बुधवार, 23 मार्च 2016

होली की कविता - रंगों में रंगे शब्द / डॉ. सुरेन्द्र वर्मा

 

शब्द मेरे चारों और शब्द ही शब्द हैं

होली के रंगों में रंगे शब्द हैं

खट्टे मीठे नमकीन शब्द हैं

कुछ नए व्यंजन कुछ रुटीन शब्द हैं

 

नाचते और गाते शब्द हैं

प्रदर्शन प्रिय किलकारते शब्द हैं

हंसते डींग हांकते शब्द हैं

फुदकते भागते शब्द हैं

होली के रंगों में रंगे शब्द हैं

शब्द, मेरे चारों और शब्द ही शब्द हैं

 

हसरतों में दबे शब्द हैं

कुछ खुले कुछ ढंके शब्द हैं

नीले पीले कुछ लाल शब्द हैं

कुछ मलाल कुछ गुलाल शब्द हैं

ढूँढ़ते और भटकते शब्द हैं

कांपते लड़खड़ाते शब्द हैं

 

गाली गलौज करते गंदे शब्द हैं

होली के रंगों में रंगे शब्द हैं

शब्द, मेरे चारों ओर शब्द ही शब्द हैं

भांग की तरंग में खदबदाते शब्द हैं

अट्टहास करते चिल्लाते शब्द हैं

चकित,चपल चितचोर शब्द हैं

मन चले मुदित, मदहोश शब्द हैं

 

झूमते इतराते शब्द हैं

वाचाल बतियाते शब्द हैं

कुछ कहे कुछ अनकहे शब्द हैं

होली के रंगों में रंगे शब्द हैं

शब्द, मेरे चारों ओर शब्द ही शब्द हैं

 

भीगे गीले तरबदार शब्द हैं

रंगे रंगाए किस कदर शब्द हैं

शब्द, मेरे चारों ओर शब्द ही शब्द हैं

 

-डा. सुरेन्द्र वर्मा

मो. ९६२१२२२७७८

 

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