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हमारी यादों में हमेशा तरोताजा रहेगी मुम्बई यात्रा / संजय दुबे

 

शिक्षकों के सामने ही दोस्तों संग मस्ती का वह आलम कभी नहीं भूलेगा

जाते वक्त ट्रेन पर सवार हुए तो ऐसा लगा जैसे हम आजाद पक्षी हो गए हों

वापसी में स्टेशन पर हम सब अलग हो गए लेकिन हमारी यादें साझा थीं

संजय दुबे

इलाहाबाद। सैम हिग्गिनबाटम इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शियाट्स) इलाहाबाद के स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन विभाग की ओर से हर वर्ष यूजी और पीजी के अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को कालेज ट्रिप पर ले जाया जाता है। इसकी शुरुआत हमेशा की तरह इस वर्ष भी सात जनवरी को हुई। मस्ती और उल्लास से भरी हम सब की मुम्बई यात्रा सचमुच रोमांचकारी और मजेदार रही। सात जनवरी की सुबह जब हम सभी छात्र-छात्राएं इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचे तो इतने उत्साहित थे, मानों कोई किला फतह करने जा रहे हैं।

हम लोगों का रिजर्वेशन मुम्बई-हावड़ा मेल ट्रेन के एस-6 कोच में था। ट्रेन अपने निर्धारित समय से दो घंटे लेट थी। बहरहाल करीब साठ छात्र-छात्राओं और तीन शिक्षकों (राम मणि त्रिपाठी, शोएब अंसारी और अनीशा हेनरी) का हमारा ग्रुप दोपहर दो बजे जब ट्रेन पर सवार हुआ तो ऐसा लगा जैसे हम बिल्कुल आजाद पक्षी हो गए हैं। समुद्र की लहरों की तरह हमारा मन हिलोरे मार रहा था।

ट्रेन इलाहाबाद जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर छह से छूटी तो छात्रों ने जमकर नारे लगाए। पूरे रास्ते खूब मस्ती की। कंपार्टमेंट के अंदर ही नृत्य और गीतों का समां बांधा तो अंत्याक्षरी और चुहलबाजी का दौर भी चला। रात हुई और ट्रेन चलती रही। इस बीच सब लोगों को खाने का पैकेट दिया गया। रात बीती तो ट्रेन में इटारसी और नासिक के पास संतरे, अनार और किशमिश बेचने वाले आ गए। यहां इनकी कीमत काफी कम रहती है। सुबह खंडवा स्टेशन पर ट्रेन पहुंची तो प्लेटफॉर्म पर किसी नेता की अगवानी के लिए खड़े कार्यकर्ताओं के साथ आए बाजा वाले ढोल-नगाड़े बजाने लगे।

ढोल की थाप सुनी तो हमारे कोच के छात्र-छात्राओं के पैर खुदबखुद थिरकने लगे। प्लेटफॉर्म पर छात्रों ने जमकर नृत्य किया। जब तक ट्रेन चल नहीं दी, तब तक वे मस्ती करते रहे। आगे सब लोगों ने सुबह का नास्ता किया। इस बीच ट्रेन दो जगह सुरंग से होकर गुजरी तो दिन में भी पूरी ट्रेन में घुप अंधेरा छा गया। फिर क्या था, लड़के-लड़कियां जोर-जोर से चिल्लाने लगे। ऐसी ही स्थिति मुम्बई के करीब कल्याण स्टेशन से पहले भी दिखी। वहां भी सुरंग से होकर गुजरने में जमकर शोर मचाए।

चौबीस घंटे से अधिक की यात्रा के बाद ट्रेन दादर स्टेशन पहुंची तो सभी लोग प्लेटफॉर्म से बाहर निकले। देश की व्यावसायिक और वाणिज्यिक राजधानी और महानगर मुम्बई की सरजमीं पर कदम रखते हुए गर्व और आनन्द की अनुभूति हो रही थी। बहरहाल हम सब अपने-अपने लगेज के साथ स्टेशन के बाहर पहले से बुक बस पर सवार हो गए। हममें से अधिकतर के लिए मुम्बई की धरती पर पहली बार कदम पड़े थे, सो महानगर की ट्रैफिक, ऊंची-ऊंची बिल्डिंग और चिकनी सड़कों को देखकर मन प्रफुल्लित था।

करीब डेढ़ घंटे की यात्रा के बाद बस हीरानंदानी स्थित एमटीएनएल के गेस्ट हाउस पहुंची। यात्रा की थकान से चूर सभी लोग औपचारिकता पूरी करने के बाद अपने-अपने ग्रुप के साथ बिल्डिंग के नौंवी और दसवीं मंजिल पर स्थित कमरों में शिफ्ट हो गए। फ्रेश हो लेने के बाद शाम को राम सर ने सबको नास्ते के लिए कैंटीन में बुलाया। नास्ते के बाद तय हुआ कि पास के मार्केट में घूम लिया जाए। एक घंटे तक आसपास के मॉल्स में कुछ शापिंग करने के बाद सभी लोग लौटे और रात का खाना खाने के बाद अपने रूम में जाकर सो गए। सुबह सब लोग थोड़ा देर से उठे और फ्रेश होकर नास्ता लेने के बाद मुम्बई शहर में पहला दौरा फिल्म सिटी का हुआ।

गेस्ट हाउस कैंपस में सब लोगों ने ग्रुप फोटोग्राफ लिए और टैक्सी से गोरेगांव फिल्म सिटी के लिए रवाना हुए। आधे घंटे बाद हम सब लोग फिल्म सिटी के एक नंबर गेट पर पहुंचे। वहां पर जांच पड़ताल के बाद सब लोग आधे किमी अंदर मार्च करते हुए "इंडिया का बेस्ट ड्रामेबाज" के सेट पर पहुंचे। अंदर हमें बताया गया कि अभी अभिनेता अक्षय कुमार और अभिनेत्री निमरत कौर अपनी फिल्म एयर लिफ्ट के प्रमोशन के लिए यहां आने वाले हैं। वे लोग बाहर खड़ी वैनिटी वैन में बैठे थे।

बहरहाल अंदर पहुंचने के कुछ देर बाद सबसे पहले अभिनेता साजिद खान, अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे और फिर अभिनेता विवेक ओबेराय आए। ये तीनों लोग प्रोग्राम में जज की हैसियत से मौजूद रहे। एंकर, डायरेक्टर और प्रोग्राम में पार्टीसिपेट कर रहे छोटे-छोटे बच्चे अपना रिहर्सल कर रहे थे। भव्य सेट देखकर हम रोमांचित थे और उत्साहित भी थे कि हम भी टेलीविजन पर दिखेंगे। कुछ देर में वहां अभिनेता अक्षय कुमार और अभिनेत्री निमरत कौर दस्तक दिए। उनको देखकर हमारा उत्साह चरम पर पहुंच गया।

अपने सामने दोनों सेलेब्रेटीज को देखकर हम रोमांचित थे। हमने टेलीविजन के पापुलर प्रोग्राम की पूरी शूटिंग देखी। देखा कि किस तरह सेट तैयार किया गया था। संवाद अदायगी से लेकर सिनेमेटोग्राफी और मेक-अप से लेकर कास्ट्युम तक की पूरी तैयारी को समझा। छोटे-छोटे बच्चों ने सधे अंदाज में अपने परिपक्व अभिनय से सबको मोहित कर लिया। सेट पर बैठने से पहले ही वहां के मैनेजर ने हम सब को जरूरी दिशा-निर्देश यानी कि कब ताली बजानी है और कब उत्साहवर्धन करना है, आदि दे दिए थे।

वहां से निकलने के बाद हम सब लोग बाहर आए और कैंटीन में दोपहर का भोजन किए। बाद में सब लोगों ने टेलीविजन सीरियल "तारक मेहता का उल्टा चश्मा" का सेट देखा और दूसरे सेटों की तैयारी देखी। फिल्म सिटी से निकलकर हम लोग बस से एक अन्य स्टूडियो पहुंचे। वहां दूरदर्शन के लिए बन रहे सीरियल चुनौती की शूटिंग चल रही थी। इस बीच शाम हो गया और हम लोग अपने गेस्ट हाउस पहुंच गए। वहां सब लोगों ने शाम का नाश्ता करने के बाद कमरे में मस्ती की। कुछ लोग शापिंग भी किए। रात में खाना खाने के बाद सब लोग सोने चले गए।

मस्ती के मूड में कई छात्र देर रात तक जमकर धूम-धड़ाका किए। अगले दिन सब लोग तैयार होकर बस से बांद्रा के लिए रवाना हुए। रास्ते में बस के अंदर ही गाने-गवाने और मस्ती का माहौल रहा। बांद्रा पहुंचने पर सब लोग समुद्र तट पर पहुंचे और पानी की तेज लहरों के बीच मस्ती की। हालांकि वहां तट पर पथरीली भूमि और बड़े-बड़े पत्थरों पर काई जमी होने से कई लोग फिसले भी। वहां फोटोग्राफी की, खुशनुमा माहौल में नाचे-गाए। समुद्र तट के सामने ही स्थित शाहरूख खान के बंगले मन्नत को देखा। वहां घंटों बिताने के बाद हम लोग जुहू-चौपाटी के लिए रवाना हुए।

बांद्रा की अपेक्षा जुहू-चौपाटी का तट अच्छा था। वहां नम रेत पर बच्चों को खूब मजा आया। समुद्र की लहरों में बच्चे घंटों मस्ती किए। जो मस्ती के मूड में नहीं थे वे भी साथियों को देखकर अपने को रोक नहीं सके और सागर की लहरों में अठखेलियां करने लगे। लड़के-लड़कियों का हमारा ग्रुप आनंद में ऐसा डूबा मानों हवा में उड़ रहा हो। सब लोग पानी में पूरी तरह भीगने के बाद गीले कपड़ों में ही वापस लौटे। इस बीच डूबते सूरज को देखकर वहां भी पानी में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की। सभी छात्र-छात्राएं पानी से तरबतर थे। भीगे होने से बस में हल्की ठंड भी महसूस हो रही थी। रास्ते में अमिताभ बच्चन का बंगला जलसा, सलमान खान का बंगला गैलेक्सी देखा। रात में गेस्ट हाउस पहुंचे तो सीधे कमरों में घुसे और कपड़े चेंज कर सब नीचे कैंटीन में खाने के लिए आ गए।

अगले दिन सब लोगों को सुबह बताया गया कि हमें सिद्धिविनायक मंदिर, हाजी अली शाह की दरगाह और मरीन ड्राइव पर चलना है। हम लोग जल्दी-जल्दी तैयार होकर बस पर सवार हुए और अगले पड़ाव की ओर चल दिए। सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन करने के बाद सबने वहां बने गणेश भगवान की सवारी मूषक में मन्नतें मानीं और बाहर फोटो खिंचवाए। इसके बाद वहां से हाजी अली शाह की दरगाह की ओर चल दिए। बस पार्क होने के बाद हम लोग सड़क से आधे किमी अंदर की ओर पैदल चलकर दरगाह पहुंचे और धागा बांधकर मन्नतें मांनीं। वहां एक तरफ दरगाह पर अकीदतमंद चादरें चढ़ा रहे थे तो दूसरी तरफ कौवाली चल रही थी। वहां से निकले तो शाम होने लगी थी।

मुम्बई की भीड़ भरी सड़कों की लंबी यात्रा के बाद हम लोग रात में करीब छह बजे मरीन ड्राइव पहुंचे। उस समय अंधेरा हो गया था, पर मजा कम नहीं हुआ था। लोग समुद्र के सामने बनी बाउंड्री पर बैठे माहौल का आनंद उठा रहे थे। वहां भी खूब फोटोग्राफी हुई। रंगीन रोशनियों के बीच ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों पर जगमगाती लाइटों और मुम्बई की सड़कों पर तेज रफ्तार में भागते वाहनों की चकाचौंध करतीं हेडलाइटों को देखना हमारे लिए किसी रोमांचक नजारे से कम नहीं था। वहां से हम लोग ऐतिहासिक ताज होटल और गेटवे ऑफ इंडिया देखने रवाना हुए। रात काफी हो रही थी। इसलिए सर ने वहां दो ग्रुप बना दिया।

लड़कियों का ग्रुप अनिशा मैम के साथ शापिंग करने चला गया और लड़कों का ग्रुप ताज होटल, गेटवे ऑफ इंडिया देखने निकल पड़ा। हमने ताज होटल और गेटवे ऑफ इंडिया के सामने फोटो खिंचवाए। देर रात करीब ग्यारह बजे हम लोग अपने गेस्ट हाउस पहुंचे। वहां सीधे कैंटीन में खाना खाने के बाद हम लोग सोने चले गए। रात में ही तय हुआ कि सुबह फिर फिल्म सिटी चलेंगे और "कामेडी नाइट विथ कपिल शर्मा" के सेट पर जाएंगे। रात की थकान की वजह से सुबह थोड़ा देर से उठे और तैयार होकर नाश्ता और दोपहर का खाना खाने के बाद हमें रवाना होना था।

चूंकि रात में हमें वापसी की ट्रेन भी पकड़नी थी इसलिए हमने अपने लगेज पैक कर लिए थे और उसको स्टोर रूम में रखवा दिए थे। दोपहर में हम फिल्म सिटी पहुंचे और कपिल शर्मा के सेट पर काफी जांच-पड़ताल के बाद इंट्री पाए। अंदर शिफ्ट होने के बाद सबसे पहले क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू दिखाई दिए। कुछ देर बाद कपिल शर्मा आए। उन्होंने शूटिंग से पहले की तैयारी की। उनकी शूटिंग शुरू हुई तो खूब हंसाई भी हुई। उन्होंने जमकर मनोरंजन कराया। मकान शिफ्ट करने को लेकर बनाए गए सेट पर उनका डायलाग वाकई में मजेदार रहा। हमें चूंकि लौटना भी था, इसलिए हम उनकी शूटिंग बीच में छोड़कर बाहर निकल आए और कुछ देर बाद वापस चल दिए।

पहले ही की तरह फिल्म सिटी से बाहर निकल कर अपनी बस में सवार हुए और गेस्ट हाउस की ओर रवाना हो गए। शाम करीब छह बजे गेस्ट हाउस पहुंचे और कुछ फोटोग्राफी करके सीधे कैंटीन में पहुंच गए। रात का भोजन किया और गेस्ट हाउस के स्टोर रूम से अपना-अपना लगेज लेकर वापसी के लिए बस में सवार हो गए। मुम्बई की सड़कों पर चल रही बस में वापसी का समय बहुत भारी पड़ रहा था। रास्ते में हमने कई महत्वपूर्ण इमारतों और दर्शनीय स्थलों को निहारा।

साढ़े आठ बजे के करीब हम दादर स्टेशन पहुंचे और बस से निकलकर अलविदा मुम्बई कहते हुए स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर पांच पर पहुंचे। स्टेशन पर भी मुम्बई की यादें आ रही थीं। पता नहीं क्यों बार-बार रुकने का मन कर रहा था। तभी साढ़े नौ बजे ट्रेन आई तो हम अपने कोच में सवार हो गए। कुछ देर में ट्रेन ने हार्न बजाया और मुम्बई से हमारी विदाई शुरू हो गई। काफी देर तक सब जागते रहे। फिर हम सब अपने-अपने बर्थ पर लेट गए। रात भर ट्रेन चलती रही। सुबह हुई तो हम सब मध्यप्रदेश के किसी स्टेशन से गुजर रहे थे। फिर वही हुआ जो जाते वक्त हुआ था, यानी नाश्ता, दोपहर का भोजन।

इस दौरान भी हंसी-मजाक और मस्ती चल रही थी, लेकिन इस बार वह रौनक नहीं थी जो जाते समय थी। तब जाने की खुशी थी और अब लौटने का गम। हमें पता था कि पांच दिन घूमकर हम सातवें दिन घर पहुंच रहे हैं और अगले दिन से हम फिर उसी माहौल में आ जाएंगे जिसे हम छोड़कर गए थे। जैसे-जैसे हम घर के करीब पहुंच रहे थे, वैसे-वैसे हमारी यादें भी बढ़ती जा रही थी। रात आठ बजकर दस मिनट पर हमारी ट्रेन नैनी स्टेशन पहुंची तो हम भारी मन से अपने तीनों शिक्षकों और दोस्तों से विदा हुए। स्टेशन पर हम सब अलग-अलग हो गए लेकिन हमारी यादें साझा थीं।

हमने बहुत यात्राएं की हैं लेकिन मुम्बई की यात्रा सचमुच यादगार बन गई।

शिक्षकों के सामने ही दोस्तों के साथ मस्ती का यह आलम कभी नहीं भूलेगा।

मुम्बई हमारी यादों में हमेशा तरोताजा रहेगी।

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