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बाल कलम / बिजली की बचत / सार्थक देवांगन

बिजली की बचत

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एक गांव में एक लड़का रहता था । जिसका नाम आदित्य था । वह बिजली की बचत बिल्कुल भी नहीं करता था , जबकि उस गांव में बिजली बहुत ही कम रहती थी । इसी वजह से उसे गांव में सब बिजली को बचाने के लिए कहते थे । वह रूम में पढ़ता रहता था और जब आता था तो उस रूम का लाईट और पंखा बंद नहीं करता था और जब बाथरूम से आता था , तो लाईट बंद नहीं करता था । और उसे कई बार डांट भी पड़ती थी कि तुम अगर कोई भी रुम से आते हो तो लाइट और पंखा बंद क्यों नहीं करते हो । तब भी वह मानता ही नहीं था और हर जगह का लाईट और पंखा चालू रहने देता था । उसे कई बार मार भी पड़ी , उसके बाद भी वह नहीं समझा ।

कुछ महीनों बाद उसकी परीक्षा का समय आ गया । उस समय बिजली दिन भर नहीं रहती थी । और गांव में अंधेरा रहता था , इसी कारण वह ठीक से अध्ययन नहीं कर सका । इस बार परीक्षा में पास नहीं बल्कि फेल हो गया । वह बहुत दुखी था । कुछ लोग कहते भी थे की तुम अपनी गलती की वजह से फेल हुए हो , अगर तुम ने बिजली बचत की होती तो परीक्षा के वक्त बिजली गुल नहीं होती , तब तुम फेल भी नहीं होते । उसे अपनी गलती का एहसास हो चुका था । उसने अब से बिजली की बचत करने का संकल्प लिया । लेकिन कुछ दिनों बाद फिर से वह , बात भूल गया कि उसे बिजली की बचत करनी है ।

उस के गांव के सरपंच ने उसे बहुत बार समझाया कि बिजली की बचत करो , वह सब को “हां“ जरुर बोलता था । लेकिन बिजली की बचत करता नहीं था । फिर से उसकी परीक्षा का दिन आ गया । और वह फिर से फेल हो गया और दूसरों पर आरोप लगाने लगा कि , आप लोग बिजली का बिल नहीं भरते हो , इसी कारण बिजली की कम सप्लाई होती है । सरपंच ने बताया कि , हम ने तो अभी कुछ ही दिन पहले बिजली का बिल भरा था , लेकिन तुम ने हमारे हिस्से की बिजली को व्यर्थ में खपा दिया । उसमें हम क्या कर सकते है ? तुम ने बिजली कि बचत नहीं कि और हमें ही सुनाते हो । उसे गांव में सभी लोगों ने डांटा कि तुम अगर अब से कभी भी बिजली कि बचत नहीं करोगे तो हम तुम्हें इस गांव से निकाल देंगे । उसने फिर अपनी गलती मान ली और सभी से क्षमा मांगते हुए कहा कि , नहीं मैं आज से ही बिजली की बचत करुंगा , लेकिन आप लोग मुझे गांव से मत निकालना ।

कुछ दिन बाद उसने फिर से बिजली की बचत नहीं की । गांव के सभी लोगों ने मिलकर फैसला किया कि इसे गांव से निकाल देना चाहिए । उसने सभी को कहा कि आप लोग मुझे गांव से मत निकालिए ऐसी गलती कभी नहीं होगी । मुझे माफ कर दो । गांव वालों ने उसे कहा कि , तुम ने पिछले दो बार भी यही कहा था कि अब ऐसी गलती नहीं होगी । लेकिन तुमने यह गलती फिर से कर दी और उसे गांव से निकाल दिया गया और उसका परिवार गांव में ही रहता था । वह गांव के बाहर बैठा हुआ था । तभी एक बूढ़ा आया और उसे उसकी परेशानी का कारण पुछा - तो उसने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि उसे गांव से निकाल दिया गया और उसके माता – पिता से अलग कर दिया गया है । वे वहीं रहते हैं । बूढ़े ने कहा कि तुम्हारे माता – पिता को तुम्हारे साथ आना चहिए था ना । बच्चे ने कहा कि उन्होंने मेरे साथ आने से साफ मना कर दिया कि हम लोगों को ऐसे बेटे के साथ नहीं रहना । बूढ़े ने कहा कि चलो तुम मेरे घर में रहना लेकिन आज के बाद कभी भी बिजली को वेस्ट नहीं करोगे । उसने कहा कि ठीक है । और बूढे आदमी के घर चला गया । उसने बिजली की बचत करने को कहा तो था , लेकिन , वह फिर से बिजली की बचत नहीं कर रहा था , इसलिए उसे उस गांव से भी निकाल दिया गया ।

और वह अब बिल्कुल अकेला पड़ गया । उसके साथ कोई नहीं था । उसके पास पैसे भी नहीं थे । वह चलता हुआ शहर आकर रोड के किनारे में बैठ गया । तभी एक आदमी आया और उसने देखा की यह तो एक छोटा बच्चा है । उसने उसका नाम पूछा तो उसने कहा की मेरा नाम मोनू है । उन्होंने उसके माता ‌- पिता के बारे में भी पूछा । तब बच्चे ने पूरी बात बताई । थोड़ा सोचकर , उस आदमी ने एक सवाल पूछा कि , तुम क्या बनना चाहते हो ? उसने कहा – इंजीनियर । तो उस आदमी ने कहा कि , तुम बिजली की बचत नहीं कर सकते हो और इंजीनियर बनना चाहते हो । वह हंसा , और बोला - तुम अगर बिजली की बचत करोगे तो तुम जरूर इंजीनियर बन सकते हो । लेकिन अब मैं क्या करुं ? उस आदमी ने कहा कि , तुम अपने गांव वापस चले जाओ और माता – पिता के साथ रहो । पर कैसे जाऊं , गांव में मुझे रखेगा कौन ? उस आदमी ने खुद गांव वालों से बात करने की सोची । वह बच्चे को लेकर उसके गांव गया । और बच्चे की ओर से सभी लोगों से माफी मांगी तथा कुछ रूपये देकर गांव के बिजली का बिल चुकाया ।

अब बच्चा वास्तव में सुधर गया , क्योंकि उसे इंजीनियर जो बनना था । अब वह अपने गांव में बिजली की बचत करने लग गया । अब न केवल वह बल्कि उसके सारे दोस्त बिजली को व्यर्थ नहीं जाने देते । अब उसके गांव के बिजली के कोटे से गांव दिन रात रोशन रहता । पढ़ाई के लिए पर्याप्त बिजली मिलने से पढ़ाई भी अच्छी होने लगी । वह बच्चा पढ़ाई में अव्वल आने लगा । कुछ साल बाद वही बच्चा बिजली का इंजीनियर हो गया ।

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लेखक - सार्थक देवांगन , उम्र ११ वर्ष

कक्षा पांचवी , के. वि. रायपुर

सार्थक देवांगन

डब्लुय.आर.एस.कालोनी

रायपुर [छ.

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