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उदयपुर चित्र प्रदर्शनी ‘पराशक्ति’ (द सुप्रीम पॉवर)

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       उदयपुर, 30 अप्रेल/ हर कल्पना अपने आप में अलौकिक, दिव्य और कालजयी होती है और यही कृतिकार के माध्यम से कैनवास पाती है। हर कृति को शाश्वत एवं कालजयी स्वरूप देने के लिए जरूरी है कि कृतिकार का चित्त शुद्ध-बुद्ध हो, तभी प्रकृति के बिम्बों का प्रपात चित्रकृतियों में पूरी मौलिकता से झरता है और हर द्रष्टा को आनंदित करता, गुदगुदाता या विचारोत्तेजना पैदा करता है।

       यह विचार उदयपुर सूचना केन्द्र में वैश्विक ख्याति की मशहूर चित्रकार इन्दिरा प्रकाश के चित्रों की पांच दिवसीय प्रदर्शनी  ‘पराशक्ति (द सुप्रीम पॉवर) के समापन अवसर पर उप निदेशक (सूचना एवं जनसंपर्क) डॉ. दीपक आचार्य ने व्यक्त किए। उन्होंने दीर्घा से एक पेंटिंग पृथक कर प्रदर्शनी का समापन किया। उन्होंने बताया कि कला दीर्घा के आधुनिकीकरण के लिए व्यापक प्रयास किए जाएंगे।

       इस दौरान् आत्मप्रकाश ने प्रदर्शनी के अनुभवों के बारे में जानकारी दी। चित्रकार इन्दिरा प्रकाश ने बताया कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित सभी 48 चित्रों के प्रति कलाप्रेमियों में जबर्दस्त आकर्षण रहा। क्षेत्र भर के प्रसिद्ध चित्रकारों, कलामर्मज्ञों, जिज्ञासुओं, शोधार्थियों और आम लोगों ने इसकी सराहना की और चित्रों की विषयवस्तु के बारे में जानकारी दी।

       आकाशवाणी के पूर्व उप महानिदेशक माणिक आर्य ने चित्र प्रदर्शनी के प्रभावों की समीक्षा की और इसे अपनी तरह की अनूठी प्रदर्शनी बताया जिसमें परा-अपरा और अलौकिक आध्यात्मिक सौंदर्य के भावों के बहते झरनों ने हर किसी को आनंदित किया।

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       समापन अवसर पर शहर के नामी चित्रकारों द्वारा कैनवास पर अंकित की गई शुभकामना चित्रकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया। इसे पूर्व समापन दिवस पर नवोदित चित्रकार रागिनी मेहता एवं सागरिका ने कैनवास पर सुन्दर चित्रांकन कर मन मोह लिया ।

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