रचनाकार

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका

व्यंग्य-राग (१७) आरोप-कानन / डा. सुरेन्द्र वर्मा

वन विभाग पौधरोपण-सप्ताह मना रहा था. हर दिन एक नया मुख्य अतिथि समारोह में बुलाया जाता था और उसके कर कमलों से पौधों को जगह जगह लगवाया जाता था. लोगों का अचानक ध्यान गया की इस बार किसी राज-नेता को पौधा-रोपण के लिए नहीं आमंत्रित किया गया. आखिर बात क्या है ? पता चला कि राज्य में चुनाव पास हैं और किसी नेता को फुरसत नहीं है. वे इन दिनों आरोपण-प्रत्यारोपण में व्यस्त हैं. पेड़ पौधों का विकास वन-अधिकारी संभाल ही रहे हैं. नेतागण अपने अपने क्षेत्र के आरोप-कानन को हरा-भरा करने में जुटे हुए हैं.

चुनाव के समय इन ‘बनन’ में आरोपों की ‘नर्सरी’ लगाई जाती है. देखते देखते कुछ आरोप दरख्त बन जाते हैं. कुछ कमज़ोर आरोप थोड़ी देर के लिए अपना जलवा दिखाकर गिर भी जाते है. सब पौधे भला कहाँ पनप पाते हैं ? महत्वपूर्ण बात आरोपों को रोपित करना है, न कि उनको जीवित रखना. चुनाव-काल तक भी यदि वे ज़िंदा रह पाते हैं तो मकसद पूरा हो जाता है. हर दल दूसरे प्रतिद्वंदी दल पर आरोप रोपित करता है. बदले में प्रत्या-रोपण होता है और यह प्रक्रिया जब तक निर्वाचन संपन्न नहीं हो जाता सतत प्रवहमान रहती है.

सर्वप्रथम आरोंपों को रोपित करने के लिए सही जगह ढूँढी जाती है, जहां आरोप आसानी से पनप सकें. यह स्थान एक ऐसा नमी वाला स्थान होना चाहिए जहां सिचाई की ज़रुरत कम से कम हो. जहां आरोप अपने आप पनप सकें. ऐसे संवेदनशील स्थानों को तलाश करना राजनीति के खिलाड़ियों के लिए कोई बहुत मुश्किल काम नहीं होता. सब एक दूसरे के दुर्बल-दलदले स्थलों को भली-भाँति समझते-बूझते हैं. लेकिन तारीफ़ तो उन शातिर किसान(?)-नेताओं की करनी पड़ती है जो सूखी जगहों पर भी आरोपों के पौधे प्रत्यारोपित कर देने में माहिर होते हैं. पौधा उगे न उगे लेकिन उसे रोपित कर अपना उल्लू तो सीधा वे कर ही लेते हैं.

रोपित किए जाने वाले आरोप कई किस्म के होते हैं. कुछ आरोप सच्चाई की गंध लिए होते हैं उन्हें खुले में लगाया जाता है ताकि लोग उनकी बू आसानी से ग्रहण कर सकें. कुछ आरोपों में किसी भी तरह की अच्छी या बुरी, सच्चाई या झूठ की गंध स्पष्ट नहीं होती | किन्तु ऐसे आरोप भी धड़ल्ले से प्रत्यारोपित कर दिए जाते हैं | मुद्दों की बजाय आरोप-रोपण हावी होने लगता है और इसमें केवल छुट-भैये ही नहीं, बड़े बड़े नेता भागीदारी करते हैं और अपना अपना तय किरदार निभाते हैं. कुछ आरोप ऐसे भी होते हैं जो पूरेरे तरह गंध- विहीन होते हैं, फिर भी वे रोपित कर दिए जाते हैं. थोड़ा पनप जाएं तो खुबसूरत लगते हैं. उनको लगाने में बड़ी चतुराई और कलाकारी चाहिए. कुछ आरोप ऐसे भी होते हैं जिन्हें सब जानते हैं कि वे पूरी तरह “फेक” हैं. पर लगाए जाते हैं. क्या पता कोई इन झूठे आरोपों के जाल में फंस ही जाए ?

किसी भी लोक-तंत्र में चुनाव प्रक्रिया राजनैतिक पार्टियों को जनता के समक्ष अपनी शासन की नीति रख कर शासन के लिए दावेदारी पेश करने का अवसर देती है पर आज के बदले माहौल में नेतागण जनता से जुड़े मुद्दों की बजाय विरोधियों के व्यक्तिगत जीवन से सम्बंधित कहानियों को कहने लगी है और उन्हें सार्वजनिक रूप से सड़क पर, जनसभाओं में, यहाँ तक कि विधान सभा और संसद में भी मजे ले ले कर बताती है | विरोधी हूँ तो विरोध करना मेरा धर्म है. कोई काम संपन्न नहीं होने देना है. आरोपों की झड़ी लगा दी जाती है. कब तक झेल पाओगे ? आरोपों की झाडी है, कब तक नहीं फंसोगे ? तुम ४४० हो तो हम भी अलीबाबा के ४० चोर हैं. खोंटे सिक्के ही सही, लेकिन याद रखो खोंटा सिक्का ही खरे को बाज़ार से बाहर कर देता है. अल्पमत यही सोच कर आरोप रोपण में अतिरिक्त सक्रियता से भाग लेता है. बहुमत भी पीछे नही रहता. तुम डाल-डाल मैं पात-पात. आरोप कानन हर मौसम में हरा-भरा रहना चाहिए.

.....................................................

- सुरेन्द्र वर्मा

१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड, इलाहाबाद -२११००१

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

आपकी रूचि की और रचनाएँ -

randompost

कहानियाँ

[कहानी][random][column1]

हास्य-व्यंग्य

[व्यंग्य][random][column1]

लघुकथाएँ

[लघुकथा][column1]

कविताएँ

[कविता][random][column1]

उपन्यास

[उपन्यास][random][column1]

तकनीकी

[तकनीकी][column1][http://raviratlami.blogspot.com]

वर्ग पहेलियाँ

[आसान][column1][http://vargapaheli.blogspot.com]
[blogger][facebook]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget