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नए लोगों को दें अवसर - डॉ. दीपक आचार्य

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संसार के समस्त कर्मों में सफलता का मूल आधार है कार्य के प्रति नैष्ठिक समर्पण, लगन, उत्साह और गुणात्मकता दर्शाने की ललक। जहाँ ये सभी कारक होते हैं वहाँ कार्य की गुणवत्ता मुँह बोलती है और कार्य करने वालों के व्यक्तित्व की सुगंध अपने आप प्रसार पाती रहती है।

समाज-जीवन का कोई सा कार्य हो, किसी भी प्रकार की सेवा का क्षेत्र हो, संस्थागत या समूहों में सेवा-कर्म आदि की बात हो, हर मामले में सफलता पाने के लिए यह जरूरी है कि इससे जुड़े हुए लोग ऊर्जावान, उत्साही और निष्काम सेवाभावी हों। जिस संस्था, संस्थान या समूह में ऎसे लोग होते हैं वहां किसी भी प्रकार की समस्या सामने नहीं आती लेकिन जहाँ ऎसे लोग नहीं होते हैं वहाँ हर प्रकार की समस्या सामने आती है।

कई प्रकार की संस्थाएं और संगठन हैं जिनमें समर्पित लोगों की वजह से इनका कर्म क्षेत्र निरन्तर उत्कर्ष पर रहते हुए दूर-दूर तक प्रसिद्धि पाता है और महकता रहता है। दूसरी ओर अधिकांश संस्थाओं, समूहों और संगठनों की स्थिति यह है कि इनमें काम करने वाले लोगों में समर्पण, त्याग, समन्वय और निष्ठा का अभाव होता है।

इस कारण से ये संस्थाएं अपेक्षित काम नहीं कर पाती और उदासीनता या बदनामी से घिरी रहती हैं और एक समय ऎसा आता है जब नाकाबिल, निरूत्साही और ऊर्जाहीन लोगों की वजह से ये संस्थाएं छिन्न-भिन्न हो जाती हैं और अपना अस्तित्व खो देती हैं। अब सभी तरफ यह स्वीकारा जाने लगा है कि इंसानी ऊर्जा और शक्ति का निरन्तर क्षरण होता जा रहा है और इस वजह से संस्थाओं और संगठनों में जो कुछ अच्छा हो रहा है, संस्थाएं चल रही हैं तो चंद लोगों के कारण से, जो कि पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम कर रहे हैं अन्यथा ये संस्थाएं भी ठप हो जाएं।

संस्थाओं और संगठनों के मामले में अब देखा यह जा रहा है कि रचनात्मक कार्य करने वाली संस्थाओं में जो लोग आ रहे हैं उनका उद्देश्य संस्था का भला या संस्थागत लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं होती बल्कि या तो संस्थाओं पर  कब्जा जमाए रखना अथवा संस्थाओं के नाम पर पब्लिसिटी पाना ही रह गया है।

बहुधा बहुत सारी संस्थाओं में पुरानी और नई पीढ़ी, पुराने और नए कार्यकर्ताओं में संघर्ष चलता रहता है। पुराने लोग अपना प्रभुत्व छोड़ना नहीं चाहते, और नए लोगों को अवसर प्राप्त नहीं हो पाते। इसके अलावा एक विचित्र स्थिति यह भी है कि हर इलाके में कुछ लोग ऎसे होते हैं जो किसी संस्था में काम करने में कोई रुचि नहीं लेते, मगर संस्थाओं में घुसपैठ कर पदों पर कब्जा जमा लेने में माहिर होते हैं।

ये लोग सब तरह की संस्थाओं में घुस जाते हैं और पदों पर काबिज हो जाते हैं लेकिन संस्थाओं के लिए इनके अवदान की चर्चा की जाए तो साफ-साफ सामने आएगा कि ये कुछ करते-धरते नहीं। यहाँ तक कि संस्थाओं के लिए आर्थिक सहयोग में भी कभी आगे नहीं आते। पर जहां सम्मान, मंच, लंच और पब्लिसिटी मिलने की बात आती है वहां सबसे आगे रहते हैं। 

सब तरफ यही स्थिति होती जा रही है। जो लोग बहुत सारी संस्थाओं में घुसे रहने के आदी होते हैं वे किसी भी संस्था में काम नहीं करते। हर संस्था में इन्हें भार ही समझा जाता है। इन लोगों के प्रभाव में होने का दूसरा सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि इनकी वजह से दूसरे सेवाभावी लोग भी ठीक ढंग से काम नहीं कर पाते अथवा ये पुराने और घाघ लोग इन्हें अच्छी तरह काम करने नहीं देते, बेवजह अपनी टाँग अड़ाते रहते हैं। जबकि इन अनुभवी और वरिष्ठ लोगों को भी चाहिए कि किसी एक संस्था में रहकर पूरी शक्ति लगाएं। पुराने लोगों की वजह से संस्थाओं के कर्म में शिथिलता आ जाती है और उत्साहहीनता का माहौल बना रहता है।

निरूत्साही लोगों का जमावड़ा बना रहने से हालत विषम हो जाते हैं और यही स्थिति बने रहना किसी भी संस्था के लिए घातक सिद्ध होता है। रचनात्मक गतिविधियोें को प्रभावी बनाने, संस्थाओं को समूहों को निरन्तर क्रियाशील और उत्तरोतर वैकासिक स्थिति में रखने के लिए जरूरी है कि पुराने लोग अपने आप पद त्यागने की स्वैच्छिक पहल करें।

इन पुराने लोगों को संरक्षक एवं सलाहकार के रूप में शामिल किया जाना चाहिए जबकि नए लोगों को सक्रिय भूमिका में रखा जाना चाहिए। इसमें यह ध्यान रखा जाना जरूरी है कि जिन लोगों को सक्रिय जिम्मेदारी सौंपी जाए, उनका अन्य कहीं दखल न हो, दूसरी संस्थाओं में व्यस्त न हों तथा एक ही संगठन में काम करने वाले हों। संस्थाओं और समूहाें को ढंग से चलाना हो तो उन लोगों को ही मौका देना चाहिए जो किसी और संस्था में न हों, ताकि पूरी निष्ठा से काम कर सकें।

पुराने लोगों को चाहिए कि वे संचित ज्ञान और अनुभवों को बताएं तथा नए उत्साही और ऊर्जावान लोगों को चाहिए कि वे कर्मयोग के प्रति समर्पित रहें। ऎसा होने पर ही समाज, क्षेत्र और देश में रचनात्मक कार्यों को प्रभावी बनाए रखते हुए संस्थागत संरचनाओं को कायम रखा जा सकता है।

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- डॉ.  दीपक आचार्य

9413306077

www.drdeepakacharya.com

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