शनिवार, 7 मई 2016

और दोनों फिर से बच्चे बन गए / लघु कथा / डॉ.सुनील जाधव

         उस दिन सुयश (40)और महेश(45) का खूब जमकर झगड़ा हुआ । दोनों की लाल आँखों से क्रोध तांडव कर रहा था । तांडव से लोग भयभीत थे । झगड़े का कारण बहुत मामूली था । तिल ने ताड़ का और राई ने विशाल पर्वत का रूप धारण कर लिया था । कुछ पल बिता तो दोनों कुछ शांत हुए ।
        अगले ही पल दोनों एक दूसरे के गले में हाथ डालकर हँसते मुस्कुराते हुए  फ़िल्म देखने चले गए।

       लोगों में यह चर्चा का विषय बन गया ।

अब तक गौर से सुन रहे गौरव ने अपने  अध्यापक से प्रश्न किया ।
" सर, दोनों में इतना बड़ा झगड़ा हुआ । कुछ पल बाद झगड़ा भूलकर  हँसते- मुस्कुराते हुए वे फ़िल्म देखने चल दिए । यह कैसे ?"
" गौरव, बात आश्चर्य और हँसाने वाली लगती हैं । हैं ना ?
पर  तुम्हे पता हैं; यह कैसे सम्भव हुआ ? नहीं ना ?
मैं बताता हूँ। सुयश ने महेश से सिर्फ एक बात कहीं और दोनों पूर्ववत मित्र बन गए ।"
" वह कौन-सी बात हैं सर ? जल्दी बताओ ।"
"तो सुनो, सुयश ने महेश से क्या कहा,' महेश क्या तुम्हें याद हैं, जैसे हम बचपन में झगड़ा करते थे और कुछ क्षण बाद फिर से भूल जाते थे । क्या हम फिर से बच्चे बन सकते हैं ?" और दोनों फिर से बच्चे बन गए ।"

---

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------