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रचनाकार हुआ लखपति !

रचनाकार के गूगल + अनुसरणकर्ताओं  की संख्या एक लाख से अधिक पहुँची!

नीचे का स्क्रीनशॉट देखें -

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रचनाकार के आप  सभी सुधी पाठकों, रचनाकारों, व प्रशंसकों का हार्दिक आभार व धन्यवाद.

आज से कोई ग्यारह वर्ष पूर्व,  रचनाकार ईपत्रिका प्रारंभ किया गया था, तब यह अपने तरह की, यूनिकोड हिंदी में विश्व की पहली ई-पत्रिका थी. और तब, चूंकि यूनिकोड हिंदी में डिस्प्ले से लेकर इनपुट टूल (कीबोर्ड) आदि की तमाम समस्याएँ थी, तो दिन में बमुश्किल आठ दस लोग पूरी दुनिया में इसे पढ़ते थे और रचनाएँ भी दिन में इक्का दुक्का छपती थीं.

तब से लेकर इस साहित्य गंगा में असीमित रचनाएँ सृजित व प्रकाशित चुकी हैं, और अब स्थिति यह है कि रचनाकार को पूरे विश्व में पाठक कई विधियों से पढ़ते हैं. डेस्कटॉप से लेकर मोबाइल उपकरणों और मोबाइल ऐप्प तथा ईबुक के रूप में. इंटरनेट की बहुत सी कोशनुमा साइटों ने रचनाकार की सामग्री को जस का तस (जी हाँ, वर्तनी और कॉमा आदि की त्रुटियों समेत,) कॉपी भी किया है और अब रचनाकार.ऑर्ग के नियमित पाठकों की संख्या प्रतिमाह 4 लाख से अधिक हो चुकी है.  इसमें अब प्रतिमाह दर्जनों प्रिंट मीडिया की पत्रिकाओं जितनी सामग्री प्रकाशित होती है.

रचनकार.ऑर्ग ने कई नए नायाब प्रकल्प भी प्रारंभ किए -

फ़ोन करें रचनापाठ करें की स्वचालित सुविधा - जिसमें कई रचनाकारों के रचनापाठ उनके स्वयं के स्वरों में यूट्यूब ऑडियो के माध्यम से प्रकाशित किए गए. अलबत्ता अभी यह सुविधा अपरिहार्य कारणों से बंद है.

संपूर्ण उपन्यास का रचनापाठ ( मशीनी ) - हाल ही में हरि भटनागर के एक उपन्यास एक थी मैना एक था कुम्हार का रचना पाठ ऑडियो बुक के रूप में जारी किया गया. यह मशीनी पाठ है जो नेचुरल भाषा के बेहद करीब है और सुनने में मधुर है.

एमपी3 फ़ाइल के जरिए रचना प्रकाशन - कई रचनाकारों ने अपनी स्वयं की आवाज में अपना रचनापाठ रेकार्ड कर रचनाकार.ऑर्ग को भेजा जिसे प्रोसेस कर प्रकाशित किया गया.

क्राउड सोर्स कर 1001 चुटकुलों तथा 1001 सुविचारों का संकलन व प्रकाशन.

रचनाकारों की स्वयं की हस्तलिपि में रचनाएँ प्रकाशित करना तथा उनके पत्रों की स्कैन इमेज प्रकाशित करना.

कई रचनाकारों को प्लेटफ़ॉर्म प्रदान कर उन्हें स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका.

क्यों न इस लखपतिया सुअवसर पर साहित्य-सृजन-पर्व मनाया जाए? आइए, नवीन रचनाएँ सृजित करें और इंटरनेटी साहित्य की दुनिया को थोड़ा और समृद्ध करें.

 

पठन-पाठन-लेखन-सृजन का सहयोग बनाए रखने के निवेदन के साथ,

आपका,

रवि रतलामी

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1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

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अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

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रवि रतलामी

101, आदित्य एवेन्यू, भास्कर कॉलोनी, एयरपोर्ट रोड, भोपाल मप्र 462030 (भारत)

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