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मई दिवस विशेष / यादगार दिवस / प्रमोद यादव

लघु कथा - मई दिवस पर -

यादगार दिवस / प्रमोद यादव

 

एक गोरा-नारा गबरू जवान मजदूर हाथ जोड़ अपने मालिक से मुखातिब होते बोला -‘ मालिक,..आज मजदूर दिवस है..आज के दिन ही मैं कुछ ज्यादा मुखरित हो पाता हूँ..बाकी दिनों तो मेरी घिघ्घी बन्ध जाती है..आठ-दस महीनों से सोच रहा था कि आपसे मन की बात करूँ..पर हिम्मत न जुटा सका..पी.एम...सी.एम. होता तो रेडिओ द्वारा अपने मन की बात कह भी देता..पर छोटा आदमी हूँ..मजदूर हूँ..मुझे तो रूबरू ही बोलना होगा..एक फ़रियाद है आपसे ..’

‘ हाँ..हाँ..बोलो..क्या बात है ? क्या मदद करूँ तुम्हारी ? आज तो तुम्हारा ही दिन है भई ..तुम्हारी बात तो आज रखनी ही होगी..क्या एडवांस चाहिए ?..या किसी से कुछ कहना है ? ‘मालिक बोला .

‘ नहीं मालिक.. ना एडवांस चाहिए..ना ही किसी से कुछ कहना है..बस..मुझे ही आपसे कुछ कहना है..’ मजदूर बोला .

‘ तो बोलो..क्या बात है ? ‘

‘मालिक..मैं आपकी बेटी से बेइंतहा मुहब्बत करता हूँ..और वो भी मुझे बेहद प्यार करती है..हम एक-दूजे के बिना रह नहीं सकते..मैं चाहता हूँ कि आज मजदूर दिवस है..तो आप अपनी बेटी का हाथ एक मजदूर को सौंप इस दिवस को हमेशा के लिए यादगार बना दीजिये....मैं एक जोड़े कपड़ों में ही आपकी बेटी को वरमाला डाल ले जाऊँगा..मुझे और कुछ नहीं चाहिए.. ‘ मजदूर एक सांस में नम्रतापूर्वक गिडगिडा गया .

उसे डर था कि ये बातें सुनते ही मालिक बौखलाकर उसे धकिया देगा..पर ऐसा नहीं हुआ.. मालिक ने बहुत ही सब्र से सामान्य लहजे में उससे कहा -

‘ वो तो ठीक है बरखुरदार ..पर मुझे बेटी के दिल की बात भी तो जानने दो कि वो क्या चाहती है ? दरअसल मैंने उसके लिए अपनी बिरादरी का एक सुन्दर और धनवान लड़का ढूँढ रखा है..और इत्तेफाक से वो आज मेरे घर मौजूद है..मैं दोनों को बुलाता हूँ..फिर बेटी से पूछता हूँ कि किससे शादी करना चाहेगी.. तुम्हारी ओर इशारा करेगी तो तुम माला डाल देना अन्यथा दूसरा तो है ही..तो बुलाऊं उन्हें ? ‘

‘ हाँ मालिक..जरुर बुलाइए..और बेटी से एक बार नहीं..दस बार पूछ लीजिये..वह कभी इंकार नहीं करेगी..’ मजदूर ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा.

मालिक के बुलावे पर दोनों आते हैं..उसकी बेटी और घर में ठहरा बिरादरी वाला धनवान नौजवान..

मालिक अपनी बेटी को उन दोनों से थोड़ी दूर ले जाकर उसके कान में कुछ खुसुर-फुसुर करता है..बेटी के चेहरे का रंग एकाएक ही उड़-सा जाता है..दो मिनट में ही फैसला हो जाता है..वह आती है और बिरादरी के नौजवान के गले में वरमाला डाल देती है..मजदूर हक्का-बक्का रह जाता है..उसे काटो तो खून नहीं..वह लड़की की बेवफाई से आहत हो उसे गुस्से से घूरता है तो वह सहमकर धनवान नौजवान का हाथ थाम तुरंत ही वहां से बाहर खिसक जाती है..

तब मालिक मजदूर को कहता है- ‘ लो भई.. तुम्हारी इच्छा के अनुरूप हमने आज के दिवस को यादगार बना दिया..अब ”मजदूर दिवस जिंदाबाद” के नारे लगाते तुम भी निकल लो..मुझे भी एक कार्यक्रम में जाना है..’

‘ ठीक है मालिक..बेटी ने तो उड़ाया ही..आप भी इस गरीब के प्यार का मजाक उड़ा लो..पर कृपा कर इतना तो बता दो कि बेटी के कान में ऐसा क्या कह दिया कि वह मिनटों में खफा और बेवफा दोनों हो गई..’

‘ जानना चाहते हो ? तो सुनों..मैंने बस इतना ही कहा कि इनके घर शौचालय नहीं है.. “ओडी स्पॉट” (खुले में शौच के स्थल) जाओगी तो वहां स्वच्छता दूतों की टोली “बैठते” ही सीटी बजाएगी...बस इतने से ही उसके दिमाग की सीटी बज गई और उसने फैसला ले लिया..’

‘ पर मालिक..मेरे घर तो शौचालय है..आपने ऐसा फरेब क्यों किया ? क्या हक़ बनता है आपको इस तरह दो प्यार भरे दिलों को यूं तोड़ने का..हमें अलग करने का ? थोडा तो सोचते कि प्यार-मुहब्बत कुदरत की दी हुई कितनी अनमोल चीज है..’

मालिक ने बात काटते कहा – ‘ अब ये सब तुम अपने शौचालय में बैठकर सोचो यार.. मैंने जो सोचा वो हो गया.. वैसे तुम्हारा आधा काम तो मैंने ईमानदारी से ही किया... मजदूर दिवस को यादगार जो बना दिया..आज के दिन को अब तुम शायद ही कभी भूलोगे... चलता हूँ..यूनियन वाले मुझे लेने आ गए..’

बाहर “मजदुर दिवस जिंदाबाद”..”मजदूर एकता अमर रहे” के नारे लग रहे थे..हजारो की भीड़ वाली रैली सामने से गुजरी तो वह बड़े बेमन से उसमें घुस गया..एकता के नारे अब भी लग रहे थे...पर वह निपट अकेला था..

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प्रमोद यादव

गया नगर, दुर्ग ,छत्तीसगढ़

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