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जय राणा प्रताप की - डॉ. दीपक आचार्य

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देश और दुनिया आज जिस दौर से गुजर रहे हैं उसमेंं सबसे बड़ी आवश्यकता है राष्ट्रीय चरित्र की।  यह राष्ट्रीय चरित्र अकेला नहीं होता बल्कि इसकी बुनियाद सजती है ढेरों विलक्षणताओं से, उन विशिष्ट गुणधर्मों से, जिनसे होता है विलक्षण, महामेधावी और पराक्रमी विराट और यशस्वी व्यक्तित्व निर्माण, जिसकी चमक-दमक अपने आप सरजमीं से लेकर व्योम तक मेंं हर क्षण विस्फुरित होती रहती है।

जिनमें स्वाभिमान, देश प्रेम, निष्काम सेवा और परोपकार, समाज और देश के लिए सर्वस्व बलिदान कर देने की भावना, संस्कार, चरित्र, सहृदयता, संवेदनशीलता, आत्मीयता और परंपराओं तथा संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले सारे गुणों का समावेश हो, उन्हीं लोगों में राष्ट्रीय चरित्र की भावना देखी जा सकती है।

यह राष्ट्रीय चरित्र केवल बातों से नहीं आता, यह जिह्वा का विषय नहीं है बल्कि करणीय और आचरणीय है और यह जीवन में बाहरी तत्वों से ही नहीं झलकती बल्कि हमारे प्रत्येक कर्म में होनी चाहिए।

आज हम सभी लोग महाराणा प्रताप का स्मरण करते हुए उनके जीवन, व्यक्तित्व और कर्मयोग के बारे में चिन्तन करते रहे हैं, उनके प्रति अगाध श्रद्धा और आस्था के भावों का सार्वजनीन दिग्दर्शन कराते रहे हैं। खास पर्वाें पर हमारी यह भावना हिलोरें लेती दिखाई देती है और इसे सभी लोग अनुभव भी करते हैं।

महाराणा प्रताप के बारे में हम श्रद्धा अभिव्यक्त करें, उनके बारे में कुछ कहें और बताएं, यह अच्छी बात है लेकिन इससे  अधिक जरूरी यह है कि हम प्रताप को अपने जीवन में उतारें, उन जैसा बनने का प्रयास करें।

देश में आतंकवाद, राष्ट्रघाती शक्तियों का बोलबाला, देश प्रेम का अभाव, स्वार्थकेन्दि्रत जिन्दगी, अपना-पराया करने का भाव, जात-पात, धर्म-सम्प्रदाय और छोटी-छोटी बातें राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता को हानि पहुंचाने की जी तोड़ कोशिश कर रही हैं।

लोग अपना घर भरने के चक्कर में भ्रष्टाचार में रमे हुए हैं, छीना-झपटी और दूसरी बुराइयां देखने में आती हैं। सामाजिक और राष्ट्रीय संस्कार तथा संस्कृति का ह्रास होता जा रहा है। इन स्थितियों में देश और दुनिया के लिए महाराणा प्रताप आज अत्यधिक प्रासंगिक एवं अनुकरणीय हैं।

लेकिन यह अनुकरण वाणी की बजाय आचरण से किए जाने की जरूरत है।  महाराणा प्रताप को ही जीवन में हम उतार लें तो हमारे भीतर महान परिवर्तन भी दिखने लगेगा और हमारा व्यवहार भी दुनिया की सेवा भावना लिए हुए हो जाएगा।

अपने कर्म, व्यवहार और जीवन में महाराणा प्रताप को उतारें और यह प्रयास करें कि उन्होंने देश और समाज के लिए जो कुछ किया उसी तर्ज पर हम भी कुछ करें, समाज और देश के लिए जियें।

समाज और देश को बचाना है, सामाजिक समरसता के साथ विकास करना है तो महाराणा प्रताप को अपनाना होगा। देश और समाज की सभी समस्याओं का खात्मा इसी से होगा। उन्नति के सारे रास्ते भी इसी से आरंभ होंगे।

महाराणा प्रताप के जीवन को ही जो समझ जाता है वह सभी अच्छाइयों को प्राप्त करता हुआ राष्ट्रीय चरित्र, स्वाभिमान, समर्पण और त्याग का धनी होकर संसार में यश प्राप्त कर सकता है।

महाराणा प्रताप की जयन्ती पर हार्दिक शुभकामनाएं ....।

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