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दिखावे के ही हैं ये आईटी एक्सपर्ट - डॉ. दीपक आचार्य

दिखावे के ही हैं

ये आईटी एक्सपर्ट

- डॉ. दीपक आचार्य

9413306044

dr.deepakaacharya@gmail.com

 

जब से कम्प्यूटर और संचार क्रान्ति का युग आया है तभी से उन सभी लोगों में दिखावे की नई कल्चर पनपने लगी है जो दिखावों में ही विश्वास रखते हैं और दिखावों के सहारे ही जिन्दगी को आगे बढ़ाते रहने के आदी हो गए हैं। 

कम्प्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी की तमाम विधाएं आज के जमाने की नितान्त आवश्यकता है और इसी के सहारे विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए जा सकते हैं।

जो लोग इसका प्रयोग कर रहे हैं वे लाभ प्राप्त कर रहे हैं और समाज तथा देश के लिए भी उपयोगी बने हुए हैं।

हम सभी को इस ज्ञान और व्यवहार का लाभ लेना चाहिए। आज के जमाने में कर्मयोग में सफलता पाने और व्यक्तित्व विकास के लिए कम्प्यूटर और नेटवर्किंग अत्यन्त आवश्यक है।

इस मायने में अब साक्षरता के प्रतिमान बदल गए हैं। अब वो हर इंसान निरक्षर कहा जाता है जो कम्प्यूटर का ज्ञान नहीं रखता।

वर्तमान में एक पीढ़ी ऎसी भी है जो कम्प्यूटर संचालन,टाईपिंग, नेटवर्किंग आदि तमाम प्रकार की गतिविधियों के मामले में निरक्षर है अथवा कामचलाऊ बनी हुई है।

ये लोग अपने आपको कम्प्यूटर एवं नेटवर्किंग एक्सपर्ट दर्शाने के लिए अपनी टेबल पर वे सारे अत्याधुनिक संसाधनों को स्थापित करने में पीछे नहीं रहते जो उन्हें आधुनिक कहलाने में मदद करते हों ताकि उन्हें लोग अनभिज्ञ न कहेंं।

इस प्रजाति में सरकारी, गैर सरकारी, आधे और आंशिक सरकारी तथा निजी काम-धंधे वाले लोग भी शामिल हैं जो अपनी बैठक पर कम्प्यूटर और इससे संबंधित उपकरणों को सजा कर रखते हैं और यह भ्रम बनाए रखते हैं कि उन्हें सब कुछ आता है।

यह दिगर बात है कि उनके आस-पास वाले और साथ काम करने वाले सारे लोग यह अच्छी तरह समझते हैं कि ये लोग कितने पानी में हैं।

इन लोगों से कोई काम नहीं होता, न टाईप जानते हैं न ई मेल करना, बाकी के कामों की तो बात ही क्या करेंं। लेकिन चाहते हैं कि उनका चैम्बर ऎसा लगे जैसे कि आईटी के एक्सपर्ट हों। इनमें भी थोड़ा-बहुत जानकारी रखने वाले लोग ताश-गेम्स खेलेंगे, पिक्चरें और दूसरी तरह के मन लुभावन दृश्यों को देखेंगे अथवा गाने, फिल्मी गीत और भजन, शायरियां सुनते रहेेंगे।

या फिर उन लोगों से चेटिंग करते रहेेंगे जो इनके ही जैसे दिखाऊ, फालतू और टाईमपास हैं जिनके पास या तो कोई काम नहीं है अथवा काम करने में कोई रुचि नहीं है।

आजकल आदमी दिखावा ज्यादा करने लगा है। कोई काम भले न आए, दिखावा ऎसा करता है जैसे कि उसे सब कुछ आता है।

जब कोई सा काम इन लोगों के माथे ही आ पड़ता है तब बगले झाँकने लगते हैं और उन लोगों की मिन्नतें करने लगते हैं जो कि इन कामोें में दक्ष हुआ करते हैं। 

अपने आपको आईटी एक्सपर्ट के रूप में दर्शाने का यह अभिनय करने वाले आजकल हर जगह आसानी से दिखने को मिल जाते हैं जिन्हें कोई काम-धाम नहीं आता है मगर आधुनिक संसाधन और उपकरणों से लैस ऎसे रहेंगे जैसे कि उनके मुकाबले का कोई एक्सपर्ट या कर्मयोगी कोई दूसरा हो ही नहीं।

इनकी असलियत जानकर इनके संसाधन छीनने के प्रयास शुरू होते ही ये लोग इस तरह हायतौबा मचाने लग जाते हैं जैसे कि अश्वत्थामा के सर से मणि छीन ली जा रही हो।

संसाधनों के मामले में शाश्वत सत्य यही है कि जिन लोगों को काम नहीं आता, जो मेहनत करना नहीं चाहते, जिन्हें वर्तमान जमाने की रफ्तार से कोई सरोकार नहीं है, ऎसे निकम्मे, कामचलाऊ और टाईमपास लोगों के पास संसाधनों की भरपूर उपलब्धता है और जो लोग वाकई काम करने वाले हैं उनमें से बहुत से ऎसे मिल जाएंगे जो इन संसाधनों से वंचित हैं और इसी कारण से उनके कर्मयोग का गुलाब या कमल पूरी तरह खिल नहीं पा रहा है। 

सत्य को जानें, दिखावा न करें। जो लोग जिस किसी काम में दिखावा करते हैं  उन लोगों को वह काम दें जिसके बारे में वे दक्ष होने की डींगे हाँकते हैं।

इसके लिए इन लोगों को स्वतंत्र रूप से कोई सा काम सौंपें और फिर देखें इनकी दक्षता का कमाल। अपने आप दूध का दूध और पानी का पानी हो ही जाएगा। 

नए जमाने की दक्षताओं को जानें, सीखें और उपयोग करें। दिखावा करने वाले लोग लम्बी पारी नहीं खेल सकते, कभी न कभी तो भाण्डा फूटना ही है। आज नहीं तो कल यह नौबत आएगी ही। वही दिखें-दिखाएं, जो हैं।

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