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बाल कलम / मदद / हार्दिक देवांगन

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मदद

एक गॉव के 5 बच्चे नई किताबें खरीदने गए , जबकि उन सभी बच्चों के पास उसी कक्षा की पुरानी किताब उपलब्ध थी ।

वे नई किताबें खरीदकर पुरानी किताबों के पन्ने फाड़ – फाड़कर खेलने लगे । इसी बीच एक गरीब बच्चा आया । वह उनकी ओर मायूस होकर देखने लगा और किताब के पन्ने उठाने लगा । तथा आग्रह करने लगा कि वे किताब न फाड़ें , बल्कि उसे दे दें । पर वे नहीं माने ।

घर जाते समय सुनसान जगह में एक बच्चे की साईकिल अचानक पंचर हो गई । दोपहर का समय था सभी बच्चे पसीने से नहाए हुए थे और साथ मिलकर पैदल चलते हुए घर जा रहे थे । किसी के पास पानी भी नहीं था । सभी का गला सूख रहा था । सभी के पैर दर्द कर रहे थे । वे सभी गर्मी से बहुत ज्यादा परेशान हो गए थे ।

तभी उन्हें वही बच्चा आता नजर आया । उसने उन सभी का हाल पूछा और उनकी समस्या को हल करने की कोशिश में लग गया । उस बच्चे ने आम का पेड़ देखा और पांचों के लिए रसीले आम तोड़ा । पंचर साइकिल को ढोकर पास के गॉव ले गया और साइकिल का पंचर बनवा दिया ।

वे सभी उससे बहुत खुश होकर उसका नाम , पता , तथा वह किस कक्षा में पढ़ता है ? पूछने लगे । उस बच्चे ने उत्तर दिया कि मेरा नाम मोनू है , मैं पास के ही गॉव में रहता हूं। मैं भी पहले स्कूल जाता था , मगर अब मेरे पिताजी के पास मुझे पढ़ाने के लिए पैसे नहीं है , इसलिए मैं इस साल स्कूल नहीं जा पा रहा हूं ।

उस दिन सभी बच्चों ने ठान लिया कि वे उसे किताब खरीद कर देंगे और उसकी फीस भी इकट्ठा कर देंगे । घर जाने पर अपने अभिभावक को पूरी बात बताकर के बच्चे अपने – अपने घर से पैसे लेकर बच्चे की मदद की और उसे पुनः पढ़ने के लिए प्रेरित किया । उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि प्रत्येक गरीब बच्चे को वे हर साल अपनी पुरानी किताबें देंगे ताकि वे सभी गरीब बच्चे भी अच्छे से पढ़ सके और आगे बढ़ सके ।

लेखक - हार्दिक देवांगन , 12 वर्ष

कक्षा सातवीं , केंद्रीय विद्यालय रायपुर

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