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बाल कविताएँ / सागर यादव 'जख्मी

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1.  (चोरी करना पाप है )

चूहे चाचा उठा रखे थे

सिर पे सारा मुहल्ला

जाने कौन चुरा ले गया था

उनका प्यारा बल्ला

बिना बल्ले के वे कैसे

क्रिकेट खेलने जाते

अपनी टीम को प्रतिद्वन्दी से

बोलो कैसे जिताते ?

कोतवाल बंदर ने छानबीन कर

केस तुरत सुलझाई

चोरी के बल्ले के संग

बिल्ली पकड़ी आई

नंदनवन के सभी जानवर

बिल्ली को फटकार लगाए

चोरी करना पाप है बच्चोँ

तुमको हम समझाएँ


2.(चुहिया रानी )

चुहिया रानी पहने के लहंगा

पहुँच गई स्कूल

जल्दी -जल्दी मेँ वह पेँसिल

घर पे आई भूल

टीचर भालूजी ने अंग्रेजी के

कुछ शब्द लिखने को बोला

यह सुनकर चुहिया जी को

झट से आ गया रोना

चुहिया जी का रोना सुनकर

भालूजी   गुस्साए

क्योँ रोती हो ? मुझे बताओ

मोटी छड़ी दिखाए

चुहिया रानी ने रो - रोकर

सारा हाल सुनाया

फिर न होगी गलती ऐसी

भालू को ये विश्वास दिलाया

चुहिया जी की बातेँ सुनकर

भालूजी   मुस्काए

अच्छे बच्चे कभी न रोते

चुहिया को समझाए

स्कूल जाने से पहले वह अब

बैग अपना चेक करती है

फिर शाला मेँ जाकर

खूब मजे से पढ़ती है


3.(धूर्त गीदड़)

नंदनवन मेँ रहता था

गीदड़ एक सयाना

चोर -उचक्कोँ से था उसका

रिश्ता बहुत पुराना

माथे पर राख लगाकर वह

गेरुआ वस्त्र पहनकर चलता था

भोले -भाले जानवरोँ को

साधु बनके छलता था

उतर गया चेहरे पर से मुखौटा

खुल गया सारा भेद

बंदर को अगवा करने के जुर्म मेँ

उसको हो गई जेल .


4. (जंगल मेँ कवि सम्मेलन )

जंगल मेँ एकबार शेर ने

कविसम्मेलन करवाया

बड़े -प्रतिष्ठित कवियोँ को

काव्यपाठ हेतु बुलवाया

बारी -बारी से सबने

कविता खूब सुनाई

बिल्ली मौसी ने भी

ताली खूब बजाई


[रचनाकार - सागर यादव 'जख्मी ' नरायनपुर ,बदलापुर ,जौनपुर ,उत्तर प्रदेश -222125) 

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