रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

प्राची - जनवरी 2016 - प्रायश्चित / लघुकथा / राजेश माहेश्वरी

image_thumb[1]_thumb_thumb_thumb_thumb_thumb_thumb_thumb

 

प्रायश्चित

राजेश माहेश्वरी

बलपुर के पास नर्मदा नदी के किनारे स्थित गौरीघाट नामक कस्बे में एक गरीब महिला भिक्षा मांगकर अपना जीवन यापन करती थी. एक दिन वह बीमार हो गई. किसी दयावान व्यक्ति ने उसे इलाज के लिए 500 रुपये का नोट देकर कहा,‘‘माई इससे दवा खरीद कर खा लेना.’’ वह भी उसे आशीर्वाद देती हुई अपने घर की ओर बढ़ गई.

अंधेरा घिरने लगा था. रास्ते में एक सुनसान स्थान पर दो लड़के शराब पीकर उधम मचा रहे थे. वहां पहुचने पर उन लड़कों ने भिक्षापात्र में 500 रुपये का नोट देखकर शरारतवश पैसा अपने जेब में डाल लिया. महिला को आभास तो हो गया था पर वह कुछ बोली नहीं और चुपचाप अपने घर की ओर चली गई.

रात में उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और दवा के अभाव में उसकी मृत्यु हो गई. सुबह होने पर दोनों शरारती लड़के नशा उतर जाने पर अपनी हरकत के लिए शर्मिंदा महसूस कर रहे थे. वे शाम को उस भिखारिन को रुपये देने के लिए इंतजार कर रहे थे. जब वह नियत समय पर नहीं आयी तो वे पता पूछकर उसके घर पहुंचे. वहां उन्हें पता चला कि दवा न खरीद पाने के कारण वृद्धा की मृत्यु हो गई थी. यह सुनकर वे स्तब्ध रह गये. उनकी एक शरारत ने वृद्धा की जान ले ली थी. उनके मन में स्वयं के प्रति घृणा और अपराधबोध का आभास होने लगा.

प्रायश्चित स्वरूप उन दोनों लड़कों ने कभी भी शराब न पीने की कसम खाई और शरारतपूर्ण गतिविधियों को भी बंद कर दिया.

वृद्धा के लिए तो वह कुछ नहीं कर सकते थे, परन्तु उन्होंने अपना जीवन सुधार लिया.

संपर्कः 106, रामपुर, जबलपुर (म.प्र.)

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget