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जुनून / लघुकथा / विरेंदर वीर मेहता

 

(  रचना - लघुकथा )

" जुनून "
"एक जुनून देखा था मैंने हमेशा उसकी बातों में, तिरंगे की शान के लिए मर मिटने का जुनून। और आज शायद उसने अपने जुनून को पा लिया था या फिर....।"  चारों और हिम से ढकी चोटियों के बीच सरहद की हद को मुकर्रर कर शान से लहराते तिरंगे को देखते हुए जाने कितनी देर से सोच रहा था मैं।  "कुछ देर पहले ही बाकी शहीद साथियों के साथ उसके दिवंगत शरीर को भी सम्मान के साथ उसके घर की ओर विदा कर दिया गया। अब आगे की कमान मेरे हाथ में आई थी, मेरे हाथ में! जिसने यहां आने से पहले, वतन के लिए मर मिटने की बातें सिर्फ किताबों में ही पढ़ी थी।" लहराते तिरंगे ने अनायास ही मुझे अतीत में ले जा खड़ा किया।
"बेरोजगारी का दंश सहते सहते अचानक एक दिन जब सेना में भर्ती का एक अवसर आया तो मैं भी चल पड़ा देश प्रेम की इस डगर पर। तन मन से तो फिट था ही; जल्दी ही सफलता की सीढ़ियों पर भी चढ़ता चला गया लेकिन..... ।" अपराधबोध से मन में एक हुक सी उठने लगी।   "..... असली इम्तेहान तो आज हुआ जब पहली बार आमने सामने की जंग में शह और मात के खेल में मौत को नाचते देखा था। फैसले की घडी सामने थी दुश्मन को मौत देने की या खुद वतन पर जान देने की, पर दोनों में ही चूक गया मैं, लेकिन वो नहीं चूका। वो तो सिखा गया मुझे, क्या होता है मिट्टी के लिए मर मिटना और देखते ही देखते मुझे पीछे धकेल दुश्मनों का काल बन तिरंगे की शान बन गया।".......
"कसम है मुझे तेरे जुनून की ए दोस्त...." भीगी पलकें मन में संकल्प की आग भरने लगी। "....आज के इम्तहान में मेरी घर वापिसी होगी तो वतन की आन के साथ और तिरंगे की शान के साथ वर्ना वापिसी होगी इसी तिरंगे में लिपटकर....।"

"विरेंदर वीर मेहता"

 

(संक्षिप्त परिचय)

जन्म स्थान और शिक्षा - राजधानी दिल्ली
आवास : एफ - ६२, विकास मार्ग, लक्ष्मी नगर, ईस्ट दिल्ली - ११००९२
सम्पर्क : +९१ ९८ १८ ६७ ५२ ०७
मेल आई डी : v.mehta67@gmail
.com
पेशा   : गुडगाँव (हरियाणा) में एक निजी कंपनी में कार्यरत

दो शब्द अपने बारे में .......
बचपन से पुस्तकों के करीब रहने और उन्हें अध्ययन का शौक रहा जो बाद में लिखने में विकसित हुआ और जीवन की आपाधापी में लेखन से दूर होने के बाद एक बार फिर से कुछ वर्ष पूर्व लिखना शुरू किया।
वर्तमान में फेसबुक के विभिन्न समूहों, विशेषकर "नया लेखन नए दस्तखत" "ओपन बुक्स ऑन लाइन" "लघुकथा - गागर में सागर" आदि समूहों और वेब पत्रिका "रचनाकार" आदि पर लेखन।

प्रकाशन :
"किरदी जवानी" में पंजाबी में अनुवादित दो लघुकथा प्रकाशित।
हिंदी लघुकथा संग्रह "बूँद बूँद सागर" में चार रचनाएं सम्मिलित।

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