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बाल कहानी - बंटवारा ( दो के बीच तीन का) / गोवर्धन यादव

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एक गांव में एक निर्धन ब्राह्मण रहता था. धन-संपत्ति के मामले में उसके पास एक गाय, एक कम्बल और एक नारियल का पेड़ था. अपना अन्तिम समय जानकर उसने अपने दोनों बेटॊं को बुलाया और कहा-’ मेरे मरने के बाद तुम दोनों इन तीन चीजों को आपस में आधा-आधा बांट लेना”. इतना कहकर उसने अपने प्राण त्याग दिए.

दोनों भाई इस बात पर गहन मंत्रणा करते रहे कि आखिर इन तीन चीजों को दो के बीच कैसे बांटा जाए?. यदि गाय को आधा करते हैं तो गाय मर जाएगी. कम्बल को आधा करते हैं तो उसे ढंग से ओढ़ भी नहीं पाएंगे और पेड़ को आधा करते हैं तो पेड़ में फ़ल कैसे लगेंगे ? इस बात पर कोई ठोस निर्णय नहीं निकल पाया.

बड़ा लड़का जरुरत से ज्यादा होशियार और चालाक था. छॊटा निहायत ही सीधा-सादा. बडे ने छोटे को सलाह देते हुए कहा कि गाय को हम दो हिस्सों में बांट लेते हैं. दिन में गाय के मुँह वाला हिस्सा तुम्हारा और रात को पीछे वाला हिस्सा मेरा रहेगा. छोटे ने सलाह मान लिया. वह दिन भर गाय को चराने ले जाता, उसे पानी पिलाता. शाम को जैसे ही गाय घर आती, बड़ा उसका दूध दोहता और पेट भर पीकर आराम से सो जाता.

एक दिन तंग आकर छॊटॆ ने अपने पड़ौस के एक बुजुर्ग से अपना दुखड़ा रोते हुए बतलाया कि शर्त के अनुसार वह गाय को दिन भर चराने ले जाता है और शाम को उसका बड़ा भाई दूध दोहकर पी जाता है. मांगने पर कहता है कि शर्त के अनुसार गाय के पिछले हिस्से पर उसका अधिकार है. इस तरह वह उसे दूध देने से इनकार कर देता है. ऎसे कठिन समय में मुझे क्या करना चाहिए?

बुजुर्ग ने काफ़ी देर तक सोच-विचार के बाद उसके कान में चुपके से सलाह बतला दी.

शाम तो जैसे ही उसका बड़ा भाई दूध दोहने बैठा, उसने एक छड़ी उठाकर गाय के मुँह पर मारना शुरु कर दिया. गाय बिदकी और उसने इधर-उधर पैर चलाने शुरु कर दिए. बिदकी गाय से दूध दोहना उसके लिए मुश्किल होने लगा. बडे ने उसे ऎसा करने से मना किया तो उसने पलटकर जवाब दिया कि गाय के मुँह वाला हिस्सा उसका है, वह चाहे जो करे.

बड़े ने हथियार डालते हुए कहा- अच्छा भाई, आज से मैं आधा हिस्सा तुमको भी दे दिया करुंगा और गाय को चराने में मदद भी करता रहूंगा.

बड़ॆ भाई के मन से बेईमानी की बू अब तक नहीं गई थी. छोटा दिन भर अपने कंधों पर कम्बल का बोझ उठाए घूमता रहता था. सर्दी के दिन आ गए. जैसे ही रात होती, बड़ा उसे अपने कब्जे में ले लेता और ओढ़कर आराम से सो जाता. छोटा बेचारा रात भर ठंड मे ठिठुरता रहता.

एक दिन वह फ़िर उस बुजुर्ग के पास जा पहुँचा और अपना दुखड़ा कह सुनाया. बुजुर्ग ने उसके कान में चुपके से सलाह बतला दी.

दूसरे दिन उसने कम्बल को पानी में भिंगो दिया. रात होते ही बड़े ने अपना कम्बल मांगा. उसने तत्काल दे दिया. भिंगा कम्बल पाकर क्रोधित होते हुए बड़े ने कहा= तुमने ये क्या किया? कम्बल पानी में भिंगो दिया? छोटॆ ने तत्काल जवाब देते हुए कहा- मेरी मर्जी. दिन में मैं इसका मालिक हूँ. तुमने तो इसे मैला कर दिया था. मैंने इसे धो डाला और अब रोज इसे धोया करुंगा.

बडे की यह दूसरी हार थी. उसने छोटॆ के समझाते हुए कहा-“भाई, इसे पानी में न भिंगोना. हम दोनों मिल कर इसे ओढेंगे, ताकि न तुम्हें सर्दी लगे, न मुझे.

अब तीसरी और अन्तिम वस्तु रह गई थी, वह था नारियल का पेड़. बडे के मन में अब भी बेईमानी भरी हुई थी. छोटा रोज उस पेड़ को पानी पिलाया करता था. जब उस पेड़ में फ़ल लगने लगे तो बड़ा आराम से पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ता और पेट भर खाता..छोटे भाई ने उसमें अपना हिस्सा मांगा तो उसने पलटकर कहा-“ शर्त के मुताबिक पेड़ के नीचे का हिस्सा तुम्हारा है और पेड़ के ऊपर का मेरा. मैं चाहे जो करुं, तुम अधिकार जताने वाले कौन होते हो?. छोटा बेचारा मन मसोस कर रह जाता.

एक दिन फ़िर वह उस बुजुर्ग के पास पहुंचा और अपना दुखड़ा कह सुनाया. बुजुर्ग ने चुपके से उसे उपाय बतला दिया.

जैसे ही बड़ा भाई पेड़ पर चढ़कर नारियल तोड़ने लगा, उसके कुल्हाड़ी उठाकर काटना शुरु कर दिया. बड़े ने चिल्लाते हुए कहा-“ ये तुम क्या कर रहे हो? पेड़ कटने से मैं गिर जाउंगा. हो सकता है, मेरे हाथ-पैर टूट जाएं?.

छोटे ने जवाब देते हुए कहा-“ शर्त के मुताबिक पेड़ के नीचे वाला हिस्सा मेरा है. मैं उसे पानी पिलाउं या फ़िर उसे काटूं, तुम रोकने वाले कौन होते हो?

बड़े को अब अपनी जान खतरे में नजर आयी. उसने माफ़ी मांगते हुए कहा-“ अपने हाथ रोक लो मेरे भाई. आज के बाद से मैं तुम्हें धोका नहीं दूंगा”.

बड़े भाई ने अपना वचन निभाया. इसके बाद उसने अपने छॊटॆ भाई को फ़िर कभी धोका नहीं दिया और न ही कभी उससे बेईमानी की.

--

-- गोवर्धन यादव

103 कावेरी नगर ,छिन्दवाडा,म.प्र. ४८०००१
07162-246651,9424356400

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