शनिवार, 14 मई 2016

आलसी / सार्थक देवांगन

image

लसी

आलस एक बीमारी है जो किसी भी आदमी को आगे बढ़ने नहीं देता। यूं तो दुनिया में सभी लोग आलसी नहीं होते। लेकिन कुछ लोग अपना छोटा भी काम नहीं करते। जैसे एक आफिस के बॉस को सिर्फ चिल्लाना आता है , और दूसरों से काम करवाना। वो खुद भी तो अपना छोटा सा काम बहुत आसानी से कर सकते है लेकिन वो नहीं करना चाहते। सिर्फ ए.सी. और कूलर में बैठे बैठे आदेश देते रहते हैं।

मेरे एक भैया जो कॉलेज में पढाते हैं। वो शाम को छह बजे घर वापस आते है और धम्म से सोफा पर बैठ जाते हैं , और चिल्लाने लगते हैं कि , मुझे कुछ खाने का दो और जब सब लोग अपना अपना काम करते रहते हैं , तभी ज्यादा ही चिल्लाते हैं। एक बार की बात है , जब घर में कोई भी नहीं था। वे कालेज से आए। उन्होंने देखा कि , घर पर कोई नहीं हैं। उन्हें बहुत जोरों की भूख लग रही थी। उन्होंने सोंचा , मैं क्या करूं ? मुझे जोर की भूख लग रही है और घर पर भी कोई नहीं है। उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था। फिर होटल से ब्रेड पकौड़ा मंगा लिए और उसे खाने लगे। पर वो घर में कुछ बना भी तो सकते थे , लेकिन उन्होंने नहीं बनाया। वह सिर्फ कूलर के आगे बैठे रहे। कुछ काम भी नहीं किया। उनकी मां ने रसोई घर में गैस पाटा पर एक चिट लिखकर छोड़ा था कि , पीने का पानी भर देना और कूलर में भी पानी डाल देना , घर के बोर का पम्प खराब हो गया है इसलिये नगर निगम के नल के पानी का इस्तेमाल करना। उनकी मां ने सोचा था कि भैया किचन में खाने के लिए कुछ बनाने आयंगे ही , और कुछ नहीं तो चाय ही पियेंगे परंतु , वे किचन में गए ही नहीं। इसलिये चिट पढ़ा ही नहीं। जब वो सब रात को आए तो उन्होंने देखा , ना तो पीने के लिए पानी है , न तो नहाने के लिए बाथरूम में और कूलर तक में भी पानी नहीं है। उन्हें रात भर गर्मी में सोना पड़ा। क्योंकि नगर निगम का नल केवल आधा घंटा ही आता था। पानी स्टोर ही नहीं हुआ था। सुबह , न तो नहाने के लिए , न ही पीने के लिए पानी था। उस दिन उनके कालेज में बहुत बड़ा फंक्शन था , जिसके प्रमुख मेरे वही भइया थे। जैसे तैसे तैयार होकर बिना नहाये , बिना कुछ खाये घर से कालेज के लिये निकलना पड़ा। सुबह सुबह सारे लोगों से डांट भी सुना वो अलग। अपने आलसीपन के कारण सुबह मूड खराब हुआ। कालेज में भी उनके ग्रुप का परफार्मेंस इसी कारण से बिगड़ते बिगड़ते बचा।

मेरा सगा भाई भी बहुत आलसी है। उसको कुछ भी काम कहा जाता है तो वह हां तो कहेगा लेकिन , कुछ करता ही नहीं। मेरी मम्मी जब उसे कुछ भी समान लाने के लिए बोलती है , तो वह जाता ही नहीं , सिर्फ मोबाइल में गेम खेलते रहता है और खाते रहता है। वह , दूसरे को देख कर आलसी बनता जा रहा है। सिर्फ अपने आलस के कारण वह बैडमिंटन के प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया , जबकि वह बहुत अच्छा खिलाड़ी है। वह जिसे आसानी से हरा देता है , वही हमारे स्कूल का बैडमिंटन चैम्पियन हो गया है। उसे उसके आलसीपन की यह बड़ी सजा मिल चुकी है।

मेरा एक मित्र है वो भी एक नम्बर का आलसी है। वह कुछ काम नहीं करता। उसे कक्षा में , कुछ करने के लिए कहा जाता है तो करता ही नहीं है। उसे कुछ लाने के लिए कहते थे तो वह लाता ही नहीं था। एक बार हम , एक ग्रुप प्रयोजना बना रहे थे। उसे हम जो भी काम कहते थे , वह करता ही नहीं था। जब हम बनाते रहते थे तब वह खेलता रहता था , और कुछ चीज लाने के लिए कहते थे , तो नहीं लाता था। इसलिए हमने उसका नाम अपने ग्रुप से काट दिया। वह रोने लगा और वह हमे बार बार बोलने लगा कि , तुम लोग अब मुझे जो काम दोगे मैं करूंगा । मुझे ग्रुप से मत निकालो। हमने कहा कि , तुम कुछ काम तो करते नहीं हो , सिर्फ खेलते रहते हो और हम लोगों को भी काम नहीं करने देते इसलिए , हमने तुम्हें निकाल दिया | अब हमेशा काम में साथ देने का वादा करने पर , हमने उसे वापस रख लिया। वह दो दिन तक काम करता रहा। फिर तीसरे दिन जब आया तो एक घंटा काम करते ही वह कहने लगा कि , मैं थक गया हूं। मैं घर जा रहा हूं। कल आउंगा। वह चला गया। अगले दिन से वह किसी भी दिन नहीं आया। उसे लगा कि , उसका नाम अब भी होगा। जब हम प्रयोजना जमा करने गये वह भी हमारे ही साथ साथ गया। परंतु हमने न उसे नाम कटने के बारे में बताया , न उसने हमसे पूछा। चार दिन बाद , प्रयोजना का परिणाम आ गया। हमारा ग्रुप पूरे स्कूल में दूसरे स्थान पर रहा। प्राइज सेरेमनी के समय वह आलसी लडका भी हमारे साथ स्टेज तक चला गया। परंतु प्राइज के लिए केवल हम तीन लोगों का नाम था। उसे प्राइज नहीं मिला। उसको स्टेज में अकारण आने पर डांट भी मिली। उसे , नीचे उतरने पर पता चला कि उसे प्राइज क्यों नहीं मिला। तब हमने उसे बताया कि , मैडम ने उसका नाम कटवाया था , क्योंकि उन्होंने उसको काम करते हुए नहीं देखा था। उसे सबक सिखाने के लिये ही उसका नाम हटाया गया था। आज उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा था कि , उसकी आलस की वजह से उसे उसका पुरस्कार नहीं मिला। उसके बाद उसने कभी भी आलस नहीं दिखाई।

आप भी आलसी बने मत रहिये। काम करते रहिये। दूसरों के ऊपर हुक्म मत चलाइये। अपना काम स्वयं करिये , सफलता आपके इंतजार में है ...........।

सार्थक देवांगन

कक्षा पांचवी , के. वि. रायपुर

1 blogger-facebook:

  1. बहुत सुन्दर लेख है,सार्थक।आप बहुत अच्छा लिखते हैं, लिखते रहिये।

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------