गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

शाहरुख की “फैनगिरी” / जावेद अनीस

शाहरुख खान को बालीवुड का किंग खान कहा जाता है और पिछले 20-25 से वे यहाँ दो और खानों के साथ राज कर रहे हैं, 50 पार कर चुकी यह खान तिकड़ी अभी भी बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा उगाही करती है और साल के सभी बड़े डेट्स इन्हीं के कब्जे में होते हैं. इन तीनों में आमिर खान अपवाद हैं और सलमान जो कर रहे हैं उससे ज्यादा कोई उनसे उम्मीद भी नहीं करता है, लेकिन शाहरुख की इस बात को लेकर आलोचना होती है कि पैसा और स्टारडम की खातिर वे अपनी अभिनय क्षमताओं के उपयोग का रिस्क नहीं उठाते हैं. पिछले दो-तीन सालों में उनकी फिल्मों का स्तर लगातार गिरा है, जबकि वही दूसरी तरह सलमान खान जैसे सितारे भी “बजरंगी भाईजान” के जरिये कम्युनल हार्मोनी और इंडो-पकिस्तान शांति का सन्देश देने की कोशिश करते हुए नजर आये हैं. हालिया सालों में आयी शाहरुख की फिल्मों से अगर उन्हें निकाल दिया जाए तो वो फिल्में बहुत साधारण साबित होंगी और उनकी कामयाबी की एकमात्र वजह यही है कि लोग उन्हें स्क्रीन पर देखना चाहते हैं फिल्म चाहे कैसी भी हो. फैन रिलीज होने से दो दिन पहले गानों की पैरोडी बनाने वाले ‘शुद्ध देशी गाने’ की तरफ से यूट्यूब पर एक वीडियो जारी हुआ था जिसमें प्रतिभाशाली सलिल जामदार खुद को शाहरुख के एक ऐसे ईमानदार फैन के तौर पर पेश करते हैं जो हालिया सालों में शाहरुख की फिल्मों से मायूस है और उसे लगता है कि आईपीएल व मार्केटिंग के चक्कर में पड़ने से उनकी फिल्मों और अदाकारी का स्तर गिरा है. इस गाने में यह उम्मीद भी जताई गयी है कि शाहरुख अपने फैन्स को आने वाली फिल्म “फैन” से मायूस नहीं करेंगें.

“फैन” के ट्रेलर ने ध्यान खीचा था जिसमें शाहरुख खान एक नौसिखए की तरह डांस करते हुए नजर आ रहे थे और सभी को लगा था कि इस बार शायद कुछ नया देखने को मिलेगा. “फैन” मायूस भी नहीं करती है. यह उनकी आम फिल्मों से अलग है और उन्हीं के द्वारा संरक्षित किये नियमों को तोडती है. यहाँ ना तो कोई हीरोइन है और ना ही रोमांस और गाना, “जबरा फ़ैन” भी एक प्रमोशनल गाना है जिसका कहानी से कोई जुड़ाव नहीं है.

एक सुपरस्टार और उसके फैन्स के रिश्ते की कहानी है जो खुद को अपने हीरो का एक हिस्सा मानते हैं और उन्हीं की तरह दिखने, बातचीत करने और कपड़े पहनने की कोशिश करते हैं. “फ़ैन” भी एक ऐसे जुनूनी शख्स की कहानी है जो खुद को अपने पसंदीदा हीरो का एक हिस्सा मानता है. फिल्म में गौरव चांदना (शाहरुख खान) दिल्ली में एक साइबर कैफे चलाता है, वह सुपरस्टार आर्यन खन्ना (शाहरुख खान) का ज़बरदस्त फ़ैन है, वह आर्यन की तरह दिखता है और उसकी हुबहू नकल भी उतार सकता है, यह सब देखकर लोग भी उसे जूनियर आर्यन खन्ना कह कर पुकारने लगते हैं. वह सोसाइटी में होने वाले एक प्रतियोगिता में आर्यन खन्ना की एक्टिंग करते हुए ट्रॉफ़ी जीतता है जिसे वह आर्यन को देना चाहता है, इसी चक्कर में वह मुंबई पहुंच जाता है, पैसे होने के बावजूद वह आर्यन खन्ना की तरह ही विदाउट टिकिट मुंबई जाता है और उसी होटल व रूम में ठहरता है जहां पहली बार आर्यन खन्ना ठहरा था.मुंबई पहुंच कर गौरव को धक्का तब लगता है जब वह यह पाता है कि आर्यन खन्ना उसे पांच सेंकेंड भी देने के लिए तैयार नहीं है. गौरव चांदना को आर्यन खन्ना का यह रवैया अखर जाता है. वह अब बदले पर उतर आता है. फिर वो यह कहते हुए बागी बन जाता है कि “गौरव है तो आर्यन है, गौरव नहीं तो आर्यन कुछ भी नहीं”. यही टकराहट फिल्म को अंत तक ले जाती है.

फ़िल्म में शाहरुख ख़ान डबल रोल में हैं सुपरस्टार और उसके सबसे बड़े फैन के किरदार में. ऐसा पहली बार नहीं है कि शाहरुख खान डबल रोल निभा रहे हों, इससे पहले वे डुप्लीकेट, डान और पहेली जैसी फिल्मों में ऐसा कर चुके हैं लेकिन यहाँ मामला लगा है, “फैन” में उनके दोनों किरदार बहुत जुदा हैं और दोनों के उम्र में काफी अंतर है, यहाँ आर्यन खन्ना के रूप में वे अपने ही उम्र और प्रोफेशन का किरदार निभा रहे हैं तो गौरव के रूप में उन्हें 26 साल के नौजवान के रूप में नज़र आना था और यह काम उन्होंने बखूबी किया है. अपने फ़ैन के किरदार में शाहरुख़ ने बेहतरीन काम किया है सबसे खास बात यह है कि आप उनके दोनों किरदारों के बीच फर्क साफ महसूस कर सकते हैं ऐसा लगता ही नहीं की दोनों किरदार को एक ही आदमी ने निभाया है, लुक,चाल–ढाल और बोलचाल सभी को लेकर दोनों किरदारों के बीच फर्क साफ़ नज़र आता है.

फिल्म का निर्माण यशराज ने किया है, शाहरुख़ खान ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में बताया था कि “इस फिल्म के विचार के बारे में उन्हें दस साल पहले मरहूम यश चोपड़ा ने बताया था, उस समय किन्हीं वजहों से यह ख्याल हकीकत में नहीं बदल सका”. इस फिल्म के निर्देशक मनीष शर्मा हैं जो इससे पहले बैंड बाजा बारात, लेडी वर्सेज रिकी बहल, शुद्ध देसी रोमांस, दम लगा के हईशा जैसी फिल्में बना चुके हैं.

लम्बे अंतराल के बाद शाहरुख खान की ऐसी फिल्म आई है, जिसमें उन्हें अभिनय क्षमता को उपयोग करते हुए नजर आते हैं. यह सिर-पैर की फिल्म है जिसमें एक कहानी है और जो ज़्यादातर समय आपको बांधे रखती है. इस बार उन्होंने अपने फैन्स को शिकायत का कोई मौका नहीं दिया है. उम्मीद है आने वाले समय में हम अभिनेता शाहरुख खान को और देख सकेंगें.

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