सुने जाते हैं।

इनमें से एक चमत्कार आज भी लोग सुनाते हैं कि एक बार जगदीश रथयात्रा के लिए महाप्रसाद बनाते समय शुद्ध देशी घी कम पड़ गया। इस पर वहाँ रह रहे संत ने नदी से डिब्बे भरवाकर मंगवाये। देखा तो पानी की बजाय शुद्ध घी था। इससे मालपूए बनाए गए। और भगवान को भोग लगाकर पूरे गांव को जिमाया गया।

चमत्कारों की साक्षी रही इस धरा पर आज भी दिव्य संत-महात्माओं का स्मरण किया जाता है। लोेक मान्यता है कि ये संत आज भी दिव्य रूप में मौजूद हैं तथा श्रद्धालुओं की मदद करते हैं।

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