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प्रीत के रंग / कहानी / सुमन त्यागी “आकांक्षी”

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मथुरा, ऐसी जगह जहाँ फागुन अन्य स्थानों की अपेक्षा कुछ जल्दी ही अपने रंग दिखने शुरू कर देता है। फागुन की मदमाती मस्ती पूरे मथुरा में छाई हुई...

मथुरा, ऐसी जगह जहाँ फागुन अन्य स्थानों की अपेक्षा कुछ जल्दी ही अपने रंग दिखने शुरू कर देता है। फागुन की मदमाती मस्ती पूरे मथुरा में छाई हुई है। कामदेव ने अपना रूप दिखाना आरम्भ कर दिया है। धरती भी सरसों की पिली चूनर ओढ़ टेसू के फूलों से श्रृंगार कर कामदेव के प्रभाव को बढाने में लगी है। सर्दी अपने उतार पर है और गर्मी ने चुपके से दरवाजे पर दस्तक दे दी है। फागुन के साथ ही पूरा मथुरा होली के रंगों में रंग हुआ है। विदेशी सैलानियों का आगमन बदस्तूर जरी है। मथुरा के सभी बाजार रंगों से अटे पड़े है। लाल,पीला,गुलाबी,हरा और न जाने कितने ही तरह के रंगों के हजारों थल दुकानों की शोभा बढ़ा रहे हैं। रंगों के साथ ही नाना प्रकार की पिचकारियाँ लोगों का मन मोहने में पूरी तत्परता से लगी हुई हैं। बाजारों में रेलमपेल मची है। मथुरा का होली का अपना ही आकर्षण और महात्म्य है। होली खेलते हुलियारों के कारण रोज ही जाम की समस्या बनी रहती है। फिर भी लोगों के मन प्रसन्न है , और उत्साह से भरे हुए हैं। लोग दूर-दूर से अपने रिश्तेदारों को होली खेलने मथुरा बुला रहे हैं। कोई भूल होली की चर्चा में मशगूल है तो कोई रंगों की होली की। किसी को इस अवसर पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम पसंद हैं तो कोई लोगों के उत्साह और भाईचारे से खुश है। हर तरफ ख़ुशी, उमंग और उत्साह का माहौल है।

मथुरा के ऐसे उमंग भरे माहौल के बीच प्रीति अपने घर में बिलकुल सामान्य है। उसके मन में होली को लेकर न कोई उत्साह है और न ही कोई उमंग। फागुन के महीने में जहाँ पूरे मथुरा के दिन सामान्य से विशेष हो जाते हैं वहीँ प्रीति के दिन अब भी सामान्य हैं। सुबह जागना कॉलेज जाना और बचे टाइम में अपने कमरे में पड़े रहना बस इतनी सी दिनचर्या है उसकी। ऐसा लगता है मानो पूरे पानी में भंवर उठ रहे हों लेकिन भंवर के बीच का भाग बिल्कुल शान्त ,नीरव,निस्तब्ध। इसके केंद्र में स्थित है प्रीति जिस पर इस पूरे कोलाहल का कोई असर नहीं है। ऐसा लगता है जैसे उसे अपने चारों तरफ के माहौल के बारे में पता ही नहीं हो बस अपने आप में मग्न ,गुमसुम,चुपचाप। वह उम्र जिसमें सभी अपने दोस्तों के साथ रहना पसंद करते हैं ,प्रीति को अपना कमरा पसंद है। पूरा दिन उसी में बिताती है।

होली के इस मस्ती भरे जादू ने जब पूरे मथुरा को अपनी गिरफ्त में ले रखा है तब प्रीति का कॉलेज भी कहाँ इस जादू से बाहर है। कॉलेज में होली की पार्टी (होली मिलन समारोह का मॉडिफाइड रूप ) स्टूडेंट यूथ यूनियन ने ओर्गनाइज की है। पूरा कॉलेज इन्वाईट है टीचर्स को छोड़। प्रीति के फ्रेंड्स भी उससे पार्टी में चलने की जिद करने लगे “चल ना यार। तू भी यार पता नहीं ,न कही आती है ,न जाती है ,बस चुपचाप घर से कॉलेज ,कॉलेज से घर ,ये भी कोई रूटीन है,कोई फीलिंग नहीं है तुझमें , तू इन्सान नहीं रोबोट है रोबोट ,न हँसना, न रोना ,बस गुमसुम,..........................चल न यार” उसकी फ्रेंड्स रिक्वेस्ट करते हुए बोलीं। तभी पीछे से आवाज आई “किससे रिक्वेस्ट कर रही हो , इस ब्लेक फ्रेम्ड चशमिस से” इतना कहते –कहते वह आगे आ गया यह क्रिस था। उसका कहना अब भी जारी है, “अपने आपको दीपिका पादुकोण समझती है, बट है नहीं। ये लॉन्ग स्कर्ट , ये टोपर , सीने से किताबों को लगाये ,आंखों पर चश्मा और ये पोनी टेल(प्रीति की पोनी टेल को झटके से खोलते हुए ) पूरी पढ़ाकू लगती है , लाइफ बोरिंग है इसकी , ये इन्जोयमेंट के लायक ही नहीं है। छोड़ो इसे चलो हम चलते हैं।” और सभी लोग उसके साथ चले गए। प्रीति अकेली खड़ी रह गई अपनी किताबों को सीने से लगाये। आजतक किसी ने उससे ऐसे बात नहीं की थी। अभी तक उसने क्रिस को बस ऐसे ही देखा था। उसी की में उसी के घर के सामने किराये के मकान में रहता है। जब कभी प्रीति अपनी बालकनी में आती तो वह उसे कभी सड़क से तो कभी अपने घर की बालकनी से मुस्कुराते हुए हैलो बोलता मिल जाता। लेकिन प्रीति ने न कभी उसकी हैलो का रिप्लाई किया और न ही उसे इतने ध्यान से देखा जितना आज खुद के बारे में इतना कुछ सुनने के बाद देख रही है। बैकहम स्टाइल हेअर,लो वेस्ट फिटिंग पेंट जिसे कोई हल्के से भी खींच दे तो तुरंत ही उतर जाये ,जिस पर रेड कलर की लूज हाफ टी-शर्ट, पेरों में स्नीकर्स , ब्रांडेड रिस्टवाच और सनग्लासेज इन शोर्ट आज के हिसाब से बिलकुल कूल बंदा। प्रीति उसको जाते हुए देखती रही वह किसी के गले मिलता ,किसी की पेंट खींचता,सभी से हंसी मजाक करता हुआ चला गया। प्रीति पूरे ग्राउंड में अकेली खड़ी रह गई। उस क्रिस और अपनी फ्रेंड्स पर उसे बहुत गुस्सा आया और अपनी एसी हालत पर रोना लेकिन वह चुपचाप घर आ गई।

अपने कमरे में पहुंच बहुत रोई। पलंग पर पड़े तकिये को उठा अपनी बाँहों में भींच लिया और लगातार रोती रही। कुछ देर बाद जब उसकी हिचकियाँ बंद हुईं और आँखों से बहने वाले आंसू उसके दिल के बोझ को कुछ हल्का करने में लगे थे , तब उसने पलंग के बगल में ड्रोअर में रखा फोटो निकाला और उसे हाथ में ले शिकायत करने लगी , “देखा सैम ! आज क्रिस ने मुझसे क्या –क्या कहा। क्या में इतनी बुरी हूँ ? सैम तुम बताओ क्या मैं इतनी बुरी हूँ ? तुमने तो कभी मुझसे कुछ नहीं कहा फिर वह क्रिस क्यूँ ..........................? तुम्हारे सामने किसी की नहीं थी जो मुझसे कुछ भी कहे। आज अगर तुम वहाँ होते तो उसकी टाँगें तोड़ देते। तुम्हें याद है जब हम ताजमहल देखने गए और वहां एक लड़के ने मुझसे कुछ कह दिया था तो तुमने उसकी कितनी पिटाई की थी। आज जब क्रिस मुझसे इतना सब कह रहा था तो तुम वहां क्यों नहीं आये ? तुमने उसकी पिटाई क्यों नहीं की ? सैम कुछ तो बोलो , सैम................., सैम.................

तुम मुझे छोड़ कर क्यों चले गए सैम ? उसका रोना बदस्तूर जरी है जो वापस हिचकियों में बदल गया

मैं.........सच्च्च्चच्चच्च्च्च.......में..........ब..हहह्ह्ह हु...........ततत..............ब्बब्बब्बबू..........ररररी...............ह्ह्ह्हह्ह्हूँ......ना। ततत...........भ्भ्भ्भी ....तततो...........ततततु.........म्मम्मम्म ..............म्म्म्मम्मु.......झ्झ्झ्झे .....छो......ड......क्क्कक्क्क.......रररर.......च.......ले.............ग......ये.........l ब्बब्बब्ब........ह्ह्हह्ह्ह्हू.......त्त्तत........ब्ब्ब्बू.........ररी.....हूँ ........मैं , ब्ब्ब्बब्ब्ब ........ह्हह्ह्ह्हू.......त्त्त्तत्त्त्त ............ब्ब्ब्बू...... रररररी।” बहुत देर तक वह ऐसे ही रोती रही। प्रीति की मम्मी (मिसेज सिंह) उसके कमरे के दरवाजे के बाहर खड़ी अपनी बेटी को देखती रही और उसको रोते देख खुद भी रोती रहीं।

इस घटना के बाद क्रिस को प्रीति न तो अपनी बालकनी में दिखी और न ही कॉलेज में। उसने प्रीति के फ्रेंड्स से भी पूंछा लेकिन किसी ने कोई आंसर नहीं दिया। प्रीति के घरवालों से तो उसकी जान- पहचान पहले से ही थी इसलिए एक दिन वह प्रीति के घर पहुंच गया ,उसका हाल-चाल पूछने। “हाय आंटी ,वाट्सअप” क्रिस ने हवा में हाथ हिलाते हुए कहा। रिप्लाई में आंटी ने भी मुस्कुराते हुए हाय बोल दिया। “और क्रिस बेटा आज यहाँ , क्या बात है”? मिसेज सिंह ने क्रिस को सोफे पर बैठने का इशारा करते हुए पूछा।

“कुछ नहीं वैसे ही , कई दिनों से प्रीति को बालकनी में नहीं देखा और वह कॉलेज भी नहीं आई इसलिए उसका हाल-चाल पूछने चला आया। क्या आप प्रीति को बुला देंगी ? किस ने उसी अल्हड़ अंदाज में कहा।

“बेशक” मिसेज सिंह ने कहा और प्रीति को बुलाने के लिए उसके रूम की तरफ चली गईं।

“क्रिस बेटा प्रीति तो सो रही है तुम चाहो तो उससे बाद में मिल लेना”l मिसेज सिंह ने लौट कर कहा। “तुम बैठो मैं चाय बना कर लाती हूँ”, इतना कह कर चाय बनाने के लिए किचिन में चली गईं। मिसेज सिंह जब चाय लेकर आईं तब क्रिस सोफे पर बैठा प्रीति के फोटो को निहार रहा था। उनको आता देख उसने फोटो बगल की टेबल पर रख दिया।

“आंटी मुझे पता है कि प्रीति सो नहीं रही है मैंने आपकी और प्रीति की सारी बातें सुन लीं”l क्रिस ने चाय का कप उठाते हुए कहा। “आपको इसके लिए शर्मिंदा होने की भी जरुरत नहीं है कि आपने मुझसे झूठ कहा”l

“ वैसे हम क्यों माहौल को बोरिंग बना रहे हैं”, क्रिस ने माहौल को हल्का करने के लिए हंसते हुए कहा।

“वैसे ये प्रीति हमेशा से ही एसी है या अब हो गई है , मेरा मतलब मेंटल”l

“मेंटल”,मिसेज सिंह ने अचम्भे से पूँछा।

“और नहीं तो क्या न बोलती है ,न हंसती है ,सबसे बड़ी बात मुझ जैसे हेंडसम लड़के ,जिस पर कॉलेज की सैकड़ों लड़कियां मरती हैं , के हेलो का रिप्लाई भी नहीं करती। यू नो .........द मोस्ट इलिजिबल बेचलर ,क्रिस। अब एसी लड़की मेंटल नहीं है तो क्या है”l

क्रिस की बात पर मिसेज सिंह जोर से हंस दी। फिर अपनी हंसी को कंट्रोल करते हुए बोलीं, “नहीं ये शुरू से एसी नहीं है। शुरू में तो बिलकुल तुम्हारी तरह थी, हंसमुख ,अल्हड़ ,जिन्दगी को अपने हिसाब से जीने वाली ,सबकी लाड़ली, हर किसी से घुल मिल जाती थी। किसी अजनबी को भी दो मिनट में अपना बना लेती। होली खेलना बहुत पसंद था इसे। सभी त्योहारों में होली फेवरिट था इसका। होली की धमा- चौकड़ी ,मौज-मस्ती बहुत सूट करती थी इसे। महीनों पहले से ही होली की तैयारियों में जुट जाती , कभी फूल होली तो कभी लठमार होली तो कभी गुलाल और रंगों की होली ,किसी भी तरह की होली को छोड़ती नहीं थी। कॉलोनी में घर –घर जाकर बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी से होली खेलना शगल था इसका। सामने वाला होली खेलना भले ही नहीं चाहता हो पर प्रीति को देख कर होली खेल ही लेता। घर पर ही पार्टी रखती ,सरे फ्रेंड्स आते ,होली के महीनों में घर कभी भी खाली नहीं रहता” सारी बातें सुनाते हुए मिसेज सिंह के चेहरे के भाव इतने अच्छे थे मानो सारी बातें अभी उनके सामने घट रहीं हों फिर अचानक उनके चेहरे के भाव बदल गए ,चेहरे पर दुःख के लक्षण साफ दिख गए , “और एक होली पर सब बदल गया”l

“ऐसा क्या हुआ था आंटी”,क्रिस ने पूंछा।

“ मेजर श्याम कुमार , प्रीति से 3-4 साल बड़ा था। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते। ज्यादातर समय साथ ही रहते। ‘मेड फॉर ईच अदर’ थे दोनों। बहुत अच्छी लगती थी दोनों की जोड़ी। प्यार से सभी उसे ‘सैम’ कहते। मुझे अब भी अच्छे से याद है जब वह शादी के बारे में बात करने हम से मिलने आया ,अपनी पूरी यूनिफार्म में था ,6 फुट 2 इंच क लम्बाई ,एक दम फिट बोड़ी, सर पर कैप ऐसा लग रहा था मानो अभी राष्ट्रपति जी सम्मानित करने वाले हों उसे। आज लड़कों की तरह हाय- हेलो से ही कम चलाने वाला नहीं था सैम , वह तो बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेने वालों में से था। हम भी उसे बहुत पसंद करते थे। प्रीति की तो जैसे जान बसती थी उसमें। दो साल पहले 2014 में होली खेलने मथुरा आया हुआ था। अभी होली में कुछ दिन बाकी थे ,लेकिन अचानक उसकी छुट्टियाँ केंसिल कर दी गईं। उसी की बटालिन के कैम्प पर आतंकी हमला हुआ था। कुछ आतंकी मुठभेड़ में मारे गए थे लेकिन कुछ के छिपे होने की आशंका थी। सर्च ऑपरेशन जारी था। पास के ही एक गाँव में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर उसकी टीम वहाँ पहुंची। आतंकियों ने खुद को घिरा पाकर फायरिंग शुरू कर दी। मुठभेड़ चल ही रही थी कि तभी एक गोली सैम के एक साथी के पैर में आकर लगी। सैम ने अपने साथी से आतंकी का ध्यान हटाने के लिए उस पर फायरिंग शुरू कर दी। आतंकियों से लोहा लेते-लेते वह काफी आगे चला आया, अपनी सुरक्षा का ध्यान ही नहीं रहा। उसने उस आतंकी को तो मार गिराया लेकिन तभी किसी दूसरे की गोली उसके दिल को छेदती हुई निकल गई। इतने पर भी उसने हार नहीं मानी और दूसरे से लोहा लेता रहा। चार गोलियां लगीं थी उसको लेकिन मरने से पहले दो आतंकियों को मार गिराया था उसने”l

मिसेज सिंह की आँखों से आंसू बहने लगे। क्रिस ने उनके कंधे पर हाथ रख दिलासा देने की कोशिश की। मिसेज सिंह अपने आंसूओं को पोंछते हुए बोलीं , “प्रीति की तो जैसे जिन्दगी उजड़ गई , होली आने से पहले ही बदरंगी हो गई। सैम की डेडबोडी को देख कर एक आंसू तक नहीं निकला था उसका। पत्थर की मूरत बन गई थी वह। महीनों तक गुमसुम बनी रही। फिर उसका वापस कॉलेज में एडमिशन कराया की दोस्तों के साथ रहेगी तो शायद फिर से सामान्य जिन्दगी जीने लगे। फिर से वाही प्रीति बन जाए ,पहले वाली ,अल्हड ,हंसमुख,मस्त-मौजी प्रीति।............ उस दिन दो साल बाद रोई थी वह”l

“सॉरी आंटी , प्रीति मेरी वजह से ही रोई थी।

‘आई एम फीलिंग गिल्टी फॉर डेट ,प्लीज फोरगिव मी’

मेरी तरफ से उसे सॉरी बोल देना और हो सके तो मुझे माफ़ कर देना ,प्लीज। अच्छा तो आंटी अब में चलता हूँ”, क्रिस ने खड़े होकर कहा।

वहाँ से आने के बाद क्रिस अपने बेड पर पड़ा रहा। विचारों के झंझावत अपने चरम पर हैं। “कृष्ण कुमार पाठक तुम प्रीति को पसंद करने लगे हो” मन के एक कोने से आवाज आई।

“नहीं ऐसा कुछ नहीं है”, दूसरे कोने से आवाज आई।

“अगर ऐसा कुछ नहीं है तो एक साल से बिना उस लड़की के रिप्लाई किये हैलो बोलने का क्या मतलब है ? उसको कॉलेज में खोजने का क्या मतलब है? उसका मजाक बनाने का दु:ख क्यों था ? उसको बालकनी में न देख कर इतने बेचैन होने का क्या मतलब है ?उसके घर जाकर उसका हाल-चाल पूछने का क्या मतलब है ?उसके फोटो को हाथ में ले निहारने का क्या मतलब है ?उसके बारे में जानकर दु:खी होने का क्या मतलब है ? मुझे तो लगता है कृष्ण कुमार पाठक तुम उसे पसंद ही नहीं करते , उससे प्यार करने लगे हो तुम ,तुम्हें प्यार हो गया है उसी झल्ली सी लड़की प्रीति से। खुद को स्मार्ट और कूल बता कर इग्नोर कर रहे हो उसे। तुम्हें प्यार हो गया है उससे ,प्यार”l

“ऐसा कुछ नहीं है तुम जाओ यहाँ से ,में और प्रीति .............................नहीं ऐसा कुछ नहीं हो सकता है”, क्रिस चिल्लाया और अपनी थोट्स पर फुलस्टॉप लगा दिया।

उस दिन के बाद क्रिस का एक ही ऐम है ,प्रीति को पुरानी वाली प्रीति बनाना। अभी होली में एक महीना बाकी है। वह होली तक प्रीति की जिन्दगी को फिर से रंगीन देखना चाहता है। उसे नहीं पता की वह प्रीति से प्यार करता है या नहीं। वह बस प्रीति को खुश देखना चाहता है , उसकी जिन्दगी को रंगों से सरोबार करना चाहता है। उस दिन के बाद प्रीति के दोस्तों उसके भाई आदि से प्रीति के बारे में जानकारी लेना उसका मेन काम बन गया। इसी दौरान उसे प्रीति की एक डायरी मिल गई जिसे प्रीति अपने हाथों से लिखा करती थी। क्रिस को उम्मीद की किरण मिल गई।

“10 अक्टूबर 2013

हाय नैंसी ,आज सैम पापा-मम्मी से मिला। फूल यूनिफार्म में था। पता है क्यों ......क्योंकि मैंने उससे कहा की पापा- मम्मी को आर्मी मेन बहुत पसंद हैं। और वह इम्प्रेसन जमाने के लिए यूनिफार्म में ही आ गया। पता है बाद में सभी ने उसका खूब मजाक बनाया”l

क्रिस डायरी को पढता जा रहा है।

“12 मार्च 2014

हाय नैंसी , पता है आज मैंने और सैम ने होली खेली। पूरी फैमिली के साथ होली खेलने में बहुत मजा आया। होली खेलते हुए अचानक से सैम ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया। मैंने उसकी साँसों की गर्माहट को बहुत नजदीक से महसूस किया। में उसके ख्यालों में खोई थी तब तक वह मेरे गालों पर गुलाल लगा कर होली है कहता भाग गया। पर मैंने भी उसका पीछा नहीं छोड़ा। मैंने और मोंटी ने उसको खूब रंग लगाया। दस दिनों तक छूटेगा नहीं ,मेरा लगाया रंग है ,बहुत प्यार से लगाया है , गहरा चढ़ेगा।

“14 मार्च 201 4

आज मैं बहुत दु:खी हूँ। सैम चला गया , उसकी छुट्टियाँ कैंसिल हो गई। सही से बातें भी नहीं हुई हमारी। बहुत सारी बातें करनी थी उससे। अपनी शादी की बातें , अपने फ्यूचर की बातें। जब उसको गाड़ी लेने आई तो लगा जैसे छिपा लूं कहीं। बैठूं उसके पास घंटों खुले आसमान में तारों के नीचे, रखूँ उसके कंधे पर सिर और कहूं अपने मन की बात , लेकिन कुछ भी न कर सकी ,कुछ भी न कह सकी ,सब रह गया मन का मन ही में। जाते समय गले लगकर खूब रोई पर मेरा रोना भी रोक न सका उसे। कर्तव्य की बात कह कर फिर से बाँध गया मुझे। लेकिन उसकी गाड़ी के पीछे काफी दूर तक गई इस लालच में की कहीं देख ले गाड़ी के शीशे में मुझे और उतर कर रुक जाए मेरे साथ या फिर यादों में जोड़ लूं कुछ और पल उसके साथ होने के ,उसके पास होने के। मुझे देख शीशे में वह रुका लेकिन गले लगा और समझाकर चला गया। बुत बनी देखती रही उसकी गाड़ी को। सड़क पर गुलाल को धूल की तरह उड़ाती उसकी गाड़ी को ज्यादा देर देख भी न सकी। उस समय तो ऐसा लग रहा था मानो राधा और श्याम की कहानी फिर से दोहराई जा रही है। फिर एक बार श्याम कर्त्तव्य के लिए प्रेम को छोड़ गए। उसकी गाड़ी अक्रूर के रथ की तरह थी और उसमें बैठा ड्राइवर अक्रूर जो हम दोनों को अलग करने आया था। क्या एक बार फिर राधा- श्याम के प्रेम की कर्तव्य की बेदी पर आहूति होगी। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरे भी भाग्य में राधा की तरह अपने श्याम की यादें ही हैं। क्या में भी अपने श्याम से कभी नहीं मिल पाऊँगी ? क्या मेरे भी भाग्य में सिर्फ इन्तजार लिखा है ?बहुत डर लग रहा है मुझे। पता नहीं ऐसे ख्याल मेरे दिल में क्यों आ रहे हैं ? मेरा दिल बैठा जा रहा है”l डायरी के पन्नों पर आँसूं के निशान अब भी बने हुए हैं। क्रिस ने डायरी बंद कर दी।

कुछ दिनों बाद प्रीति कॉलेज आई। कॉलेज कैम्पस में कॉलेज के ही लड़कों का एक बैंड परफोर्म कर रहा है। क्रिस ने आव देखा न ताव सीधे स्टेज पर पहुंच कर माइक पकड़ लिया।

“एवरीबडी अटेंशन प्लीज , प्रीति आई ऍम सॉरी ,आई रिअली सॉरी ,प्लीज फोरगिव मी .......तुम कहो तो कान पकड़ लूं (उसने कहने के साथ एक हाथ से कान पकड़ भी लिया ) देखो अब तो मैंने कान पकड़ भी लिया। प्रीति देखो तो सही। माफ़ कर दो न यार (क्रिस ने अपने आस- पास देखा और बोला ) अरे तुम लोग ऐसे क्या देख रहे हो ,कभी –कभी ऐसा भी होता है। इसमें ऐसे शोक्ड होने वाली क्या बात है। प्रीति तुमने अगर मुझे माफ़ नहीं किया तो में ऐसे ही कान पकडे खड़ा रहूँगा। आरा कोई तो पूछो इससे माफ़ कर दिया क्या ? प्रीति तुमने मुझे माफ़ कर दिया क्या”?

प्रीति के आस –पास खड़े स्टूडेंट्स की एक साथ आवाज आई “ ओ भाई ,कर दिया माफ़”l

क्रिस ने माइक को स्टेज पर फेंक ग्राउंड में जम्प लगाई और प्रीति के जस्ट सामने पहुँच एकदम फ़िल्मी स्टाइल में हाथ को आगे बढाते हुए बोला , “मुझसे दोस्ती करोगी”? प्रीति बिना कुछ कहे क्लास रूम की तरफ चल दी और क्रिस उसके पीछे मिन्नतें करता हुआ। कभी वह पीला गुलाब लिए खड़ा मिलता तो कभी फ्रेंडशिप कार्ड लिए , प्रीति से फ्रेंडशिप करने के उसके उसके प्रयास जरी हैं।

आखिरकार उसके प्रयास रंग लाये और प्रीति ने उसकी फ्रेंडशिप एक्सेप्ट कर ली। अब तो क्रिस का अधिकांश समय प्रीति के साथ ही बीतता। प्रीति भी अब क्रिस के साथ थोड़ी सहज हो गई। क्रिस की हरकतों में उसे सैम नजर आता , फिर चाहे वे हरकतें कॉलेज में फ्रेंडशिप के लिए हों या उसके चेहरे पर हलकी सी मुस्कान के लिए। कमरे में बीतने वाला समय भी अब थोड़ा कम हो गया। क्रिस की धमा-चौकड़ी तो अब चलती ही रहती। वह प्रीति की मम्मी और उसके भाई से बहुत घुल-मिल गया। प्रीति उनकी हरकतों में भागीदार नहीं होती पर हाँ एक तरफ खड़ी हो देखती रहती। घर से निकल कॉलोनी के लोगों से मिलने लगी। बहुत कुछ बदल गया है इन दो सालों में। उसे ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने कॉलोनी में आ गई हो। बहुत से नए चेहरे देखने को मिले। बच्चे जिनके साथ धमा-चौकड़ी किया करती थी पहले से बड़े हो गए हैं।

प्रीति की माँ अपनी बेटी में आये इन बदलावों को देखकर बहुत खुश होती और मन ही मन क्रिस को ढेर सारे आशीर्वाद देती। कभी –कभी क्रिस के प्रति उनकी कृतज्ञता आँखों से होकर बह निकलती।

होली अब नजदीक है , कुछ ही दिन बचे हैं। क्रिस, प्रीति की जिन्दगी में रंग भरने के अपने प्रयासों में थोड़ा सफल जरुर हुआ है लेकिन अब भी पूरी सफलता नहीं मिली है। प्रीति में अब काफी बदलाव आ चूका है। अब वह घर से बाहर निकल कॉलोनी के लोगों के साथ टाइम बिताने लगी है क्रिस, जिसकी हैलो का जवाब तक नहीं देती थी उससे बातें करने लगी है। बीते दिनों में क्रिस को ये एहसास हो चुका है कि वह प्रीति से प्यार करने लगा है , सच्चा प्यार। प्रीति की एक हंसी के लिए सब कुछ कुर्बान कर देने वाला प्यार।

कल होली है। क्रिस अपने कमरे में बेड पर पड़ा हुआ है। तभी एक दूसरा क्रिस उसके सामने आया। “तुम कल अपने दिल की बात उसे बताओगे”? दूसरे ने पूछा।

“नहीं”, क्रिस ने जवाब दिया।

“लेकिन क्यों”? दूसरे ने पूछा।

“कितनी मिन्नतों और एफर्ट के बाद उसने मेरी फ्रेंडशिप एक्सेप्ट की थी। कही अपने दिल की बात बता कर में उसे नाराज न कर दूं। अगर उसने मना कर दिया तो ? आगे के चक्कर में पुराना भी न खो दूं। कहीं उसकी दोस्ती भी नहीं रही तो। मेरे पास इन सारे सवालों के न तो जवाब हैं और और न ही इस टेंशन को झेलने की हिम्मत। इसलिए मैंने डिसाइड किया है कि उसे कुछ भी नहीं बताऊंगा। जो है , जैसा है ,वैसा ही ठीक है। अच्छे के चक्कर में और बुरा न हो जाये”, क्रिस ने अपनी बात कही।

“शर्म आनी चाहिए तुम्हें ,कृष्ण कुमार पाठक। तुम कृष्ण हो कृष्ण और कृष्ण ने कहा है कर्म करो फल की इच्छा मत करो क्योंकि कर्म तुम्हारे हाथ में है फल नहीं। परिणाम चाहे जो भी हो , अच्छा या बुरा ,कम से कम इस बात का दु:ख तो नहीं रहेगा की हमने प्रयास ही नहीं किया। वैसे भी तुमने प्रीति को खुशियां देने का वादा किया है। तुम खुद से किया वादा कैसे तोड़ सकते हो”? दूसरे ने अपने प्रश्न दागे।

“तुम जाओ यहाँ से मुझे तुमसे कोई बात नहीं करनी”, क्रिस जोर से चिल्लाया। दूसरा क्रिस गायब हो गया। लेकिन क्रिस टेंशन में है। वह यहाँ से वहां , वहां से यहाँ अपने कमरे में चक्कर लगा रहा है।

कॉलोनी में बहुत चहल- पहल है। सभी लोग होली खेलने में लगे हैं। क्रिस और प्रीति के कॉलेज के फ्रेंड्स भी आये हुए हैं। सभी एक दूसरे को रंग गुलाल लगा होली की बधाइयाँ देने में मशगूल हैं। हुलियारों के लिए किसी ने शर्बत की तो किसी ने गुझियों आदि की व्यवस्था की हुई है। शर्बत का आनंद लेकर लोग जबरदस्त डांस कर रहे हैं कोई नागिन तो कोई सपेरा डांस करने में लगा हुआ है। कुछ लोग कॉलोनी में बने रंग के हौज में दूसरों को उठा-उठा कर डाल रहे हैं। क्रिस बेसब्री से प्रीति का इन्तजार कर रहा है।

लेकिन ये क्या ? प्रीति की फैमिली भी हुलियारों के साथ शामिल हो गई पर प्रीति नहीं आई। क्रिस बहुत बेचैन हो गया। उसने प्रीति की फैमिली को होली की शुभकामनायें दी और हलकी –फुलकी होली खेल प्रीति के घर की तरफ भागा।

“प्रीति”,उसने हांफते हुए आवाज लगाईं। प्रीति अपने कमरे में थी ,उसकी आवाज सुन बाहर आई। “हाँ ,क्रिस क्या बात है ? और तुम यह कैसे ?,प्रीति ने पूछा।

“तुम होली खेलने नहीं आई”, क्रिस ने कहा। वह अभी भी हांफ रहा है।

“हाँ,वैसे ही , मेरा मन नहीं था। वैसे तुम्हें तो हुलियारों के साथ होना चाहिए था तुम यहाँ”

“तुम्हें बुलाने आया हूँ। चलो मिलकर होली खेलते हैं ,मथुरा की होली को और भी रंगीन बनाते हैं”,क्रिस का अपनी साँसों पर कंट्रोल हो गया था और वह यह कहते हुए उसके थोड़ा सा करीब आ गया।

“नहीं ,तुम ही जाओ। मुझे होली पसंद नहीं है” प्रीति इतना कहकर जाने के लिए मुड़ी तभी क्रिस ने उसका हाथ कलाई से पकड़ उसे अपनी तरफ खींचकर उसके चेहरे पर गुलाल मल दिया। कुछ देर दोनों इसी स्थिति में बने रहे ,फिर प्रीति अपना हाथ झटके से छुड़ाकर चिल्लाई , “क्रिस”

“तुम्हें ये होली पसंद नहीं है, जिसे तुम महीनों पहले से खेलना शुरू कर देती थी। वह होली जो तुमको सबसे ज्यादा प्यारी है। अपने साथ ऐसा क्यों कर रही हो , प्रीति ? क्यों इतिहास को दोहराना चाहती हो ? क्यों फिर एक बार राधा श्याम के लिए अपने जीवन को त्यागना चाहती है ?क्या श्याम कभी ये कहते थे कि राधा उनकी याद में अपने आपको भूल जाएँ ? क्या उनको राधा की एसी हालत पर दु:ख नहीं होता होगा ? क्या कोई सच्चा प्रेमी ये चाह सकता है कि उसकी प्रेमिका उसके लिए अपने आपको ही भूल जाए ? आखिर क्यों तुम वाही कहानी दोहरा रही हो ? क्या सैम को तुम्हारी इस हालत पर दु:ख नहीं होता ? सैम भी तुमको खुश देखना चाहता था कम से कम उसके लिए ही इस घुटन, इस तन्हाई से बाहर आओ। कब तक ऐसे ही अकेली घुटती रहोगी”?

“जब तक रह सकूंगी तब तक ,”प्रीति रोते हुए चिल्लाई।

“तुम अपनी जिद्द के कारण कितनों को दु:खी कर रही हो , तुम्हें पता भी है। तुम्हारे मम्मी-पापा तुम्हारी इस हालत पर कैसा फील करते हैं ,तुमने ये जाना भी है। मैंने देखा है ,तुम्हारी एक हंसी के लिए वर्षों से तरसती तुम्हारी माँ को। तुम्हें थोड़ा सा भी खुश देखने पर उनकी आँखों से ख़ुशी के आंसू बहने लगते हैं। क्यों टॉर्चर कर रही हो उन्हें”, क्रिस चिल्लाते हुए बोला। क्रिस बोले जा रहा है और प्रीति रोये।

क्रिस ने अपनी आवाज को संयत किया। फिर प्रीति की बाहों को कंधे के पास से पकड़कर उसकी आँखों में आँखें डालते हुए बोला, “प्रीति मैं जनता हूँ की पहले प्यार को भुलाना आसान नहीं है। लेकिन उसके लिए अपने आप को इस तरह अकेला कर लेना ,अपनों को दु:खी करना भी कहाँ की समझदारी है”l

क्रिस प्रीति की बाँहों को छोड़ अपने घुटनों पर बेठ गया और उसके हाथों को अपने हाथों में ले बहुत ही प्यार से बोला , “प्रीति प्लीज मेरी तरफ देखो। में जानता हूँ कि मुझमें और तुममें बहुत कुछ डिफरेंट है। लेकिन फिर भी में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ , बहुत ज्यादा। मुझे नहीं पता ये कैसे हुआ , कब हुआ और क्यों हुआ ,बस हो गया। मुझे पता है तुम मुझसे प्यार नहीं करती। मुझे इस बात का कोई दु:ख भी नहीं है। मैं जानता हूँ कि मैं कभी भी सैम की जगह नहीं ले सकता। लेकिन उसके अधूरे कम को पूरा करना चाहता हूँ। में तुम्हे खुश रखना चाहता हूँ , तुम्हारी जिन्दगी में रंग भरना चाहता हूँ , तुमको दुनिया की वे सभी खुशियाँ देना चाहता हूँ जो तुम डिजर्व करती हो। एक दोस्त की हैसियत से ही ये हक़ मुझे दे दो प्लीज। सैम ही तुम्हारा हीरो है, मैं तो उसका बॉडी डबल बन कर ही खुश हूँ। प्लीज प्रीति ......................प्लीज”l

प्रीति लगातार रोये जा रही है। क्रिस ने खड़े होकर प्रीति को गले स लगा लिया। उसका रोना और भी तेज हो गया वह हिचकियाँ लेकर जोर-जोर से रोने लगी। उसने क्रिस को कसकर पकड़ लिया। क्रिस उसके सिर पर धीरे-धीरे हाथ फेरते हुए उसे दिलासा दे रहा है। कई घंटों तक वह ऐसे ही रोती रही और क्रिस उसके सर को सहलाता रहा।

जब आँखों से बहने वाले आंसुओं ने भी उसके दु:ख को कम करने में सहायता करने से मना कर दिया तब क्रिस ने अपने कंधे का सहारा दे उसे सोफे पर बिठाया और उसके बालों को बदस्तूर सालता रहा। मानो प्रीति के दिल पर लगे घावों पर हलके हाथ से मलहम लगा रहा हो। गालों पर सूखने से बची आंसू की आधी बूंदों को अपने हाथों से पोंछ उसके चेहरे को अपने हाथों में ले क्रिस ने पूछा , “प्लीज, क्या मुझे तुम्हारी जिन्दगी में रंग भरने की इजाजत है”?

प्रीति ने हलके से हाँ में सिर हिला दिया। क्रिस ने प्रीति के माथे को प्यार से चूमा। दोनों हुलियारों में शामिल होने के लिए चल दिए , जो उनकी ही तरफ आते हुए दिखाइए दे रहे हैं।

सुमन त्यागी “आकांक्षी”

मनियां,धौलपुर ,राजस्थान

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रचनाकार: प्रीत के रंग / कहानी / सुमन त्यागी “आकांक्षी”
प्रीत के रंग / कहानी / सुमन त्यागी “आकांक्षी”
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