विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

व्यंग्य / ‘‘अपनी-अपनी मातहती’’ / अरविन्द कुमार खेड़े

 

जिनको हताहत होना होता है, जिनको हताहत किया जाना होता है, खुदा उनको मातहत बनाकर इस दुनिया में भेज देता है । पता नहीं, इन आत्माओं ने ऐसा क्या गुनाह किया होगा कि, इनको इस रूप में इस दुनिया में आना पड़ता है ।

तो भईये, हम इस तरह के मातहत हैं ।

जब भी नया अफसर आता है, पखवाड़े-महीने तक सारे मातहत उनकी कार्यशैली जानने के लिए उत्सुक रहते हैं । ताकि उनके सुर से सुर मिलाते हुए उनके मुताबिक अपनी शैली ईजाद की जा सके । सब दबी जुबान से आपस में चर्चा करते हुए उनकी टोह लेने की कोशिश में लगे रहते हैं ।

कोई कहता है, ‘‘बेहद सख्त हैं । ’’

दूसरा कहता है, ‘‘बेहद ईमानदार हैं । ’’

तीसरा कहता है, ‘‘बहुत ज्ञानी है, सारे-नियम कायदों का ज्ञान है । ’’

चौथा कहता है, ‘‘बहुत बारीक है । उनको सब पता है कि कहां गड्ढा हो सकता है ? कहां गड्ढे होने की संभावना है ? और कहां गड्ढा किया जा सकता है ?’’

पांचवा कहता है, ‘‘उन्हें सिर्फ काम चाहिए । परिणाम चाहते हैं । ’’

मकसद सिर्फ इतना कि, अब ढील-पोल नहीं चलेगी । अब लेट-लतीफी नहीं चलेगी । दायें-बायें, उपर-नीचे से लेने-देने के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे । मतलब कि उनको बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता ? मतलब सिर्फ इतना कि, अब अपना मतलब नहीं साधा जा सकता ।

जितना मुंह, उतनी बातें । इन बातों के जरिये वे आपस में एक-दूसरे के मन के भाव जानना चाहते हैं । इतना सुनने के बाद उनके उनकी राय क्या बनी है ? क्या अपनी मंशा के अनुरूप काम होगा ? या उनकी मंशा के अनुरूप ढलना होगा ? या अपनी ढपली अपना राग अलापा जायेगा ?

इस प्रकार के आचरण से मुझे बहुत चिढ़ आती है । अरे भाई, यदि हम अपना-अपना कार्य ईमानदारी और लगन से करेंगे तो, हमें कोई दिक्कत नहीं आयेगी । मैं अपनी बात यहीं से प्रारंभ करता हूं और यही पर खत्म करता हूं । लेकिन साथी मातहत तो मेरे मुख से कुछ और सुनना चाहते हैं । मैं उनके इरादों को भांपकर हर बार नेस्तनाबूद कर देता हूं । फिर कभी-कभी तंग आकर मेरा मुंह फट जाता है, मैं उबल पड़ता हूं, ‘‘देखो भईया, हमारा काम है बजाना । जो चले गये, उनका बजाया था । जो आ रहे हैं, उनका बजाना है, और जो आयेंगे, उनका बजायेंगे । आप कहे तो, मैं आपका भी बजा दूं ? ’’

सब चलते बनते हैं । जाते-जाते मैं अपनी बात स्पष्ट करता हूं, ‘‘मैं हुकुम की बात कर रहा हूं । ’’ लेकिन कोई पलट कर नहीं देखता ।

खबर फैल चुकी थी कि आज नए अफसर ज्वाईन करने वाले हैं । सब व्यवस्था स्वतः ही चाक-चैबंद हो गयी । कोई कुर्सी खाली नहीं थी । सब अपनी-अपनी कुर्सी पर अपने-अपने काम में तल्लीन । सारा चतुर वर्ग अपनी अपनी जगह पर । गोया कि अंग्रेजी कहावत का अर्थ जैसे सब यह भली-भांति जानते हैं कि, पहला प्रभाव ही अंतिम होता है ।

यह सब देखकर मेरा दिल भर आया । जैसे सच्चाई किसी को पता नहीं है । यही सब बारह बजे के आसपास आते हैं । इधर-उधर गप्पे हांक कर एक बजे के आसपास गायब हो जाते हैं । लंच बाद चार बजे के आस-पास फिर प्रकट हो जाते हैं, पांच बजे के आस-पास फिर गायब । बेचारे बाहर से आये लोग दिन भर खटते रहते हैं, परेशान होते रहते हैं । घंटी बजाओ तो कोई चतुर वर्ग हाजिर नहीं होता । कभी-कभी तो खीजकर मुंह से निकलने को आ जाता है, फिर जबरन रोकना पड़ता , ‘‘कहां मर गये सब के सब ? ’’

लेकिन हर कोई मातहत अपने जैसा नहीं होता ? जो पक्के मातहत होते हैं, वे वाकई में पके होते हैं । वे भली-भांति जानते हैं कि, ऊंट किस करवट बैठेगा ? ऊंट को किस करवट बैठना चाहिए ? मतलब कि जो पक्के मातहत होते हैं, वे साम, दाम, दंड, और भेद में निपुण होते हैं । और ऐसे लोगों का निरापद उद्देश्य मैदान मारना होता है ।

अफसर का कदम रखना हुआ कि, सारे मातहत अगुवाई में जुट गये । स्वागत सत्कार की स्वस्थ परम्परा के समाप्त होते ही अफसर ने अगले दस मिनिट में सभी को मीटिंग हाल में हाजिर होने के निर्देश प्रसारित कर दिए ।

हुकुम का पालन हुआ । ठीक दस मिनिट बाद सब मीटिंग हाल में । अपने नाम के साथ-साथ अपने द्वारा किये जा रहे दायित्वों का भी जिक्र किया जाकर अपना-अपना परिचय दिया जा रहा था । अब अफसर की बारी थी । पहले दस मिनिट में उन्होंने अपना इतिहास बांचा गया । बीच बीच में कई गौरवशाली क्षण भी आये, जिनमें उनके ऐसे किस्सों का जिक्र था, जिसे सुनकर गर्व महसूस किया जा सकता था । बाद के दस पन्द्रह मिनिट में उन्होंने आने वाले समय में रचे जाने वाले इतिहास की रूपरेखा प्रस्तुत की । और उम्मीद जताई कि उनके इस भागीरथी प्रयासों में सारे मातहत उनका साथ देगें ।

उनके उद्बोधन के दौरान मेरी स्मृति में कई ऐसे व्यक्तित्व जीवित हो उठे थे, जिन्होंने अपना कार्य ईमानदारी, लगन और निष्ठापूर्वक किया था । और जिन्होंने इनकी कीमत भी चुकाई थी ।

बंगला अलाट होने तक रेस्ट हाउस में एक कमरा बुक कराया जा चुका था । कल से काम शुरू करने के संदेश के साथ वे तुरंत प्रस्थान कर लिए । उनके जाने के बाद सारे मातहत अपनी आदतों के अनुसार फिर उसी राह चल पड़े । उनके उद्बोधन में छिपे निहित अर्थों की खोज में निकल पड़े ।

थोड़ी देर बाद एक पक्का मातहत अपने हाथ में कुछ कागज लिए जाता दिखा तो मैंने पूछ लिया, ‘‘कहां चल दिए ? ’’

            ‘‘रेस्ट हाउस । ’’ पक्का मातहत कम बोलता है ।

            ‘‘क्यों ? ’’ कच्चा मातहत केवल मूर्खों जैसे सवाल करना जानता है ।

            ‘‘अरे.....कुछ नहीं......साहब ने कहा है कि,.....जरा बजट शीट लेते आना । अब तक कितना खर्च हुआ है ? कितना शेष है ? ’’

थोड़ी देर बाद दूसरा पक्का मातहत बगल में कागज दबाये चलता हुआ दिखा । उससे भी वही प्रश्न और उसके भी वही उत्तर ।

            ‘‘अरे......कुछ नहीं.....साहब ने कहा है कि,.....जरा आदेशों की सूची ले आना । कितने आदेश जारी हुए हैं ? कितना मटेरियल प्राप्त हुआ है ? कितना होने वाला है ? और अभी कितनों के आदेश जारी करना है ? ’’

थोड़ी देर बाद तीसरा पक्का मातहत कुछ कागजों को गोल-गोल लपेटकर (जिस तरह कि विष्वविद्यालय छात्रों को उपाधियां भेजते हैं ) जाता हुआ दिखा । उससे भी वही प्रश्न और उसके भी वही उत्तर ।

            ‘‘अरे....कुछ नहीं....साहब ने कहा है कि.......जरा फंड्स की डिटेल्स ले आना । किन-किन गतिविधियों में कितना-कितना फंड प्राप्त हुआ है ? कितना फंड रिलीज किया जा चुका है ? और कितना करना है ? ’’

अपुन ने राहत की सांस ली थी । नए अफसर के आने से अपुन को कोई दिक्कत नही होगी । मतलब अपुन अपनी जगह पर ही बने रहेंगे । अपुन को वही काम करना है, जो करते आये हैं । मसलन कि लिफाफे तैयार करना, उनका वजन करना और वजन के मुताबिक उन पर टिकिट चिपका कर पोस्ट करना । लिफाफे के भार से अपुन को कोई लेना-देना नहीं है । क्योंकि अपुन जरा दूजे किसिम के मातहत हैं ।

-अरविन्द कुमार खेड़े

मोबाईल-०९९२६५२७६५४

रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget