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परिपूर्णतावाद :: कल्पित वास्तविकता / मीनू पामर

पूर्णत: आदर्श होना किसी के लिए भी संभव नहीं है! हर इंसान दुनिया के हर काम में पूर्णत: आदर्शवादी हो,ऐसा सम्भव नहीं है! कहते हैं कि अच्छी सूरत वाले के पास अच्छी सीरत भी हो,ऐसा ज़रुरी नहीं है!

आईये मिलकर देखते हैं कि अलग अलग कार्य प्रवृति के लोगों को ज़िन्दगी में संपूर्णता लाने के लिए कौन कौन सी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है!

क) गृहिणी (हाउसवाइफ) :

यह शब्द सुनने में जितना साधारण लगता है, उतना है नहीं ! गृहिणी का जो अर्थ समझा जाता है, वह यह है कि उसे बस घर संभालना है ,घर से जुडी चीजों की संभाल करनी है! घर चाहे छोटा हो या बड़ा ,बहुत सी छोटी छोटी चीज़े एक गृहिणी को देखनी पड़ती हैं! घर के सभी सदस्यों की छोटी छोटी ज़रूरतों का ध्यान रखना! किसी सदस्य ने किस समय क्या खाना पीना है, कब दवा लेनी है, बच्चों ने खाना खाया या नहीं, दूध पीया या नहीं ,होमवर्क किया या नहीं इत्यादि!

 

क्यों ना मैं आज पतिदेव को उनके पसंद की सब्जी या मिठाई बना कर खिला दूँ, वह खुश हो जायेंगे! उसके मन में बहुत तरह तरह के सवाल उठते रहते हैं कि मैं कैसे अपने घर के कमरों, रसोई , बाथरूम, ड्राइंग रूम इत्यादि की सजावट कर सकती हूं! उसकी यही कोशिश रहती है कि अचानक कोई मेहमान आ जाये तो उसके मुख से यही निकले कि घर के मुखिया औरत ने घर की साज सज्जा कितने अच्छे ढंग से की है!परन्तु हर समय घर परिपूर्ण लगे, ऐसा संभव नहीं है! इसीलिए परिपूर्णता के लिए चिंता करना भी समझदारी नहीं है!

 

ख) नौकरीपेशा स्त्रियाँ :

नौकरीपेशा स्त्रियों की बात करें तो उनकी ज़िन्दगी चुनौतियों से भरी हुई होती है! घर,नौकरी व बच्चों की जिम्मेदारीयों में संतुलन बना पाना काफी मुश्किल होता है! शांत मन से ऑफिस में काम करना, शाम को आकर बच्चों के साथ पूर्ण उर्जाशक्ति के साथ खेलना व घर के कार्य पूर्ण करना उसके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होते ! इन्हीं चुनौतियों की आड़ में वह अपना ध्यान पूरी तरह से नहीं रख पाती हैं! ज़िन्दगी की भागम भाग में जैसे उसकी अपनी ज़िन्दगी अदृश्य होने लगती है!

इन स्त्रियों की ज़िन्दगी में कई चीजों का अभाव रहने लगता है, जैसे –

 

१) अपने लिए गुण्वत्ता समय निकाल पाना !

२) बच्चों के बचपन का भरपूर आनंद ले पाना !

३) पूर्ण उर्जा शक्ति से पति व बच्चों की छोटी छोटी इच्छाओं की आपूर्ति करना !

 

ग) नौकरीपेशा पुरुष

नौकरीपेशा पुरुषों के लिए भी कई तरह की छोटी छोटी चुनौतियां होती हैं !उन्हें भले ही स्त्रियों की तरह घर की संभाल की चिंता नहीं होती,परंतु उनकी अपनी अलग जिम्मेदारियां हैं! जैसे –

१) कैसे अपनी कंपनी के बॉस को अपने अच्छे काम से प्रभावित करना है !

२) कैसे अपना निरंतर ज्ञान बढ़ाना है !

३) निरंतर उन्नति पाने के लिए कौन कौन से हथकंडे अपनाने हैं !

४) घर पहुँच कर पत्नी,बच्चों व माँ को समय देना!

५) छुट्टी वाले दिन पत्नी,बच्चों व घर के अन्य सदस्यों को बाहर घुमाना फिराना !

६) अगर पत्नी भी कामकाजी है व माँ भी साथ में नहीं रहती है तो घर के काम काजों में भी उसे पत्नी का साथ देना पड़ता है !

 

घ) व्यापारी

एक व्यापारी के कार्य में आत्म निर्भरता होती है ,उसको नौकरीपेशा व्यक्ति की तरह भले ही किसी के अधीन रहके कार्य नहीं करना पड़ता, परंतु उसका काम भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं होता!

 

१) अपना व्यापार शुरू करने व उसे सफल बनाने के लिए एक व्यापारी को पूरी तरह से अपनी ताकत झोंकनी पड़ती है, उतार चदाव का सामना भी करना पड़ता है !

२) नौकरीपेशा व्यक्ति को भले ही बॉस द्वारा सौंपे हुए कार्य ही करने पड़ते हैं ,परन्तु उसे कंपनी से जुड़े छोटे बड़े निर्णय लेने की चिंता नहीं होती ! वहीँ एक व्यापारी को अपने व्यापार से जुड़ा हर निर्णय स्वयं ही और बहुत सोच समझकर लेना पड़ता है! एक छोटी सी भी चूक हो गयी तो रातों रात उसके व्यापार का दीवाला भी निकल सकता है !

३) एक व्यापारी को अपना व्यवसाय जमाने के लिए कई खतरे मोल लेने पड़ते हैं! उसकी छुट्टी का समय व दिन भी निर्धारित नहीं रहते! वहीँ नौकरी की बात करें तो आज के समय में बहुत सी नौकरियां ऐसी हैं जिस में ५ दिन जमकर मेहनत करके २ दिन छुट्टी का भरपूर मज़ा ले सकते हैं!

अत: निष्कर्ष यही निकलता है कि एक पूर्णत: व्यक्ति ही सफल व्यक्ति हो ऐसा ज़रुरी नहीं है!

एक सफल व्यक्ति व पूर्णतावादी व्यक्ति में यही अंतर है कि पूर्णतावादी व्यक्ति ऐसे लक्ष्य निर्धारित करता है जो उसकी पहुँच से बाहर हो सकते हैं ,वहीँ एक सफल व्यक्ति अपने लक्ष्य अपनी पहुँच के अन्दर रखकर न ही अधिक प्रसन्न रहता है बल्कि छोटे छोटे लक्ष्यों की प्राप्ति की ख़ुशी मनाते हुए अधिक मनोबल महसूस करता है !

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