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ले ले बेटा सेल्फी ..... / व्यंग्य / सुशील यादव

    आज के जमाने में सेल्फी जिसे किसी ने हिन्दी अनुवाद में 'खुद-खेचू ' कह  डाला है ,गजब की चीज है ।फोटो खीचते समय चीज या रसगुल्ला किसी को भी याद करके मुह बनाया जा सकता है ।

    कुछ आत्महत्या करने वाले नौजवान इसे आजमा रहे हैं ।आत्महत्या  कर के  बुजदिल खिताब पाने से अच्छा है, किसी ऊचाई की  छोर में पहुँचो ,हाथ के मोबाइल को सेल्फी मोड़ में तानो, और बेलेंस बिगड़ जाने की तर्ज में,किसी  खाई  या उफनती नदी के हवाले अपने आप को झोक दो |अखबार की सुर्खियाँ में स्वयं खिंचित अंतिम सेल्फी फोटो आ जाती हैं ।

    हमे अच्छी तरह याद है,मेला या मीनाबाजार जब कस्बे में लगता था तो एक फोटोग्राफर का स्टाल लगा होता था ।ढांचे वाली कार या मोटरसायकल के साथ फोटो खिचवाने वाले  शौकीनो की एक जमात होती थी ।उस जमाने में पत्नी को मीनाबाजार घुमवा देना यानी आज के फारेन ट्रिप से ज्यादा की अहमियत वाला किस्सा था ।वो चटकारे लेकर मीनाबाजार पुराण साल छह महीने जरुर चलाती ।अगली बार मीनाबाजार लगने की प्रतीक्षा जोरों से रहती ।उस जमाने में  दस- बीस देखे गये स्टाल की एक-एक चीज की सेल्फी उनकी नजरों में खीची रहती थी  ।इसी में यदि पति ने फोटो खीचवाने का प्लान बना लिया तो पत्नी सहित हम सरीखे ,दस -बारा साल के बच्चों में अति उत्साह का अतिरिक्त ,संचारी भाव जागृत हुए रहता था ।अपने-अपने स्तर  पर हम सब आईने के सामने भिन्न- भिन्न  पोज बनाने की धुन में व्यस्त हो जाते थे ।उधर फोटोग्राफर को हमारी फोटो फेन्टसी से भला क्या सारोकार होना ...?दोनों पैर जोड़कर हाथ जांघ पर रखते हुए सेकंडों में क्लिक कर देता था । मीनाबाजार में खिचवाये एकलौते फोटो का साज-संभार जबरदस्त तरीके से होता था ।बाकायदा आठ सास फोटो के संकलन को फ्रेम में जडवा कर आने जाने वाले मेहमानों पर अपनी संपन्नता का धौस जमाया जाता था ।

    आज वो दिन होते तो मौत की छलांग वाले वीडियो छलांग लगाने वाले की हिम्मत को दाद देते फेसबुक में आये दिन डाले जाते |     

        इधर मै सेल्फी ,मीनाबाजार और फोटोग्राफी पर नब्बू के साथ चाय की गुमटी में बीते जमाने के फ्लेश-बेक में था उधर कहीं पास में माइक से भागवत पुराण में कोई संत जैसा कि प्राय: होता है प्रवचन की मुख्य धारा से हटकर किस्से कहानियों में भक्तों को बाँधने का उपक्रम कर  रहे थे।

    भक्तजनों !इस मिथ्या संसार में आसक्ति ही सभी विवाद की जड़ है ।रिश्तो में आसक्ति ,पद के प्रति आसक्ति ,प्रतिष्ठा के लिए मोह ,व्यापार के लिए दौड़ भाग ,व्य्वास्स्य के लिए खुरापात ,जीत- हार के लिए मार काट ,किसी को नीचा दिखाने ,किसी से ऊचा दिखने के लिए आमरण अनशन ये सब आसक्ति है ।मोह में फंसे होने का पक्का सबूत है ।मेरी आप सब से आग्रह है की कल की सभा  में आप आये तो सेल्फी  लेकर आयें......?

पता नहीं माइक में क्या व्यवधान आया सो बंद हो गया ।

    नब्बू ने कहा ,गुरुजी महाराज का प्रवचन अच्छा चल रहा था अचानक सेल्फी वाली ओछी बात क्यों कह दी ......?

मैंने चाय के डिस्पोसिबल फेकते हुए कहा ,पंडाल पीछे है चल  देख लें......

प्रवचन सुनने वाले पुरुष महिलाओं की अच्छी खासी तादात थी ।प्रवचन किसी यू पी  साइड का पंडित कर रहा था ,हमारे प्रवेश बाद माइक वाले ने जनरेटर मोड़ में माइक को शुरू कर दिया ।

    वे बोले आप सब सेल्फी सुन कर अपनी अपनी मोबाइल की तरफ देखने लगे,बंधुओ मेरा आशय एंड्राइड  या स्मार्ट फोन से लिए जाने वाले सेल्फी से नहीं है ।

    गुणीजनो......हमारे शास्त्रो  में सेल्फी का मतलब है 'आत्म-चिंतन' .....

यूँ तो हममें से हर आदमी चिंतन करता है जिसे मन ,दिमाग या बुद्धी संचालित करती है ।क्ल जब आप इस सभा में शामिल हों तो आत्म चिंतन की सेल्फी लेकर आयें .....?अब प्रश्न ये है की आत्म चिन्तन का सब्जेक्ट क्या हो....?मेरी राय में आप सब अपने वर्तमान को टार्गेट रखें ।जो जिस व्यवसाय में है उसमे कितना वफादार है .....।कितनी इमानदारी की गुजाइश है और वो कितना दे पाता है....?इस सेल्फी का प्रयोग आप महीने में एक बार कर लेंगे तो यकीन जानिये आपकी चर्बी कम होगी ,मोटापा घटेगा ,बी पी टेशन दूर होंगे .....।आज की सभा को विराम देता हूँ ,जय श्री कृष्णा ....

    दुसरे दिन नब्बू के साथ उत्सुकता  से पंडित महराज और भक्तजनों के बीच होने वाले संवाद सुनने के लिए पहुचे ।पंडाल  लगभग खाली था,पंडित के चेले पंडाल का मुआयना कर कर के जा रहे थे,  उनमे से हमने एक को पकड़ा ....क्यां सभा होगी कि  नहीं ....?

वॊ खिसियाया दिख रहा था ,देख तो रहे हो..... आप दो आदमी के लिए कोई प्रवचन होगा क्या ....?वो बुदबुदाया अपने महराज भी प्रवचन टी आर पी बढाने के चक्कर में ज्ञान की ऊँची -ऊँची फेक गए ....कौन सुनता है आजकल ,क्या जरूरत थी भला ,..... अच्छा चढावा मिल रहा था ....अब तंबू उखाड़ने की नौबत है ....भुगतो ....?कौन आदमी है जो इमानदार है इस जमाने में ...बताओ ...?

    आत्म चिंतन की सेल्फी में विद्रूप चेहरा किसको भाता है ?

    कोइ कहीं  मुह दिखाने लायक भी नहीं बचता.......?

महराज उधर अकेले में  अपनी सेल्फी ले रहे हैं ..देखो कहीं दौरा न पड़ जाए ....

 

सुशील यादव 

न्यू आदेश नगर दुर्ग 

०९४०८८०७४२० 

susyadav7@जीमेल.com

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