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जादुई बीज / बाल कहानी / मित्सुमासा एैनो

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जनवाचन आंदोलन

बाल पुस्तकमाला

भारत ज्ञान विज्ञान समिति

 

जादुई बीज

मित्सुमासा एैनो

 

यह कहानी जैक नाम के एक मस्तमौला इंसान की है। एक जादूगर उसे

दो जादुई बीज देता है। जैक एक को खाता है और फिर उसे साल भर

भूख नहीं लगती। दूसरे बीज को वो बो देता है। अगले साल फिर दो बीज

पैदा होते हैं। जैक एक को खाता है और दूसरे को बोता है। एक बार

जैक दोनों बीजों को एक-साथ बो देता है। यहीं से असली कहानी शुरू

होती है। गणित कहानी को आगे बढ़ाती है या कहानी गणित को, इसका

निर्णय आप खुद करें। दुनिया की एक महान कृति।

 

हिन्दी अनुवादः अरविन्द गुप्ता

 

बूढ़े ने जैक को 2 सुनहरे बीज दिए। "यह बीज जादुई हैं," उसने

कहा। "एक बीज को आग में भून कर खा लेना। उसके बाद तुम्हें पूरे

एक साल तक भूख नहीं लगेगी। दूसरे बीज को मिट्टी में बो देना और

उसकी संभाल कर हिफाजत करना। वो बीज उगेगा और पतझड़ के

समय उसमें से दो जादुई बीज दुबारा पैदा होंगे।"

 

सर्दियों का मौसम था। जैक नामका एक मस्तमौला आदमी सड़क

पर चला जा रहा था। उसे काफी भूख लगी थी। तभी अचानक उसे एक

ऐसा बूढ़ा आदमी मिला जिसे उसने पहले कभी नहीं देखा था। बूढ़े

आदमी के एक हाथ में लकड़ी की मोटी लाठी थी और दूसरे हाथ में

2 बड़े सुनहरे बीज थे। "मैं एक जादूगर हूं" बूढ़े आदमी ने कहा, "और

यह बीज तुम्हारे लिए हैं …

 

जैक ने जादूगर के बताए अनुसार

ही किया।

 

अगली वसंत बीज में अंकुर फूटा। बड़े

होकर वो एक बड़ा पौधा बना।

 

सर्दियों में जैक ने फिर एक बीज को भूनकर खाया

और दूसरे को जमीन में बो दिया।

गर्मियों में उस पौधे में दो सुंदर फूल खिले। कुछ

समय बाद फूलों की जगह दो फल उग आए।

पतझड़ में उन 2 फलों में से 2 सुंदर सुनहरे बीज

निकले - बिल्कुल वैसे ही जैसे जादूगर ने दिए थे।

फिर गर्मी आई। पौधे में दो सुंदर फूल खिले, जो बाद

में दो खूबसूरत फलों में बदल गए।

पहले की तरह फिर वसंत आई। और

जहां जैक ने बीज बोया था वहां एक छोटा

पौधा निकल आया।

 

उसके अगले साल भी एक पौधा उगा, उसमें 2 फूल लगे, जो दो

सुंदर फलों में बदले और उनसे 2 सुनहरे जादुई बीज पैदा हुए।

अगले वर्ष भी पिछले साल जैसे ही फूल खिले, फल लगे और

उनसे 2 बीज निकले। जाड़ों में जैक ने दुबारा से एक बीज को भूना और

दूसरे को जमीन में बो दिया।

 

पतझड़ आई। और दुबारा उन फलों में से 2 सुनहरे बीज निकले।

सर्दियों में जैक ने फिर एक बीज को भूनकर खाया और दूसरे को

जमीन में बो दिया।

 

अगले साल भी जैक आराम से बैठा देखता रहा। दुबारा फिर एक

पौधा उगा, उसमें फूल खिले, फल लगे और उसमें से 2 बीज निकले।

पहले जैसे ही जैक ने एक बीज खाया और दूसरा जमीन में बो दिया।

उसके अगले साल भी वही बात हुई। फिर एक पौधा उगा, उसमें

फूल खिले, फल लगे और उसमें से 2 बीज निकले। पहले जैसे ही जैक

ने एक बीज खाया और दूसरा जमीन में बो दिया।

 

पर इस सबने जैक को सोचने पर मजबूर किया। "हर साल वही

बात हो रही है। इस तरह कब तक चलेगा?" उसने खुद से पूछा, "इस

साल मैं बीज खाऊंगा नहीं और दोनों बीजों को बो दूंगा।"

"मैं सर्दियों में इधर-उधर से कुछ जुगाड़ करके

अपना पेट भर लूंगा।" फिर जाड़े के मौसम में जैक

ने दोनों बीजों को बो दिया। उसने काफी मेहनत से

उनकी देखभाल की।

 

अगले साल - यह पहला साल था जब उसने

दोनों बीजों को एक साथ बोया था। आपके खयाल

से उस साल क्या हुआ?

 

 

वसंत में 2 पौधे निकले जिनसे पतझड़ में 4

बीज पैदा हुए।

 

सर्दियों में जैक ने एक बीज खाया और बाकी 3 को जमीन में

बो दिया।

 

दूसरे साल वसंत में 3 पौधे उगे, जिनसे पतझड़ में 6 बीज निकले।

सर्दी के मौसम में जैक ने एक बीज खाया और बाकी 5 बीज बो दिए।

कौए और गौरइए बीज न खाएं - उन्हें भगाने के लिए जैक ने एक "शोर

मचाने वाली" जुगाड़ भी बनाई। तेज हवा चलने पर इस जुगाड़ की

आवाज से चिड़िए घबरा जातीं।

 

अगले साल जैक के बाग में कितने फल उगेंगे?

सर्दियों में जैक ने 9 बीज बोए। उसने एक

बीज को भूनकर खाया।

 

उसके अगले साल - यानी तीसरे साल - वसंत

में सारे बीजों में से अंकुर फूटे। और पतझड़ में 10

फलों में से 10 सुंदर सुनहरे बीज निकले।

 

अगले साल - यानि पांचवे साल - वसंत में फिर अंकुर निकले

और पतझड़ में बीज बने। उस जाड़े के मौसम में जैक ने एक बीज खाया

और बाकी को जमीन में बो दिया।

 

उसने कितने बीज बोए?

अगले वर्ष - चौथे साल - फिर वसंत में अंकुर फूटे और

पतझड़ में 18 बीज निकले। उस जाड़े के मौसम में जैक ने

जमीन में 17 बीज बोए।

 

अगले साल - छठवें साल भी वसंत में सभी बीज अंकुरित हुए।

उस साल इतने पौधे उगे कि जैक ने उन्हें गिनने की कोशिश भी नहीं

की। जब वो बीजों की फसल को इकट्ठा कर रहा था तब एक भली

नौजवान युवती वहां आई। उसका नाम एलिस था। वो जैक की मदद के

लिए वहां रुक गई।

 

उस साल कितने बीज उगे?

 

जैक और एलिस ने

एक-एक बीज भूनकर खाया।

फिर उन्होंने बाकी बीजों को बो

दिया।

 

उन्होंने कितने बीज बोए?

 

अगले साल वसंत में - यानी सातवें साल भी सारे बीज अंकुरित

हुए और पतझड़ में उन फलों में से बहुत सारे बीज निकले।

 

सर्दियों में जैक और एलिस ने शादी की और उसके लिए दावत भी

दी। उपहार स्वरूप उन्होंने 5 मेहमानों को दो-दो सुनहरे जादुई बीज दिए।

सभी मेहमानों ने खुशी के इस दिन की याद में एक बीज को बचाकर

रखा। जैक और एलिस ने एक-एक बीज खाया।

 

उस साल उन्होंने एक छोटी कोठरी भी

बनाई और उसमें 16 बीजों को संभाल कर

रख दिया। बाकी बीजों को उन्होंने बो दिया।

उन्होंने कितने बीज बोए?

 

अगली वसंत - आठवें साल बहुत से बीज अंकुरित हुए और उनमें

से बहुत सारे बीज निकले। अब क्योंकि उनके पास बहुत सारे बीज हो

गए थे इसलिए उन्होंने कुछ बीजों को बाजार में बेंचने की बात सोची।

उन्होंने कोठरी से पिछले साल के बीजों को निकाला और कुल

मिलाकर 60 बीज बेचने के लिए बाजार गए। 34 नए बीजों को उन्होंने

कोठरी में रखा। उन्होंने एक-एक बीज खाया और बाकी बीजों को

जमीन में बो दिया।

 

उन्होंने जमीन में कितने बीज बोए?

 

अगला साल नौवां साल था जब जैक ने बीज न खाकर दोनों बीजों

को बोया था।

 

वसंत में बहुत से अंकुर निकले जिनसे पतझड़ में बहुत से बीज बने।

उस वर्ष उनके एक बच्चे का जन्म हुआ। जाड़ों में उन्होंने कुल मिलकर

3 बीज खाए गए - क्योंकि हरेक ने एक-एक बीज खाया। अब उनके

पास बीजों का बहुत स्टाक हो गया था। इसलिए उन्होंने गोदाम के बीज

भी निकाले और कुल मिलाकर 100 बीजों को बेचने के लिए बाजार

गए। उन्होंने नई फसल के 51 बीजों को कोठरी में रखा और बाकी बचे

बीजों को बो दिया।

 

उन्होंने कितने बीज बोए?

 

अगला साल दसवां साल था। क्योंकि बच्चा बड़ा हो रहा था

इसलिए जैक और एलिस ने एक नया और बड़ा घर बनाया। पतझड़ में

उनका खेत जादुई बीज देने वाले पौधों से भर गया। जल्द ही नई फसल

को काटने का समय आने वाला था। परंतु अचानक, "हे भगवान," जैक

ने कहा, "देखो कितनी तेज हवा चलने लगी है!"

 

वो एक भीषण तूफान था! तूफान इतना भयानक होगा इसकी उन्हें

बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। फिर नदी में बाढ़ आई और पानी तेजी से

आबादी वाले इलाके में फैलने लगा। घर को पानी में बहने से रोकने के

लिए जैक ने उसे एक पेड़ से बांध दिया। फिर उसने अपनी गाय को

लकड़ी की गाड़ी में ऊपर खींच लिया। गाड़ी अब पानी में नाव जैसे तैर

रही थी। पानी से बचने के लिए एलिस बच्चे के साथ घर की छत पर

दौड़कर गई।

 

जैक बड़ी मुश्किल से बीजों की एक छोटी थैली को बचा पाया।

उसने थैली को पेड़ से लटका दिया।

 

कितना भयानक तूफान था!

 

तेज हवा के झोकों में बड़े-बड़े पेड़ भी पत्तों की तरह कांप रहे थे।

धुंआधार बारिश हो रही थी। कुछ ही देर में पूरा खेत एक विशाल समुद्र

में बदल गया।

 

रात के अंधेरे में हवा चिल्लाती रही और पानी के थपेड़े पौधों को

रौंदते रहे।

 

फसल और कोठरी पूरी तरह नष्ट हो गए।

कुछ दिनों बाद तूफान खत्म हुआ। फिर आसमान

साफ हुआ और सूरज दुबारा से चमका।

परंतु तब तक खेतों की पूरी फसल उजड़ चुकी

थी।

 

"गनीमत है कि बच्चा तो सुरक्षित है," एलिस ने कहा।

"मैं भी काफी खुश हूं," जैक ने कहा। "कम-से-कम तूफान में

हमारा लड़का तो बच गया। हम लोग अपनी मेहनत से 10 बीज भी बचा

पाए। यह गम का नहीं खुशी का मौका है। हम अब दुबारा से एक नई

जिंदगी शुरू करेंगे!"

 

जैक ने 3 बीज भूने। उसने एक बीज खुद

खाया। उसने एलिस और एक अपने लड़के को भी

एक-एक बीज दिया। बाकी बीजों को उसने जमीन

में बो दिया।

 

फिर जैक और उसकी पत्नी दोनों ने सिर

झुकाकर अच्छी फसल के लिए प्रार्थना की।

 

---

A note from Mitsumasa Anno

I called this book The Magic Seeds because, in fact, because there is a

mysterious power in even one tiny seed that seems quite beyond our understanding.

Of course, we could not live for a year on one grain of rice or cereal, as Jack did. But

if we should bury one seed in the ground and take care of the plant that grows from it,

it would not be long before we had a crop of hundreds of thousands of grains. In our

real world of nature there are many such magical events - more than are contained in

all the most fantastic picture books.

 

A long, long time ago, human beings learnt to grow plants for their food and

other needs. They sowed seeds in the ground and fertilised them; they protected

their growing plants from harmful birds and insects. They prayed to God for rain. And

when their harvest produced more food than they needed commerce and trade began,

and calculating and bargaining and other things we may think of as typical of civilisation.

And then, unfortunately, some people began to quarrel and fight with each other.

I don’t mean to refer in this book to all of these difficult matters. Yet I think you

will find that many events in our real world are quite a lot like things that happened in

this story. I hope you will find this interesting.

 

The magic begins when the wizard gives Jack two mysterious golden seeds.

Jack eats one and, miraculously, isn’t hungry for a whole year! He buries the other

seed, just as the wizard had told him to do, and suddenly his life starts to change. His

fortune grows by ones and twos, then faster and faster, and so does the reader’s fun

- until suddenly a terrible flood threatens to take it all away. Though the story can be

followed without any math’s skills beyond simple addition and subtraction, sharp-

witted young readers will delight in the increasingly tricky arithmetic puzzles cleverly

woven into both the text and illustrations.

 

 

This many-layered tale is much more than an entertaining mathematical tour

de force; it has a deeper message. Anno’s simple but poetic text and exquisite

watercolour illustrations invite children to seek out his meaning for themselves. Visual

clues “hidden in plain sight” reveal the moment when carefree Jack mends his lazy

ways; perceptive viewers will detect at what point he becomes “smarter” (or perhaps

more calculating). In the end, a wiser Jack finds the courage to start it all again. Here

is a heartening message for viewers/readers of all ages.

 

Mitsumasa Anno was born in Tsuwano, a small, historic town in the Shimane

prefecture of Japan in 1926. His first book was published in 1968; since then, more

than 100 others have followed to the delight of children, to the delight of children and

adults around the world. He has received many honours for his work, including the

Hans Christian Anderson Award in 1984 and the Shiju Hosho decoration.

 

Mr. Anno believes that children enjoy the playful solving aspect of mathematics

and that they use their natural mathematical abilities in many ways as part of their

daily lives. In Anno’s Magic Seeds, he has not set out to teach arithmetic by using it

within the story; instead the movement is in the opposite direction - it is the math that

moves the narrative along and adds to the fun of reading it.

 

Other titles in Mitsumasa Anno’s innovative collection of beautiful maths books

include Anno’s Mysterious Multiplying Jar, Socrates and the Three Little Pigs

and Anno’s Hat Trick

(अनुमति से साभार प्रकाशित)

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