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देशी विदेशी खाना / आशीष श्रीवास्तव

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हाल ही में मित्र की दीवार पर एक बहस देखी थी जो विदेशी मूल के ’पित्जा’ पर थी। पोष्ट थी कि एक विशेष पित्जा ब्रांड का पित्जा पसंद नहीं आया उसके बाद टिप्पणियों का दौर शुरु हुआ!

मैं खाने का शौकीन हूँ, देश विदेश हर जगह नये नये खाने का स्वाद लेते रहता हूँ। कभी खाना पसंद आता है, कभी पसंद नहीं आता है, जो कि स्वाभाविक ही है। हर जगह मैं हमेशा नये व्यंजन का आर्डर करता हूँ। एक बार ऐसा भी हुआ है कि जिसे मुख्य खाने समझ कर आर्डर दिया वो खाने के बाद वाला मीठा व्यंजन निकला है। मेरे खाने पीने से संबंधित अनुभव कुछ ऐसे हैं।

1. सामान्यतः विदेशी खाना महंगा होता है, जैसे भारत में इटालीयन पित्जा, पाश्ता महंगा मिलेगा। विदेशों में भी भारतीय खाना स्थानीय खाने से दो गुना तीन गुना महंगा होता है।


2. भारत में किसी भी देश का कोई भी व्यंजन आपको उसके मूल स्वाद में नहीं मिलेगा। कहने को तो वह पित्जा, मंचूरियन, चाइनीज या थाई होगा लेकिन वास्तविकता में उसमें आपको पूरी तरह से भारतीयकरण किया हुआ स्वाद मिलेगा। उस व्यंजन का असली स्वाद गायब मिलेगा। मुझे चाइनीज खाना, थाई खाना पसंद है लेकिन इसी भारतीयकरण की वजह से मैंने चाइनीज, थाई खाने को भारत में खाना बंद कर दिया। पित्जा कुछ हद तक अभी भी मूल ईटालियन स्वाद में मिलेगा लेकिन पास्ता, स्पेघेटी नहीं!


3.पूर्वी एशियाई भोजन जैसे थाई, मलेशियन, वियतनाम, कोरीयन खाना स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छे होते है। एक तो अधिकतर खाना उबला हुआ या भाप में पकाया हुआ होता है, तेल न्यूनतम होता है। दूसरा खाने की मात्रा में 60-70% भाग सब्जी, प्रोटीन होता है, बाकी कार्बोहायड्रेट (चावल/नूडल) होता है। सामान्यत: आपको किसी भी व्यंजन के साथ आपको चावल/नूडल मिलेगा, व्यंजन पूरी प्लेट भर होगा, चावल या नूडल एक छोटी कटोरी में सहायक भाग के रूप में मिलेगा। भारतीय खाने के ठीक उल्टा जिसमें चावल/रोटी मुख्य भाग और सब्जी सहायक भाग है।


4. मध्य एशियायी खाने में अधिकतर व्यंजन तंदूरी होते है, भूना तंदूरी मांस और कार्बोहायड्रेट (खबूस, रोटी, खुसखुस ) से भरपूर।


5. इटालीयन खाना चीज से भरपूर होता है, पाश्ता, पित्जा , स्पेघेटी मे ढेर सा कार्बोहायड्रेट होता ही है।


6.फ़्रेंच खाने में मक्खन की भरमार होती है। अधिकतर व्यंजन मिठास लिये होते है।


8. मेक्सीकन खाने में मेक्सीकन रोटी(टोर्टीया, टैको, नाचो) में लपेटकर चावल, मांस, बीन(राजमा के जैसे), सब्जी और चीज होती है, साथ में कुछ सास होते है। खाना तीखा होता है।


9. मंगोलियन खाना एक ही बार खाया है, उसमें मुझे खाने की कच्ची सामग्री, चावल, नूडल, सब्जियाँ, सास को एक प्लेट में चुन कर एक तवे पर सेंकने देना था। आपके सामने सब सामग्री को मिलाकर सास मिलाकर एक तवे पर पका कर दिया जाता है।


10.विश्व प्रसिद्ध जापानी सुशी मुझे पसंद नहीं आयी। चावल मे लपेटी कच्ची मछली खाना पसंद नहीं आया। बाकी व्यंजन ठीक ठाक लगे।


11. अमरीकन खाने के नाम पर बर्गर और तले हुये चिप्स या भूना/तला मांस ही होता है।


12.भारतीय खाना तो हर पचास किमी पर बदल जाता है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक का खाना पसंद आया , केवल केरल का मलयाली खाना नहीं। मलयाली खाना पसंद ना आने का एक मात्र कारण नारियल तेल, पता नहीं क्यों खा ही नहीं पाता!

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