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गुबार देखते रहे / कहानी / सक्षम द्विवेदी

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उस दिन भी उसने पहले अपनी शर्ट की बांयी फिर दायीं फिर जीन्स की बायीं जेब को देखा पर वो जो ढूँढ. रही थी पर हर बार की तरह वो उसकी जींस की साम...

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उस दिन भी उसने पहले अपनी शर्ट की बांयी फिर दायीं फिर जीन्स की बायीं जेब को देखा पर वो जो ढूँढ. रही थी पर हर बार की तरह वो उसकी जींस की सामने वाली दायीं जेब में ही निकला शायद वो भी जानती थी जो वो ढूंढ रही थी वो यहीं पर है पर इस तरह ढूंढना उसकी आदत सी हो गयी थी और इस आदत के कारण अनिरूद्ध को भी पता रहता था कि उसकी किस जेब में क्या होता है कई बार तो अनिरूद्ध ही उसे बताता था कि आप जो ढूंढ़ रहीं हैं वो आपकी इस जेब में हैं और कभी-कभी तो ये भी बताता की आपकी शर्ट में दायीं ओर जेब ही नहीं है।

अनिरूद्ध और गार्गी का साथ भी अपने में अलग तरह का था, क्यों कि दो लोगों में साथ रहने के लिए कामन इंन्ट्रेस्ट सा कामन सब्जेक्ट होना जरूरी होता है। पर इन दोनों के बीच ऐसी कोई भी चीज नहीं थी। पर जब दो लेाग साथ रहना चाहतें है तो वो ये दोनेां तलाश लेते हैं। अरे हां! दो लोगों के साथ रहने का मन भी तो एक कामन इंन्ट्रेस्ट हो गया ना। पर शुरू-शुरू में इन दोनेां के बीच एक मौसम ही कामन सब्जेक्ट हुआ करता था। दोनों एक दूसरे से पूछते मौसम कैसा है ? फिर दोनों हंसने लगते क्यों की जब दोनेां एक ही जगह हैं तो इस प्रश्न का कोई मतलब नहीं होता था पर कुछ बात तो करनी ही थी तो कुछ तो पूछना ही था। कड़ाके की सर्दी में भी मौसम ही आईस ब्रेकर की भूमिका निभाता था।

अनिरूद्ध चाय बहुत पीता था और गार्गी सिगरेट दरअसल उस दिन वो अपना लाइटर ही ढूंढ रही और अनिरूद्ध जानता था वो गार्गी की जींस सामने वाली दायीं जेब में है वो अनिरूद्ध ने ही निकाला और हमेशा की तरह जलाते हुए सिगरेट से होने वाले नुकसानेां को गिनाते हुए गार्गी की सिगरेट जलाया। अनिरूद्ध ने बहुत बार गार्गी को चाय पिलाने की कोशिश की पर वो हमेशा यही कहती की चाय पीने से काले हो जाएंगे और अनिरूद्ध कहता आप काली हों या न हों मैं एक दिन आपके सिगरेट के धुंए से सफेद जरूर हो जाउंगा। गार्गी ने कहा ये ब्लैक एण्ड वाइट का बहुत अच्छा काबिनेशन हो गया आज आप सिगरेट पीजीए और मैं चाय फिर हम दोनों एक ब्लैक एण्ड वाइट फिल्म देखने चलते हैं। अनिरूद्ध ने सिगरेट पीने से मना कर दिया तो गार्गी ने कहा चलो हम दोनों एक दूसरे की आधी-आधी बात मानते हैं हम आधी चाय पीते है और आप पैसिव स्मोक करना, अनिरूद्ध ने कहा ये ठीक है।

अब आधी-आधी चाय की प्यालीयां आयी और एक सिगरेट गार्गी सिगरेट का कश लेकर धुंआ अनिरूद्ध के मुंह पर छोड़ती धुंआ उपर जाता और सामने गार्गी का चेहरा धुंधला से साफ होता जाता तीन-चार बार ऐसा होने के बाद अनिरूद्ध को नशा सा होने लगा पर वो नशा सिगरेट के निकोटीन से कुछ ज्यादा था। अनिरूद्ध ने पहले भौहें उपर की फिर आंखे बन्द करते हुए अपने को थोड़ा संभाला, गार्गी की नजर भी बगल से जा रही ट्रक की तख्ती पर पड़ी जिस पर लिखा था ‘‘ उचित दूरी बनाएं रखें’’ गार्गी उठकर थोड़ा दूर चली गयी। फिर दोनों ने शहर के थियेटर्स में ब्लैक एण्ड वाइड मूवी खेाजने निकले पर कोई भी नहीं मिली फिर वापस आकर लैपटाप में ‘‘शोले’’ को ब्लैक एण्ड वाइट करके देखा। शोले को भी इसलिए चयनित किया गया क्यों कि इसका टाइम ड्यूरेशन ज्यादा था बाकी आजकल की फिल्मे 2:30 मिनट से अधिक होतीं ही नहीं है। अनिरूद्ध को पहली बार पता चला कि अच्छी फिल्मों का चयन सिर्फ कहानी के आधार पर नहीं किया जा सकता समय भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

गार्गी जब भी अनिरूद्ध से मिलती वो बड़े ही आवेग के साथ गले मिलती जिससे अनिरूद्ध एक दो कदम पीछे चल जाता था, इसीलिए जब भी गार्गी मिलने आती तो अनिरूद्ध अपनी जगह स्थिर रहने के लिए दायीं पैर की एड़ी में विशेष बल लगाता था।

अनिरूद्ध ने गार्गी को ताश खेलना सिखाया था। हालांकि अनिरूद्ध को सबसे अच्छा ‘ब्लाइंड’ खेलना लगता था पर उसने गार्गी को सिर्फ ‘रमी’ खेलना ही सिखाया था क्यों कि ब्लांइड में तीन लोगों की आवश्यकता होती है और अनिरूद्ध इस खेल में किसी तीसरे को नहीं चाहता था।

एक रात अनिरूद्ध को किसी काम से कहीं जाना था लेकिन तभी गार्गी का काल आया जल्दी आइये कुछ काम है। अनिरूद्ध तीसरे मंजिल में बने उसके फ्लैट में बिना लिफ्ट के गया। अनिरूद्ध के बैठते ही गार्गी ने उसे काफी देर तक बड़ी ही अच्छी-अच्छी गालियां दी। उसके गाली देने के अंदाज से ऐसा लग रहा था कि इसने आज तक किसी से तेज आवाज में बात भी नहीं की हो। उसके शांत होने के बाद अनिरूद्ध ने उसकी दी गयी गालियों के उच्चारण में की गयी खामियों को बताया और बताया ये वाली गाली ऐसे दी जाती है। अनिरूद्ध ने बोला ‘‘आपके गालियों के प्रोनाउंसिएशन में बहुत खामियां हैं’’ तो गार्गी ने कहा ‘‘इट्स नाट प्रोनाउंसिएशन, इट्स प्रनाउंसिएशन’’ गार्गी तेज-तेज हंसने लगी। हंसते-हंसते एकदम शान्त हो गयी। अचानक फूट-फूट कर रोने लगी और अनिरूद्ध की शर्ट में आंसू पोंछने लगी वो इतना ज्यादा रो रही थी कि उसके आंख और नाक दोनों बह रहे थे और वो दोनों ही बड़ी तन्मयता के साथ अनिरूद्ध की शर्ट पर पोंछ रही थी अनिरूद्ध को लगा क्या किया जाए वो रूमाल तो रखता नहीं था पर ये जानता था कि गार्गी की जींस की किस जेब में रूमाल होता है उसने वहां से रूमाल निकाला पर फिर देखा कि गार्गी जिस तरह से अपने आंसू पोंछ रही थी उसे लगा कि इनके काम में फिलहाल हस्तक्षेप करना ठीक नहीं ये जो कर रहीं है पहले कर लेने दिया जाए। शर्ट का मसला बाद में सुलझाया जाएगा।

कुछ देर बाद गार्गी बात करने की स्थिति में आयी तब अनिरूद्ध ने न तो उससे गाली देने का कारण पूछा,न हंसने का और न रोने का। हां ये जरूर पूछा कि अब इस शर्ट का क्या होगा। तब गार्गी ने कहा आप दीजिए हम इसे धोतें है। अनिरूद्ध ने पूछा आपने कभी कपड़े धोयें हैं ? गार्गी ने कहा कोशिश करने में क्या जाता है? अनिरूद्ध बोला ठीक है आप कोशिश कीजिए पर फिलहाल मुझे जाने के लिए कोई कपड़ा दीजिए। गार्गी बोली अगले रूम में कपड़े हैं आप देख लीजिए जो ठीक लगे ले लीजिए। अनिरूद्ध रूम में एक सेमी ट्रांसपैरेन्ट शर्ट दिखी जो उसकी नाप की थी वो उसको पहन कर जा रहा था कि इस रूम में उसे दुपट्टा भी दिखा जिसकी उम्मीद उसे गार्गी के घर में नहीं थी। बहरहाल अनिरूद्ध चला गया।

अगले दिन गार्गी और अनिरूद्ध साथ में लंच कर रहे थे। लंच के बाद गार्गी ने वाश बेसिन में हाथ धोया और पानी के छींटे अपने मुंह में मारे। गार्गी जब अनिरूद्ध के सामने आयी तो उसके गार्गी के चेहरे के उपर से नीचे की ओर एक लाल रेखा सी चल रही थी। अनिरूद्ध ने उसे वो दिखाया तब गार्गी थेाड़ी असहज सी हो गयी फिर उसने बताया कि पानी के कारण सिंदूर बहकर नीचे की ओर आ गया है। दरअसल गार्गी के बाल दो लेयर में बंटे होते थे वो सिंदूर निचली लेयर में नाममात्र का लगाती थी इसीलिए अनिरूद्ध का ध्यान आज तक उस पर नहीं गया।

अब गार्गी अनिरूद्ध के संभावित प्रश्न ‘‘आपने मुझे कभी बताया नही’’ का उत्तर देने के लिए एकदम तैयार ही हो रही थी पर अनिरूद्ध ने ऐसा कुछ भी गार्गी से नहीं पूछा। अनिरूद्ध ने कहा कि खाने के बाद कुछ मीठा खाना चाहिये उसने दो मीठे पान लिये एक खुद खाया और दूसरा गार्गी को दिया। गार्गी ने कहा कि मैं पान नहीं खातीं अनिरूद्ध ने कहा खा लीजिये इससे आप काली नहीं होंगीं।

एक दिन अनिरूद्ध ने गार्गी से पूछा और आपके घर में कौन-कौन हैं ? उसने कहा शायद आप मेरे पति के बारे में जानना चाहतें हैं, आप सीधे क्यों नहीं पूछे? अनिरूद्ध ने कहा जब समझ हीं गयीं है तो सीधे बता दीजिए। गार्गी ने एक लंबी जम्हाई लेते हुए अपने दोनों हाथ उपर उठाये और अपने दाहिनी हाथ को बांयी हथेली से पकड़ते हुए फिर एक जम्हाई ली और कहा कि मेरे पति ई……. बहुत अच्छे हैं, मेरा बहुत ख्याल रखते हैं,मेरी सारे बातें मानते हैं और इस तरह 13 मिनट 21 सेकेण्ड तक अपने पति केा एक आदर्श पति के रूप में स्थापित करने के लिए जितने वाक्य आवश्यक थे वो सब उसने बोले पर अनिरूद्ध के मुंह में सिगरेट का धुंआ फूंकने वाली गार्गी ने इस 13 मिनट 21 सेकेण्ड में पहली बार बिना एक भी बार आंख मिलाए इतना बोला था और 22वें सेकेण्ड एकदम चुप हो गयी। और बहुत देर तक महौल एकदम शान्त हो गया। अनिरूद्ध एकटक गार्गी का चेहरा देखता रहा। थोड़ी देर में चुप्पी तोड़ने के लिए अनिरूद्ध ने झूठी खांसी ली वो खांसना तो सूखी खांसी चाहता था पर उसमें कुछ तरलता आ गयी थी। फिर गार्गी ने कहा कि मेरे पति मुझे लेने आ रहें हैं फिर शायद मैं यहां कभी ना आऊँ। पर मैं जाने से पहले आप से कल शाम मिलने की कोशिश करूंगी, आप आइये उसी सनसेट प्वांइंट पर। अनिरूद्ध ने कहा ठीक है।

अगले दिन शाम को अनिद्ध खड़ा था,गार्गी की कार आकर रूकी गागीं उतरी अनिरूद्ध ने अपनी दायीं पैर की एडि़यों में बल लगाया पर इस बार गार्गी बेहद धीमी गति से आयी और अनिरूद्ध से कुछ दूरी पर खड़ी हो गयी, फिर कार का दूसरा दरवाजा खुला वहां से गार्गी का पति आया और गार्गी के बगल में खड़ा हो गया। गार्गी ने कहा ये अगस्त्य हैं मेरे पति। अनिरूद्ध ने कहा शुभ संध्या अगस्त्य। अगस्त्य ने कहा और बताईये अनिरूद्ध ने कहा कि आपकी पत्नी बहुत अच्छी हैं। अगस्त्य हंसने लगा और कहा कि इसकी तारीफ आजतक मैनें दूसरों से ही सुनी हैं अनिरूद्ध ने कहा लेकिन आपकी तारीफ मैंने सिर्फ इन्हीं से सुनी है। अगस्त्य ने कहा देखिये हमे जल्दी जाना था वो तो गार्गी ने इतनी जिद की थी आपसे मिलाने की इसीलिए हम यहां पर आयें हैं, हमने और गार्गी ने तय किया था कि हमारे पास 15 मिनट हैं पहले 5 मिनट हम और आप बात करेंगें बाकी के 10 मिनट आप और गार्गी बात करेंगे। इसलिए मैं कार में बैठा हूं आप गार्गी से बात कर लीजिए, अनिरूद्ध ने कहा लगता है आप साइंस इस्ट्रीम से है अगस्त्य ने कहा ये तो मैने आज तक गार्गी को नहीं बताया आपको कैसे पता, छोडि़ये समय कम है। अगस्त्य जाकर गाड़ी में बैठ गया। गार्गी खड़ी थी अनिरूद्ध ने कुछ नहीं बोला गार्गी ने कहा हम जा रहें है, कुछ बोलेंगें नहीं। अनिरूद्ध ने कहा मौसम कैसा है? दोनों हंसने लगे। गार्गी बोली सोच रहे थे जाते समय आपसे बहुत बातें करेंगे पर अभी कुछ समझ में नहीं आ रहा है। अनिरूद्ध ने कहा मेरी शर्ट धुल गयी हो तो दे दीजिए।गार्गी कही कोशिश करेंगे। फिर गार्गी ने एक सिगरेट निकाला और पहली बार बिना किसी और जेब को देखे सीधे जींस की सामने वाली दायीं जेब से लाईटर निकाला और सिगरेट जलाई। तभी तक पीछे से अगस्त्य गाड़ी का हार्न बजाने लगा,गार्गी कही टाइम हो गया अब जाना होगा। अनिरूद्ध ने कहा नमस्ते। गार्गी हंसी और चली गयी। अनिरूद्ध खड़ा रहा। गाड़ी स्टार्ट हुयी और चली गयी।गाड़ी दूर तक एक सीधी रेखा में जाती रही और पीछे धूल उड़ाती रही। फिर अनिरूद्ध के मोबाईल उसके दोस्त का एक काल आया उसने बोला आइये भाई चाय पीया जाए अनिरूद्ध बोला चाय पीने से लोग काले हो जाते हैं। अच्छा रूको आते हैं।

 

सक्षम द्विवेदी

रिसर्च ऑन इंडियन डायस्पोरा। महात्मा गांधी इन्टरनेशनल यूनिवर्सिटी। वर्धा; महाराष्ट्र ।

20 दिलकुशा पार्क न्यू कटरा इलाहाबाद; मो0 7588107164।

 

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रचनाकार: गुबार देखते रहे / कहानी / सक्षम द्विवेदी
गुबार देखते रहे / कहानी / सक्षम द्विवेदी
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