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होरी / कहानी / राजू सुथार 'स्वतंत्र'

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होरी जो बिसू की सबसे छोटी बेटी है जो कि बिल्कुल ही भोली-भाली अज्ञान एवं अशिक्षित है पिता बिसू जो काफी गरीब है दिनभर मेहनत करने पर दो वक़्त की रोटी मिलती है इन की तीन बेटियां है उसमें से होरी भी एक है । वहीं मां त्रिशला ज्यादातर घरेलू कामों में ही व्यस्त रहती है । होरी का जब जन्म होता है तो घर वालों में काफी खुशी रहती है तब उनकी दादी भी बहुत खुशी व्यक्त करते हैं परंतु कुछ समय पश्चात इनका निधन हो जाता है । होरी एकदम कुरूप थी इस वजह से आस पड़ोस वाले इसका मजाक उड़ाते रहते हैं तथा उपेक्षा करते है जैसे - जैसे होरी बड़ी होती है वैसे वैसे उपेक्षाओं का कहर बरसता रहता है । होरी जब 5 साल की हो जाती है तो नजदीकी शाला में दाखिला करा दिया जाता है इसी बीच शक्ल से कुरूप होने के कारण पड़ोसी तो उपेक्षा करते ही है लेकिन अब शाला के दूसरे बच्चे भी उसका मजाक उड़ाते हैं तंग करते , उपेक्षा भी होती रहती है इसी कारण मात्र 17 दिनों के भीतर होरी विद्यालयी शिक्षा को त्याग देती है मां बाप के कहने पर भी वह शाला नहीं जाना चाहती है दूसरी बेटियां भी अशिक्षित ही होती है इस कारण खेतों में काम पर लग जाते हैं बाप बिसू और मां त्रिशला भी इनके साथ काम करते रहते हैं ।

    ऐसे करते - करते होरी 12 वर्षों की हो जाती है तब दूसरी बहिनों की शादी कर दी जाती है और वे अपने ससुराल चली जाती है कुछ समय पश्चात होरी का भी बाल विवाह कर दिया जाता है तब वह मात्र 15 सालों की होती है और उसका पति शम्भू नामक जो की विकलांग , एकदम अशिक्षित एवं भोला होता है लेकिन होरी के ससुराल में सास - ससुर , जेठ - जेठानी सब चतुर होते है । होरी की शादी के बाद बिसू और त्रिशला एकदम अकेले पड़ जाते हैं , भगवान ने उनकी गोद में कोई पुत्र नहीं दिया था ।

  होरी का पति शम्भू जो कि विकलांग होता है इस वजह से वह काम करने में असमर्थ है जबकि दूसरे भाई जो उनसे बड़े है तथा पढ़े लिखे भी इस कारण दोनों भाई शम्भू पर गुस्साए हुए ही रहते है , जरा सी भी कद्र नहीं करते है ।

   होरी की शादी होती है तब ये बाल अवस्था में ही होती है इस कारण रसोई का ज्यादा कुछ नहीं जानती है और फिर यहीं से ससुराल वालों की अपेक्षाओं का आतंक शुरू हो जाता है । और फिर छोटी जिठानी होरी को गर्म आवाज में कहती है कि ''तुम्हें रोटी तो पकानी आती ही होगी तो फिर काहे को मुंह फाड़-फाड़कर घूर रही है देख लिया है तेरा चेहरा राक्षस से भी बत्तर है और फटाफट रोटियां बनाओ यहां दूसरे कामों की भी कोई कमी नहीं है ,, यह होरी का पहला दिन था जो कि किसी दूसरी जगह पर बिताया । और फिर होरी कंपकंपाती हुई बोली जी.... ,जी....
मुझे रोटियां करनी नहीं आती है पर दूसरा काम कर लेती हूँ । और इसी सन्दर्भ में जिठानी कहती है "क्या बोली तो यह रोटिया तेरी मां पकाएगी अगर तुझे रोटियां भी नहीं बनानी आती है तो इतने सालों से क्या सीखा अपनी मां से ।,,  होरी को अपनी मां के बारे में कोई गलत बोले वह सहन नहीं कर पाती थी इस कारण होरी भी वापस जवाब देती है और कहती " जी आप ऐसे कैसे किसी को बोल सकती है ,, अरे ! मां ने रोटियां तो बनाना सिखाया नहीं और मुंह लगाना सिखा दिया चल फिर यह बर्तन धो दे ,, ।
   होरी को इतना सब करने पर रोना आ जाता है क्योंकि कभी डांट उनको किसी ने नहीं मारी थी इसी बीच रोते - रोते वह बर्तन धो रही थी और उसका पति जो कि से उससे 8 साल बड़ा था बैठा - बैठा सब देख रहा था इस कारण है वो भी भावुक हो जाता है और मन को कोसता है कि यह सब मेरी वजह से ही हो रहा है इसी बीच बड़ी जिठानी भी कहीं से टपक पड़ती है ये उन सबसे अलग थी उनके मन में दूसरों के मुकाबले में रहमियत वाली थी और बोलती है कि बड़ी  ''रोना बंद करो और कुछ नहीं यह सब तो ऐसे ही है ,, ।

   घर वाले भी सभी अपना - अपना काम करने लगते हैं शम्भू के बड़े भाई जो कि इस परिवार का सबसे बड़ा बेटा है वह पंचायत में सर्विस करता है बाकि सास - ससुर तथा ननद खेतों में निराई - गुड़ाई कर रहे थे जबकि सभी बहुएं घर पर काम निपटा रही थी शम्भू अचानक से फिसल जाता है तभी होरी उसको संभाल लेती है और फिर से छोटी जिठानी के दर्शन हो जाते हैं और फिर बोलती है ....
वाह ! वाह ! क्या प्रेम है ?

   समय अपनी गति से चलता रहता है और होरी अब 25 वर्षों की हो जाती है इस वजह से वह काम भी सीख जाती है लेकिन उपेक्षाओं ने पीछा अब भी नहीं छोड़ा था क्योंकि शादी करके इतने साल हो गए फिर भी गोद खाली की खाली थी इस कारण सास बोलती है कि "लगता है भगवान भी तुझसे तंग आ गये है ,,। जब अपने मायके जाने की बात करती है तो सास हमेशा यह कहकर टाल देती है कि " वहां क्या करेगी जाके इधर काम कर बहुत काम है ,,  और फिर होरी चुपचाप काम पर लग जाती है । होरी के गांव का नाम विरहनगर था एक बार भीषण तूफान आया आधे ग्राम वासियों को अपनी शरण में ले गया था इस में होरी के पिता बिसू भी थे अर्थात बिसू की मौत हो चुकी थी , इतना होने पर भी होरी को पता नहीं था इसका कारण भी उसकी सास ही थी उसको पता था लेकिन बताना नहीं चाहती थीं क्योंकि वो सोचती कि जब उसे पता चलेगा तो वह रोएगी जो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है ।

   कुछ दिनों बाद शम्भू बीमार पड़ गया सभी ने न चाहते हुए भी उनकी सेवा की , लेकिन भगवान ने होरी के जीवन में एक अलग मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया क्योंकि शम्भू की मृत्यु हो जाती है तब ससुराल में होरी के साथ सिर्फ उपेक्षाएं ही होती है ।

   सास - ससुर एवं छोटी जिठानी दिनभर होरी को गालियां देती रहती है यहां तक कि कभी-कभी मारपीट भी हो जाती थी होरी को अब 3 साल हो गए थे मायके गये हुए इधर मायके में मां त्रिशला सोच रही थी कि होरी तो अपने पिता की मौत के बाद मिलने तक नहीं आई जबकी इसकी दूसरी बहनें तो आई थी । साथ ही त्रिशला को शंका भी हो रही थी कि शायद उसे पता ही नहीं चला हो ! होरी को मजबूर कर दिया गया था कि वह अपने मां - बाप को कुछ भी नहीं बताएगी कि उनके साथ क्या होता है इस वजह से त्रिशला को कुछ भी पता नहीं था कि होरी के साथ ससुराल वाले कैसा सलूक करते हैं । अब होरी की स्थिति नाजुक बन रही थी क्योंकि समय पर न तो खाना मिल रहा था और न ही पानी , दिन भर काम ही काम करना पड़ता था । इधर ससुर भी भोजन के सन्दर्भ में हमेशा गाली - गलौच कर देता है इसको जरा सी भी शर्म नहीं है कि होरी उसकी बहू है ।

   होरी जब ससुराल आई थी तब से 3 साल बाद छोटी जिठानी ने लड़की को जन्म दिया था जो अब सात - आठ वर्षों की हो चुकी थी , इसके लक्षण भी जैसे मां - बाप के है वैसे इसके भी । इसको तैयार होरी ही करती थी इस कारण होरी रेखा के बाल इत्यादि संवारती थी इस बीच में होरी को कई बार गालियां भी सुननी पड़ती थी तथा जिठानी की बेटी ने तो एक अलग नाम भी दे रखा था "काली चाची" ।

   होरी पर खूब अत्याचार होते रहते हैं कभी भोजन के मामले में तो कभी दूसरे कामों में । ऐसे ही कुछ दिनों के पश्चात सास , छोटी जिठानी मिलकर होरी के साथ मारपीट करते है एवं जो थोड़े बहुत जेवरात थे वह भी लूट लिए जाते है बाद में चोरी का आरोप लगाकर घर से धक्का मार देते है । इस सन्दर्भ में आसपास के लोग भी इकट्ठा हो जाते हैं कि आखिर क्या हुआ है । तभी होरी की सास बोलती है '' कि यह घर से पैसे चुरा रही थी कामकाज तो कुछ करती है नहीं और पैसे चाहिए ,, इस कारण पूरे गांव में हल्ला हो जाता है और होरी को घर से निकाल देते हैं अब हालत ऐसी हो रही थी कि एक कदम भी न चल सके आँखों से अश्रुधारा हो रही थी और फिर मन में सोचा कि एकबार और गुहार करती हूँ , लेकिन अंदर आने ही नहीं दिया।

   होरी का गांव जो कि पन्द्रह किलोमीटर दूर है वह अकेले ही पैदल चल पड़ती है एकदम भूखी - प्यासी होरी थोड़ी देर बाद अपना आपा खो देती है और वही पर गिर जाती है अर्थात अचेत हो जाती है तभी एक बूढ़ा अपने घर ले जाता है ।  होरी एक बार फिर से संकट में फंस जाती है क्योंकि वृद्ध के आगे - पीछे कोई संबंधि नहीं है इस कारण जैसे ही वह अपने घर ले जाता है तो सभी ग्रामवासी तिरछी नजरों से देखते हैं और थोड़ी ही देर बाद गांव में हंगामा मच जाता है । ग्रामवासी मानते हैं कि बूढ़ा कुछ गंदी नीयत से लाया है तभी थोड़ी देर बाद होरी को होश आ जाता है और जब वह देखती है तो किसी दूसरे गांव में मिलती है ।

   खुद की इज्जत को बनाए रखने के लिए बूढ़ा होरी को भोजन करा कर अपने घर से विदा कर देता है इधर ससुराल में रोना - विलाप करना शुरू हो जाता है क्योंकि छोटा जेठ एक दुर्घटना में मारा जाता है जिसकी छानबीन पुलिस करती है ऐसे करते - करते होरी अपने घर पहुंच जाती है , जब वह अपनी मां से मिलती है तो खूब रोने लगती है तथा अपने ऊपर हुए कष्टों को सुनाती है और अपनी मां से बोलती है कि "आप तो शम्भू के निधन पर मिलने भी नहीं आई , आप को चिट्ठी भी भेजी थी ,, त्रिशला भी इसी स्थिति में रोती हुई बोलती है कि "हमें तो कोई चिट्ठी नहीं मिली और तुम भी अपने बाबा की मौत पर मिलने नहीं आई यह बाद सुनते ही होरी खूब रुदन करती है ।

   सब दुखों को देखते हुए होरी भी अपनी मां के साथ काम बंटाने लगती है घर में खाने के लिए कुछ भी नहीं था इस कारण भूख से तड़प रही थी ऐसे करते - करते दिन गुजरते है फिर महीने और होते - होते ढ़ाई साल । बाद में त्रिशला होरी का पुनर्विवाह करा देती है लेकिन होरी को तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता है लेकिन कुछ ही दिनों बाद होरी के दूसरे पति को पुलिस गिरफ्तार कर देती है जब होरी को पता चलता है कि उनका पति एक चोर है तब वह ससुराल से भाग कर अपनी मां के पास आ जाती है इसी तरह होरी की परीक्षाओं का अंत नहीं होता है यह बात सुनकर मां त्रिशला को दिल का दौरा पड़ जाता है । और अब होरी सिर्फ एक अर्थात अकेली ।

लेखक परिचय:-
नाम - राजू सुथार 'स्वतंत्र'
गांव - ठाडिया
ज़िला - जोधपुर
तहसील - बालेसर
राज्य - राजस्थान
पिनकोड -342314
कार्य - लेखक वर्तमान में बीए प्रथम वर्ष का स्वयंपाठी विद्यार्थी है साथ ही विभिन्न समाचार पत्रों के लिए स्वतंत्र रूप से ख़बरें लिख रहे है । इनके अलावा हिन्दी विकिपीडिया पर पुनरीक्षक भी है ।

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