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जयपुर साहित्य महोत्सव : एक अंतर्राष्ट्रीय पहचान / गीता दुबे

 

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  गीता दुबे 

इस वर्ष जनवरी माह में जयपुर के डिग्गी पैलेस में आयोजित साहित्य महाकुम्भ में शरीक होने का सुअवसर मुझे भी प्राप्त हुआ. इस महोत्सव में बच्चों से लेकर बुजुर्ग सभी आयु के लोग देखे गए लेकिन युवा वर्ग की उपस्थिति भारी संख्या में देखी गई. युवा वर्ग का साहित्य प्रेम देखकर साहित्य का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध होता दिखा. इस साहित्य महाकुम्भ में लगभग तीन सौ पचहत्तर लेखकों ने भाग लिया जिसमें सौ से ज्यादा विदेशी लेखक थे. टी. वी. स्क्रीन के आकड़ों के अनुसार प्रतिदिन करीब पैतालीस हजार से अधिक लोग इस महोत्सव में शामिल हुए. दिन- भर डिग्गी पैलेस के छह स्थानों पर छह सत्रों में पुस्तक लोकार्पण, पुस्तक चर्चा, विचार- विमर्श, साक्षात्कार, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम चल रहे थे.

पुस्तक चर्चा--- जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के प्रांगण में विभिन्न क्षेत्रों के लोकप्रिय लोगों की पुस्तक पर चर्चाएँ हुईं. विज्ञापन के क्षेत्र की मशहूर हस्ति पीयूष पांडे की पुस्तक  ‘पाण्डेमोनियम’ पर पीयूष पांडे के साथ लेखक सुहैल सेठ ने बातचीत की. आज के नवयुवकों के बारे में पीयूष पांडे ने कहा कि वे किसी तरह का बंधन नहीं चाहते. यदि उन्हें मुझसे मिलना होता है तो वे सीधे मेरी ऑफिस में चले आते हैं और मुझसे मिलते हैं, मेरे साथ सेल्फी लेते हैं. करन जौहर ने अपनी पुस्तक ‘ऐन अनसुटेबल बॉय’ की चर्चा करते हुए कहा कि बचपन में उन्हें सब ‘लड़की जैसा’ कहकर पुकारते थे. जानी- मानी किन्नर लक्ष्मी ने अपनी पुस्तक ‘मैं हिजड़ा हूँ’ की चर्चा करते हुए आप बीती बताई जो दिल दहला देने वाली थी. मशहूर टी. वी. एंकर बरखा दत्त ने अपनी पुस्तक ‘दिस अनक्वाइट लैंड’ के विषय में लेखिका शोभा डे से बातचीत के दौरान अपने साथ बचपन में हुई यौन शोषण का जिक्र कहा और बताया कि यौन शोषण करने वाला करीबी ही था. उन्होंने यह भी कहा कि आज भी कई घरों के बंद दरवाजे के अन्दर करीबी लोगों द्वारा महिलाओं, बच्चियों के यौन शोषण हो रहे हैं और वे शर्म और डर के मारे चुप रह जाती हैं फिर उन्होंने यह भी कहा कि मेरी विकिपीडिया में लिखा हुआ है कि मेरे तीन पति हैं लेकिन सच्चाई यह है कि मेरे एक भी पति नहीं है.

कविता निरंतर—कविता निरंतर में न सिर्फ भारतीय बल्कि ब्रिटेन, अमेरिका, वियतनाम से आये सभी कवि, कवित्रियों ने अपनी अपनी कविता का पाठ किया. प्रत्येक कवि को कविता पढने के लिए सिर्फ चार मिनट का समय दिया गया. हरिराम मीना की दो पंक्तियों की कविता ‘आदमी मरने के बाद कुछ नहीं बोलता, कुछ नहीं सोचता, कुछ नहीं बोलने और कुछ नहीं सोचने पर आदमी मर जाता है.’ काफी सराही गई.

सुन्दरता आपकी नजरों में है---  ‘साहित्य और सिनेमा से सुन्दरता कहाँ तक  प्रभावित है’ पर हुए परिचर्चा में केंद्रीय मंत्री रह चुके शशि थरूर ने कहा कि हमारी जितने भी ग्रन्थ हैं सभी की नाईकाएं सांवली ही रही हैं, चाहे कालिदास की शकुंतला हो या महाभारत की द्रौपदी. धीरे-धीरे सोच में बदलाव आया और गोरे रंग को सुन्दर माना जाने लगा. नंदना देव सेन ने कहा कि योग सुन्दरता बढ़ाती है, वहीँ बॉलीवुड के मशहूर गीतकार, पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने कहा कि आप जिससे प्रेम करते हैं, जिसको चाहते हैं, वह आपको सुन्दर लगता है. सुन्दरता की कोई परिभाषा नहीं होती, वह आपकी नजरों में होती है.

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में न सिर्फ साहित्यिक बल्कि रसोई से लेकर बच्चों के पुस्तकों का भी लोकार्पण हुआ. हिंदी साहित्य का भविष्य समृद्ध होता दिखा. इस वर्ष से दैनिक भास्कर की ओर से हिंदी के लिए युवा लेखक सम्मान की शुरुआत की गई और हिंदी कविता के क्षेत्र में के. एल. सेठिया सम्मान भी प्रारम्भ किया गया. इस वर्ष हिंदी कविता का सम्मान कवि उदय प्रकाश को दी गई. पांच दिन चलने वाले साहित्य महोत्सव में पीने के पानी से लेकर चाय, कॉफी, बीयर, नाश्ता, खाना सभी चीजों की व्यवस्था थी. सफाई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे. वॉलनटियर हर कदम पर मौजूद थे. इतने वृहद आयोजन के लिए मैं आयोजकों को हार्दिक धन्यवाद देती हूँ जिनकी वजह से जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की एक अंतर्राष्ट्रीय पहचान बन चुकी है.

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