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अंधविश्वास / लघुकथा / आकांक्षा यादव

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आज सावन का पहला सोमवार था। रमा खूब करीने से मंदिर को धो-पोंछकर मूर्ति सजा रही थी। शिवलिंग पर फूल-माला चढ़ा ही रही थी कि अचानक उसकी बेटी वहां आई और पूछ बैठी- ”मम्मी, हम पूजा क्यों करते हैं ?” अपनी बेटी के इस जिज्ञासु प्रश्न का हँसते हुए रमा ने जवाब दिया- ”बेटी, हम भगवान की कृपा पाने के लिए और अपनी भावना को प्रदर्शित करने के लिए पूजा करते हैं।”

..........”लेकिन भगवान हैं कहाँ मम्मी ?” 

..........”यहाँ इस मूर्ति में।” 

अचानक बात करते-करते रमा का संतुलन बिगड़ा और भगवान की मूर्ति टूट गयी।

”अरे ! ये क्या हो गया ? अब तो ईश्वर का कोप सहना पडेगा।”  

मूर्ति के समक्ष हाथ जोड़कर रमा गिड़गिड़ाने लगी- ”हे भगवान ! गलती से ऐसा हो गया। हमसे भूल हो गई, क्षमा करना प्रभु।” 

.........”मम्मी ! इसमें घबराने की क्या बात है ? पत्थर की मूर्ति ही तो थी टूट गयी। बाजार से नई खरीद लेना।”

  ”अरे नहीं बेटी! जरुर कुछ अशुभ घटित हुआ है। लगता है भगवान जी हमसे नाराज हो गए हैं।” 

.......ट्रिन..ट्रिन..ट्रिन..बेटी ने फोन उठाया और चीख पड़ी- ”मम्मी, पापा का एक्सीडेंट हो गया है। वे अस्पताल में भर्ती हैं। जल्दी से चलो।”

”.......मैंने कहा था न कि कुछ अशुभ घटित होने वाला है। ऐसा करो, तुम अपनी स्कूटी से अस्पताल निकलो और मैं मंदिर होकर आती हूँ। भगवान का कोप है, मंदिर में प्रसाद चढ़ा दूँ। पंडित को दान देकर भिखारी को भी खाना दे दूं ताकि तेरे पापा जल्दी से ठीक हो जाएं।”

”.....मम्मी, तुम भी किस अंधविश्वास में पड़ी हो। यह कोई कोप नहीं है। पापा को इस स्थिति में हमारी जरुरत है। तुम भी मेरे साथ चलो।”

”....नहीं बेटी, तुम अभी यह चीजें नहीं समझोगी। तुम चलो, मैं भी मंदिर से सीधे वहीं पहुँचती हूँ।”

बेटी अस्पताल पहुँची तो डाक्टर ने बताया कि काफी खून बह गया है। तुरंत ’बी पॉजिटिव’ ब्लड की जरूत है। उसे याद आया कि मम्मी का भी बी पाजिटिव ब्लड है। पर मम्मी फोन उठाए तो सही। 

  इधर बेटी ब्लड बैंक का नंबर ढूंढ़कर ’बी पॉजिटिव’ ब्लड की माँग कर रही थी और उधर रमा अंधविश्वास में गुम होकर मंदिर के दरवाजे पर भिखारियों को खाना खिलाने में जुटी थी....!!

-आकांक्षा यादव

टाइप 5  निदेशक बंगला,

मेघदूत सदन, जेडीए सर्किल के निकट, जोधपुर, राजस्थान - 342001

ब्लॉग : http://shabdshikhar.blogspot.com

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आकांक्षा यादव : परिचय -

कालेज में प्रवक्ता के बाद साहित्य, लेखन और ब्लागिंग के क्षेत्र में प्रवृत्त आकांक्षा यादव की रचनाएँ देश-विदेश की शताधिक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं- इण्डिया टुडे, कादम्बिनी, नवनीत, साहित्य अमृत, वर्तमान साहित्य, अक्षर पर्व, आजकल, उत्तर प्रदेश, मधुमती, हरिगंधा, हिमप्रस्थ, दैनिक जागरण, जनसत्ता, अमर उजाला, राष्ट्रीय सहारा,राजस्थान पत्रिका, गृहलक्ष्मी, गृहशोभा, हिन्दी चेतना (कनाडा,वसंत (मारीशस) और वेब पत्रिकाओं व ब्लॉग पर प्रकाशित हैं । स्त्री चेतना, समानता, न्याय और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी आकांक्षा यादव बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं। साहित्य की विभिन्न विधाओं में उनकी रचनाओं का फलक उनके भावों और विचारों के वैविध्य का परिचायक है। अब तक कुल 2 कृतियाँ प्रकाशित हैं - चाँद पर पानी (बाल-गीत संग्रह, 2012) एवं क्रांति-यज्ञ: 1857-1947 की गाथा (युगल संपादन, 2007)। नारी विमर्श पर आपके लेखों का एक संग्रह प्रकाशनाधीन है। दर्जनाधिक प्रतिष्ठित पुस्तकों /संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित होने के साथ आकाशवाणी से वार्ता, रचनाओं इत्यादि का प्रसारण। व्यक्तित्व-कृतित्व पर डा. राष्ट्रबंधु द्वारा सम्पादित ‘बाल साहित्य समीक्षा’ (कानपुर) का विशेषांक जारी। 20 नवम्बर 2008 से हिंदी-ब्लागिंग में 'शब्द-शिखर' (http://shabdshikhar.blogspot.com) के माध्यम से सक्रिय. युगल रूप में ‘बाल-दुनिया’ (http://balduniya.blogspot.in/) ‘सप्तरंगी प्रेम’ (http://saptrangiprem.blogspot.in/) व ‘उत्सव के रंग’(http://utsavkerang.blogspot.in/) ब्लॉग¨ का संचालन।  विकीपीडिया पर भी आपकी तमाम रचनाओं के लिंक्स उपलब्ध हैं तो  ब्लाग और सोशल मीडिया माध्यमों पर भी सक्रियता देखते बनती है।

आकांक्षा यादव की सृजनधर्मिता सिर्फ पन्नों तक नहीं है, बल्कि इसने लोगों के जीवन को भी छुआ है। साहित्य के माध्यम से आपने जहाँ पुराने समय से चली आ रही कु-प्रथाओं पर चोट किया, वहीं समाज को नए विचार भी दिए। अपनी विशिष्ट पहचान के साथ आप साहित्यिक व सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊँचाईयाँ दे रही है। विभिन्न प्रतिष्ठित साहित्यिक-सामाजिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु आपको कई सम्मान और मानद उपाधियाँ प्राप्त है। इनमें उ.प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा न्यू मीडिया ब्लागिंग हेतु ’’अवध सम्मान’’, परिकल्पना समूह द्वारा ’’दशक के श्रेष्ठ हिन्दी ब्लागर दम्पति’’ सम्मान व परिकल्पना सार्क शिखर सम्मान, विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर बिहार द्वारा डाक्टरेट(विद्यावाचस्पति) की मानद उपाधि, भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘डाॅ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान‘ व ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’भारती ज्योति’, साहित्य मंडल, श्रीनाथद्वारा, राजस्थान द्वारा ”हिंदी भाषा भूषण”, ‘‘एस.एम.एस.‘‘ कविता पर प्रभात प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार इत्यादि प्रमुख हैं।  एक रचनाधर्मी के रूप में रचनाओं को जीवंतता के साथ सामाजिक संस्कार देने का प्रयास. बिना लाग-लपेट के सुलभ भाव-भंगिमा सहित जीवन के कठोर सत्य उभरें, यही  इनकी लेखनी की शक्ति है !!

संपर्क : -आकांक्षा यादव, टाइप 5  निदेशक बंगला, मेघदूत सदन, जेडीए सर्किल के निकट,

            जोधपुर, राजस्थान - 342001

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