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नववर्ष की कुछ और कविताएँ

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(चित्र - ननकुसिया श्याम की कलाकृति)


डा श्याम गुप्त


इस प्रथम भोर पर एक उद्बोधन गीत प्रस्तुत है -----
नयी भोर ...
नयी भोर की इक नयी हो कहानी
जगे फिर मेरे देश की नव जवानी |
ये उत्तर ये दक्षिण पूरव औ पश्चिम,
मिलकर लिखें इक नई ही कहानी |
नयी भोर लाये नयी ज़िन्दगानी ||

युवा-शक्ति का बल, अनुभव का संबल,
मिलकर चलें इक नवल राह पर हम |
नए जोश के स्वर, नए सुर-तराने,
रचें गीत-सरगम, नई इक कहानी |
नयी भोर की नव-कथा इक सुहानी ||

पहले ये जानें, सोचें और मानें,
कि इस राष्ट्र की है जो संस्कृति सनातन |
वही विश्ववारा संस्कृति मनुज की,
सकल विश्व में फ़ैली जिसकी निशानी |...
सनातन कथा की लिखें नव कहानी ||

पुरा ज्ञान, विज्ञान का हो समन्वय,
हो इतिहास एवं पुराणों का अन्वय |
नए ज्ञान कौशल पर सोचें विचारें ,
न यूंही नकारें ऋषियों की वाणी |
नवल-स्वर नए सुर नयी प्रीति-वाणी||

सहजता सरलता सहिष्णुता संग,
प्रीति की रीति जग देखले इक सुहानी|
न मज़हब की दीवार का अर्थ कोइ,
पलें धर्म और नीति-राहें सुजानी |...
राहें सुजानी नई इक कहानी ||

विचारों के जग पर न अंकुश कहीं है,
सदा राष्ट्र का यह गौरव रही है |
जग देखकर नीति-नय का समां यह,
लगे लिखने खुद की नयी इक कहानी|
नया भोर जग की नई ही कहानी ||

बनें नर स्वयं नारी गरिमा के रक्षक,
न शोषण कुपोषण अनाचार कोई |
औ नारी बने राष्ट्र-संस्कृति की गरिमा,
दोनों लिखें मिलके जीवन कहानी |...
बने नीति की एक सुन्दर कहानी |
बने राष्ट्र गरिमा की दृड़ता निशानी ||
----------------


राधास्वामी! अतुल कुमार मिश्र,


नए वर्ष की नई पहल ये ..
नव आगम है, नये वर्ष का,
नव दिवस की नई पहल है,
नई चुहल है, नई किरन की,
किरणें हैं ये, नव उमंग की,
धीरे से खोलो नयनों को,
नयनों की भी नई टहल है,
देखो, उगता सूरज देखो!

किरण-किरण में नया उछाह है,
मंगल लेके, कौन है आया,
किसने अपना दर खटकाया,
ये तो बावला मन है मेरा,
आशा का संचार लिये है,
गुंजित है, मंगल गीतों से,
ये सारा आकाश लिये है,
आकाशों के छोरों से भी
नव आह्लादित गान यही है,
मंगल-मंगल नव भारत का,
विश्व मांगलिक पहचान यही है।
**************
राधास्वामी! अतुल कुमार मिश्र,
369, कृश्णा नगर, भरतपुर, राजस्थान,. 321001.
मोबाइल नं0 9460515371
--------------------.


सुशील यादव


छतीसगढी शब्द चित्र

नवा साल आगे .....
काबर तैं उन्घावत हस   नवा साल आगे

बइला कस कमावत हस नवा साल आगे
सावन के बदरा तैं,
जेठ के होथस घाम
थामे रहिथस आगू 
चिरहा कथरी लगाम
बढ़-बढ़ गोठियावत  हस नवा साल आगे

देखे बर जियरा तरसे
जेवरा-सिरसा के मेला
मुड ले उतार गरु
ऐसो,कर्जा धमेला
पाई-पाई बचावत हस नवा साल आगे

सोनकुवर मागे होही
तोर ले हिसाब 
दे ना बिसाहू गा
ओला जवाब
मया-कती बगरावत  हस नवा साल आगे

कुशियार खा के
भुर्री ला तापे
कनिहा भर पानी
तरिया म नापे
तहीं तै मेछरावत हस नवा साल आगे

दुकलहा के घर में
फुटत हे फटाका
लइका बिहाव नेवते
सोहारी-बरा खा
बराती बने जावत हस नवा साल आगे

सुशील यादव
susyadav7@ gmail.कॉम
29.12.15
-----------.


डाक्टर चंद जैन "अंकुर "


नव वर्ष का आगंतुक
नव वर्ष अब आगंतुक बन, अलख जगाने आया है
अब बदलें हम, कुछ बदलें हम ये बात बताने आया  है
,मत भूलो भारत वासी ये भूमि सनातन के पूर्वज की
और हम सब है भाई भाई ये इतिहास बताने आया है
 
भारत माँ कितनी पावन है ,सबको गले लगाया है
दुश्मन को भी छावं यहाँ है ,कितना निश्छल भाव यहाँ है
अपनें ही बेटे गद्दार यहाँ है फिर भी भारत का प्यार यहाँ है
याद रहे ये  देश के लोगों उग्रवाद तब ही  पलता है
जब पनाह उनको मिलता है ये बात बताने आया है 
नव वर्ष अब  आगंतुक बन, ये अलख जगाने  आया है
अब बदलें हम, कुछ बदलें हम ये बात बताने भाया है
,मत भूलो भारत वासी ये भूमि सनातन के पूर्वज की
और हम सब है भाई भाई ये इतिहास बताने आया है
सदियों का इतिहास कह रहा,ह्रास हमारा
न जाने कितनों नें  लुटा और हमको तोड़ा
चीन छीन ले गया भूमि  या हमनें छोड़ा   
खंडित धरती फिर भी  वात्सल्य भरी है 
ईश्वर, अल्लाह, गुरु बानी, जीसस और गौतम बन  फैल गयी है  
इसने सबको अपनाया है ये एहसास दिलाने आया है   

,नव वर्ष अब  आगंतुक बन, ये अलख जगाने आया है
अब बदलें हम, कुछ बदलें हम ये बात बताने आया  है
,मत भूलो भारत वासी ये भूमि सनातन के पूर्वज की
और हम सब है भाई भाई ये इतिहास बताने आया है
हम सब भारत वासी से  ये प्रश्न पूछता है
एक कारण तो इन्हें बतादो जिसमे एक है हम कोई ,विरोध नहीं  
राष्ट्र धर्म और राष्ट्रप्रेम  से बड़ कर कोई  फर्ज़  नहीं है
क्या ?कोई मजहब आज़ादी भी दे सकता  है ऐसा देश बतादो
मातृभूमि के मतवालों ने दी कुर्बानी ,तब हमने पाई है आज़ादी
सब धर्मों  का सेतु बना कर ,भारत माँ को  हार चढाने आया है

,नव वर्ष अब  आगंतुक बन, ये अलख जगाने आया है
अब बदलें हम, कुछ बदलें हम ये बात बताने आया  है
,मत भूलो भारत वासी ये भूमि सनातन के पूर्वज की
और हम सब है भाई भाई ये इतिहास बताने आया है

जब डूबेगा सूर्य आज का अंतिम दिवस बतायेगा
रक्त ,सुरा और नग्न नृत्य से होगा सराबोर
माँ की धरती  और मधुशाला भर जायेगा
फिर से रोयेगी ये धरती अपने ही औलादों के अवरोहण से
अंतिम दिन है आज वर्ष का कल सूरज, पूरब से आयेगा
एक नूर दे सब जग उपजा ये बात बतलायेगा
मातृभूमि में नतमस्तक हो शीश झुकाने आया है

,नव वर्ष अब  आगंतुक बन, ये अलख जगाने आया है
अब बदलें हम, कुछ बदलें हम ये बात बताने आया  है
,मत भूलो भारत वासी ये भूमि सनातन के पूर्वज की
और हम सब है भाई भाई ये इतिहास बताने आया है
द्वारा :डाक्टर चंद जैन "अंकुर "
          रायपुर CG

--

डॉ नन्द लाल भारती 

मुबारक नया साल/कविता 
क्या किया जन-देशहित में  पूरे साल 
करें सच्चे मन से आकलन फिलहाल।

किया या नहीं किया ना करें अफ़सोस 
आओ चले नई राह, लेकर नई सोच। 
नई उमंग,नया एहसास नया साल है 
मिले खुशियों का उजास,नया उत्साह।

नई उम्मीदें,नया जोश,एहसास सुहाना
नव ऊर्जा संग बढे,त्यागे रिवाज पुराना।
नया साल,नया लक्ष्य ,जीवन खुशहाल 
क्या गैर क्या  बैर, जग में बने मिशाल। 

नया साल नई प्रतिज्ञा करे नई शुरुआत 
सदभाव जीओ और जीने दो की  हो बात। 
ना जाति भेद का दर्द,ना हो कोई नरसंहार ,
देशधर्म,संविधान धर्मग्रन्थ का हो संचार।

आस नया साल,समता संवृध्दि विकास
नया साल नई सौगात,  सुखद एहसास। 
त्याग कर  मन भेद,आओ हाथ बढाए,
अदना करे यही कामना 

2016...खुशियो की सौगात लेकर आये। 
नए साल की खुशियाँ छाई रहे पूरे साल 
कबूल हो अदने की शुभकामना,
मुबारक नया साल.. .........   

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