रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

प्राची - जनवरी 2016 - एक टोकरी भर मिट्टी / कहानी / माधवराव सप्रे

image_thumb[1]_thumb_thumb

 

 

image_thumb

 

एक टोकरी भर मिट्टी

माधवराव सप्रे

किसी श्रीमान जमींदार के महल के पास एक गरीब अनाथ विधवा की झोंपड़ी थी. जमींदार साहब को अपने महल का हाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई. विधवा से बहुतेरा कहा कि अपनी झोंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई जमाने से वहीं बसी थी. उसका प्रिय पति और एकलौता पुत्र भी उसी झोंपड़ी में मर गया था. पतोहू भी एक पांच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी. जब यही उसकी पोती इस वृद्धापकाल में एक मात्र आधार थी. जब कभी उसे अपनी पूर्वस्थिाति की याद आ जाती, तो मारे दुःख के फूट-फूट कर रोने लगती थी, और जब से उसने अपने श्रीमान पड़ोसी की इच्छा का हाल सुना, तब से तो वह मृतप्राय हो गई थी. उस झोंपड़ी में उसका ऐसा कुछ मन लग गया था कि बिना मरे यहां से वह निकलना ही नहीं चाहती थी. श्रीमान के सब प्रयत्न निष्फल हुए, तब वे अपनी जमींदारी चाल चलने लगे. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया और विधवा को वहां से निकाल दिया. बिचारी अनाथ तो थी ही. पांड़ा-पड़ोस में कहीं जाकर रहने लगी.

एक दिन श्रीमान उस झोपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और लोगों को काम बतला रहे थे कि इतने में वह विधवा हाथ में एक टोकरी लेकर वहां पहुंची. श्रीमान ने उसको देखते ही अपने नौकरों से कहा कि उसे यहां से हटा दो. पर वह गिडगिड़ा कर बोली कि ‘‘महाराज! अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है. मैं उसे लेने नहीं आई हूं. महाराज छिमा करें तो एक विनती है.’’

जमींदार के सिर हिलाने पर उसने कहा कि ‘‘जबसे यह झोंपड़ी छूटी है, तब से पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है. मैंने बहुत कुछ समझाया, पर एक नहीं मानती. कहा करती है कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊंगी. अब मैंने सोचा है कि इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊंगी. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी. महाराज कृपा करके आज्ञा दीजिए तो इस टोकरी में मिट्टी ले जाऊं.’’ श्रीमान ने आज्ञा दे दी.

विधवा झोंपड़ी के भीतर गई. वहां जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और आंखों से आंसू की धारा बहने लगी. अपने आंतरिक दुःख को किसी तरह संभाल कर उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और हाथ से उठाकर बाहर ले आई. फिर हाथ जोड़कर श्रीमान से प्रार्थना करने लगी कि ‘‘महाराज कृपा करके इस टोकरी को जरा हाथ लगाएं जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूं.’’ जमींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई. किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े. ज्योंही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे, त्योंही देखा कि यह काम उनकी शक्ति से बाहर है. फिर तो उन्होंने अपनी सब ताकत लगाकर टोकरी को उठाना चाहा, पर जिस स्थान में टोकरी रखी थी, वहां से वह एक हाथ भी ऊंची न हुई. तब लज्जित होकर कहने लगी कि ‘‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी.’’

यह सुनकर विधवा ने कहा, ‘‘महाराज! नाराज न हों. आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियां मिट्टी पड़ी है. उसका भार आप जनम भर क्यों कर उठा सकेंगे. आप ही इस बात का विचार कीजिए.’’

जमींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे, पर विधवा के उपरोक्त वचन सुनते ही उनकी आंखें खुल गईं. कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने विधवा से क्षमा मांगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी.

विषय:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

रचनाकार में ढूंढें...

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][column1]

बाल कथाएँ

[बाल कथा][column1]

लोककथाएँ

[लोककथा][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget