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आओ योग करें - डॉ. दीपक आचार्य

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भारतवर्ष के लिए यह गर्व, गौरव और प्रतिष्ठा का विषय है कि उसकी पहल पर पूरी दुनिया आज अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है।

यह अपने आप में उस संकेत की शुरूआत है जो विश्व गुरु के रूप में स्वीकार्यता को परिपुष्ट करती है। हमारा ज्ञान-विज्ञान और सब कुछ हर मामले में सर्वश्रेष्ठ और सर्वोपरि है किन्तु हम अपने ही लोगों के कारण से आत्महीनता के दौर-दर-दौर से गुजरने के कारण हमारी संस्कृति और परंपराओं की विलक्षणताओं को भुला चुके थे।

कुछ तो सदियों की गुलामी का असर रहा और शेष कहर ढाया उन अपने ही लोगों ने जिन्होंने अपने स्वार्थों को सर्वोच्च माना और छोटी-मोटी ऎषणाओं, भोग-विलासी और प्रमादी प्रवृत्तियों के कारण अपनी संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं के मुकाबले गोरी चमड़ी वालों की हर बात को ब्रह्मवाक्य मानते चले गए।

और इन चन्द भटके और खिसके हुए, अनजान लोगों के कारण ही हमारी अस्मिता और गौरव का ह्रास होता चला गया। हमारी श्रेष्ठतम परंपराओं की उपेक्षा होती चली गई और इसका खामियाजा यह हुआ कि हम अपना सब कुछ भूलकर उन विदेशियों के पीछे भेड़चाल को अपनाते गए, जिन परदेशियों को हमने सभ्यता का पाठ पढ़ाया।

यहां हम केवल योग की ही बात करें तो हमें गर्व होना चाहिए इस सदी के युगपुरुष के रूप में उभरे हमारे महानायक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और योग गुरु बाबा रामदेव, जिनकी बदौलत आज योग की पुनप्र्रतिष्ठा न केवल भारतवर्ष बल्कि दुनिया के कोने-कोने तक हो चुकी है।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर योग दिवस का आयोजन इस दिशा में हो रहे प्रयासों की सफलता का उद्घोष करता है। यह योग दिवस नहीं बल्कि भारतीय योग, सभ्यता और संस्कृति की सर्वश्रेष्ठता को स्वीकार कर उसके अनुकरण का शंखनाद है।

योग किसी धर्म-सम्प्रदाय, मत-पंथ और विचारधारा से जुड़ा हुआ नहीं बल्कि मानव मात्र के लिए वह अनिवार्य कारक है जिसे अपना कर हम स्वस्थ और मस्त रहने का दावा कर सकते हैं।

यही कारण है कि सभी लोग योग को अपना रहे हैं। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस केवल एक दिन का भले ही हो, मगर इसने संसार भर में तहलका मचा रखा है। एक साथ कई मुल्कों में योग दिवस की गतिविधियां, विश्व के कोने-कोने में यौगिक क्रियाओं का प्रदर्शन और योग के महत्व के बारे में करोड़ों लोगों तक जानकारी का संवहन तथा अपूर्व जन भागीदारी का इतिहास यह सिद्ध करता है कि हमारा योग ही है जो दुनिया को बीमारियों से बचाकर स्वस्थ, सुखी, सौन्दर्यशाली और मस्त रख सकता है।

एक जमाना था जब भारत में हर दिन हरेक के लिए योग दिवस हुआ करता था। आज यह निश्चय करने की आवश्यकता हैकि साल भर हमारी हर प्रभात योग प्रभात हो। इस बात को दुनिया स्वीकार करती जा रही है, हमें भी स्वीकार करनी ही चाहिए।

सभी को योग दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ....

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