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व्यंग्य राग (४) सर्वर डाउन है / डा. सुरेन्द्र वर्मा

अपनी बारी के इतजार में मैं एक लम्बी कतार में खडा था | मैंने खिड़की से गिनना शुरू किया, एक दो तीन चार ...मेरा पन्द्रहवां नंबर है. मुझे खड़े खड़े लगभग एक घंटा हो चुका है. लगता है करीब ४०-४५ मिनट और लगेंगे. चलो कोई बात नहीं, जहां ६० मिनट गुज़ारे वहां ४० मिनट और सही. लेकिन यह क्या? आधा घंटा बीत गया और मैं अभी भी पंद्रह नंबर पर ही खडा हू. आखिर कतार आगे क्यों नहीं बढ़ रही है? पता चला सर्वर डाउन है !

अब आप ही बताइए, जब सर्वर ही ‘सर्व’ करना छोड़ दे तो क्या किया जा सकता है ? किसी से शिकायत भी नहीं कर सकते. जिस अधिकारी के पास जाइए कह देता है – सर्वर डाउन है, मेरे हाथ में नहीं है. अगर आप इंतज़ार नहीं कर सकते तो बेहतर होगा आप कल आएं. ‘लेकिन सर्वर का क्या है, कल भी डाउन हो सकता है.” अधिकारी बड़े इत्मीनान से कहता है, हाँ, सो तो है.

मैं घर वापस आ जाता हूँ. ‘क्यों आप तो कह कर गए थे की १५-२० मिनट में आ जाऊंगा, और दो घंटे हो गए. कब से खाना लिए बैठी हूँ. आपको तो किसी की कोई फिकर ही नहीं है. ‘काम तो थोड़ा ही था, बस पोस्ट-आफिस से पैसे ही तो निकालने थे. लेकिन क्या करें, सर्वर ही डाउन हो गया!’, मैंने सफाई देने की कोशिश की.

बस कहने भर की देर थी कि देखता क्या हूँ, पत्नी का मूड एकदम खराब हो गया. झुंझलाकर बोलीं, जाओ अब खुद ही परसो और खुद ही खा लो. मुझे भूख नहीं है. मैंने कहा, ‘ठीक है, खा लूंगा. पर सर्व तो कर दो.’ नहीं, वे बोलीं, परोसना हो तो खुद ही परोस लो. सर्वर डाउन है.!

सर्वर डाउन होता है तो सब काम-काज ठप्प हो जाते हैं. पत्ता नहीं हिल सकता. मैंने काफी लल्लो-चप्पो करने की कोशिश की लेकिन पत्नी नहीं मानी तो नहीं मानी. उसका सर्वर उखड गया था.

एक दिन ज्ञानचंद जी मिल गए. ज्ञानी आदमी हैं. इत्तफाक से सर्वर के बारे में चर्चा छिड़ गई. बोले, आपको पता नहीं सर्वर तीन तरह का होता है. एक सर्वर स्वयं आदमी द्वारा निर्मित है. डाउन हो जाए तो आदमी उसे ठीक भी कर लेता है. मैं यहाँ उस सर्वर की बात कर रहा हूँ जो आपके डाकघर में पैसा निकालते समय डाउन हो गया था. समय लगता है लेकिन उसे जानकार टेक्नीशियनों द्वारा ठीक कर दिया जाता है.

दूसरा सर्वर आदमी की मानसिकता में ही इन-बिल्ट है. कभी डाउन हो जाए तो स्वयम आदमी को ही डाउन कर देता है. अच्छा खासा आदमी किसी मसरफ का नहीं रहता. कोशिश करने से यह ठीक नहीं होता. हाँ, उसे यदि अकेला छोड़ दिया जाए तो शायद ठीक भी हो जाए. लेकिन मूड तो मूड है. क्या पता कब बिगड़ जाए, कब उखड जाए ! आपकी पत्नी का सर्वर डाउन हो गया था तो क्या आप उसे ठीक कर पाए थे ? नहीं न !

एक तीसरी तरह का सर्वर भी है. यह न आदमी द्वारा निर्मित कोई यांत्रिक कल-पुर्जा है और न ही आदमी के स्वभाव का कोई हिस्सा है. लेकिन फिर भी आदमी को प्रभावित किए बिना बाज़ नहीं आता. इसकी डोर शायद ईश्वर के हाथ में है. ईश्वर जब चाहे इसे सकारात्मक या नकारात्मक रूप से सक्रिय कर देता है. आदमी ने इसका नाम ‘भाग्य’ रखा है. आदमी का जब भाग्य साथ नहीं देता तो समझो भगवान का सर्वर डाउन है. इंसान तब दुखी होने के सिवा कुछ नहीं कर सकता. कितनी ही कोशिश करे उसे कुछ प्राप्त नहीं होता. कहा भी गया है, ‘सकल पदारथ हैं जग माहीं भाग्यहीन नर पावत नाहीं.’ वैसे कहा यह भी जाता है कि भाग्य रूपी सर्वर को काटने वाला हथियार बेशक आदमी के पास है लेकिन वह अक्सर उसका इस्तेमाल नहीं करता. और वह हथियार है, ‘पुरुषार्थ’-

सर्वर यंत्र है, सर्वर मूड है, सर्वर भाग्य है. आइए, हम सब मिल कर प्रार्थना करें कि हमारा कोई भी सर्वर कभी डाउन न हो. दफ्तर के हमारे काम होते रहें, हमारा मूड बना रहे और भाग्य हमारा साथ दे. तथास्तु |

-सुरेन्द्र वर्मा

१०,एच आई जी / १,सर्कुलर रोड इलाहाबाद -२११००१

मो, ९६२१२२२७७८

ब्लॉग surendraverma389.blogspot.in -

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