रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

प्राची - फरवरी 2016 - कहानी / जाल / जवाहर सिंह

SHARE:

  कहानी जाल जवाहर सिंह ब ड़े बाबू ने प्रखंड विकास कार्यालय में जैसे ही कदम रखा, सहकर्मियों की आठ जोड़ी प्रश्नाकुल आंखें उनके चेहरे पर घु...

 

कहानी

जाल

जवाहर सिंह

ड़े बाबू ने प्रखंड विकास कार्यालय में जैसे ही कदम रखा, सहकर्मियों की आठ जोड़ी प्रश्नाकुल आंखें उनके चेहरे पर घुघचियों की तरह टंग गई. रामविलास चपरासी ने तुरंत उनके हाथ से छाता लेकर अलमारी के पीछे कोने में रख लिया. शिवलाल चपरासी उनकी मेज के ड्राइवर से स्टील वाला उनका स्पेशल गिलास निकालकर ताजा और ठंडा पानी लाने के लिए कुएं की ओर दौड़ा.

हालनुमा कमरे में रखी आठ मेज और आठ कुर्सियों से चिपके आठ बाबुओं की सोलह आंखें अलग-अलग कोणों और भिन्न-भिन्न दूरियों से लगातार उनके चेहरे पर एक्स-रे किरणें फेंककर उसमें छिपी वास्तविकता का पता लगाने में व्यस्त थीं. जिस वास्तविकता की तलाश में ये जिज्ञासु आंखें बड़े बाबू के चेहरे पर उगी खिचड़ी दाढ़ी की खूंटियों की आधी-आधी इंच लंबी नोक वाले जंगल में भटकते-भटकते लहू-लुहान हो रहीं थीं, वह आज आने वाले नये बी.डी.ओ. साहब से संबंधित थीं. इस ब्लाक के पुराने बी.डी.ओ. की बदली हो गई थी और आज कोई नए बी.डी.ओ. साहब आने वाले थे. बड़े बाबू उन्हीं को रिसीव करने के लिए रेलवे स्टेशन गए और अभी-अभी लौटे थे. नये साहब को सीधे उनके क्वार्टर में पहुंचाकर आज आराम करने की सलाह देकर बड़े बाबू कार्यालय में आ गए थे और अपनी स्वाभाविक प्रक्रिया में पान चभुलाते हुए निश्चिंत भाव से कुर्सी के पीछे सिर टेके आंखें बंद कर आराम फरमा रहे थे.

कार्यालय के हर आदमी की आंखों में एक ही प्रश्न था-नये साहब कैसे हैं...? और इस प्रश्न का कोई उत्तर फिलहाल बड़े बाबू के चेहरे से टपक नहीं रहा था. वह कुर्सी पर उठंगे हुए आंखें बंद कर परम निश्ंिचत भाव से पान की जुगाली कर रहे थे और अपने चेहरे पर चींटियों की तरह रेंगती उन आठ जोड़ी आंखों से उत्पन्न गुदगुदी की सुखात्मक अनुभूति को पान के तंबाकू के साथ घुलाकर पीक बना रहे थे.

बड़े बाबू की यह पुरानी आदत है. जब भी कोई ऐसी बात होती है, जिससे उनकी अहमियत पूरे आंफिस के सिर पर तनी-सी दिखाई देने लगती है, वह उसका बोध अपनी दीर्घ खामोशी और ओढ़ी हुई गम्भीरता से कराने लगते हैं. ऐसे अवसरों पर वह अपने चेहरे पर भीतर की खुशी के पके फोड़े के फूटकर मवाद की तरह अपने आप बहकर निकल आई मुस्कान को पान में पड़े सुपाड़ी के टुकड़ों की तरह दांतों से कुचल-कुचलकर धीरे-धीरे लुगदी बनाते हैं और जब उनका जबड़ा भर जाता है तो एक ही बार घोड़े की तरह फुर्रर्र...करके थूक देते हैं. इसके बाद ही उनके मुंह से कोई बात निकलती है.

उनका पूरा स्टाफ बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहा था कि कब वह होंठों की मुस्कान को पान-सुपाड़ी की पीक के साथ थूककर अपना थोबड़ा खाली करेंगे. लेकिन आज का पान शायद ज्यादा जायकेदार था या उन्हें जो बात कहनी थी वह अधिक वजनदार थी. वह लगातार चभुलाए जा रहे थे....चभुलाए जा रहे थे. थूकने का नाम ही नहीं ले रहे थे. अंत में नाजिर बाबू के सब्र की डोरी तने-तने यक-ब-यक पटाक से टूट गई. उन्होंने दोनों हाथ के पंजे एक-दूसरे से बांधकर एक बार जोर से जमुहाई ली और रामरतन चपरासी से बोले-‘‘अरे रामरतन, पंखे की स्पीड थोड़ा और तेज कर दो और दौड़कर बाजार से थोड़ा बर्फ-वर्फ लाओ...लगता है, बड़े बाबू को लू लग गई है...जीप में चलने से लू कुछ ज्यादा ही लगती है.’’

वातावरण का तनाव कुछ ढीला पड़ गया. बड़े बाबू के अतिरिक्त अन्य सारे चेहरों में थोड़ी ताजगी-सी आ गई...कई होंठ फड़फड़ाए और मुस्कराने के लिए फैल गए.

बड़े बाबू तब तक पान-सुपाड़ी को कुचलकर लुगदी बना चुके थे. अब कुछ बोलना आवश्यक हो गया था, इसलिए उन्होंने अपनी बगलवाली खिड़की की ओर मुंह फेरकर पच्च से थूक दिया. अपने सहयोगियों की ओर देखकर थोड़ी देर तक वह मंद-मंद मुस्कराते रहे. फिर शायद गंभीरता कुछ कम नहीं, अब बोल ही देना चाहिए. मेज पर रखे गिलास में एक घूंट पानी पीकर अपनी मूंछों की झाड़ी के बीच से मुस्कान की टहकार चांदनी बिखेरते हुए बोले-‘‘अरे भाई, अपना बी.डी.ओ. तो एकदम लौंडा है...चिरौंटा लगता है. सीधे कॉलेज से निकलकर आ गया है. मैंने अपना परिचय दिया तो मुझसे पहले उन्होंने ही हाथ जोड़ दिए. और जानते हैं मिसिर जी, सामान के नाम पर एक पुरानी दरी में लपेटा हुए डेढ़ पाव का एक बिछावन और वही पिचकी हुई अटैची-बस. लगता है जैसे धर्मशाले में टिकने के लिए आए हैं.’’

‘‘साहब का स्वभाव कैसा है, बड़े बाबू...?’’ सप्लाई इंस्पेक्टर वर्मा जी ने बहुत देर से इस सवाल को मुंह में चबाते-चबाते आखिर थूक ही दिया, ‘‘असली चीज है आफिसर का स्वभाव...उमर से क्या होता है, छोटी मिर्चाई देखने में छोटी होती है, एक बार जीभ से सट जाए तो पानी पिलाकर छोड़ती है.’’

वर्मा जी ने कई कोटेदारों और दुकानदारों से चीनी और सीमेंट दिलवाने के लिए एडवांस ले रखा था. पहले वाला बी.डी.ओ. बहुत घाघ था. इनकी नकेल अपने ही हाथों में रखता था. और स्वयं ही दुकानदारों से लेन-देन का मामला तय कर लेता था. इसीलिए वर्मा जी को नये बी.डी.ओ. के स्वभाव की चिंता बहुत सता रही थी. बड़े बाबू की बातों से उनका मन तो हल्का हो गया था फिर भी नये साहब के स्वभाव की जानकारी के बिना चिंता मुक्त नहीं हुआ जा सकता था.

बड़े बाबू इस बार मुस्कराए नहीं, खुलकर हंसे, एकदम रामलीला वाले की-सी हंसी-‘‘अरे वर्मा जी, आप मिर्चाई खाने का मेथेड ही नहीं जानते, इसीलिए पानी पीना पड़ता है. उसे तेल में भून लीजिए या फिर नमक के साथ खाइए, देखिए उसका सारा तीखापन कपूर की तरह उड़ जाता है. एक से एक धाकड़ और तेज-तर्रार आफिसरों को मैंने इसी उंगली पर चक्र सुदर्शन की तरह नचाया है. साहब तो साहब उनकी मेमें भी मेरे इशारे पर उठती-बैठती थीं. मुखर्जी साहब एस.डी.ओ. का नाम तो आप ने सुना ही होगा, उनके डर से एस.डी.ओ. कोर्ट के आगे वाले पीपल के पत्ते तक भी हिलना भूल चुके थे. और उन्हीं को ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया कि एक दिन सीधे मेरे पांव पर आ गिरे. गिड़गिड़ाकर बोले-‘‘पाठक बाबू, मेरी गलती माफ कर दीजिए, हमने आपको पहचाना नहीं...अब आपकी शरण में हूं.’’ इसलिए कहता हूं आदमी को काम करने कराने का मेथेड जानना चाहिए. बिना मेथेड के मिर्चाई क्या, प्याज भी खाइएगा तो पानी पीने की जरूरत पड़ जाएगी.

‘‘अब हर कोई धर्मदेव पाठक तो नहीं बन सकता, बड़े बाबू. हम लोग तो अभी आपके शागिर्द बनने की भी लियाकत नहीं रखते.’’ वर्मा जी ने मक्खन के बदले मोबिल लगाना ही उचित समझा.

बड़े बाबू फिसले और फिसलते-फिसलते ही बोल गए-‘‘ले आइए सप्लाई वाली अपनी फाइल, एक छोटा-सा चक्रव्यूह रच देता हूं. अपनी मां के पेट से भी चक्रव्यूह भेदन की कला सीखकर आए होंगे तो भी अंत तक जाते जाते साहब कहीं फंस नहीं गए तो मेरे नाम पर कुत्ता पाल लीजिएगा. लेकिन पहले परसेंटेज तय कर लीजिए.’’

‘‘आपकी जो मर्जी, बड़े बाबू! लड़की की शादी है, इसीलिए थोड़ी परेशानी है...अन्यथा.’’ वर्मा जी पालक के साग की तरह गलते चले गए.

‘‘बड़े बाबू, कुछ मेरा भी ख्याल कीजिए, डेढ़ साल हो गया इस टेबुल पर रिसीव-डिसपैच करते हुए. पान-बीड़ी पर भी आफत है. नये साहब से कहकर अगर रेवेन्यू सेक्शन में डलवा देते तो बड़ी मेहरबानी होती.’’ रिसीव-डिस्पैच क्लर्क गिरधारी लाल काफी देर से मौके की तलाश में थे. मौका मिलते ही उन्होंने भीतर जमा सारा बलगम खखारकर फेंक दिया.

बड़े बाबू ने उनकी ओर बिना देखे ही लोहे पर हथौड़ा मारने जैसी आवाज में कहा-‘‘कंबल ओढ़कर जब घी पी रहे थे तब तो बड़े बाबू की याद नहीं आई और जब अपच के मारे उल्टी-डकार आने लगी तब पाचन के लिए बड़े बाबू की गुहार लगा रहे हैं. अभी छः महीने तक इसी टेबुल पर बैठकर लेफ्ट-राइट कीजिए. पुराने बी.डी.ओ. साहब आपका सी.आर.पंक्चर कर गए हैं, इसका भी कुछ पता है या नहीं...’’

गिरधारी लाल जी के अंतःकरण से तीन बार ‘‘प्रभु हो...प्रभु हो...प्रभु हो...’ की आर्त पुकार उठी और पूरे कमरे में क्षण भर के लिए पवित्र आध्यात्मिक वातावरण छा गया.

बी.डी.ओ. साहब अपने क्वार्टर के बरामदे में उदास बैठे थे. बड़े बाबू ने दूर से ही झुककर सलाम ठोंका और बगल वाली कुर्सी पर बैठते हुए बोले-‘‘हुजूर, अब तो रास्ते की थकावट दूर हो गई होगी...कुछ चाय-वाय पी कि नहीं?’’

‘‘नहीं, अभी तो सोकर उठा ही हूं...यहां तो चाय की कोई दुकान भी नजदीक में दिखाई नहीं देती...’’

‘‘क्यों, शिवरतन चपरासी क्या आपके लिए चाय-नाश्ता लेकर नहीं आया? मैंने उसे एक घंटा पहले ही कह दिया था कि साहब जग जाएं तो उनके लिए चाय-नाश्ता ला देना.’’ बड़े बाबू ने चिंतित स्वर में कहा-‘‘यह शिवरतन भी एक हरामी है. पहले वाले साहब ने इसे सिर चढ़ा रखा था, इसीलिए थोड़ा घमंडी बन गया है. मैं अभी किसी को चाय के लिए दौड़ाता हूं...’’

वह उठने लगे तो बी.डी.ओ. साहब ने रोक दिया-‘‘बैठिए-बैठिए पाठक जी, चाय तो बाद में भी पी लेंगे...आप से कुछ जरूरी बातें करनी हैं. आपको मैंने रास्ते में ही बतला दिया था कि अभी मेरी शादी नहीं हुई है, इसीलिए परिवार रखने का कोई सवाल ही नहीं है. मेरे लिए आप एक नौकर की व्यवस्था जल्दी कर दीजिए जो खाना बना दे और घर के अन्य काम कर दे.’’

‘‘आप भी हुजूर, खूब आदमी हैं. कार्यालय में सात-सात चपरासी हैं और आप पैसे देकर प्राइवेट नौकरी रखेंगे? आखिर वे सब किस काम आएंगे...?’’

‘‘अरे भई, वे सरकारी नौकर हैं, दफ्तर के काम के लिए...उनसे मैं अपना व्यक्तिगत काम क्यों कराऊं...?’’

‘‘आप भी हुजूर, हद करते हैं. वे सरकारी नौकर हैं और आप सरकार हैं, इसलिए आपका काम सरकारी हुआ कि नहीं. इसमें प्राइवेट और सरकारी क्या. एक-एक महीना की ड्यूटी लगा देंगे. पहले वाले साहब के यहां तो पांच-पांच की ड्यूटी रोज लगती थी. कोई सब्जी लाता, कोई कपड़े धोता, कोई उनके बच्चों को खाना खिलाता, कोई रसोईं बनाता तो कोई झाडू-बुहारी करता.’’

‘‘यह सब मुझसे नहीं होगा.’’ बी.डी.ओ. साहब सख्ती से बोले-‘‘जब तक नौकर नहीं मिलता, तब तक किसी होटल में खा लिया करूंगा या स्वयं ही कोई इंतजाम कर लूंगा. आप केवल इतना कीजिए कि ये पैसे लीजिए और कुछ जरूरी बर्तन तथा खाने-पीने का सामान बाजार से किसी से मंगवा दीजिए.’’

‘‘ऐसा कीजिए हुजूर कि यह जो आपके पैरों के पास नीचे चप्पल पड़ी हुई है, उसे उठाकर मेरे सिर पर सरासर जमा दीजिए और मेरी गर्दन में हाथ लगाकर बरामदे के बाहर धकेल दीजिए.’’ और बड़े बाबू ने सचमुच अपना सिर नीचे झुका दिया.

बी.डी.ओ. साहब हक्के-बक्के से उनकी ओर देखते रह गए. थोड़ा संभल-कर बोले-‘‘यह क्या कर रहे हैं बड़े बाबू...आप बुजुर्ग आदमी...आप के लड़के की उम्र का हूं मैं तो...’’

‘‘मैं बिल्कुल ठीक कह रहा हूं, हुजूर...!’’ बड़े बाबू एक लंबी सांस लेकर बोले, ‘‘मेरे रहते हुजूर अपने हाथ से खाना बनाकर खाएं या होटल में भोजन करने जाएं, इससे बढ़कर मेरा अपमान क्या हेागा...! आज आपको मुझ गरीब के घर भोजन करना होगा और कल से मेरी बड़ी बेटी सुनीता यहां आकर आपका भोजन बना देगी. सत्रह-अठारह साल की है, खूब अच्छा खाना बनाती है. मैं जाकर बाजार से सारा सामान ले आता हूं. आप लिस्ट बना दें, बस.’’

‘‘यह तो आपकी कृपा है, बड़े बाबू...’’ बी.डी. ओ. साहब अभिभूत स्वर में बोले, ‘‘लड़की को क्यों कष्ट देंगे, एक नौकर ही तलाश दें. और सामान की लिस्ट भी आप ही तैयार कर लें, मुझे अभी इन सब चीजों का कोई अनुभव नहीं है कि क्या-क्या लगेगा. हां, लिस्ट अभी छोटी ही रखेंगे, केवल बहुत जरूरी चीजें. अभी मेरे पास यही कुल सौ-डेढ़ सौ रुपये हैं...वेतन मिलने के बाद देखा जाएगा. ये पैसे ले लीजिए.’’

लेकिन बड़े बाबू तब तक उठकर चल चुके थे. चलते-चलते ही बोले, ‘‘पैसे की फिकर मत कीजिए हुजूर, सब हो जाएगा...सब.’’

डेढ़-दो घंटे में एक घोड़ा गाड़ी पर ढेर सारा सामान लदवाए वह लौटे. बाहर से ही बोले-‘‘लीजिए हुजूर, जम गई आप की गृहस्थी. भगवान ने चाहा तो गृहस्थी में रही-सही कमी भी जल्दी ही पूरी हो जाएगी. कहा गया है कि बिन घरनी घर भूत का डेरा...’’ और वह मुक्त कंठ से हंसे.

सामान उतारकर अंदर रखने जाने लगे. एक बोरा चावल, एक बोरा गेहूं, डालडा, चीनी, तेल, बिजली का चूल्हा, स्टेनलैस स्टील के ढेरों बर्तन और बहुत सारी चीजों का पैकेट, गद्दा, चादरें और तकिए भी.

बी.डी.ओ. साहब आश्चर्य से अांखें फाड़े देखते रहे. उनके मुंह में से कोई आवाज ही नहीं निकल पा रही थी. उन्होंने मन ही मन अनुमान लगाया, हजार रुपये से ऊपर के सामान होंगे, अर्थात लगभग दो महीने के उनके वेतन का वारा-न्यारा हो चुका.

बड़े बाबू लिस्ट पढ़कर उन्हें एक-एक सामान दिखाते जा रहे थे-‘‘हुजूर ये रहे सुबह के लिए आपके नास्ते का सामान काजू, पिस्ता और अंडे के साथ सुबह की चाय. आफिस जाने से पहले कचौड़ी, पराठे या हलुआ के साथ दूध और बौर्नबीटा, फिर लंच में जैसा आप चाहें. अपने आफिस के चौकीदार के पास दो गायें हैं. वह एक किलो दूध सुबह दे जाया करेगा. जमीर मियां से दो अंडे रोज सुबह देने के लिए बोल आया हूं, बर्तन वगैरह साफ करने का काम उसी चौकीदार की बीबी कर देगी और मेरी सुनीता आपके लिए खाना बना देगी.’’

लेकिन बी.डी.ओ. साहब न तो बड़े बाबू की बातें सुन रहे थे और न सामने फैले सामानों को देख रहे थे. उनकी आंखों के सामने घर से चलते समय बस स्टैंड पर विदा अपने पिता का चेहरा विभिन्न प्रोफाइलों में नाच रहा था,...खुशी...स्नेह...उत्साह...करुणा...उदासी...डेढ़ सौ रुपये उसके हाथ में देते हुए पिता ने जिस बेबस दृष्टि से उसकी ओर देखा था, वह दृष्टि

सीधे उसके भीतर उतर गई थी. स्नेह बिगलित कंठ से बोले थे-‘‘नरेन, अब तो तुम साहब हो गए, लेकिन हम लोगों को कभी भूलना मत. हमारी क्या औकात थी तुम्हें इतना पढ़ाने-लिखाने और ऊंचा ओहदा दिलवाने की...सब भगवान की दया और तुम्हारे भाग्य से हुआ. मेरे पास बाप-दादा की दी हुई जो थोड़ी सी जमीन थी, वह सब दो-चार थान सोने-चांदी के गहने थे, वे भी समय-कुसमय के लिए मैंने नहीं बचाए. इस समय कोई उपाय न था तो पांच रुपये सैकड़े माहवारी ब्याज पर ये डेढ़ सौ रुपये मैंने संपत साहू से लिए हैं. दरमाहा मिलते ही अगले महीने ये रुपये भेज देना...और अधिक मैं क्या कहूं, तुम स्वयं समझदार हो. बस इतना ही जान लो कि तुम्हारे तीनों भाई-बहन हम बूढ़े-बूढ़ी का जीवन अब तुम्हारी ही दया पर निर्भर है. अपने शरीर का ख्याल रखना और भूलकर भी पाप की कमाई मत करना. पाप की कमाई में बरकत नहीं...’’ और उनकी आवाज बस के इंजन की घड़घड़ाहटों में कहीं खो गई थी. सामने रह गया था एक झुर्रियों वाला चेहरा, फटी बनियान के बीच में झांकती जर्जर काया...और कोटरों धंसी डबडबाई दो आंखें...

‘‘हुजूर यह एक बोरा गेहूं तो मैंने ग्राम पंचायत के प्रधान जी के घर से उठवाकर मंगवा लिया, ‘काम के बदले अनाज’ वाली योजना का माल है, पैसे थोड़े देने हैं.’’ बड़े बाबू ने शाबाशी लूटने के ख्याल से मुस्कुराते हुए बी.डी.ओ. साहब की ओर देखा. लेकिन साहब के चेहरे पर फैली उदासी देखकर वह सहसा अनुभवी चौंक गए. आंखों से साहब की उदासी का कारण छिपा नहीं रहा.

उन्होंने तुरंत पैंतरा बदल दिया-‘‘हुजूर, शायद यह सोचकर चिंतित हो रहे हैं कि मैंने बहुत खर्च दिए होंगे. आप खर्च की बात मन से निकाल दीजिए, सर! बाईस वर्ष हो गए इसी विभाग में काम करते हुए, पांच साल से तो इसी ब्लाक में हूं. मैं जानता हूं कि साहब लोग पैसा खर्च करके सामान लेना अपना अपमान समझते हैं. साहबों की सेवा में ही यह जिंदगी कटी है, हुजूर! आपको एक पैसा भी अपने पास से नहीं देना पड़ेगा हुजूर, सारा सामान सप्लाई इंस्पेक्टर वर्मा जी ने दुकानदारों से लिया है. वे उनसे समझ लेंगे. वर्मा जी भरते हैं. केवल बर्तन वाले को पैसे देने होंगे, वह कल नाजिर बाबू को देंगे...’’

‘‘कहां से देंगे...अपने बाप के घर से...?’’ बी.डी. ओ. साहब अब और अधिक अपने को जब्त नहीं कर सके और जोर से चीख पड़े.

‘‘नहीं हुजूर, अपने बाप के घर से यहां कौन देता है? कल प्राइमरी स्कूल के मास्टरों का वेतन दिवस है न! उसमें हर माह सात-आठ सौ रुपये आ जाते हैं. उसकी आधी रकम हुजूर की होती है, आधे में हम लोग सभी स्टाफ के लोग हैं.’’ बड़े बाबू घोड़े की तरह हिनहिनाये.

‘‘सात-आठ सौ कैसे आ जाते हैं?’’

‘‘हुजूर, मास्टर लोग खुशी-खुशी देते हैं. हम लोग उनकी सेवा करते हैं तो वे लोग भी हमारी सेवा करते हैं.’’

‘‘लेकिन अब यह सब नहीं चलेगा...’’ साहब तैश में बोले.

‘‘हुजूर, पूरे देश में चलता है...मिनिस्टर से लेकर कमिश्नर तक सब जगह चलता है. जनतंत्र में जनता से ही तो सब को जीना है, चाहे नेता हो या आफिसर या एक साधारण चपरासी. जो जनता की सेवा करेगा, वह क्या खाने के लिए अपने बाप के घर जायेगा. आप अभी नये हैं साब, धीरे-धीरे सब समझ जायेंगे....अच्छा मैं चलता हूं, सुनीता को भेज देता हूं, वह आपका सारा काम संभाल लेगी.’’ और बड़े बाबू मुस्कराते हुए कमरे के बाहर निकल गये.

बी.डी.ओ. साहब उनको बाहर जाते हुए देख रहे थे, चाहते हुए भी उनके कंठ से कोई स्वर नहीं फूटा.

अब कमरे में वह थे और सामने बेतरतीब फैला ढेर सारा सामान. कई क्षणों तक सहमी-सहमी नजर से वह उधर देखते रहे. उन्हें लगा, चोरी और लूट के मालों का उन्हें रक्षक और भक्षक बनाकर यहां बैठा दिया गया है...एक बड़ा-सा जाल फैला दिया गया है और उसमें दानें छींट दिये गये हैं...आकर्षक लुभावने दाने.

उन्हें दम घुटता-सा लगा. उन्होंने कपड़े बदले और क्वार्टर में ताला डालकर बाहर निकल गये...चलो, किसी फुटपाथी होटल में चाय पी लेंगे और किसी ढाबे में रात का भोजन कर लौटेंगे. अभी मुझे यहां पहचानता ही कौन है! रात में स्थिर मन से इन सारी समस्याओं पर सोचा जायेगा....

COMMENTS

BLOGGER

विज्ञापन

----
.... विज्ञापन ....

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$count=6$page=1$va=0$au=0

विज्ञापन --**--

|कथा-कहानी_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|लोककथाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=list$au=0$count=5$com=0$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3789,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2067,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1880,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्राची - फरवरी 2016 - कहानी / जाल / जवाहर सिंह
प्राची - फरवरी 2016 - कहानी / जाल / जवाहर सिंह
https://lh3.googleusercontent.com/-aD8sCqgKPb8/Vt0caJ5gsRI/AAAAAAAAsGI/s95R8QVUJ4M/image_thumb%25255B3%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-aD8sCqgKPb8/Vt0caJ5gsRI/AAAAAAAAsGI/s95R8QVUJ4M/s72-c/image_thumb%25255B3%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2016/03/2016_95.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2016/03/2016_95.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ