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जयचन्द प्रजापति 'कक्कू' की कविताएँ

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(1)

सुंदर मन
..........
सुंदर मन
बनानाआसान नहीं
कड़ी तपस्या
मेहनत
से एक पवित्र
मन
बड़े मुश्किल से आता है

सुंदर मन के लिये
दया,परोपकार से
हृदय भरना होगा
करूणा का गीत
लिखना
होगा

नये भावों से
रंगना होगा
चंचल मन को बाँधना होगा
तभी पूर्ण होगा
सुंदर मन बनाने का
कार्य

(2)

मजदूर
........

मजदूर
जब मेहनत करता है
लिखता है नया इतिहास
हाड़ तोड़ मेहनत से
लिखता है
नई कहानी

सुबह से काम करे
शाम तक
मेहनत ही मेहनत
करता जाये
यही उसका जीवन
बनाता महल अटारी
रंगहीन जीवन जीता

प्रसन्न मन से
करता कर्म
सादा जीवन जीता
नहीं भरा है मन
धोखा किसी के लिये
सत्य जीवन अपनाता
हर पल

(3)

अध्यापक
............
अध्यापक
अपने छात्र को
बढ़ते हुये
देखना चाहता है
नये भावों को भरना चाहता है
देखना चाहता है
एक लम्बी उड़ान

हर पल
उसके विकास को
देखता है
यही उसके जीवन का
सच्चा मूल्यांकन है
यही
जीवन की पूँजी है

उसके कार्य की गणना
उस दिन महान होती है
जब उसका शिष्य
किसी
महान भूमिका में
सफल होता है

एक सच्चा अध्यापक
सतत
विकास पथ पर लिखता है
नया कीर्तिमान
तब मुश्काता है
अध्यापक

(4)

रिक्शा चालक
.................
रिक्शा चालक
पसीने से तर बतर
बिन खाये
पतली छाती है लिये
बड़ी तेजी से
रिक्शा चलाते
मंजिल तक
पहुँचाता है

कठिन मेहनत करता है
सहता है घुड़कियाँ भी
पूरी मेहनत का
नहीं पाता है पैसा
लोग छिनते हैं
उसका निवाला
कैसे कैसे लोग पड़े हैं

लेकिन निष्कपट
रिक्शाचालक
सहृदय भाव लिये
अपने कर्म पथ पर
चलता है

धैर्य लिये
मुश्कान के साथ
परिश्रम को
अपना पूँजी मानता है
यही उसके जीवन की
अंतिम इच्छा है

(5)

माँ
....
माँ होती है
कोमल भाव लिये
लड़ती है
जीवन भर
अपने बच्चे को बनाने में

भूख प्यास 
सब सहती है
मजबूती से खड़ी होती है
माँ ही
नई आशा  व उर्जा
लिये

माँ की कीमत
कितनी होती है
हर माँ वाला बच्चा
जानता है
लेकिन असली कीमत 
माँ की क्या है
उनसे पूछिये
जिनकी माँ नहीं होती हैं

जयचन्द प्रजापति 'कक्कू'
जैतापुर, हंडिया, इलाहाबाद
मो.07880438226
व्लॉग.kavitapraja.blogspot.com
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