बुधवार, 25 मई 2016

रैवन की लोक कथाएँ / रैवन रोशनी लेकर आया / सुषमा गुप्ता

clip_image002
clip_image004
सुषमा गुप्ता ने 1000 से अधिक लोक कथाओं का संग्रह किया है. तमाम दुनिया भर से. देश विदेश की लोक कथाओं की  उनकी एक प्यारी  सी किताब है - रैवन की लोक कथाएँ. प्रस्तुत है उक्त किताब से एक लोक कथा.
पुस्तक का विवरण -
रैवन की लोक कथाएँ
लेखिका - सुषमा गुप्ता
प्रकाशक - इंद्र पब्लिशिंग हाउस
http://indrapublishing.com
ISBN NO. 978-93-84535-39-1
पृष्ठ 113, कीमत 125 रुपए
ईमेल संपर्क - manish@indrapublishing.com
pramod@indrapublishing.com
फ़ोन - 0755-4059620








एक बार एक गाँव में बहुत ही ताकतवर और अमीर सरदार रहता था। उसकी एक बहुत सुन्दर लड़की थी। उसके पास सूरज और चाँद भी थे जिनको वह अपने घर में टाँग कर रखता था।
अब क्योंकि सूरज और चाँद उसके पास थे इसलिये और सब जगह अँधेरा रहता था। अँधेरे की वजह से लोग कुछ भी नहीं देख सकते थे। बे अपने खाने के लिये मछलियाँ भी नहीं पकड़ सकते थे।
जब वे अपना खाना पकाने के लिये जंगल में लकड़ी लेने जाते तो उनको रेंगकर जाना पड़ता था और हाथ से महसूस करके यह पता करना पड़ता था कि वह लकड़ी है कि नहीं। फिर उसको उन्हें मुँह से काटकर भी देखना पड़ता था कि वाकई बह लकड़ी है या नहीं।
रैवन को जब यह पता चला कि उस अमीर सरदार के पास सूरज और चाँद हैं तो वह उसके घर उनको लेने के चल दिया। वहीं जाकर उसने सरदार से कहा कि वह उनको उसे दुनिया की भलाई के लिये दे दे, पर सरदार ने मना कर दिया।
तब रैवन को एक तरकीब सूझी। उस सरदार की लड़की एक नदी पर रोज सुबह-सुबह पानी भरने जाया करती थी। वह नदी के पास छिपकर उस लड़की के वहाँ आने का इन्तजार करने लगा।
जैसे ही रवन ने सरदार की उस लड़की को आते देखा तो वह एक बहुत छोटी-सी मछली बनकर पानी में कूद गया।
जब लड़की ने नदी में से पानी भरा तो वह उसकी बालटी में चला गया और जब उस लड़की ने पानी पीने के लिये अपना गिलास उस बालटी में डाला तो वह उसके पानी पीने के गिलास में चला गया।
वह मछली इतनी छोटी थी कि उस लड़की को दिखायी नहीं दी और उसने वह पानी पी लिया। उस लड़की के शरीर में घुस कर रैवन एक बच्चा बन गया और इस तरह वह लड़की गर्भवती हो गई।
कुछ समय बाद उस लड़की ने एक बेटे को जन्म दिया।
धीरे-धीरे उसका बेटा बड़ा हो गया। उसका नाना उसको बहुत प्यार करता था और वह उसके लिये कुछ भी करने को तैयार था।
एक दिन वह लड़का बहुत रो रहा था तो उसके नाना ने पूछा-
''बेटा, तुम क्यों रो रहे हो? क्या चाहिये तुम को?''
लड़के ने रोते हुए छत से लटके सूरज और चाँद की तरफ इशारा करते हुए कहा- ''मुझे वे चाहिये। ''
सरदार ने सोचा कि यदि वह बच्चा उनके साथ खेलने से चुप। हो जाता है तो वह उनको उसको दे देगा, और उसने उनको उस बच्चे को दे दिया।
बच्चा उनको बाहर ले जाकर उनसे कुछ देर तक तो खेलता ' रहा, फिर खेल-खेल में उसने उन सूरज और चाँद को ऊपर उछाल दिया । उनके ऊपर जाने से चारों तरफ बहुत सारी रोशनी फैल गयी ।
यह देखकर बह सरदार यह देखने के लिये बाहर आया कि क्या हुआ । सरदार को बाहर आता देखकर वह बच्चा फिर से रैवन बन गया और वहाँ से उड गया । उस दिन से दुनिया में रोशनी ही रोशनी हो गयी ।

















0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------