मंगलवार, 2 फ़रवरी 2016

हरि भटनागर के उपन्यास - एक थी मैना एक था कुम्हार - का सस्वर पाठ

हरि भटनागर का उपन्यास - एक थी मैना एक था कुम्हार - आप यहाँ पढ़ सकते हैं.

इस दिलचस्प, मनोरंजक, फ़ैंटेसी उपन्यास को अब स्वर दिया गया है. जी हाँ, अब आप इस उपन्यास का आनंद सुनकर उठा सकते हैं.

नीचे 5 भागों में यूट्यूब ऑडियो के रूप में ये स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध हैं -

उपन्यास एक थी मैना एक था कुम्हार भाग 1 का पाठ -

 

उपन्यास एक थी मैना एक था कुम्हार भाग 2 का पाठ -

उपन्यास एक थी मैना एक था कुम्हार भाग 3 का पाठ -

उपन्यास एक थी मैना एक था कुम्हार भाग 4 का पाठ -

उपन्यास एक थी मैना एक था कुम्हार भाग 5 का पाठ -

 

वैकल्पिक रूप से आप इसे निम्न कड़ी से एमपी 3 फ़ाइल के रूप में स्ट्रीम कर या डाउनलोड कर भी सुन सकते हैं -

ऑडियो स्ट्रीम भाग 1

 

ऑडियो स्ट्रीम भाग 2

 

ऑडियो स्ट्रीम भाग 3

ऑडियो स्ट्रीम भाग 4

ऑडियो स्ट्रीम भाग 5

 

डायरेक्ट डाउनलोड लिंक -

भाग 1

https://archive.org/download/HariBhatanaagarUpanyasEkThiMainaEkThaKumhar/Hari%20bhatanaagar%20upanyas%20part%201.mp3

भाग 2

https://archive.org/download/HariBhatanaagarUpanyasEkThiMainaEkThaKumhar/Hari%20bhatanaagar%20upanyas%20part%202.mp3

भाग 3

https://archive.org/download/HariBhatanaagarUpanyasEkThiMainaEkThaKumhar/Hari%20bhatanaagar%20upanyas%20part%203.mp3

भाग 4

https://archive.org/download/HariBhatanaagarUpanyasEkThiMainaEkThaKumhar/Hari%20bhatanaagar%20upanyas%20part%204.mp3

भाग 5

https://archive.org/download/HariBhatanaagarUpanyasEkThiMainaEkThaKumhar/Hari%20bhatanaagar%20upanyas%20part%205.mp3

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------