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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ - 12 / लेखक परिचय / अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

  लेखक परिचय

डॉ. हिदायत प्रेम

जन्म : 24 मार्च 1946, घोटका, ज़िला- सिन्ध में। 1973 में सिन्ध यूनिवर्सिटी, जामशोरो में सिन्धी में एम.ए.। 1989 में लंदन से लसानियत में डिप्लोमा और 1995 में सिंध यूनिवर्सिटी, जामशोरों से पीएच.डी. हासिल की। इस वक्त सिंध यूनिवर्सिटी में सिंधी पढ़ाते हैं। उन्होंने अनेक कहानियाँ और शोधपरक लेख लिखे हैं। पता : सी-25, सिन्ध यूनिवर्सिटी कॉलोनी, जामशोरो।

अमर जलील

जन्म : 8 नवंबर, 1936 में हुआ। जिनका बचपन रोहड़ी व कराची में गुज़रा। नवाबशाह से बी.ए. करने के पश्चात् कराची यूनिवर्सिटी से एम. ए. की। वे रेडियो पाकिस्तान पर रिसर्च ऑफीसर भी रहे। 1954 में ‘इंदिरा’

नाम की कहानी लिखी, जो बहुचर्चित रही। उनके कहानी संग्रह हैं- ‘दिल की दुनिया’ और ‘तीसरा वजूद’ व नावल ‘आख़िर गूँगी बोल पड़ी’ प्रकाशित हैं। कुछ सिन्धी फ़िल्मों की कहानियाँ रेडियो और टेलिविज़न के लिए लिखी हैं। सिन्धी और अंग्रेज़ी में कई पत्रिकाओं में कॉलम लिखते रहे हैं। अब वे अलामा इक़बाल ओपन यूनिवर्सिटी, इस्लामाबाद से रिटायर हुए हैं। वे इस समय कराची में रहते हैं।

रशीदा हिजाब

जन्म : अक्टूबर 21, 1942 शिकारपुर , सिन्ध (पाकिस्तान) में। एम. एससी. एवं पीएच. डी. सिन्ध यूनीवर्सिटी, जाम शोरे से हासिल की। अमेरिका की त्नजहमते न्दपअमतेपजल से च्वेज क्वबजवतंजम हासिल की। लेक्चरार के तौर पर ‘बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट एंड सेकेंडरी एजूकेशन’ हैदराबाद में अध्यक्षा हैं। बाल साहित्य, लेख, आलेख और लगभग 100 कहानियाँ पत्रिकाओं में छपी हैं। 1962 में बेहतरीन कहानी के लिये महराण अवार्ड और अनेक अकाडेमिक अवार्ड हासिल हैं। निवास : हैदराबाद सिन्ध।

तारिक़ आलम अबरो

जन्म 10 अप्रैल 1958 में कम्बर में लारकाणे में हुआ। 1962 में सिन्धी यूनीवर्सिटी से सिन्धी में एम.ए. की। उनका पहला कहानी संग्रह ‘रात शांत और सोचें’ और उनका नॉवल, ‘रह गए वो मंजर’ 1984 में प्रकाशित। इस नावल पर इंस्टीट्यूट ऑफ सिन्धीयोलॉजी की तरफ़ से उन्हें बेहतरीन अदब के अवार्ड से निवाज़ा गया। 1998 में उनका कहानी संग्रह ‘पहचान की तलाश’ प्रकाशित हुआ। इस वक़्त वह सिन्ध यूनीवर्सिटी कॉलोनी जामशोरो में रहते हैं।

सहर इमदाद

सहर इमदाद का असली नाम सहर बलोच है। पर इमदाद हसीनी के साथ शादी के बाद उसका नाम यही रहा।

जन्म : 20 जुलाई 1951, हैदराबाद में हुआ। एम.ए. सिन्धी में की है। रेडियो पर उनकी कहानियाँ, मज़मून, मक़ाले और कॉलम प्रकाशित होते रहे हैं। इस वक्त वह सिन्ध यूनीवर्सिटी, जामशोरो में सिन्धी की प्रोफेसर हैं। पता- बी-1, सिन्ध यूनिवर्सिटी कॉलोनी में रह रही हैं।

तनवीर जोनेजो

जन्म : 1952 में, ज़िला दादू में। उनकी तालीम भी वहीं हुई। 1974 में सिंध यूनिवर्सिटी जामशोरों से एम.ए. (ैवबपवसवहल) करके वहीं पर लैक्चरर के रूप में कार्यरत हुई। इस समय वे वहाँ की अध्यक्षा  हैं।

सातवें दशक में उन्होंने लिखना शुरू किया। उनका प्रकाशित कहानी-संग्रह है- ‘अध्त में कड़वापन’। अनेक शोध लेख और मज़मून किताबों में छप चुके हैं।

वह इस वक़्त सिन्ध यूनिवर्सिटी एम्पलाइज़ को-ओपरेटिव सासाइटी, जामशेरों में रहती हैं।

लेखक परिचय :: 127

नूर अलहदा शाह

जन्म : 24 जुलाई 1957 में हैदराबाद में जन्मी। शुरुआती तालीम लाहौर, इंटरमीडिएट लाहौर और फिर हैदराबाद से बी.ए. की डिग्री हासिल की। उनके प्रकाशित कहानी संग्रह हैं- ‘जलावतन’, ‘करबला’ और ‘रण में संज जो इतिहासु’। उनकी शाइरी का संग्रह- ‘कैदियाणी की आँखें और चाँद" नाम से प्रकाशित हुआ है।

1982 से टी.वी. के लिए नाटक लिखे। उनका पहला ड्रामा सिन्धी में ‘खिलौना’ के नाम से मशहूर हुआ। कहानियों और ड्रामा निगारी के लिये अनगिनत अवार्ड मिल चुके हैं।

लियाक़त रिज़वी

जन्म : 1 मई 1963 नोशहरो फेरोज़ में। वहीं से मैट्रिक करने के पश्चात् सिन्ध यूनिवर्सिटी जामशोरो से एम. ए. करने के बाद इस वक़्त वे केडिट कॉलेज में लाइब्रेरियन हैं। अनेक कहानियाँ, मकाले व मज़मून लिखे। उनकी कहानी ‘जनम शहर में विछोह ना पल’ के लिये पहला इनाम मिला। 1994 में उन्हें ‘बादाम ख़ातून’ कहानी अवार्ड दिया गया। इस वक़्त वे पी-25 केडिट कॉलेज, पेटारो में रहते हैं।

अब्दुल रहमान सियाल

हैदराबाद ज़िले में रहते हैं। सरकारी आफिसर के रूप में कार्यरत हैं।

एक अच्छे कहानीकार के रूप में भी काफी मान्यता मिली है। कुछ संग्रहों में इनकी कहानियाँ प्रकाशित हुई हैं।

कृष्ण खटवाणी

जन्म : वरुणशाह, सिन्ध (पाकिस्तान)। उपन्यास - 6, कहानी संग्रह- 9, कविता संग्रह- 2, नाटक- 1, अन्य 4 पुस्तके प्रकाशित। किसी भी ख़ास विचारधारा एवं लेबल से मुक्त। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा सामी पुरस्कार (1981) और गौरव पुरस्कार (2006), भारतीय भाषा परिषद्, कलकत्ता द्वारा (1991) तथा ‘याद हिक प्यार जी’ उपन्यास पर साहित्य अकादमी द्वारा सम्मानित (2005)। रा.सि. बो. वि. परिषद् द्वारा साहित्यकार सम्मान (2005)

पोपटी हीरानंदाणी (18 सितम्बर 1924 - 2005) जन्म : हैदराबाद सिन्ध (पाकिस्तान)। उनके साहित्य का विस्तार क्षितिज को छूता है। उनके चार कहानी संग्रह हैं- रंगीन ज़माने की गमगीन कहानियाँ (1953), पुकार (1953), कली गुलाब की, सागर शराब का (1967), मैंने तुमसे प्यार किया (1975) और ख़िज़ां का दौर पूरा हुआ (1976)। उपन्यास हैं- मंजू (1950), हसरतों का तरबत (1961) और सैलाब ज़िन्दगी का (1980)। अन्य आलोचना, लेख, शोधकार्य प्रकाशित। साहित्य अकादमी मुंबई द्वारा 1982 में सम्मानित। उनकी आत्मकथा ‘मुहिजे हयातीअ जा सोना रूपा वर्क’ पर महाराष्ट्र सरकार गौरव पुरस्कार, राष्ट्रीय सिन्धी बोली परिषद दिल्ली और कई पुरस्कारों से सम्मानित।

मुश्ताक़ अहमद शोरो

जन्म 10 मई 1952, जिला ठट्ठो में। 1973 में यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और 1977 में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री हासिल की। हैदराबाद सिंध से निकलने वाली मासिक पत्रिका ‘आखाणी’ के संपादक रहे। ज़िंदगी की शुरूआत रेडियो पत्रकार के रूप में की। अब वे विश्वविद्यालय में परामर्शदाता के रूप में कार्यरत हैं। उनके कहानी संग्रह- ‘थके जज़्बों की मौत’ (1975), ‘टूटे-फूटे-उजड़ते अक्स’ (2003) में प्रकाशित हुए हैं। पता : 166 ए, सिंध

यूनिवर्सिटी, जामशोरो की कॉलोनी में आवास।

शरजील

जन्म 13 दिसंबर 1938, नवाबशाह जिले में। हैदराबाद में आर्ट टीचर के तौर पर स्थापित रहे। अब वे सेवा न्ठित हुए हैं। 1970 में उन्होंने लिखना शुरू किया। उनका कहानी संग्रह ‘पल पत्ते झड़ने के बाद!’ और नज़्मों का संग्रह ‘छोलियूं’ प्रकाशित हुए हैं।

उनकी एक और पहचान चित्रकार के रूप में भी है। उन्होंने चित्रकार के रूप में अनेक पुस्तकों के कवर ढष्ठ और स्केच भी बनाए हैं। इस समय वे हैदराबाद ज़िला काउंसिल के फ्लैट नम्बर बी-2-1 में रह रहे हैं।

इमदाद हुसैनी

उनका असली नाम इमदाद अली शाह है। जन्म : 10 मार्च 1941, टंडो- मुहम्मद जान ज़िले, हैदराबाद में हुआ। शुरूवात में पढ़ाई गाँव में ली, बाद में गवर्नमेंट नूर मुहम्मद हाई स्कूल हैदराबाद में की, उसके बाद सिंध यूनीवर्सिटी से एम.ए. की डिग्री हासिल की। इमदाद हुसैनी का पहला शायरी-संग्रह ‘इमदाद है रोल’ 1976 में प्रकाशित हुआ। शायरी के साथ-साथ ‘सांवल’ के नाम से बहुत सारी कहानियाँ, निबंध और कॉलम लिखे। इसके अलावा उन्होंने रेडियो के लिए ड्रामा, गीतों भरी कहानियाँ और टी.वी. सीरियल भी लिखे। मिर्ज़ा गलीच बेग के नॉवल ‘ज़ीनत’ का उर्दू तर्जुमां भी प्रकाशित है। इस समय वे ठ-1 सिन्ध यूनिवर्सिटी कॉलोनी, जामशोरो में रहते हैं।

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देवी नागरानी

जन्म : 11 मई, 1941, कराची (तब भारत)

पति का नाम : भोजराज नागरानी, माँ का नाम : हरी लालवानी,

पिता का नाम : किशिनचंद लालवानी।

शिक्षा : स्नातक। अर्ली चाइल्ड व गणित में डिप्लोमा, न्यूजर्सी से।

मातृभाषा : सिंधी।

सम्प्रति : शिक्षिका, न्यू जर्सी, यू.एस.ए (अब रिटायर्ड)।

भाषाज्ञान : हिन्दी, सिन्धी, गुरमुखी, उर्दू, तेलुगू, मराठी, अँग्रेज़ी।

प्रकाशित कृतियाँ : 1. ग़म में भीगी ख़ुशी (सिन्धी ग़ज़ल-संग्रह 2004), 2. चरागे-दिल (हिन्दी ग़ज़ल-संग्रह, 2007), 3. उडुर-पखिअरा (सिन्धी-भजनावली, 2007), 4. आस की शम्अ (सिन्धी ग़ज़ल-संग्रह 2008), 5. दिल से दिल तक (हिन्दी ग़ज़ल-संग्रह, 2008) 6. सिंध जी आँऊ आई आह्याँ (सिंधी-काव्य संग्रह, कराची से, 2009) 7. द जर्नी (अंग्रेज़ी काव्य-संग्रह 2009), 8. लौ दर्दे-दिल की (हिन्दी ग़ज़ल-संग्रह, 2010), 9. भजन-महिमा (हिन्दी, 2011), 10. ग़ज़ल (सिन्धी ग़ज़ल-संग्रह, 2012), 11. और मैं बड़ी हो गयी (सिन्धी से हिन्दी में अनूदित कहानी संग्रह, 2012), 12. बारिश की दुआ (हिन्दी से अरबी सिन्धी में अनूदित कहानियाँ, 2012) 13. अपनी धरती (हिन्दी से अरबी सिन्धी में अनूदित कहानियाँ, 2013), 14. माई-बाप और कहानियाँ (सिन्धी से हिन्दी में अनूदित कहानी संग्रह, पद चतवहतमे), 15. सरहदों की कहानियाँ (सिन्धी से हिन्दी में अनूदित कहानी-संग्रह), 16. भाषाई सौंदर्य की पगडंडियाँ (सिन्धी से हिन्दी में अनूदित काव्य-पद, प्रेस में), 17. गुलाब की ख़ुशबू (सिन्धी से हिन्दी में अनूदित कहानी-संग्रह (प्रेस में) 18. यह ज़हर कोई तो पिएगा (सिन्धी से हिन्दी में अनूदित कहानी-संग्रह, प्रेस में) भारत तथा यू.एस. की विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं (न्यूयार्क, ओसलो) द्वारा निमंत्रित एवं सम्मानित।

अनुवाद कार्य : सिन्धी भाषा की कहानियों का अनुवाद हिन्दी में और अन्य भाषाओं की रचनाओं का सिन्धी में अनुवाद। हिन्दी रचनाकारों की लघुकथाएँ व काव्य रचनाएँ सिन्धी देवनागरी में अनुवाद। रूमी, खलील जिब्रान व रवीन्द्रनाथ टैगोर की काव्य रचनाएँ अंग्रेज़ी से सिन्धी और हिन्दी में परस्पर अनूदित।

सम्मान : अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, न्यूयार्क में, विद्या धाम संस्था, न्यूयार्क, शिक्षायतन संस्था न्यूयार्क की ओर से ‘काव्य रतन’ व ‘काव्य मणि’ सम्मान। खन्यू जर्सी, मेयर के हाथों City Hall mein 'Proclamation Award'  रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय लघुकथा सम्मेलन में सृजन-श्री सम्मान, मुम्बई में काव्योत्सव, श्रुति संवाद साहित्य कला अकादमी, महाराष्ट्र हिंदी अकादमी, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद की ओर से वर्ष 2009 में पुरस्कृत एवं सम्मानित हिंदी प्रचार सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में काव्य पाठ के उपरांत, महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादेमी के कार्याध्यक्ष श्री नंदकिशोर नौटियाल एवं सभा की मानिंद निर्देशक डॉ. सुशीला गुप्ता के कर कमल से संस्था के नामी पदक व सुमन द्वारा सन्मानित 17 अप्रेल, 2008 काव्योत्सव सम्मान, 2008 Bal Vikas Kendra Charitable Trust, Nerul द्वारा आयोजित गोष्ठी में संयोजक श्री अरविंद राही, अध्यक्ष श्री ब्रिगेडियर धर्मप्रकाश, श्री धनराज चौधरी, उपाध्यक्ष श्री पारस नाथ पांडे, अध्यक्ष श्रीमती साधना मिश्रा के हाथों से शाल, श्रीफल-पुष्प व सभा के काव्योत्सव पदक से सम्मानित, 27 अप्रेल 2008 खश्रुति संवाद साहित्य कला अकादमी द्वारा हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित अखिल भारतीय सर्व-भाषा साहित्य सम्मेलन में भागीदारी के लिये सिंधी भाषा के लिये सरंक्षक व निर्देशक श्री अरविंद राही, श्री राजीव सारस्वत एवं श्री अनन्त श्रीमाली द्वारा सम्मान चिन्ह, श्रीफल, शाल, सुमन, 2008 खमहाराष्ट्र हिंदी अकादमी के आयोजित सर्व ‘भारतीय भाषा सम्मेलन’ स्मारक सम्मान- साहित्य के योगदान व मुशायरे में शिरकत के लिए अकादमी की ओर से सम्मानित 3-5 अक्टूबर 2008 ख राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद -सिन्धी पुस्तक ‘उडुर पखीयरा’ के लिए पुरस्कार, 2009 ख जोधपुर में ‘ख़ुशदिलान-ए-जोधपुर’ के रजत जयंती समारोह एवं कवि सम्मेलन के अवसर पर स्ध्ति सभा भवन में आयोजक श्री अनिल अनवर द्वारा स्ध्ति चिन्ह, शाल सुमन से सम्मानित, 22 अगस्त, 2010 ख जयपुर में ख़ुशदिलान-ए-जोधपुर के रजत जयंती समारोह में सम्मानित 22 अगस्त, 2010 खभारतीय-नार्वेजीय सूचना एवं सांस्कृतिक फोरम के मंच पर स्थानीय मेयर थूर स्ताइन विंगेर और भारतीय दूतावास के सचिव बी.के. श्रीराम जी एवं इस संस्था के अध्यक्ष सुरेशचंद्र शुक्ल ‘शरद आलोक’ जी के हाथों हिंदी साहित्य सेवा के लिए ओस्लो में सम्मानित, 17 मई 2011 तुलसी साहित्य सम्मान- 2011, मध्य प्रदेश तुलसी साहित्य अकादेमी द्वारा, भोपाल ‘जीवन ज्योति पुरस्कार’, जीवन ज्योति संस्था की ओर से, भारत के 63 गणतंत्र दिवस पर मुंबई में, 26 जनवरी 2012 विशेष सम्मान, संस्कृति संगम संस्था-कल्याण 13 अक्टूबर 2012 ‘अखिल भारतीय सिन्धी समाज’ का गोवा में 22वां राष्ट्रीय सम्मेलन में श्री लछमनदास केसवानी की हाजिरी में, मुख्य अतिथि युधिष्टर लाल जी हाथों विशिष्ट सम्मान सिन्धी- 24-26, फरवरी 2012 अखिल भारत सिंधी भाषा एवं साहित्य प्रचार सभा की ओर से लखनऊ में टेकचंद मस्त व बिनीता नागपाल द्वारा आयोजित 90 नेशनल सेमिनार स्त्री शक्ति पर, जिसमें शिरकत के लिए सखी साईं मोहनलाल साईं के हाथों सम्मानित, सिन्धी-15,16,17 मार्च 2012 भारतीय भाषा संस्कृति संस्थान, गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद के निर्देशक श्री के.के.भास्करन, प्रोफेसर निसार अंसारी, एवं डॉ. अंजना संधीर के हाथों- सुत माला, सुमन, शाल से सम्मानित, 18 जून, 2012 खसाहित्य अकादेमी तथा रवीन्द्र भवन के संगठित तत्वावधान में शुक्रवार 2012, रवींद्र भवन मडगांव, गोवा में सर्वभाषी ‘अस्मिता’ कार्यक्रम में सिन्धी काव्य पाठ में भागीदारी, 9 नवम्बर 2012 ख तमिलनाडू हिन्दी अकादमी एवं धर्ममूर्ति राव बहादुर कलवल कणन चेट्टि हिन्दू कॉलेज, चेन्नई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विश्व हिन्दी दिवस एवं अकादमी के वर्षोत्सव में भागीदारी, अकादमी के अध्यक्ष डॉ.बालशौरी रेड्डी के हाथों ‘साहित्य सेतु सम्मान, 10 जनवरी 2013 खसंस्कार सारथी ट्रस्ट के तत्वावधान में ‘अक्षर शिल्पी सम्मान’ एवं लोकार्पण ‘और मैं बड़ी हो गई’ गांधी शांति प्रतिष्ठान, दिल्ली 12 मार्च, 2013 खदिल्ली साहित्य अकादेमी द्वारा गणतन्त्र दिवस और सिन्धी के वरिष्ठ शायर हरी दिलगीर की याद में संयोजित संस्कृत व साहित्यिक काव्यगोष्ठी में भागीदारी, 20 जनवरी, 2013 ख‘सैयद अमीर अली मीर पुरस्कार- 2013, मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, मंत्री संचालक श्री कैलाशनाथ पंत की हाजिरी में माननीय राज्यपाल श्री रामनरेश यादव के हाथों ‘चरागे-दिल’ के लिए, 2, अक्टूबर 2013

मेरी बात : कलम तो मात्र इक ज़रिया है, अपने अंदर की भावनाओं को मन की गहराइयों से सतह पर लाने का। इसे मैं रब की देन मानती हूँ, शायद इसलिये जब हमारे पास कोई नहीं होता है तो यह सहारा लिखने का एक साथी बनकर रहनुमाँ बन जाता है। लिखने का प्रयास शुरुवाती दौर मेरी मातृभाषा सिन्धी में हुआ। दो ग़ज़ल संग्रह सिन्धी में प्रकाशित, कई आलेख, और समीक्षाएं लिखीं, फिर कदम ख़ुद-ब-ख़ुद राष्ट्रभाषा की ओर मुड़ गए, शायद विदेश (न्यू जर्सी) में रहते हुए साहित्य की धारा हिन्दी में प्रवाहित हुई और देश की जड़ों से जुड़ी यादें काव्य-रूप में कलम के प्रयासों से काग़ज़ पर उतरने लगीं। प्रवास में हिन्दी अकादेमी द्वारा कई संग्रह निकले जिनमें शामिल रही। प्रवासी परिवेश पर आधारित लेख, कहानियाँ और समीक्षात्मक आलेख लिखना एक प्र्वृत्ति बन गयी। ग़ज़ल विधा मेरी प्रिय सहेली है, बस एक शेर में अपने मनोभाव को अभिव्यक्त करने का साधन और माध्यम। शिक्षिका होने का सही मतलब अब समझ पा रही हूँ, सिखाते हुए सीखने की संभावना का खुला आकाश सामने होता है, ज़िंदगी हर दिन एक नया बाब मेरे सामने खोलती है, चाहे-अनचाहे जिसे पढ़ना और जीना होता है, यही ज़िंदगी है, एक हक़ीक़त, एक ख़्वाब!!

यह ज़िंदगी लगी है हक़ीक़त, कभी तो ख़्वाब

वह सामने मेरे खुली, जैसे कोई किताब

संपर्क :

9 - Corner View Society, 15/33 Road,
Bandra Mumbai 400050. Ph : 9987928358
USA Add : 408 W Surf Street, Elmhurst II 60126,
Phone : 1-630-841-2804
e-mail : dnangrani@gmail.com
URL ://charagedil.wordpress.com

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ईबुक - सरहदों की कहानियाँ / / अनुवाद व संकलन - देवी नागरानी

 

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(समाप्त)

(टीप - इस संकलन कुछ कहानियाँ  पुनर्प्रकाशित नहीं की गई हैं  - जैसे कि रिश्ता, गोश्त का टुकड़ा, गुनाह का अंत, एक मरा हुआ इंसान, जिंदगी और टेबल टाक - क्योंकि वे- प्राची दिसम्बर 2015 के अंक में  पूर्व प्रकाशित हैं जिसे आप यहीं रचनाकार के पृष्ठों पर जनवरी 2016 के अंक में पढ़ सकते हैं.)

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