हास्य व्यंग्य कविताएँ - महेश संतुष्ट

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(चित्र - ननकुसिया श्याम की कलाकृति)
 

सरकारी नौकरी

जिसको
 मिली
उसी की
हो गई...


अपराध

एक
ऐसा
पौधा,
जिसे
पुलिस सींचती है.


जुआरी

टुकड़े
टुकड़े
हुआ
एक
नोट-!

नेता

वे सर्कस के
शेर कहलाते हैं.
और रोजाना
पांच किलो
कच्चा मीट खाते हैं
फिर भी
हंटरधारियों के आगे
नपुंसक कहलाते हैं!


मन्त्री पद

प्रधान मंत्री / मुख्य मंत्री
जिंदाबाद !
का नारा लगाते लगाते
जो गंगा हो जाए
बस
उसे ही मिलता है
यह अनोखा पद!

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