---प्रायोजक---

---***---

रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु लघुकथाएँ आमंत्रित हैं.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ [लिंक] देखें. आयोजन में अब तक प्रकाशित लघुकथाएँ यहाँ [लिंक] पढ़ें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

फ़िल्म समीक्षा / दे रेवीनेंट (मौत के मुंह से वापि‍सी) / परितोष मालवीय

साझा करें:

मनुष्‍य क्‍यों ईश्‍वर की सर्वश्रेष्‍ठ रचना है, इसका अनुभव हाल ही में कुछ ऑस्‍कर पुरस्कार प्राप्‍त करने वाली फि‍ल्‍म ‘‘द रेवीनेंट’’ को देखकर...

image

मनुष्‍य क्‍यों ईश्‍वर की सर्वश्रेष्‍ठ रचना है, इसका अनुभव हाल ही में कुछ ऑस्‍कर पुरस्कार प्राप्‍त करने वाली फि‍ल्‍म ‘‘द रेवीनेंट’’ को देखकर सहज ही हो जाता है। यह फि‍ल्‍म आपको एक ऐसे लोक में ले जाती है, जो आज की दुनि‍या से जुदा सा होते हुए भी पहचाना सा है। दरअसल यह कथा उस काल की है जब मनुष्‍य शनै:-शनै: सभ्‍य हो रहा था। हालाकि‍ इस बात पर बहस की जा सकती है, कि‍ आज की सभ्‍यता को मनुष्‍य का सभ्‍य होना कहा जाये या वहशीपन।

अलेजेन्‍द्रो द्वारा नि‍र्देशि‍त और लि‍योनार्दो द कैप्रि‍यो द्वारा अभि‍नीत इस फि‍ल्‍म का कथानक सन 1823 के आसपास का है तथा उत्‍तरी अमेरि‍का महाद्वीप स्‍थि‍त मि‍सीसि‍पी नदी के घने-पर्वतीय जंगलों में अमेरि‍की शि‍कारी समूहों और उस इलाके की मूल जनजाति‍यों के बीच हुए खूनी संघर्षों पर केन्‍द्रि‍त है। परंतु इस फि‍ल्‍म का संदेश यहीं तक सीमि‍त नहीं है। जि‍स तरह से इसे फि‍ल्‍म को रचा गया है, वह इसे बहुआयामी बना देता है। इसका फि‍ल्‍मांकन आपको भीतर तक झकझोरता भी है, डराता भी है और संवेदनाओं में डुबो भी देता है। इसमें डूबते-उतराते हुए आप ऐसे अनेक पहलुओं से दो-चार होते हैं जो आपको पूरी तरह बांधे रखते हैं और आप अपलक स्‍वयं को इस फि‍ल्‍म का हि‍स्‍सा पाते हैं।

यह कहानी है मनुष्‍य की श्रेष्‍ठता की, उसकी जि‍जीवि‍षा की, पि‍ता-पुत्र के परस्‍पर नैसर्गि‍क प्रेम की, मनुष्‍य के स्‍वार्थ और लालच की, उसके मन में पल रही बदले की आग की। यह कहानी है प्रकृति‍ के सौंदर्य और उसकी संहारक क्षमता की, मनुष्‍य और प्रकृति‍ के सह-अस्‍ति‍त्‍व की, जनजाति‍यों और तथाकथि‍त वि‍कसि‍त समाजों के मध्‍य मूल्‍यों के अंतर और उनके संघर्ष की। जहां एक ओर यह कहानी है स्‍त्री के प्रति‍ पुरुष के वहशि‍याने रवैये की, वहीं दूसरी ओर स्‍त्री के प्रेम और कोमल स्‍पर्श के लि‍ए तड़पते पुरुष की। यह कहानी है बाजार की नि‍र्ममता और प्राकृति‍क संसाधनों के दोहन की।................ यहां तक कि‍ ईसाई धर्म की एक प्रमुख मान्‍यता ‘Revenge is in the Creator's hands’ यानि‍ ‘बदला लेना ईश्‍वर के हाथ में है’ को भी इस फि‍ल्‍म में वि‍शेष रूप से चि‍त्रि‍त कि‍या गया है।

यह फि‍ल्‍म मूलत: एक अमेरि‍की नि‍वासी शि‍कारी हग ग्‍लास (1783-1833) के जीवन और उसके अनुभवों पर अमेरि‍की उपन्‍यासकार माइकल पंक के उपन्‍यास ‘द रेवनेंट’ पर आधारि‍त है। इस तरह यह फि‍ल्‍म काल्‍पनि‍क नहीं है। फि‍ल्‍म में दि‍खाया गया है कि‍ कैप्‍टन ऐंड्रयू हेनरी के नेतृत्‍व में शि‍कारि‍यों का समूह, जि‍नके पास हथि‍यार के नाम पर भरमार बंदूक, गन पाउडर और खंजर ही हैं, उत्‍तरी अमेरि‍का की मि‍सीसि‍पी नदी के उदगम क्षेत्र के आसपास के घने जंगलों में जानवरों की खालों और फर को हासि‍ल करने के लि‍ए गया हुआ है। इस फि‍ल्‍म में मि‍सीसि‍पी और उसके इलाके के बेजोड़ दृश्‍यों का फि‍ल्‍मांकन प्राकृति‍क रोशनी में ही कि‍या गया है। फि‍ल्‍म का नायक हग ग्‍लास और उसका कि‍शोरवय पुत्र ‘हॉक’, जो कि‍ उसकी मृत जनजातीय पत्‍नी की एकमात्र नि‍शानी है, भी इस समूह का हि‍स्‍सा हैं। पर्वतीय जंगलों में पाये जाने वाले जानवरों की खालों और फर को हासि‍ल करना ही उनके जीवन का परम लक्ष्‍य है। इस शि‍कारी समूह पर स्‍थानीय अरि‍कारा जनजाति‍ के आदि‍वासी भीषण हमला करते हैं। आदि‍वासी इसलि‍ए भी वि‍शेष रूप से नाराज़ हैं क्‍योंकि‍ उनके मुखि‍या की लड़की को ऐसा ही कोई शि‍कारी समूह दैहि‍क शोषण के लि‍ए अगवा कर ले गया है। इस भीषण हिंसक हमले में 30 से ज्‍यादा शि‍कारी मारे जाते हैं तथा हग ग्‍लास, उसका पुत्र, कैप्‍टेन हेनरी तथा कुछ अन्‍य शि‍कारी जैसे – तैसे बच नि‍कलने में कामयाब होते हैं। अनुभवी हग ग्‍लास उन बचे खुचे 09 शि‍कारि‍यों से कहता है कि‍ नाव के रास्‍ते भागने के बजाय पैदल चलकर बेस कैंप फोर्ट कायोबा सकैंप े के लि‍ए छोउोउ़शुरू कद तक पहुंचना अधि‍क सुरक्षि‍त है। वे दुर्गम पहाड़ी रास्‍ते पर खालों के बोझ को उठाये हुए अपनी यात्रा आरंभ करते हैं। दुर्भाग्‍य से हग ग्‍लास पर एक जंगली क्रोधि‍त मादा भालू भीषण हमला कर देती है तथा उसे चीरफाड़ कर मरणासन्‍न कर देती है परंतु हग ग्‍लास उसे भी मारने में कामयाब हो जाता है। इस दृश्‍य का फि‍ल्‍मांकन इतना सजीव है कि‍ कमजोर हृदय के लोग दहल जायेंगे। शेष सदस्‍य हग ग्‍लास को स्‍ट्रेचर पर लेकर फि‍र चढ़ाई शुरू कर देते हैं, हालाकि‍ मरणासन्‍न ग्‍लास को ढोना एक अन्‍य शि‍कारी फि‍ट्जि‍राल्‍ड को बि‍ल्‍कुल नहीं भाता। वह अन्‍य कैप्‍टन और सदस्‍यों से उसे मरने के लि‍ए छोड़ देने के लि‍ए कहता है ताकि‍ शेष लोग सकुशल बेसकैंप पहुंच सकें। लेकि‍न धार्मिक वि‍चारों वाला कैप्‍टन उसे घायल अवस्‍था में जंगल में छोड़ने को तैयार नहीं है। वह अन्‍य शि‍कारि‍यों को अति‍रि‍क्‍त धन देने का प्रस्‍ताव देता है तो ग्‍लास का पुत्र हॉक, इसका मि‍त्र जि‍म ब्रि‍डजर और लालची फि‍ट्जि‍राल्‍ड तैयार हो जाते हैं। कैप्‍टन यह कहकर आगे नि‍कल जाता है कि‍ वे ग्‍लास की मौत होने पर बाकायदा उसका अंति‍म संस्‍कार करके ही लौटें।

जि‍स समय ब्रि‍डजर पानी लेने के लि‍ए गया होता है, फि‍ट्जि‍राल्‍ड मरणासन्‍न और लाचार ग्‍लास को मारने का प्रयत्‍न करता है परंतु हॉक देख लेता है। वह अपने पि‍ता को बचाता है परंतु फि‍ट्जि‍राल्‍ड उसे ही मार देता है। लाचार ग्‍लास अपने प्रि‍य पुत्र को मरते हुए देखता है और इस दृश्‍य में लि‍योनार्डो द कैप्रि‍यो ने बेजोड़ अभि‍नय कि‍या है। ब्रि‍डजर के लौटने पर वह मनगढंत कहानी सुना कर यह कहता है कि‍ हॉक गायब है तथा आदि‍वासी जल्‍द ही उन लोगों को खत्‍म कर देंगे। वह एक कब्र खोदकर ग्‍लास को जिंदा ही दफना देना चाहता है परंतु दयालु ब्रि‍डजर उसे अपने हाल पर ही छोड़ देने का अनुरोध करता है। वे दोनों वहां से चले जाते हैं।

मरणासन्न और जख्‍मी ग्‍लास कि‍सी तरह घि‍सट कर पास ही मृत पड़े अपने पुत्र हॉक के पास पहुंचता है तथा उसके सीने पर सि‍र रखकर उससे कहता है कि‍ ‘मैं अब भी तुम्‍हारे पास हूं’। परंतु वह जीवि‍त नहीं बचता। अब ग्‍लास के जीने का एक ही उद्देश्‍य है फि‍ट्जि‍राल्‍ड को दंड देना। बदले की यह आग उसे नयी ऊर्जा देती है तथा वह कई दि‍नों तक घि‍सटता रहता है। अपने जीवन के उद्देश्‍य को हासि‍ल करने के लि‍ए वह स्‍वस्‍थ भी होने लगता है। इस दौरान खौफनाक जंगल में अपने अस्‍ति‍त्‍व को बचाये रखने के लि‍ए वह मृत पशुओं को मांस खाता है। इस जगह पर फि‍ल्‍म हमें बताती है कि‍ संकट और भूख के समक्ष आपकी सारी मान्‍यतायें धरी की धरी रह जाती हैं। जंगल में फंसा इंसान जानवरों की तरह आचरण करके ही जीवि‍त रह सकता है।

अपने मार्ग में उसकी मुलाकात एक अकेले आदि‍वासी ‘हि‍कक’ से होती है जो उसे भैंसे का मांस खाने को देता है। भैंसे के मांस को खाने के दृश्‍य का चि‍त्रण भी बड़ा वीभत्‍स है। हि‍कक उसे बताता है कि‍ उसी की तरह के एक शि‍कारी ने उसके परि‍वार और कबीले की हत्‍या कर दी थी तथा वह अब अकेला है। वह ग्‍लास से कहता है कि‍ वह बदला लेना नहीं चाहता क्‍योंकि‍ ‘बदला लेना ईश्‍वर के हाथ में है’। वह उसका उपचार करता है तथा अपने घोड़े पर आगे की यात्रा कराता है। एक तूफान में वे फि‍र फंस जाते हैं। ठंड से कांपते बेसुध ग्‍लास के लि‍ए वह आदि‍वासी आग जलाता है तथा झोपड़ी बनाता है। दूसरे दि‍न होश आने पर ग्‍लास यह पाता है कि एक अन्‍य शि‍कारी समूह ने हि‍कक की हत्‍या कर दी है और उन्‍हीं के पास अरि‍कारा जनजाति‍ के आदि‍वासी कबीले के मुखि‍या की लड़की पबाका है। वह पबाका को बलात्‍कार होने से बचाता है। इतने में आदि‍वासी फि‍र हमला कर देते हैं तथा वह कि‍सी तरह हि‍कक का घोड़ा लेकर भागता है। वह घोड़ा समेत एक खाई में गि‍र जाता है। फि‍र बर्फबारी शुरू हो जाती है। ठंड से बचने के लि‍ए वह मृत घोड़े के पेट से मांस नि‍कालकर उसके मृत शरीर में रात गुजारता है। वह इसी तरह प्रकृति‍ से संघर्ष करते हुए अपना अस्‍ति‍त्‍व बचाये रखता है। उधर फि‍ट्जि‍राल्‍ड और ब्रि‍डजर अपने बेस कैंप तक पहुंच जाते हैं। फि‍ट्जि‍राल्‍ड कैप्‍टन हेनरी को बताता है कि‍ ग्‍लास मर गया था और हॉक लापता हो गया था। वह ग्‍लास को दफनाकर ही आया है। हेनरी उन्‍हें पुरस्‍कार देता है।

इस बीच एक अन्‍य घायल शि‍कारी उस बेसकैंप पहुंचता है जि‍सके पास ब्रि‍डजर की वही बोतल होती है जो वह ग्‍लास के पास छोड़कर आया था। वे उससे पूछते हैं कि‍ यह बोतल उन्‍हें कहां मि‍ली थी। उस शि‍कारी की नि‍शानदेही पर वे सभी ग्‍लास को ढूंढने के लि‍ए फि‍र से जंगल में प्रवेश कर जाते हैं। उन्‍हें ग्‍लास मि‍ल जाता है। वे उसे बेसकैंप वापस लाते हैं। तब तक फि‍ट्जि‍राल्‍ड भाग जाता है। ग्‍लास हेनरी को बताता है कि‍ उसके जीवि‍त बचे रहने का एक ही उद्देश्‍य है - फि‍ट्जि‍राल्‍ड को सजा देना। वे दोनों फि‍ट्जि‍राल्‍ड की तलाश में बर्फीले जंगल की ओर प्रस्‍थान करते हैं। धूर्त फि‍ट्जि‍राल्‍ड, हेनरी को मार देता है पर ग्‍लास चतुराई से फि‍ट्जि‍राल्‍ड पर काबू पा लेता है। वह उसे मारने वाला ही होता है कि‍ नदी के उस ओर वह आदि‍वासी कबीले के मुखि‍या, पबाका और अन्‍य आदि‍वासि‍यों को देखता है। तभी उसे अपने मि‍त्र हि‍कक की बात याद आती है कि‍ ‘बदला लेना ईश्‍वर के हाथ में है’। वह उसे नदी में बहा देता है। नदी के दूसरी ओर खड़े आदि‍वासी उसे मार डालते हैं परंतु ग्‍लास को जीवनदान दे देते हैं क्‍योंकि‍ पबाका अपने रक्षक को पहचान लेती है। इस तरह फि‍ल्‍म अपने अंत तक आ पहुंचती है। अंति‍म दृश्‍य में ग्‍लास को अपनी मृत पत्‍नी को देखता है। ओझल होने के पूर्व पहली बार वह उसे मुस्‍कराते हुए देखता है।

इस फि‍ल्‍म में बेजोड़ अभि‍नय के लि‍ए लि‍योनार्डो द कैप्रि‍यो को सर्वश्रेष्‍ठ अभि‍नय के लि‍ए ऑस्‍कर पुरस्‍कार प्रदान कि‍या गया है। यह एक ऐसी फि‍ल्‍म है जो प्रत्‍येक संजीदा व्‍यक्‍ति‍ को पसंद आयेगी, यद्यपि‍ फि‍ल्‍म में प्रदर्शित हिंसक दृश्‍य कुछ लोगों को अरुचि‍कर लग सकते हैं। इस फि‍ल्‍म के लि‍ए ऑस्‍कर जीते लि‍योनार्डो ने भी ‘हग ग्‍लास’ के समान ही कई चुनौति‍यों का सामना कि‍या। इस फि‍ल्‍म की शूटिंग की दास्‍तान भी कम रोमांचकारी नहीं है। इसकी ज्‍यादातर शूटिंग अल्‍ब्राटा, कनाडा के बर्फीले इलाके में हुई है जहां तापमान माइनस 300सेंटीग्रेड तक जाता है। लि‍योनार्डो ने न केवल इतने बर्फीले तापमान में शूटिंग की वरन भैंसे के लीवर के कच्‍चे मांस को खाने का दृश्‍य भी स्‍वयं कि‍या है। उल्‍लेखनीय है कि‍ लि‍योनार्डो ने 1992 के बाद से मांसाहार त्‍याग दि‍या था। परंतु इस फि‍ल्‍म में भैंसे के लीवर को कच्‍चा चबाने का दृश्‍य उन्‍होंने बेझि‍झक कि‍या।

इस तरह ‘द रेवीनेंट’ हमें बताती है कि‍ मनुष्‍य की कोई सीमा नहीं है। फि‍ल्‍म अपनी शुरुआत में ही यह संदेश देती है कि‍ हमें अपनी आखि‍री सांस तक प्रयत्‍न करते रहना चाहि‍ए।

- डॉ. परि‍तोष मालवीय

-05 मार्च 2016

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3864,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2811,कहानी,2136,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,489,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,348,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,18,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,862,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,24,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1932,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,659,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,703,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,61,साहित्यम्,2,साहित्यिक गतिविधियाँ,186,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,69,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: फ़िल्म समीक्षा / दे रेवीनेंट (मौत के मुंह से वापि‍सी) / परितोष मालवीय
फ़िल्म समीक्षा / दे रेवीनेंट (मौत के मुंह से वापि‍सी) / परितोष मालवीय
https://lh3.googleusercontent.com/-cWAXhBNTOQU/VuPHf_yZyCI/AAAAAAAAsQU/HXqDll_Zdd0/image_thumb.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-cWAXhBNTOQU/VuPHf_yZyCI/AAAAAAAAsQU/HXqDll_Zdd0/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2016/03/blog-post_72.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2016/03/blog-post_72.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ