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आलोक कुमार की कविताएँ

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भगवान मुझे........... एक 'स्वप्न ' पूर्ण हो ले, उन्मुक्त विचरने को, भगवान मुझे, एक गगन भेंट कर दो। एक 'अन्त' निकट हो ले, क...

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भगवान मुझे...........

एक 'स्वप्न ' पूर्ण हो ले,
उन्मुक्त विचरने को,
भगवान मुझे,
एक गगन भेंट कर दो।
एक 'अन्त' निकट हो ले,
क्षितिज पकड़ने को,
भगवान मुझे,
एक पवन भेंट कर दो।
एक 'हृदय' मुग्ध हो ले,
सौन्दर्य समझने को,
भगवान मुझे,
एक 'सुमन' भेंट कर दो।
एक 'प्रासाद' रिक्त हो ले,
तत्काल ठहरने को,
भगवान मुझे,
एक 'सदन' भेंट कर दो।
   
                                         ''' आलोक

 

   अनुरोध...........

मेरे मन के पन्नों को न पलटो।
मेरी आँखों में छुपे शब्दों को,
तुम नहीं कुरेदो।
मुझे समझ नहीं सकते, तो
पढ़ो नहीं ,
मेरी व्यथा को।
पर डरो नहीं।
मैं ठीक-ठाक हूँ।
मैं, तुमको यह आभास हुआ होगा,
चुप रहता हूँ।
मेरी चुप्पी को,
न स्वीकार करो तो,
न ही प्रश्न करो इस पर ।
यह मेरा रीता पन है,
इसे भरो नहीं।
इसमें जगह नहीं है।
यह भरा हुआ है,
अपने रीतेपन से।
मैं जीवन से असंतुष्ट,
भटकता हूँ।
मेरी नियति यही है,
मुझे दिशा नहीं दो।
मैं जीता हूँ,
दिशा की खोज में ही।
मुझे जीने दो,
संतोष नहीं दो।
अर्थ नहीं दो,
जीवन का।
मैं अर्थ को व्यर्थ समझता हूँ।
मैं अन्त समझता हूँ।
अत्यन्त समझता हूँ।
यह मुझ पर, मेरा ही विश्वास है।
मुझे,
अविश्वास नहीं दो।
मेरी कुछ चिन्ता है तो,
मैं घायल हूँ,
मेरे घावों को
दवा नहीं दो।
इन्हें प्रतीक्षा है गल जाने की,
तुम भरो नहीं।
ये वीभत्स होते हैं, पर,
इनसे
पाप-पुण्य, दोनों का मवाद बहता है।
इसे बहने दो,
ठहराव नहीं दो।
तुमको कुछ पीड़ा होती हो मन में,
तो सहो उसे,
मुझसे कहो नहीं।
मेरी शुभ-चिन्ता में व्यर्थ,
स्वयं को,
मेरे ही साँचे में ढलने से तुम
बचने दो।
मैं तो भूल चुका हूँ अपने जीवन को।
मेरे संग,
तुम भी मरो नहीं।
मुझे तुम लौटा नहीं सकते जो,
मेरे उन टुकड़ों को,
तुम नहीं सहेजो।।
                      '''' आलोक


दिवस की खोज में..........

मुझे आकाश दो,
प्रभु !
फिर उडूँगा,
मैं क्षितिज की खोज में।
मुझे मत बाँधो,
समय के बन्धनों में।
मुझे मत समेटो,
परिस्थिति के दायरों में।
मुझे प्रकाश दो,
प्रभु !
फिर जगूँगा,
मैं दिवस की खोज में।
                     ''''''    आलोक

 


          परछाई..........

अपनी परछाई को पकड़ने को,
बढ़ते हैं मेरे हाथ।
परछाई नहीं मिलती।
मिलते हैं घाव,
सतह के खुरदुरे स्पर्श के ।
फिर भी मैं हूँ,
यह अहसास पाले कि,
जिन्दगी बेहद तंग है।
कहीं न कहीं,
कभी न कभी,
किसी कोने में,
मुझको मिलेगा,
मेरा अक्स।
मेरे सामने होगा,
मेरा भविष्य,
सर झुकाए।
उसमें मगर ,
परछाई की कालिख नहीं होगी।
न होगा, अनिश्चितता का जाल ।
सब स्पष्ट होगा,
मेरे सामने।
मैं जिऊँगा,
पढूँगा,
खुद के प्रतिबिम्ब को।
मगर, मैं यह जानता हूँ,
न तो कोई बिम्ब होगा,
न ही मुझमें दृष्टि होगी।
मेरा जो भविष्य होगा,
उसमें,-
कोटरों में धँसे,
दो बेजान पत्थर होंगे,
अंधकार होगा,
और,
सामने मेरे,
मौत मेरा आईना होगी।
                     ''''''''    आलोक

 

 

          आतंक

ज्वार,
सड़क पर अचानक,
बढ़ता हुआ पानी,
जन समुद्र।
टूटती चट्टानें,
उतराने लगी।
वाहन,गिरने-पड़ने लगे।
किनारों को धकियाता रेला,
बँधने लगे बालू के बाँध,
दुकानों के,
शटर गिरने लगे।
क्षणभर में,
फैल गया आतंक,
लोग अपनों को ढूँढने लगे।
मिनटों में, सड़क,
सुनसान हुई,
बस,
चन्द खद्दर,चन्द खाकी,
नजर आने लगे।
भीड़ दुबक चली,
अपने कोटरों में,
धर्म भी,अपनी मृत्यु से,
भयभीत था।
खिड़कियों से झाँकती
जिज्ञासा थी,
कान, मिलते उत्तरों से,
संत्रस्त था।
संभावनाएँ,
एक से बढ़ने लगी,
झूठ के पाँव नजर आने लगे।
कुछ आध घण्टे बाद,
जब थमा ज्वार,
लोग घरों के ईद-गिर्द,
मँडराने लगे।
युवक बने दिलेर,
अब सड़क पर जाने लगे।
दुकानदार,सशंक,
शटर उठाने लगे।
हकीकत फिर भी नहीं थी सामने,
वजह से,
हर शख्स नावाक़िफ था।
वह भागा था,
लोग जो भागे थे ।
भागदौड़ की यह कतार,
लम्बी थी,
लोग मीलों दूर से,
भागे आ रहे थे।
अफसोस!
आदमी से भागता था,
आदमी,
विश्वास का कोई नहीं
अस्तित्व था।
सबसे जो संभ्रान्त है,
वह आदमी,
हर पशु से अधिक,
आक्रान्त था।
                    ''''''   आलोक

   बापू की स्मृति में

समय साक्षी है, युगपुरूष।
हम तुम्हें भूले नहीं हैं।
सतत् तुम्हारी समाधि पर,
जलती है मशाल।
हमने उसे बुझने न दिया,
हाँ हमारे घरों में,
कई चूल्हे बुझे पड़े हैं।
तुम्हारे नियमों की स्मृति में
भले ही बेबसी में,
आधे कपड़ों में हैं लोग,
तुम्हारी तरह बहुतेरे,
उपवास कर रहे हैं।
उन अत्याचारों की स्मृति में,
जो तुमने सहे थे,
आज भी हम,
सह रहे अत्याचार हैं,
पुलिस का,नेताओं का।
हर थाने,हर अदालत में,
टँगी हैं तुम्हारी तस्वीर,
और उस तस्वीर के नीचे,
रोज होते फैसले हैं,
अंधे,अन्याय भरे।
पर तुम्हें रोने नहीं देते,
तुम्हारी वही तस्वीर टँगती है,
जो हँस रही होती है।
हर वर्ष होते है दंगे-फसाद,
उन दंगों की स्मृति में,
जो तुमने देखे थे,
हर महीने होती हैं हड़तालें,
जैसे उन दिनों हुईं थीं।
सच,
असहयोग का अर्थ,
आज भी स्पष्ट है।
हम असहयोग करते हैं,
भले ही अपने-आप से।
घूमती आज भी हैं औरतें,
'बा' की तरह,
अपने नेता पतियों के संग,
आज भी उनके दर्शनों को,
उमड़ पड़ती है,
जनता की भीड़,
उन दिनों की ही तरह।
वैसे,
यहाँ नेता अनेक हैं,
फिर भी वे एक हैं,
इस अर्थ में,
सब तुम्हारी ही दुहाई देते हैं।
और,
सब गाँधीवादी ही होते हैं।
सब जानते हैं,
कितनी मुश्किलों के बाद
मिली है आजादी,
और इसीलिए,
जिससे जितना बन पड़ रहा है,
सब उपभोग कर रहे हैं,
इस आजादी का।
                  ''''''   आलोक


      मैं तुम्हें........

मैं तुम्हें
चाँद-तारे लाकर नहीं दे सकता।
मैं तुम्हें दे सकता हूँ
बस इतनी सी जमीन,
जो हम दोनों के बसर को
काफी हो,
और,जहाँ खड़े हो हम दोनों
मिलकर,
आसमान को पाने की कोशिश कर सकें।

मैं तुम्हारे
चेहरे में चाँद को नहीं तलाशता।
मैं बस तुम्हारी आँखों में
खुद को ढूँढता हूँ।
मुझे तुम्हारे रूप-रंग की चाह नहीं,
मैं बस तुम्हारे हृदय में घर करना चाहता हूँ।
तुम्हारी देह में
आत्मा की तरह शामिल हो सकूँ,
मैं तुम पर
कुछ ऐसा असर करना चाहता हूँ।

मैं तुमसे
कोई वादा करना नहीं चाहता।
न ही तुमसे कोई
उम्मीद रखना चाहता हूँ।
मैं तुम्हें स्वतन्त्र देखना चाहता हूँ,
और तुम्हारी स्वतन्त्रता में
खुद भी शामिल होना चाहता हूँ,
उन ख्वाहिशों के लिए
जो न मेरी हो, न तुम्हारी हो।
मैं जीना चाहता हूँ,
उन हसरतों के लिए, जो हम दोनों की हों।

मैं तुम्हारे लिए
अपने प्राण नहीं दे सकता।
और न तुमसे ही
ऐसी मूर्खता की आशा करता हूँ।
मैं तुम्हारे सुपुर्द
बस उतना जीवन कर सकता हूँ,
जितना मेरे हिस्से में आया है।
मैं जीना चाहता हूँ तुम्हारे लिए,
और तुम्हें
सदाबहार देखना चाहता हूँ,
ताकि मैं भी
जब तक तुम हो,जी सकूँ।

मैं कवि
तुम मेरी भावना हो
मैं भावुक हूँ,तुम्हारे वशीभूत हूँ।
पर तुम
मेरे  आलोक में विचरण करो
मैं यह चाहता हूँ।
मैं पवन, तुम मेरी दिशा हो ।
तुम जिधर ,मेरी उसी ओर गति है।
तुम्हारी प्रेरणा के सहारे
बहता रहूँ,
मैं यह भी चाहता हूँ।
                    ''''''' आलोक


    ख्यालों में

मेरे तुम्हारे दरम्यान
फासला कुछ भी हो
फिर भी तुम्हें करीब,
मैं महसूस करता हूँ,
ख्यालों में ही सही।

खुलकर बिखर आई
तुम्हारी जुल्फों की छुअन को,
अपने चेहरे पर,
मैं महसूस करता हूँ,
ख्यालों में ही सही।

तुम्हारे लबों की तपिश से
अपने होठों के दरम्यान,
सुलगते अरमानों को,
मैं महसूस करता हूँ,
ख्यालों में ही सही ।

मेरे हाथों की हरकतों से
थरथराती तुम्हारी देह के
मूक आमन्त्रण को,
मैं महसूस करता हूँ,
ख्यालों में ही सही।

तुम्हारे आगोश में सिमटी हुई,
अपनी देह को पिघलते हुए
तुम्हारी देह में,
मैं महसूस करता हूँ,
ख्यालों में ही सही।
                   '''''''  आलोक

       रिहाई

मौत की आहट सी
हर सुबह आती है।
जिन्दगी,बस रात को
ही मुस्कराती है।
धूप एक कफ़न,
दिन जनाजे का जुलूस
और कब्र सी शाम में
तकदीर सिमट आती है।
बस यही वक्त,होता है
मेरी रिहाई का,
मेरी रूह भी बस
अंधेरे में ही खिलखिलाती है।
                          ''''''
              आलोक

 


स्नेह जिन्दा है.....

स्नेह जिन्दा है.....
समय की धूल है बिछी,
फिर भी बची है
एक रेख .....
मेरे, उसके बीच।
मैं,
मौन रहकर भी
बहुत कुछ कह गया हूँ।
उसने सुना या नहीं,
यह व्यर्थ है ।
अर्थ है, एक पहचान का स्पर्श
मैंने पा लिया है,
उसको छुए बिना।
मेरे उसके बीच,
है ज्ञान का भेद।
नहीं तो,
उसने भी देखा होगा,
वह स्वप्न,
जो मैंने देखा है।
मुझे याद है,
उसे याद नहीं।
स्नेह पवित्र है,
मैंने,
इसको पूजा है,
किसी कामना के बिना।
तभी तो,
स्नेह मरा नहीं है,
मेरे उसके बीच,
स्नेह जिन्दा है।
               '''''''
                     

आलोक कुमार,

डिप्टी जेलर, कारागार विभाग,

उत्तर प्रदेश, कानपुर

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नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3830,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,335,ईबुक,191,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2770,कहानी,2095,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,485,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,130,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,90,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,329,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,327,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,49,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु 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रचनाकार: आलोक कुमार की कविताएँ
आलोक कुमार की कविताएँ
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रचनाकार
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