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शनि से बचना चाहें तो सदाचार अपनाएं - डॉ. दीपक आचार्य

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आजकल सबसे ज्यादा भय शनि के नाम पर पसरा हुआ है। न केवल शनि बल्कि क्रूर ग्रहों और अमंगलकारी शक्तियों को पूजने का जो धंधा देश में चल रहा है उसने धर्म की भी दुर्गति की है और समाज तथा देश को भी गर्त में धकेला है।

कारण साफ है कि धर्म के नाम पर धंधा चलाने वालों ने धर्म को केवल अंधाधुंध और अंधी कमाई का जरिया मान लिया है जहाँ लाख भ्रष्टाचार, बेईमानी, चोरी-डकैती, अपराध, व्यभिचार, लूट-खसोट, अन्याय-अत्याचार करते रहो, मानवता को छोड़कर सारे कामों में डाका डालते रहो, नालायकों, नुगरों, झूठे, धूर्त, मक्कारों और चोर-उचक्कों, तस्करों और जमाखोरों को पूज्य मानते रहो, दिन-रात मिलावट करते रहो, बेटियों को जन्म लेने से पहले ही मारते रहो, जी भर मानसिक हिंसा व व्यभिचार करते रहो, दलाली करते रहो, बिना मेहनत का हराम का खाते-पीते और जमा करते रहो, दूसरों की जमीन-जायदाद पर कब्जा करते रहो, रैप करते रहो और सारे अवैध कामों में रमे रहकर पाप कर्मों में लिप्त बने रहो।

इन सभी से बच जाओगे यदि शनि या क्रूर ग्रहों या देवरों पर घी-तेल, मेवा-मिष्टान्न, रुपया, सोना-चांदी और भेंट चढ़ा दो, शनि दैव कृपा करेंगे, अभयदान देते रहेंगे और खुली छूट जिन्दगी भर पाते रहो।

शनि के नाम पर धंधा करने वाले बाबाओं, मठाधीशों और पाखण्डियों से लेकर पुजारियों, पण्डों को खुश करते रहो, चढ़ावा चढ़ाते रहो, इन्हें खुश करने के सारे औजारों और हथकण्डों का इस्तेमाल करते रहो। यह भावना इतने गहरे तक समाज में बिठा दी गई है कि धर्म के इन धंधेबाजों का मैनेजमेंट फण्डा दुनिया के सारे मैनेजमेंट गुरुओं को भी फेल कर देता है।

शनि का भय दिखाकर कुछ भी कर लो-करा लो, सब लोग चुपचाप हाँजी-हाँजी करते रहेंगे, कोई चूँ तक नहीं करने वाला। आजकल सभी जगह यही हो रहा है। शनि के नाम पर सब तरफ दुकानदारी का जोर हैं। जिन मन्दिरों में आवक नहीं हो पा रही हो उन मन्दिरों में शनि की एक मूर्ति बिठा दो, एक कोने में दशामाता का स्थानक बिठा दो। फिर बेचारे राहू-केतु ने क्या बिगाड़ा है, उनकी भी मूर्तियां बिठा दी जाएं तो धर्म के नाम पर भय को और अधिक प्रगाढ़ किया जा सकता है। 

धर्म के हर क्षेत्र को धंधा बनाने वाले लोग इतने चतुर हैं कि उन्हें साल भर आवक बनाए रखने के सारे फण्डे आते हैं।  आजकल शनि के नाम पर भी धंधा परवान पर है। लोहे के पतले तारों से बंधा और छोटे-छोटे पात्रों में सड़कों, चौराहों, बस-रेल्वे स्टेशन तक चक्कर लगाता शनि हो या फिर मन्दिरों में प्रतिष्ठित शनि, सब तरफ शनि ही शनि दिखाई देते हैं शनिवार को। बहुत से लोग भी हैं जिन्हें उनकी हरकतों की वजह से हम शनि की संज्ञा देते हैं।

शनि के बारे में समाज को यह सच बताने की जरूरत है कि हम यदि चोर-उचक्के, रिश्वतखोर, भ्रष्ट, बेईमान, ड्यूटी से जी चुराने वाले, हराम का पैसा लेने वाले, पुरुषार्थहीन, दलाली खाने वाले, औरों को प्रताड़ित कर दुःखी एवं तनाव देने वाले हैं, मानवताहीन, संवेदनशून्य और पाप कर्मों में लिप्त हैं, माता-पिता-गुरुओं को बड़े लोगों को कष्ट देने वाले हों, षड़यंत्रों, व्यभिचारों, पदों के दुरुपयोग, अपूज्यों की पूजा करने वाले या धर्म विरोधी हैं, तो इस स्थिति में चाहे कितना कुछ कर लें, शनि कुछ भी बचाव नहीं कर सकता।

वह विधाता के नियमों में बंधा है इसलिए  हमें दण्ड देगा ही। शनि का काम न्यायाधीश का है इसलिए वह कर्म के आधार पर सजा या प्रसन्नता देता है। हमारे कर्म अच्छे होंगे तो पुरस्कार देगा, तरक्की प्रदान करेगा और सुख-समृद्धि देगा।

यदि हमारे लक्षण, गुण और कर्म ही ठीक नहीं हैं तो वह हमें कभी बख्शेगा नहीं चाहे उसके लिए कितना ही कुछ कर लो। टन भर तेल चढ़ा लो, दीये जला लो, अनुष्ठान करा लो और जिन्दगी भर दर्शन करते रहो। कितनी ही नाक रगड़ते रहो, कोई फायदा नहीं। वहाँ न देर है, न अंधेर। जो बोया है वह फसल मिलेगी ही।

इसलिए शनि को प्रसन्न करना चाहें, उसके कोप से बचना चाहें तो जीवन में बुराइयों, निन्दा, पाप कर्मों तथा अधर्माचरण को त्यागें, सदाचार को अपनाएं और शनि के कोप की आंशका से हमेशा के लिए मुक्त रहें। हम सभी को इस शाश्वत और सनातन तथ्य को समझने की आवश्यकता है।

शनि के नाम पर न भय पैदा करें, न धंधा चलायें, न शनि के बारे में भ्रम फैलायें। लोगों को यह साफ-साफ क्यों नहीं बताते कि शनि के डर से मुक्ति के लिए अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, दलाली, औरों को बेवजह तनाव देने, अपने पदों के दुरुपयोग और शोषण की वृत्तियों को त्यागें अन्यथा शनि किसी को छोड़ने वाला नहीं। इसी जन्म में सब चुकता कर देने वाला ग्रह है यह। 

आज शनि जयन्ती पर सभी शनि भक्तों, शनि पुजारियों, शनि से भयभीत विधर्मियों और शनि के नाम पर धंधा करते हुए धर्म के नाम पर गोरखधंधों में रमे सभी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं। शनि ग्रह इन सभी को सद्बुद्धि दे। जय शनिदेव।

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