---प्रायोजक---

---***---

रु. 25,000+ के  नाका लघुकथा पुरस्कार हेतु लघुकथाएँ आमंत्रित हैं.

अधिक जानकारी के लिए यहाँ [लिंक] देखें. आयोजन में अब तक प्रकाशित लघुकथाएँ यहाँ [लिंक] पढ़ें.

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

प्राची अप्रैल 2016 : कहानी / आखिर क्यों / प्रभात दुबे

साझा करें:

कहानी आखिर क्यों प्रभात दुबे र विवारीय अवकाश की खुशनुमा सुबह, गुलाबी जाड़े की कुनकुनी धूप, अपनी ही रौ में बहती हुई ठण्डी हवा का आनंद उठ...

कहानी

आखिर क्यों

प्रभात दुबे

विवारीय अवकाश की खुशनुमा सुबह, गुलाबी जाड़े की कुनकुनी धूप, अपनी ही रौ में बहती हुई ठण्डी हवा का आनंद उठाता, मैं लॉन में बैठा हुआ था. मैंने इन फुरसती क्षणों में मोबाइल ऑन किया और मीनू के ऑप्शन में जाकर माय फोटो की बटन दबाई तो सहसा प्रथम चित्र देखते ही लगा मानो जैसे अतीत के दरवाजे की कुंडी खुल गई हो. सुगंधित शीतल पवन के झोके के मानिंद रंगीन स्क्रीन पर एक बुजुर्ग दम्पत्ति का मुस्कुराता हुआ चेहरा उभर आया. स्मृति पटल पर पल भर में ही सारा घटनाक्रम साकार हो उठा.

यह उस वक्त की बात थी, जब मैं लंबी रेल यात्रा पर था और द्वितीय श्रेणी के स्लीपर कोच में ऊपर की बर्थ पर गहरी नींद में निमग्न था. अचानक लोगों के कोलाहल से मेरी नींद खुली. मैंने धीरे से अपनी पलकें खोलीं. लेटे-लेटे ही अंगड़ाई ली. आहिस्ते से अपने चेहरे पर ढकी चादर को अलग किया. सुबह का उजाला बाहर ही नहीं कोच के अन्दर भी था. तभी तेज हवा का गर्म झोंका मेरे चेहरे से आ टकराया. तब मुझे लगा कि जैसे मैं गंदे, लंबी अवधि से जमा किसी विशाल कचरे के ढेर से निकलती तेज, असहनीय दुर्गन्ध की परधि में हूं.

‘भाई साहब यह कौन सा स्टेशन है?’ मैंने खिड़की के समीप बैठे नवयुवक से पूछा.

उसने बेरुखी से इन्कार में हल्का सा सर हिलाया और गुस्से से झुझंलाते हुए कांच की खिड़की को खोल दिया. लगता था वह भी इस असहनीय दुर्गन्ध से परेशान है. मैं सम्हल कर नीचे उतरा. जैसे ही मैंने चप्पलों को अपने पैरों में डाला, तभी उसकी आवाज मेरे कानों से आ टकराई. वह मुझे ही संबोधित कर कह रहा था-‘सर, आप कहां जा रहे हैं?’

मैंने आश्चर्य चकित होकर कहा-‘टायलेट, क्यों?’

‘कुछ नहीं सर, मैं यह कहने वाला था कि आप टायलेट न ही जाये तो बेहतर होगा?’

उसके इस प्रश्न ने मुझे हैरान कर दिया.

मैने उससे पूछा-‘ क्यों?’

उसने मेरे प्रश्न के जवाब में मुझसे ही प्रश्न पूछ लिया-‘सर, क्या आपको तेज बदबू का अहसास नहीं हो रहा है?’

‘हां, हो तो रहा है.’

उसने मेरी जानकारी में इजाफा करते हुए कहा-‘ सर, यह दुर्गन्ध इसी कोच के सभी शौचालयों से आ रही है. लगता है कई दिनों से इन शौचालयों पर रेलवे कर्मचारियों की नजर नहीं पड़ी है. इनमें इतनी गंदगी है कि मैं आपको बता भी नहीं सकता और एक दो शौचालय तो ऐसे भी है जिनकी गंदगी में मरे हुए चूहे सड़ांध मार रहे हैं.’

वह कुछ और कहता कि तभी एक तेज लंबी विसिल के साथ ही धीरे-धीरे ट्रेन ने चलना प्रारंभ किया और कुछ पलों बाद ही उसने अपनी वही पुरानी तेज रफ्तार पकड़ ली. ट्रेन की गति बढ़ते ही गर्म थकी-थकी सी हवा में दुर्गन्ध की कुछ तो कमी हुई थी लेकिन अभी भी दुर्गन्ध का अहसास हो रहा था. मैं अपनी बर्थ पर जाने ही वाला था कि उसने फिर कहा -‘सर, जब से मैं इस कोच में आया हूं, तब से इस तीखी दुर्गन्ध के कारण मेरे सर में दर्द सा होने लगा है. हमारा रेलवे विभाग रेल यात्रियों से करोड़ों रुपया किराये के रूप में वसूलता तो है लेकिन यात्रियों की

सुविधाओं की ओर बिलकुल ध्यान नहीं देता. होना यह चाहिये कि जिस व्यक्ति को सरकार ने जो कार्य सौंपा है, जिसका वे वेतन पाते हैं उसे कम से कम वह कार्य तो ईमानदारी से करना ही करना चाहिये.’

वह कुछ और कहने वाला था कि मैंने उससे कहा-‘आपका परिचय?’

उसने बताया-‘सर, मैं मध्य प्रदेश के छोटे से जिले की सत्ताधारी पार्टी का सरपंच हूं. प्रदेश से प्रकाशित होने वाले

सांध्य अखबार का संपादक भी हूं. दिल्ली के मंत्रालय में कुछ व्यक्तिगत काम है, और कुछ राजनेताओं से भी मिलना है. इसलिये दिल्ली जा रहा हूं.’

मैं समझ चुका था कि यह नवयुवक स्वभाव से बातूनी है इसलिये मैं उसकी देश विदेश, घर गांव की बातें सुनता रहा. तभी किसी छोटे से रेलवे स्टेशन पर ट्रेन कुछ पलों के लिये ठहरी और दो तीन मिनिट पश्चात् ही वह फिर तेज गति से अपनी मन्जिल की ओर बढ़ने लगी.

कुछ क्षणों पश्चात् हमारे कोच में एक बुजुर्ग ग्रामीण दम्पत्ति भीड़ में सीट तलाशते हुए मेरे सामने आ खड़े हुए. मैं उनके हाव भाव, सलीके से, उनके स्वच्छ पहिने हुए परिधानों से मन ही मन अनुमान लगा रहा था कि ये दोनों संस्कारयुक्त, आदर्श भारतीय परम्पराओं का निर्वाह करने वाले दम्पति होना चाहिये. बुजुर्ग ने मेरी ओर देखते हुए खाली बर्थ की ओर दाहिने हाथ से संकेत करते हुए पूछा-‘क्या यह बर्थ खाली है, यदि आप कहें तो हम यहां बैठ जाये.’

मैने कहा-‘हां-हां क्यों नहीं, आप आराम से बैठिये.’

उस बुजुर्ग दम्पत्ति के बदन पर मोटी खादी के ही साफ सुंदर धुले कपड़े, पैरों में खादी आश्रम की साधारण चप्पलें और कांधे पर ही खादी का एक थैला टंगा हुआ था. मैं सोच रहा था कि बुजुर्ग व्यक्ति की आयु अस्सी-बियासी वर्ष के आसपास और महिला की आयु उनसे कुछ बरस कम होना चाहिये. वे दोनों अभी भी कद काठी से काफी मजबूत दिखलाई दे रहे थे. प्रथम दृष्टि में वे मुझे बहुत ही भले लगे. बर्थ पर बैठने के बाद महिला ने क्षण भर के लिये सभी को देखा. इसके उपरांत उस बुजुर्ग से

धीमे स्वर में कहा-‘क्या आपको दुर्गन्ध आ रही है?’

‘हां, आ तो रही है.’ बुजुर्ग ने सरलता से कहा.

‘यह दुर्गन्ध कहां से आ रही है और किस चीज की है?’ बुजुर्ग ने मुझसे मुखातिब होकर पूछा.

मैं कोई जवाब दे पाता कि तभी उस नवयुवक ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा-‘यह दुर्गन्ध कोच के सभी चारों टायलेटों से आ रही है जिसके कारण पूरे कोच के लोग जब से ट्रेन चली है तभी से परेशान हैं. मैंने टायलेट साफ न होने की शिकायत कोच के टी.सी. और रास्ते में आने वाले कुछ रेलवे स्टेशन मास्टरों से भी की थी, किन्तु अभी तक कोई सफाई कर्मचारी इन टायलेटों को साफ करने के लिये नहीं आया है. न जाने क्या होता जा रहा है हमारे देश के कर्मचारियों और अधिकारियों को, कोई किसी की सुनता ही नहीं. पूरे देश में हिमालय से लेकर कन्या कुमारी तक अराजकता सी फैली हुई है. हम रेल यात्रियों की पीड़ा न तो कोई सुनने वाला है, न देखने वाला. यदि आज ट्रेन में अधिक भीड़ नहीं होती तो मैं पल भर भी इस दुर्गन्ध से भरे हुए डिब्बे में बैठना पसन्द नहीं करता.’

वह युवक आक्रोशित होकर कुछ और कहता कि तभी बुजुर्ग ने धीरे से मुस्कुरा कर उसे अपने दाहिने हाथ से शांत रहने का इशारा किया और अपनी पत्नी की ओर देखा, आंखों ही आंखों में कुछ इशारा किया और तत्काल आहिस्ते से वे दोनों एक साथ उठे. बिना किसी की ओर देखे चुपचाप एक दूसरे की विपरीत दिशाओं में तेजी से चल पड़े. मैं अचंभित होकर यह सोचता रहा कि ऐसा क्या हो गया कि वे दोनों इस तरह से उठ कर चले गये.

लगभग बीस-पच्चीस मिनिट बाद वही बुजुर्ग दम्पत्ति आत्म-विश्वास से भरे हुए, सधे कदमों के साथ आकर अपने-अपने स्थान पर बैठ गये. कुछ पलों की छोटी सी खामोशी के बाद उस बुजुर्ग ने हम सभी की ओर देखते हुए गंभीर स्वर में पूछा-

‘क्या आप सभी को ऐसा नहीं लगता कि अब दुर्गन्ध समाप्त हो चुकी है?’

सभी के साथ ही मैंने भी अन्दर की ओर सांस खींची. यह सच था कि अब हवा में बिलकुल भी दुर्गन्ध नहीं थी. यह कोच के अन्य यात्रियों के साथ मुझे भी किसी चमत्कार से कम नहीं लग रहा था.

मैंने उनसे कहा-‘आप बिलकुल सही कह रहे हैं, अब

दुर्गन्ध नहीं है, लेकिन यह दुर्गन्ध समाप्त कैसे हुई?’

उन्होंने अपनी दोनों साफ सुन्दर हथेलियों को गौर से देखते हुए कहा-‘कुछ नहीं, हम पति-पत्नी दोनों ने चारों शौचालयों को अच्छी तरह से साफ कर दिया है. मरे हुए चूहों को एक पोलीथीन में भर कर उसे अच्छी तरह से बंद कर डस्टबिन में डाल दिया है. अब आप लोग चाहें तो साफ स्वच्छ दुर्गन्धहीन शौचालयों का उपयोग कर सकते है.’

यह सुन कर कई यात्री एक साथ उठे और तेजी से शौचालयों की ओर लगभग दौड़ पड़े. लेकिन मैं अपलक पत्थर बना मंत्रमुग्ध सा उन्हें देखता रहा.

उन्होंने अपनी गहरी, गंभीर, अनुभवी आंखें मेरी आंखों में डाल कर स्नेह भरे शब्दों में कहा-

‘बेटे, सभी चाहते हैं कि काम दूसरे लोग करें और हमें सारी सुविधायें सरलता से उपलब्ध होती रहें. इसीलिये हम हमेशा असुविधायें सहते हुए भी दूसरों को कोसते रहते हैं. आखिर क्यों? आखिर क्यों नहीं हम दूसरों की समस्यायों को अपनी समस्या समझ कर हल करने के लिये स्वयं आगे बढ़ कर कोई प्रयास करते हैं. दरअसल हमारे देश में ऊंगली उठाने, आलोचना करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है. हमारे यहां आक्षेप लगाना एक पारंपरिक आदत है. हम सबकुछ चाहते हैं, लेकिन हम में कुछ करने की इच्छा शक्ति मृतप्राय सी हो गई है. सच्चाई यही है कि जब तक हम स्वयं कुछ करने की आदत नहीं डालेंगे, तब तक स्थिति जस की तस बनी रहेगी. मैं कुछ बरसों तक गांधी जी का साथी रहा हूं, उन्हें मैंने काफी निकट से देखा है, समझा है और उनके विचारों को आत्मसात कर अपने जीवन में उतारा है. वे कहा करते थे कि कोई भी काम महत्वहीन हो सकता है पर महत्वपूर्ण यह है कुछ किया जाये.’

वे मुझसे कुछ और कहना चाह रहे थे. मैं भी उनसे बहुत सारी बातें करना चाहता था कि तभी ट्रेन धीरे-धीरे थमते हुए

‘गांधीग्राम’ नामक रेलवे स्टेशन पर रुकी ही थी कि वे दोनों उठे और उस बुजुर्ग ने हम सभी की ओर स्नेह दृष्टि से देखा, दोनों ने हाथ जोड़े और उस बुजुर्ग ने कहा-‘जयहिन्द, अच्छा अब हम लोग चलते हैं.’

यह सुनते ही मैं अपनी सीट से उठा और उनसे मैंने आतुरता से अनुरोध किया-‘यदि आप लोगों की आज्ञा हो तो मैं अपने मोबाइल में आपका एक छाया चित्र उतार लूं.’

यह सुनते ही बुजुग पुरुष ने अपनी पत्नी की ओर देखा. पत्नी ने सहमति से अपना सर हिलाया तो वे बोले-‘हां-हां क्यों नहीं.’ इतना सुनते ही मैंने तनिक भी देर नहीं की और उन दोनों का एक सुन्दर चित्र अपने मोबाइल में कैद कर लिया. उनके ट्रेन से उतरते ही मेरे मन मस्तिष्क में यह सवाल तेजी से उभरा कि वे बूढे दम्पति आम लोगों के हित में यदि इन दुर्गन्धयुक्त शौचालयों को स्वयं अपने हाथों से साफ कर सकते हैं तो मैं या कोई अन्य यात्री ऐसा क्यों नहीं कर सकता?’

तभी मोबाइल की तेज रिंग बजी और कुछ पलों बाद ही मैं अपने अतीत से बाहर निकलकर मोबाइल ऑन कर रहा था.

---

 

सम्पर्कः 111, पुष्पांजलि स्कूल के सामने, शक्तिनगर, जबलपुर 482001 (म.प्र.)

मोः 9424310984

टिप्पणियाँ

ब्लॉगर

-----****-----

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=list$au=0$label=1$count=5$page=1$com=0$va=0$rm=1

.... प्रायोजक ....

-----****-----

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

~ विधा/विषय पर क्लिक/टच करें : ~

* कहानी  || * उपन्यास || * हास्य-व्यंग्य  || * कविता  || * आलेख  || * लोककथा  || * लघुकथा  || * ग़ज़ल  || * संस्मरण  || * साहित्य समाचार  || * कला जगत  || * पाक कला  || * हास-परिहास  || * नाटक  || * बाल कथा  || * विज्ञान कथा  ||  * समीक्षा  ||

---***---


|आपके लिए कुछ चुनिंदा रचनाएँ_$type=complex$count=8$src=random$page=1$va=0$au=0

नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3864,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,337,ईबुक,192,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2812,कहानी,2137,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,489,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,62,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,348,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,50,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,9,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,18,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,238,लघुकथा,865,लघुकथा लेखन पुरस्कार आयोजन,24,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,326,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,62,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1932,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,659,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,703,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,15,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,61,साहित्यम्,2,साहित्यिक गतिविधियाँ,186,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,58,हास्य-व्यंग्य,69,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: प्राची अप्रैल 2016 : कहानी / आखिर क्यों / प्रभात दुबे
प्राची अप्रैल 2016 : कहानी / आखिर क्यों / प्रभात दुबे
https://lh3.googleusercontent.com/-Xh86rCqn6T4/Vx3gtc3Q58I/AAAAAAAAtQE/Z6tHqAx-JAU/image_thumb%25255B3%25255D.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-Xh86rCqn6T4/Vx3gtc3Q58I/AAAAAAAAtQE/Z6tHqAx-JAU/s72-c/image_thumb%25255B3%25255D.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2016/04/2016_83.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2016/04/2016_83.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय SEARCH सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ