गुरुवार, 21 जनवरी 2016

काली है तो क्या हुआ दिलवाली है ! / व्यंग्य / सुदर्शन कुमार सोनी

image

व्यंग्य लेख

काली है तो क्या हुआ दिलवाली है !

पत्नी को सांवला या काली कहना भी अब अपराध माना जायेगा ! कोर्ट के दो साल पहले आये एक फैसले के अनुसार कोई भी पति यदि पत्नी को सांवला कहकर भी संबोधित कर देता है तो यह मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न माना जायेगा। एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को इस बात पर ताना मारा कि वह काली है , सीधे से और दहेज लेकर आये वह न जाने कितने दिनों से उसे झेल रहा है।

गोरे तो इस देश से चले गये लेकिन ‘काले गोरे’ अभी भी है जो कि अपने को गोरा व दूसरों को काला मानते है ! काला न हो तो यह दुनिया ही चलना बंद हो जाये ? सड़क को बनाने वाला काला डामर ही है ? लोग अपने सफेद हो रहे बालो को काला करने के लिये न जाने कितने जतन करते है ? और चमडी़ का काला रंग देखकर घृणा करने लगते हैं बडी़ अजीब बात है , यह तो हिन्दी फिल्मों की एक्टेस की तरह बात हुयी जो बोलती है कि ‘माफ कीजियेगा माई हिन्दी इज वीक’ ! लेकिन पता नहीं मूवी मे कैसे इतनी अच्छी हिन्दी तन पर साडी़ व सिर पे बिन्दी लगाये बोलते दिखती है ! नोट मिले तो हिंदी की बिंदी लगाओ नहीं तो उसे चिंदी समझो यही हो रहा है यहां ?

पुरूष को तो खुश होना चाहिये कि उसकी पत्नी सांवली सलोनी है ! ज्यादा गोरी हो तो उसे खतरा बढ़ जाता है , वैसे पुरूष अपना कलर भूल जाते है खुद कोयला को भी मात करने वाले पुरूष को पत्नी जो है वो दूध जैसी सफेद रंग वाली चाहिये। लेकिन जमाना बदल रहा है एक दो ऐसे वाक्यात हो गये है जहां कि पत्नी ने भी धूसर रंग के पति को परमेश्वर बनाने से इंकार कर दिया वैसे ही जैसे कि आजकल की वधु शादी के मंडप में ही शराबी पतियों को बेरंग लौटा रही है और साथ ही जिनके यहां लोटा लेकर बाहर खलास होने की आदत घर किये हैं उन्हें भी घर आयी बारात सहित लौटा रही है !

दुनिया में बहुत सी महत्वपूर्ण चीजें काली ही होती है नाग काला होता है , सफेद सांप से कोई नहीं डरता कोबरे काले से सब डरते है ? काले हिरण का गजब का के्रज होता है।

वैसे गंगू लिंगभेद नहीं करता वह तो कहता है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पतियों पर भी लागू होना चाहिये कि यदि वह सांवला या काला है तो कोई उसे भी कालू कहकर संबोधित न करे ! क्योंकि कई पत्नियां अपने कालू को प्यार से कई बार कालू कह देती है तो पति को बडा़ बुरा लगता है। रंगभेद पत्नी हो या पति किसी को अच्छा नहीं लगता है । एक गाना भी था कि ‘कालूराम भी चलेंगे प्यार में’ इसे सुनकर कई पुरूष खुश तो कई नाराज हो जाते होंगे ? काले व गोरे पर तो बहुत पहले एक फिल्म ‘गोरा और काला’ भी आ चुकी है । असली बात हम यहां भूल जाते है कि ‘ब्यूटी इज आनली स्किन डीप’ इसके बाद तो सबको भगवान ने एक सा बनाया है !

कोयला भी तो काला होता है इसी से न जाने कितने ताप विद्युत केन्द्र चल रहे है यह काला न हो तो कहो ऊर्जा का भंडार भी इसके अंदर से खिसक जाये। मच्छर से आप कितना डरते हो लाल खून पीकर भी वह धुर काला होता है ! काली कार भी उतनी ही सुंदर लगती है जितनी की सफेद फिर यहां क्यों विभेद काले व गोरे का ?

भगवान श्री कृष्ण भी तो सांवले थे लेकिन उन पर न जाने कितनी गोपियां मोहित थी तो फिर कालू पति या काली पत्नी पर क्यों न पति या पत्नी मोहित हो।

sudarshan kumar soni 

D-37 , Char Imli , bhopal 

  462016 , mob. 9425638352  

Email: sudarshanksoni2004@yahoo.co.in

Blog: meethadank.blogspot.in

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------