रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

शरद कोकास की कहानी "काउंटर के पीछे मुस्कराता चेहरा*

SHARE:

शरद कोकास   यह उस ज़माने की कहानी है जब गाँव के बच्चे शहरों में पढ़ने जाते थे और उनके माँ-बाप उन्हे मनीऑर्डर या बैंक के मेल ट्रांसफर के माध...

image

शरद कोकास

 

यह उस ज़माने की कहानी है जब गाँव के बच्चे शहरों में पढ़ने जाते थे और उनके माँ-बाप उन्हे मनीऑर्डर या बैंक के मेल ट्रांसफर के माध्यम से पैसा भेजते थे । तब ए.टी.एम की सुविधा आम नहीं थी और बैंकें नेटवर्क के माध्यम से आपस में जुड़ी नहीं थीं । शहर में पढ़ रहे बच्चों को भी मनचाहा खर्च करने की स्वतंत्रता नहीं थी और वे साइकिल चलाने में शर्म महसूस नहीं करते थे । अलावा इसके उस समय बैंक जैसे संस्थानों में मशीनों के अलावा मनुष्य भी काम करते थे और वे ग्राहकों को सिर्फ ग्राहक नहीं समझते थे ।

महानगर की चकाचौंध , दुकानों में सजी खूबसूरत और कीमती वस्तुएँ , काँच के शो केसों से झाँकती काली- गोरी पुतलियाँ , सड़कों पर फर्राटे से दौड़ती नई नई डिजाइनों की मोटरगाड़ियाँ और रंगबिरंगें परिधानों में तितलियों की तरह इठलाती कॉलेज जाती लड़कियाँ , सब कुछ नज़र अंदाज करता हुआ वह बैंक की उस इमारत में घुस गया । इमारत के भीतर पढ़े-लिखे लोगों की भीड़ थी, सुन्दर फर्श पर बने काँच के चमचमाते हुए काउंटर थे , काउंटर के पीछे मुस्कराते हुए कुछ चेहरे थे ।
यह एक ऐसी हसीन दुनिया थी जिसे देखकर अन्दाज़ ही नहीं लगाया जा सकता था कि इन ऊँची ऊँची इमारतों के पीछे बदहाली से भरी कोई दुनिया भी हो सकती है । फिर इन शहरों से दूर गाँवों की ज़िन्दगी की कल्पना करना तो और भी मुश्किल । वैसे भी शहरवाले गाँवों की ज़िन्दगी फिल्मों में देखते थे और यह सोचकर खुश होते थे कि कभी समय मिला तो पिकनिक मनाने गाँव जायेंगे । हाँ इन लोगों से इतर कुछ लोग और थे शहरों में जिन्हे रोज़ी-रोटी की ज़रूरत शहर ले आई थी । उनकी जड़ें अब भी गाँवों में थीं और वे अपने तीज - त्योहारों में बार बार जड़ों की ओर लौटते थे ।
‘मैं आप की क्या सेवा कर सकता हूँ ‘ लिखे हुए काउंटर के सामने जा कर वह खड़ा हो गया । उसने अपने हाथों का पसीना काउंटर के सफेद सनमाइका से पोछा फिर आसपास देखकर झेंपते हुए अपनी हथेली को अपनी पैंट पर रगड़ा और काउंटर पर काम कर रही लड़की से कहा .. ‘’ जी सुनिये । ‘’

लड़की कुछ लिखने में मशगूल थी । लड़के की आवाज़ सुनकर उसने अपनी नज़रें उठाई और जैसा कि उसे प्रशिक्षण दिया गया था अपने होठों पर मोनालिसा की तस्वीर सी रहस्यमयी मुस्कान लाकर उसने कहा ‘’ जी ..कहिए ‘’

लड़के ने उसकी ओर देखकर पूछा ‘’ जी ..मेरी एम.टी .आई ? ‘’ ‘’ आपकी एम.टी .? खाता नंबर बताईये ‘’ लड़की ने नपे तुले स्वर में जबाब दिया । उसके चेहरे पर इस बात की कोई शिकन नहीं थी कि लड़के ने पहले अपना खाता नम्बर क्यों नहीं बताया ।

‘’ जी मेरा नंबर ... यह लीजिए .. ‘’ इतना कहकर लड़के ने अपनी जेब से एक तुड़ी मुड़ी पासबुक निकाली और लड़की के हाथों मे थमा दी ।
‘’ आफ्फोह ! कितने गंदे तरीके से रखते हैं आप पासबुक ! पासबुक शर्ट की जेब में रखा कीजिये ,पैंट की जेब में मुड़ जाती है  , मुड़ी हुई पासबुक हमारा प्रिंटर नहीं लेता है । ‘’ लड़की के स्वर में शिकायत थी या नाराज़गी कुछ स्पष्ट नहीं हो रहा था ।
‘’ जी     ... वो ....... साइकल चलाने में .... मुड़ गई ।‘’ लड़के ने सफाई देनी चाही ।
लड़की ने इस बात पर ध्यान न देते हुए कम्प्यूटर के की बोर्ड की बटनों पर उंगलियाँ चलाई और स्क्रीन पर देखकर कहा ... ‘’ सॉरी ..... आपकी तो कोई एम.टी . नही आई ।
‘’ नहीं आई ‘’ लड़का हताश स्वर में बोला ।
‘’ कहाँ से आने वाली थी ? ‘’ लड़की ने उसके चेहरे पर उसकी ज़रुरत को पढ़ते हुए पूछा ।
‘’ जी गाँव से ... मेरा मतलब मेरे गाँव के पास के बैंक से भेजी होगी मेरे पिताजी ने । क्या मालूम क्यों नहीं आई । ‘’ लड़के ने जबाब दिया ।
लड़की उसकी परेशानी समझ रही थी । लड़के के ठीक से उत्तर न देने के बावजूद वह नाराज़ नहीं हुई । उसने फिर पूछा ‘’ आपके गाँव के निकट हमारे बैंक की कौन सी ब्रांच हैं ?
लड़का अपनी गलती समझ गया था , तपाक से बोला .. जी आपकी खैरी ब्रांच से भेजते हैं पिताजी ।
‘’ अच्छा अच्छा ‘’ लड़की ने उससे कहा ‘’ ऐसा कीजिये आप कल और आकर पता लगा लीजिये .. शायद कल तक आ जाये ।

अपने कदमों को लाश की तरह घसीटते हुए वह बाहर निकल आया । भूख के कारण उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था । उसने सोचा होटल पहुँचकर पहले खाना खा लिया जाए लेकिन रोटियों के साथ होटल के मालिक द्वारा परोसे जाने वाले उधार के तकाज़े से वह खौफ खाने लगा था । इस खौफ के साथ वह वैसे भी ठीक से खाना नहीं खा पाता था । पिंजरे में बंद तोते में बसी राक्षस की जान की तरह उसकी जान भी होटल मालिक के हाथ में थी । वह जब चाहता तब उसे भूखों मरने पर मजबूर कर सकता था । “चलो खाने के बारे में शाम को सोचेंगे  “ उसने सोचा और कॉलेज जाकर क्लासेस अटेंड करने के बारे में विचार किया ।
          ‘ होटल न सही कॉलेज तो जाया ही जा सकता है शायद कॉलेज की कैंटीन में कोई मित्र मिल जाये और कुछ दया कर दे “ उसने सोचा । वैसे भी अपने एक करीबी मित्र से कुछ पैसे लेकर काँलेज की फीस तो जमा कर दी थी हालाँकि उसके मित्र ने खुद को दानवीर कर्ण घोषित करते हुए इस बात को जगजाहिर करने मे कोई कसर बाकी नहीं रखी थी कि उसने आड़े वक़्त में उसकी मदद की है । फलस्वरुप कॉलेज परिसर में एकाध बार उसे ‘ बेचारा ग़रीब देहाती ‘ जैसे जुमले भी सुनने को मिल चुके थे ।

यह तीन शब्द उसे तीन गालियों की तरह लगे थे । कहने वाले भी इस बात को नहीं जानते थे कि ये तीनो शब्द दरअसल एक दूसरे के पर्यायवाची ही तो हैं ,इन्हे अलग अलग कहने की ज़रूरत क्या है ।
लेकिन यह शब्द सुनकर उसे अपने उस तथाकथित मित्र पर बहुत क्रोध आया था और उसने सोच लिया था कि जैसे ही बैंक में उसके पिता द्वारा भेजा हुआ पैसा आयेगा वह उसे मित्र के मुँह पर दे मारेगा और उससे कहेगा लो रखो अपना पैसा और उन नोटों से देश के गरीब बेचारे देहातियों के लिये बहनेवाले अपने आँसुओं को पोछ लो ।
बैंक से निकलने और यह सब सोचने में इतनी देर हो चुकी थी कि कॉलेज जाने का खयाल भी अब तक उसके दिमाग से उड़ चुका था । वह कमरे पर पहुँचकर कुछ पढ़ने - लिखने के बारे में विचार करने लगा लेकिन वहाँ भी कहाँ चैन था । दो माह से कमरे का किराया नहीं दे पाया था वह । मकान मालिक जो एक सरकारी दफ्तर में बाबू था रोज शाम शराब के नशे में उसे गालियाँ देता , निकाल बाहर करने की धमकी देता और सुबह होते ही उसका चरित्र प्रमाण पत्र उसे थमा देता ।
‘’ वह तो यह कि तुम अच्छे भले घर के लड़के हो और तुम्हारे पिताजी से मेरे ससुरजी की पहचान है वरना कोई और होता तो मैं कबका उसे सामान सहित घर से बाहर सड़क पर फेंक देता ।
उसे डर था यदि किसी दिन सुबह तक मकान मालिक का नशा नहीं उतरा तो वह सचमुच भले घर के लड़के की बजाय ‘ कोई और ‘ हो जाएगा । इस परेशानी से बचने के लिये वह अक्सर देर रात कमरे पर पहुँचने लगा था । शाम तक वह लायब्रेरी में बैठा रहता फिर होटेल से खाना खाकर ही कमरे पर पहुँचता ।
उसे अचानक अपने भले घर का लड़का होने पर रंज होने लगा । ग्लानि का ढेर सारा झाग उसके दिमाग में भर गया ..क्यों उसने गाँव के अन्य कृषक - पुत्रों की भांति अपने बाप के साथ खेती – किसानी के काम में हाथ बँटाने का निर्णय नहीं लिया । क्यों वह अपने गाँव की शाला के उस प्रधान अध्यापक के बहकावे में आ गया जो बार बार उससे कहते थे ... ये हल बैल तुम्हारे लिये नहीं बने है । तुम बुध्दिमान हो , मेहनती हो , शहर जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करो , देश के भविष्य बनो , कर्णधार बनो , तुम्हें इतने अच्छे नम्बर मिले हैं तो क्या खेत में हल चलाने के लिये ......वगैरह वगैरह ।
‘’ स्साला दो कौड़ी का मास्टर ‘’ उसे अपने गाँव के प्रधान अध्यापक पर भी गुस्सा आने लगा । ‘’खुद तो गाँव में मास्टरी कर रहा है और मुझसे कहता कर्णधार बनो । देश का भविष्य लादने के लिये उसे मेरे ही कंधे मिले थे । और बापू को क्या हुआ था ? उसके क्रोध की जद में उसका बाप भी आने लगा था ‘’बड़ा आया मेरा बाप । पता नहीं कैसे मास्टर के बहकावे में आ गया । उसके दिमाग में भी लगता है मुझे बड़ा आदमी बनता देखने का कीड़ा कुलबुला रहा था । ‘’
शाम को भी वह डर के मारे होटल नहीं गया । उसने सोचा अबकी बार पैसे आयेंगे तो कमरे पर ही कुछ पकाने का जुगाड़ कर लेगा ।वैसे पिछली बार शौक शौक में घर से वह पकाने के लिये कुछ आवश्यक बर्तन लेता ही आया था ।
रोटी की जगह शाम को मकान मालिक की गालियाँ खाकर वह रात भर अगले दिन की चिंता में जागता रहा ।उसे यकीन था कि अगले दिन तो एम टी आ ही जायेगी ।

जैसे ही सुबह हुई वह भीड़ का जंगल पार कर फिर उसी मुस्कराते हुए चेहरे के सामने जा खड़ा हुआ । लड़की ने उसकी ओर देखा और मुस्कराते हुए पूछा .. ‘’ आपका खाता नंबर बताइये ’’ ।
उसने जेब से पासबुक निकाली । आज वह यथासंभव ठीक तरह से पासबुक लेकर आया था । पासबुक पर पड़ी सलवटें उसने धीरे से ठीक करते हुए पासबुक लड़की के हाथों में थमा दी ।
लड़की ने उसे पासबुक की सलवटें ठीक करते देखा तो वह मुस्कुराई । फिर उसने पहले दिन वाली प्रक्रिया दोहराई और उसी तरह मुस्कुराते हुए कहा ... ‘’ साँरी आज भी आपकी एम . टी . नही आई ‘’ ।
‘’ आज भी नहीं आई “ उसने आश्चर्य से लड़की की ओर देखा । उसे समझ में नहीं आ रहा था आखिर ऐसा कहते हुए वह मुस्करा क्यों रही थी । उसने सोचा कहीं वह मजाक तो नहीं कर रही है । उसने संदेह उपस्थित करते हुए पूछा .. ‘’ एक बार ठीक तरह से तो देखिये । ‘’
लड़की ने फिर एक बार अपनी नज़र कम्प्यूटर के स्क्रीन पर डाली और कहा ‘’ ठीक से देख चुकी हूँ.. सचमुच आपकी एम.टी. नहीं आई । ‘’

निराश होकर वह वापस लौटने लगा । वह मुड़ा ही था कि अचानक उसने महसूस किया कि लड़की उसे बुला रही है ....’’ सुनिये । ‘’
‘’ जी कहिए । ‘’ वह पलटकर बोला । उसे इस बात का बिलकुल गुमान नहीं था कि उनकी पिछले दिन की बातचीत ठीक इन्ही शब्दों के साथ शुरु हुई थी । फर्क केवल इतना था कि जो शब्द लड़के ने कहे थे वे लड़की ने कहे थे और जो शब्द लड़की ने कहे थे वे लड़के ने कहे थे ।
‘’ आप काँलेज में पढ़ते हैं ? लड़की ने पूछा ‘’
‘’ जी हाँ ‘’ लड़के ने जबाब दिया ।
‘’ कौन से काँलेज में ? लड़की ने पूछा ।
‘’ जी इंस्टीयूट आफ टेक्नालॉजी में । लड़के ने जबाब दिया ।
‘’ ओह तो आप इंजिनियरिंग कर रहे हैं । लड़की ने कहा । ‘’ होस्टल में रहते होंगे ? “
‘’ नहीं इस साल लेट हो गया था सो सीट फुल हो गई थी । प्राइवेट रुम लेकर रह रहा हूँ यहीं पास के मोहल्ले में । लड़के ने बताया ।
‘’ किस गाँव के रहने वाले हैं । ‘’ लड़के ने सवाल किया ।
फिर लड़के ने अपने गाँव का नाम बताया ,  लड़की ने अपने मौहल्ले का । लड़की ने यह भी बताया कि कैसे उसे मैट्रिक करते ही नौकरी मिल गई । लड़के ने बधाई दी । लड़की ने यह भी बताया कि वह भी इंजिनियरिंग करना चाहती थी लेकिन बैंक की एग्जाम में पास हो जाने और इंटरव्यू में सफल हो जाने के कारण उसने बैंक ज्वाइन कर लिया और यह भी कि शायद यह नौकरी छोड़ दे । लड़के ने उसे मना किया यह कहकर कि नौकरी बहुत भाग्यवालों को मिलती है और लगी लगाई नौकरी छोड़ने में कोई बुद्धिमानी नहीं है । और फिर लड़के ने अपनी परिस्थितियाँ बताई । यह भी बताया कि उसने कल से कुछ खाया नहीं है । यह सब संवाद उतनी देर में ही सम्पन्न हुआ जितनी देर अगला ग्राहक नहीं आया । अगले ग्राहक के आते ही लड़की अपनी उसी मुस्कान के साथ उसे इंटरटेन करने में मशगूल हो गई ।
लड़का कुछ देर तक तो खड़ा रहा फिर कुछ देर पश्चात लड़के को यह ख्याल आया कि जिस काम के लिये वह आया था वह तो हुआ नहीं , अब इस व्यर्थ की बातचीत में क्या लाभ । उसने सौजन्यवश कहा ‘’ मैं चलता हूँ । “ उसे लगा शायद इस जान-पहचान से अगले दिन काम जल्दी हो जाये ।
‘’ आप ज़रा रुकियेगा , मैं देखकर आती हूँ शायद आज की डाक में आ गई हो । ‘’ लड़की ने उसे रुकने का इशारा किया । फिर उसने उस ग्राहक का काम निपटाया फिर पीछे के दरवाज़े से निकल कर एक अन्य कक्ष में चली गई ।
कुछ देर बाद वह लौटकर आई ‘’ साँरी , आज की डाक में भी आपके नाम से कुछ नहीं हैं । “
‘’ अच्छा मैं चलता हूँ ‘’ उसे लगा वह व्यर्थ ही इतनी देर वहाँ रुका । बाहर आकर उसने हाथ में पड़े कागज़ के गोले को हवा में उछाला और फुटबाल की तरह उस पर किक लगाते हुए कहा .. ‘’ हुंह , बड़े प्यार से पूछ रही थी ‘’ अकेले रहते हैं ? ‘’ जैसे कह रही हो .. “ अच्छा तो आप ग़रीब हैं । इसे टाइमपास करने के लिये मैं ही मिला था ।‘’उसे इतनी ज़ोरों से भूख लगी थी कि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह सोच क्या रहा है और बोल क्या रहा है ।
वह सोचने लगा.. पता नहीं कहाँ अटका होगा उसका पैसा । दफ्तरों में कागज़ात कई दिनों तक अटके रहते हैं । सबको बस अपनी फिक्र होती है चाहे कोई उनकी राह देखते देखते भूखा मर जाए । उसे पूरी व्यवस्था से चिढ़ होने लगी , नेताओं की आश्वासन लुटाने वाली जीभ , उज्ज्वल भविष्य का सब्ज़बाग दिखाने वाली सरकारी योजनाएँ.. सब कुछ उसके क्रोध के दायरे में था ।
फिर उसका गुस्सा अपने माँ बाप की ओर ट्रांसफर हो गया । अभी उस दिन उसका दोस्त कह रहा था ‘’माँ-बाप जब भलिभाँति पाल नहीं सकते तो पैदा क्यों करते हैं ।“ उसके मध्यवर्गीय संस्कारों ने प्रतिवाद किया था ‘’माँ बाप पूरी ज़िंदगी का ठेका क्यों लेंगे । उन्होनें हमें मनुष्य के रूप में जन्म दे दिया यही क्या कम है?  हमें अपने बाजुओं पर भरोसा रखना चाहिए । हालाँकि अपनी बात के खोखले पन से वह वाक़िफ था । उसे यह भी पता था कि इसके बाद भी उसका संघर्ष समाप्त नहीं होगा । पढ़ाई फिर रोज़गार और भी ढेरों समस्यायें । हर सहानुभूति रखने वाले से निष्कर्ष के रुप में एक ही उत्तर मिलता है ‘’बेटे,  रोजगार देने का और ज़िन्दगी की समस्याओं को सुलझाने का ज़िम्मा सरकार का है ,जाओ उसीसे मांगो । ‘’

किसी तरह वह दिन भी बीत गया । गनीमत कि शाम को एक मित्र मिल गया और एक दुकान से एक प्लेट भेल उसने खिला दी ।वह उससे कह भी नहीं पाया कि उसने उस पर क्या अहसान किया है । अगले दिन कांपते हुए कदमों से उसने फिर बैंक की उस इमारत में प्रवेश किया । लड़की को काम में व्यस्त देख काउंटर के बगल में ,अपनी पैंट पर हथेलियों का पसीना पोंछते हुए वह चुपचाप खड़ा हो गया ।
‘’ अरे आप ? ‘’ लड़की ने कुछ देर बाद नज़रें उठाई । फिर कम्प्यूटर के की बोर्ड पर उंगलियाँ चलाकर उसने स्क्रीन की ओर देखा और पूछा ‘’ कितने रुपयों की एम .टी . आने वाली थी आपकी ?
लड़के ने जबाब दिया ‘’ यही कोई एक हजार की ।‘’ फिर खुश होकर पूछा ‘’ आ गई क्या ? ‘’
लड़की ने कोई जबाब नहीं दिया । बस मुस्कराते हुए उसने एक विथड्राल फॉर्म लाकर उसके सामने रख दिया और कहा ‘’ लीजिए एक हजार भर दीजिए । ‘’फिर वह कम्प्यूटर पर अपना काम करने लगी ।
उसने फॉर्म भरकर पासबुक सहित उसे थमा दिया । लड़की ने उस वाउचर को कम्प्यूटर पर पोस्ट किया फिर उसे लेकर पीछे साहब के पास गई , आकर ड्राअर खोला और सौ सौ के दस नोट उसके सामने रख दिये । उसने जल्दी से नोट गिने और ‘’ अच्छा धन्यवाद  ‘’ कहकर बैंक की इमारत से बाहर आ गया ।
कमरे पर पहुँचकर सबसे पहले उसे कमरे का किराया देना था । दरवाज़ा खोलते ही फर्श पर पड़े पोस्टकार्ड पर उसकी नज़र पड़ी वह लिखावट से पहचान गया पिताजी का पत्र था । उसकी नज़र इन पंक्तियों पर अटक गई .. “ बेटा , तुम बहुत बेसब्री से पैसों का इंतजार कर रहे होगे , लेकिन क्या बताऊँ , इस बार धान अभी तक नहीं बिका है , वैसे भी बहुत कर्जा हो गया है । साहूकार ने भी आगे कर्जा देने से मना कर दिया है सो फिलहाल तुम्हें पैसा नहीं भेज पा रहा हूँ । जैसा भी हो महीने दो महीने कहीं से उधार लेकर काम चला लेना .. जैसे ही व्यवस्था होगी ......
वह आगे नहीं पढ़ पाया .. उसके दिमाग में तेजी से पहले तो एक सवाल उभरा .. तो खाते में फिर पैसे कहाँ से आये और फिर जेहन में उभर आया काउंटर के पीछे मुस्कराता हुआ वह चेहरा । वह उन आँखों में छिपे दर्द को याद करने की कोशिश करने लगा ।

COMMENTS

BLOGGER: 3
Loading...

विज्ञापन

----
.... विज्ञापन ....

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$count=6$page=1$va=0$au=0

विज्ञापन --**--

|कथा-कहानी_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|लोककथाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=list$au=0$count=5$com=0$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3789,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2067,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1880,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: शरद कोकास की कहानी "काउंटर के पीछे मुस्कराता चेहरा*
शरद कोकास की कहानी "काउंटर के पीछे मुस्कराता चेहरा*
https://lh3.googleusercontent.com/-TTE6x81x0wk/V2-ezbXHy9I/AAAAAAAAumE/hJ_n7Zb2CcU/image_thumb.png?imgmax=800
https://lh3.googleusercontent.com/-TTE6x81x0wk/V2-ezbXHy9I/AAAAAAAAumE/hJ_n7Zb2CcU/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2016/06/blog-post_146.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2016/06/blog-post_146.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ