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बाल कलम / जानवर हमारे मित्र / सार्थक देवांगन

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एक छोटा सा गांव था । वहां के दो बच्चे जिनका नाम चून्नू और मून्नू था , वो जंगल की तरफ घूमने निकले । दोनों बच्चे फल-फूल लेकर जा रहे थे। तभी उनकी मुलाकात उनके मित्र और उनके दादाजी से हुई। दादाजी ने पूछा कि,बच्चों आज तुम लोग विद्यालय नहीं गए ? बच्चों ने कहा – नहीं दादाजी आज हमारी छुट्टी है ।

फिर दादाजी और बच्चे जाकर एक पेड के नीचे बैठकर फल खाने लगे , तभी एक बंदर आया और एक बच्चे के हाथ से सेब छीनकर ले गया । तब वह बच्चा रोने लगा , फिर बच्चे ने उस बंदर को मारने के लिए पत्थर उठा लिया । मित्र के दादाजी ने उसे रोका और कहा कि हमें जानवरों को नहीं मारना चाहिए। बच्चों ने पूछा क्यों दादाजी ? दादाजी ने कहा क्योंकि बंदर भी जीव है उसे भी दर्द होता है , और फिर जानवर हमारे लिए उपयोगी और मददगार भी तो होते है । बच्चों ने कहा कैसे ? फिर दादाजी ने बताया कि जिस सेब को तुम खाने जा रहे थे वह सड़ा हुआ था , जिसे बंदर ने तुमसे छीनकर तुम्हारी ही रक्षा की । इस तरह जानवरों का महत्व बच्चों को समझाया और कहा ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌कि वादा करो कि कभी जानवरों को नहीं मारोगे और ना ही मारने दोगे । बच्चों ने कहा – हां दादाजी हम आपकी बात मानेंगे। फिर दादाजी और बच्चे वापस गांव चले गये। और तभी से बच्चों ने कभी जानवरों को नहीं मारा ।

फिर दो दिन बाद वह बच्चे फिर से जंगल की तरफ गये । बच्चों ने देखा कि वहां पर एक कुत्ते का बच्चा गड्ढे में गिर गया है । उन्होंने उस कुत्ते के बच्चे को बाहर निकाला और उसके चोट पर मरहम पट्टी की । जिन - जिन लोगों को जानवरों को मारते हुए देखा तब , उनको अपने साथ घटी घटना को बताते हुए कहा कि ये हमारे रक्षक हैं , आप लोग हमें वादा करो कि जानवरों को नहीं मारोगे । गांव में और भी बहुत से लोग थे , जिन्हें जानवरों का महत्व पता नहीं था । उन्हें बताने के लिए वो अपने गांव के सरपंच के पास गये और कहा कि सरपंच जी हमारे गांव में कई लोग जानवरों का महत्व नहीं जानते है । सरपंच जी ने कहा हां ये तो है । बच्चों ने कहां तो हमें यहीं बात पूरे गांव वालों को बताना है । सरपंच जी ने कहा पर कैसे बच्चों ने कहा क्यों ना हम गांव में सभी लोगों को इकट्ठा कर के उन्हें बताये कि जानवरों का क्या महत्व है । सरपंच ने कहा ठीक है फिर बच्चों ने घर ‌- घर जा कर बताया कि आज दोपहर को सभी लोगों को चौराहे के पास आना है । सभी लोग वहां आये फिर सरपंच जी भी आए । लोगों ने कहा - क्या हुआ सरपंच जी , आपने हमें क्यों बुलाया ? सरपंच जी ने गांव वालों को बच्चों के साथ घटी घटना को बताते हुए , जानवरों का महत्व समझाया और कहा कि अब से कोई भी जानवरों को नहीं मारेगा । गांव वालों ने उस दिन से किसी भी जानवर को नुकसान नहीं पहुंचाया ।

सार्थक देवांगन

११ वर्ष

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